* पीटीआरके बफर क्षेत्र में गश्त के दौरान खुला मामला, सुरक्षा श्रमिक भी आरोपी
* सागौन की छिलाई करते समय वन अमले को देख भाग निकले, पहचान में आया बीटगार्ड और श्रमिक
* 7 नग सागौन सिल्लियां जब्त कर आरोपियों के विरुद्ध तत्परता से की गई प्रभावी कार्रवाई
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जंगल की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वालों की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व से एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) के पन्ना बफर परिक्षेत्र में अवैध सागौन कटाई कराए जाने के मामले में एक वनरक्षक (बीटगार्ड) के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण दर्ज करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में एक वन सुरक्षा श्रमिक को भी आरोपी बनाया गया है। सोशल मीडिया पर जारी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई जानकारी के अनुसार यह मामला दिनांक 8 फरवरी 2026 का है, जब परिक्षेत्र सहायक छापर एवं अन्य वनकर्मियों द्वारा बीट छापर क्षेत्र में नियमित गश्त की जा रही थी। गश्त के दौरान कक्ष क्रमांक पी-293 में कुछ व्यक्तियों को सागौन लकड़ी की छिलाई कर सिल्ली बनाते हुए देखा गया।
भागते समय पहचाने गए दोनों आरोपी
जंगल गश्त के दौरान अचानक वन अमले के मौके पर पहुंचने से सागौन की सिल्लियों को छोड़ आरोपी भाग निकले।
वन स्टाफ द्वारा मौके पर घेराबंदी कर आरोपियों को पकड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन सभी आरोपी घने जंगल का लाभ उठाकर फरार हो गए। हालांकि भागते समय दो व्यक्तियों की पहचान की गई, जिनमें बिहारी पिता रामलगन यादव, निवासी ग्राम बनहरीकलां, जो बीट छापर में समिति सुरक्षा श्रमिक के रूप में कार्यरत है तथा संतोष प्रजापति, पदस्थ वनरक्षक बीटगार्ड छापर शामिल हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार इन दोनों की प्रथम दृष्टया अवैध कटाई में संलिप्त पाई गई है। घटनास्थल की तलाशी के दौरान वन विभाग द्वारा सागौन लकड़ी की कुल सात सिल्लियां जब्त की गईं, जिनका कुल घनफल 1.526 घन मीटर बताया गया है। जब्त सामग्री के आधार पर आरोपी बिहारी यादव एवं वनरक्षक संतोष प्रजापति के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया।
प्रतिवेदन के आधार पर तत्काल निलंबन
पूरे घटनाक्रम का प्रतिवेदन परिक्षेत्र अधिकारी पन्ना बफर द्वारा तैयार कर सहायक संचालक मड़ला के माध्यम से 10 फरवरी 2026 को क्षेत्र संचालक कार्यालय भेजा गया। प्रतिवेदन के परीक्षण के बाद प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर वनरक्षक संतोष प्रजापति को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए गए। पन्ना टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के उप संचालक वीरेन्द्र कुमार पटेल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा है कि वन क्षेत्र में अवैध गतिविधियों में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह विभाग का कर्मचारी ही क्यों न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि जंगल की सुरक्षा से जुड़े पदों पर बैठे लोगों से और अधिक जवाबदेही अपेक्षित है।
पन्ना-सतना जिले के बॉर्डर क्षेत्र में दबिश देकर जुआरियों को पकड़ने वाली देवेन्द्रगर थाना पुलिस टीम।
* देवेन्द्रनगर थाना अंतर्गत पन्ना-सतना बॉर्डर के जंगल क्षेत्र में हुई कार्रवाई
* पुलिस के दावे को लेकर संदेह, जुआ फड़ में 5 से 7 लाख रुपए होने की जनचर्चा
पन्ना।(www.radarnews.in) जिले देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत पन्ना-सतना बॉर्डर क्षेत्र में जुए के फड़ पर की गई पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सोशल मीडिया पर पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी दी गई है कि जंगल के इलाके में दबिश देकर पुलिस ने 11 जुआरियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दावा किया है कि यह कार्रवाई 9-10 फरवरी की दरम्यानी रात को की गई, जब कुछ लोग सीमा क्षेत्र में जुए का फड़ संचालित कर रहे थे। पुलिस के अनुसार सूचना मिलने पर देवेन्द्रनगर थाना पुलिस ने पन्ना-सतना सीमा के पास ग्राम गिरवारा के जंगल क्षेत्र में दबिश दी, जहां रात्रि के अंधेरे में प्रकाश की व्यवस्था कर ताश के पत्तों से जुआ खेला जा रहा था। मौके से सभी आरोपियों को घेराबंदी कर पकड़ने का दावा किया गया है। पुलिस का यह भी कहना है कि यह फड़ लंबे समय से पन्ना, सतना और दमोह जिलों की सीमा से सटे इलाकों में स्थान बदल-बदलकर संचालित किया जा रहा था।
जुआ खेलते इनको किया गिरफ्तार
जंगल में जुआ खेलने आए जुआरियों जब्त बोलेरो कार।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में देवेंद्रनगर थाना क्षेत्र के ग्राम गिरवारा निवासी नरेन्द्र वर्मा 26 वर्ष और भंडारी कुशवाहा 27 वर्ष शामिल हैं। सतना जिले के जसो थाना अंतर्गत खगई निवासी बलवान सिंह बुंदेला 63 वर्ष, कोलगवां थाना क्षेत्र के आदर्श नगर घुरडांग निवासी पुष्पेन्द्र कुशवाहा 19 वर्ष, ज्ञानेंद्र सिंह दीक्षित 27वर्ष तथा दीपेन्द्र द्विवेदी 25 वर्ष को भी मौके से पकड़े जाने का दावा किया गया है। इसके अलावा पन्ना शहर के बेनीसागर मोहल्ला निवासी राजू कुशवाहा 40 वर्ष और रामकिशोर मिश्रा 56 वर्ष, सिमरिया थाना क्षेत्र के महोड़ निवासी राकेश सिंह बैस 44 वर्ष तथा करिया निवासी राजवेन्द्र लोध 38 वर्ष के साथ-साथ दमोह जिले के गैसाबाद थाना अंतर्गत ग्राम कचनारी निवासी 29 वर्षीय सतेन्द्र राजपूत के नाम भी पुलिस द्वारा जारी सूची में शामिल बताए गए हैं।
नकदी कम मिलने से कार्रवाई को लेकर संदेह
जुआरियों के कब्जे से पुलिस के द्वारा जब्त की गई बलेनो कार।
पुलिस ने अपने दावे में बताया है कि आरोपियों के पास से कुल 27 हजार रुपये नकद, एक बलेनो कार, एक बोलेरो कार, 12 मोबाइल फोन और जुआ खेलने में प्रयुक्त ताश के पत्तों की गड्डी जब्त की गई है। हालांकि कार्रवाई के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि जब आरोपी लग्जरी वाहनों से जुआ खेलने पहुंचे थे, तो मौके से इतनी कम नकदी की बरामदगी कैसे हुई। इधर क्षेत्र में यह जनचर्चा भी है कि जुए के फड़ पर मौजूद नकदी की मात्रा पुलिस द्वारा बताई गई राशि से कहीं अधिक थी। अपुष्ट चर्चाओं के अनुसार फड़ 5 से 7 लाख रुपए जुआरियों के पास मौजूद थे। जिससे शेष राशि कहां गई और वह जब्त क्यों नहीं हो पाई इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। इन्हीं चर्चाओं के चलते पुलिस की कार्रवाई पर सवाल और संदेह भी व्यक्त किए जा रहे हैं। जनचर्चाओं में कितनी हकीकत और कितना फसाना है, यह तो सिर्फ देवेन्द्रगर थाना पुलिस और जुआरी ही बेहतर बता सकते हैं। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध देवेन्द्रनगर थाना में जुआ एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई किए जाने का दावा किया है।
अज्ञात वाहन की ठोकर लगने से मृत तेंदुए के शावक का शव।
* पन्ना टाइगर रिजर्व के परिक्षेत्र मड़ला की घटना
पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में पन्ना टाइगर रिजर्व के परिक्षेत्र मड़ला अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-39 के समीप स्थित राजस्व क्षेत्र में शुक्रवार को एक तेंदुए का शावक मृत अवस्था में पाया गया। शावक का शव मिलने से क्षेत्र में वन विभाग में हड़कंप मच गया और मौके पर जांच शुरू की गई। तेंदुए के शावक की मृत्यु की जानकारी पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेन्द्र पटेल द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी गई है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार दिनांक 07 फरवरी 2026 को सुबह लगभग 11:15 बजे घटना की सूचना प्राप्त हुई। मौके पर पहुंचे वन विभाग के अमले द्वारा किए गए निरीक्षण में तेंदुए के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए।
मौके से मिले साक्ष्यों एवं तेंदुए के शरीर पर पाए गए जख्मों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि तेंदुए के शावक की मृत्यु किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से हुई है। विभागीय आकलन के अनुसार शावक की मौत सुबह लगभग 10:30 से 11:00 बजे के बीच होना प्रतीत होती है। यह मामला हिट एंड रन का माना जा रहा है। उक्त प्रकरण में अज्ञात वाहन चालक के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया गया है तथा घटनास्थल पर विधिवत जांच की जा रही है। जांच के लिए पुलिस विभाग के साइबर सेल की सहायता ली जा रही है। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग एवं आसपास उपलब्ध सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर अज्ञात वाहन की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग के अनुसार वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र में निगरानी और गश्त बढ़ाई गई है तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित वाहन चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गोली चलने से निकले छर्रे लगने से जख्मी महिला का इलाज जिला अस्पताल पन्ना में जारी।
* खुद को गोली मारने की कोशिश कर रही महिला को बचाने आई मासूम, छीना-झपटी में हुआ हादसा
पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में अजयगढ़ थाना की चंदौरा चौकी क्षेत्र अंतर्गत लोढ़ापुरवा गांव में पति-पत्नी के आपसी विवाद के दौरान चली गोली से महिला और उसकी नाबालिग बेटी गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना के बाद परिजनों ने दोनों को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी है।
जानकारी के अनुसार रमाशंकर कुशवाहा शराब पीने का आदी है। इसी बात को लेकर शुक्रवार रात उसका अपनी पत्नी रामसखी से विवाद हो गया। विवाद के दौरान मानसिक रूप से परेशान महिला ने आवेश में आकर देशी कट्टे से स्वयं को गोली मारने की कोशिश की। मां को हथियार उठाते देख उसकी करीब 9-10 वर्षीय बेटी रश्मि उसे बचाने के लिए बीच में आ गई। इसी दौरान छीना-झपटी में गोली चल गई। गोली के छर्रे महिला और मासूम बच्ची के शरीर के कई हिस्सों में लगे हैं, जिससे दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है।
सूचना मिलते ही चंदौरा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने मामले में प्रकरण दर्ज कर लिया है तथा आरोपी पति से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में शराब के नशे और घरेलू विवाद को घटना का कारण बताया गया है। पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की बात कह रही है।
पन्ना विच्छेदन गृह में पोस्टमार्टम के बाद शव को शासकीय शव वाहन से जिजगांव ले जाया गया।
* पन्ना जिले के अमानगंज थाना क्षेत्र के जिजगांव की घटना
* विवाद के बाद तीनों बच्चों को लेकर पत्नी के मायके जाने से दुखी था रतिराम
पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के जिले के जिजगांव से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया है। पारिवारिक कलह और लंबे समय से चले आ रहे मानसिक तनाव से टूट चुके एक युवक ने आत्मघाती कदम उठाते हुए जहर खाकर अपनी जान दे दी। इस घटना ने न सिर्फ एक घर का चिराग बुझा दिया, बल्कि तीन मासूम बच्चों को हमेशा के लिए पिता के साए से वंचित कर दिया। मृतक की पहचान 30 वर्षीय रतिराम चौधरी पिता दरबरिया चौधरी)के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार रतिराम और उसकी पत्नी मनीषा निवासी गुनौर के बीच बीते करीब एक वर्ष से पारिवारिक विवाद चल रहा था। हाल के दिनों में विवाद बढ़ने पर पत्नी अपने तीनों बच्चों- प्रियंका (9), रश्मि (12) और ऋषि (7) को लेकर मायके चली गई थी। इसके बाद से रतिराम गहरे तनाव में रहने लगा था।
बताया गया कि घटना वाले दिन रतिराम काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकला। जब परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई तो उन्होंने दरवाजा खोला, जहां वह बेसुध अवस्था में पड़ा मिला। परिजन उसे तुरंत अमानगंज स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां से हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान शनिवार 7 फरवरी को रतिराम ने दम तोड़ दिया। प्रारंभिक तौर पर जहर सेवन से मौत की आशंका जताई जा रही है। मृतक के भाई गेंदा लाल ने बताया कि रतिराम पहले भी मानसिक तनाव के चलते आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास कर चुका था, लेकिन तब उसकी जान बच गई थी। रतिराम मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी असमय मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है और तीनों मासूम बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है।
पन्ना में पोस्टमार्टम के दौरान शव विच्छेदन गृह के बाहर बैठे शोक संतृप्त परिजन।
घटना के बाद गांव में शोक की लहर है। हर आंख नम है और हर जुबान पर बस यही सवाल है कि पारिवारिक विवादों का यह दर्दनाक अंत क्यों हुआ। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के सभी पहलुओं की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बाघ शावक के हमले की घटना को गंभीरता से लेते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने पलकोहा के ग्रामीणों से संवाद कर उन्हें आवशयक सतर्कता बरतने की सलाह दी।
* पन्ना टाइगर रिजर्व के चन्द्रनगर परिक्षेत्र के पलकोहा गांव की घटना
* सुरक्षा व्यवस्था सख्त करते हुए बढ़ाई गश्ती, कैमरा ट्रैप और ड्रोन से निगरानी
* इलाके में लगातार बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष, ग्रामीण भयभीत और आक्रोशित
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व समेत पन्ना जिले के सामान्य वन क्षेत्रों से सटे गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे वन वन क्षेत्र से लगे ग्रामों के वाशिंदों में भय, चिंता और आक्रोश का माहौल है। सप्ताह भर पूर्व पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेंज से सटे जरधोवा गांव में तेंदुए ने एक 12 वर्षीय बालक पर हमला कर उसे अपना शिकार बना लिया था। घटनास्थल पर बालक का सिर और धड़ अलग-अलग मिले, जबकि तेंदुआ शव के कुछ हिस्सों को खा चुका था। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से क्षेत्र के ग्रामीण गहरे सदमे में हैं। इसी क्रम में पन्ना टाइगर रिजर्व के चंद्रनगर परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पलकोहा में खेत में कार्य कर रही एक महिला पर बाघ के शावक के हमले की घटना सामने आई है। हालांकि महिला को केवल मामूली खरोचें आईं और उपचार के बाद वह स्वस्थ होकर घर लौट आई, लेकिन इस घटना ने ग्रामीणों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। उल्लेखनीय है कि, पन्ना टाइगर रिजर्व का एरिया तीन जिलों पन्ना, छतरपुर और दमोह जिले की सीमाओं तक फैला है। जिसमें चंद्रनगर वन परिक्षेत्र का इलाका छतरपुर जिले में स्थित है।
खेत में काम करते समय किया हमला
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 3 फरवरी की शाम लगभग 6 बजे, चंद्रनगर परिक्षेत्र की बीट पलकोहा (कक्ष क्रमांक P-538) के समीप राजस्व क्षेत्र में खेत में काम कर रही महिला पर बाघ के शावक ने हमला कर दिया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल महिला को शासकीय वाहन से जिला अस्पताल छतरपुर भेजा गया। महिला के पैर में आई मामूली चोटों का उपचार किया गया तथा तात्कालिक सहायता के रूप में रुपए 1,000/- की राशि भी प्रदान की गई। दो दिन के उपचार के बाद 5 फरवरी को महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
भालू के हमलों ने भी बढ़ाई दहशत
पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र तथा पन्ना जिले के सामान्य वन क्षेत्र के आसपास स्थित गांवों में केवल तेंदुआ और बाघ ही नहीं, बल्कि हाल के दिनों में भालू के हमलों में बुजुर्गों के गंभीर रूप से घायल होने की घटनाएं भी सामने आई हैं। पन्ना जिले के दक्षिण वन मंडल और उत्तर वन मंडल अंतर्गत हाल के दिनों में घटित भालू के हमलों की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इलाके में वन क्षेत्र के आसपास मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। वन क्षेत्र से लगे खेतों में फसल की सुरक्षा के लिए झोपड़ी बनाकर रात में खेतों में रुकने वाले किसान सबसे अधिक भयभीत हैं। जरधोवा में बालक की दर्दनाक मौत और अब पलकोहा की घटना के बाद ग्रामीण खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
वन विभाग अलर्ट, गश्त और निगरानी बढ़ाई
पन्ना टाइगर रिजर्व का मड़ला ग्राम में स्थित प्रवेश द्वार। (फाइल फोटो)
मानव-वन्यजीव संघर्ष की इन घटनाओं के बीच पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने के निर्देश दिए हैं। चंद्रनगर परिक्षेत्र में दो दल दिन-रात सघन गश्त कर रहे हैं। बाघ और शावक की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दो जोड़ी कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं तथा ड्रोन के माध्यम से हवाई निगरानी भी की जा रही है। अधिकारियों द्वारा घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण कर बाघ और शावक की मौजूदगी की पुष्टि की गई है।
ग्रामीणों से संवाद, सतर्कता बरतने की अपील
पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेन्द्र पटेल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि, ग्राम पलकोहा में वन विभाग द्वारा ग्रामीणों के साथ बैठक आयोजित कर संवाद किया गया। ग्रामीणों को सूर्यास्त के बाद खेतों की ओर न जाने, दिन में समूह बनाकर ही खेतों में जाने और लाठी/डंडा साथ रखने की सलाह दी गई। विभाग का कहना है कि पलकोहा गांव टाइगर रिजर्व के भीतर स्थित होने के कारण यहां के निवासी वन्यजीवों के स्वभाव से परिचित हैं, फिर भी जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। बहरहाल, लगातार हो रही घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र समेत पन्ना जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष अब एक गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले चुका है, जिससे निपटने के लिए दीर्घकालीन और ठोस रणनीति की आवश्यकता है।
पन्ना के जगात चौकी क्षेत्र में स्थित क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व के बाहर वन क्षेत्र से सटे ग्रामों के रहवासियों द्वारा जमकर नारेबाजी की गई।
* वन क्षेत्र से सटे गांवों के वाशिंदों का ज्ञापन लेने चेंबर से बाहर नहीं आए पन्ना टाइगर रिजर्व के अफसर
* तेंदुए के हमले में बालक की मौत के बाद भी ग्रामीणों से मिलने का समय नहीं
* उप संचालक की गरीब-विरोधी टिप्पणी और कुतर्कों से भड़के ग्रामीण प्रतिनिधि
* आधा घंटे तक बाहर इंतजार और नारेबाज़ी के बाद बिना ज्ञापन सौंपे लौटे ग्रामीण
पन्ना टाइगर रिजर्व (पीटीआर) प्रबंधन का एक ओर बाघ संरक्षण के लिए जन समर्थन का दावा और दूसरी ओर वन क्षेत्र से सटे गांवों के ग्रामीणों की पीड़ा के प्रति उदासीन रवैया गुरुवार को खुलकर सामने आ गया। तेंदुए के हमले में एक आदिवासी बालक की मौत से सहमे ग्रामीण जब अपनी समस्याएं लेकर क्षेत्र संचालक से मिलने पहुंचे, तो उन्हें न सिर्फ नजरअंदाज किया गया, बल्कि संवेदनहीन व्यवहार का भी सामना करना पड़ा।
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) की पन्ना कोर रेंज से सटे जरधोवा गांव में कुछ दिन पूर्व तेंदुए के हमले में एक 12 वर्षीय आदिवासी बालक की दर्दनाक मौत के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश और भय का माहौल है। बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे कोटा गुंजापुर, जरधोवा सहित आसपास के आधा दर्जन गांवों के ग्रामीण गुरुवार 5 फरवरी को जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) के जिलाध्यक्ष मुकेश गौंड और समाजसेवी रामविशाल गौंड के नेतृत्व में पन्ना पहुंचे थे। ग्रामीण पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक (Field Director) नरेश यादव से मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा करना और ज्ञापन सौंपना चाहते थे।
बुनियादी सुविधाओं से वंचित वन क्षेत्र के गांव
ग्रामीणों का कहना है कि पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) की आपत्तियों के चलते वन क्षेत्र से सटे कई गांवों में वर्षों से बिजली, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाईं। जंगल से घिरे इन गांवों में जंगली जानवरों का खतरा लगातार बना रहता है। बिजली न होने के कारण अंधेरे का फायदा उठाकर वन्यजीव गांव तक पहुंच रहे हैं। हाल ही में तेंदुए द्वारा एक लड़के को अपना शिकार बनाए जाने की घटना ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।
ग्रामीणों से मिलने बाहर नहीं आए क्षेत्र संचालक
क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व को ज्ञापन सौंपने और अपनी पीड़ा सुनाने के लिए उनके कक्ष के बाहर वन क्षेत्र से सटे ग्रामों के वाशिंदे काफी देर तक इंतजार करते रहे।
ग्रामीण और जयस (JAYS) संगठन के पदाधिकारी लंबे समय तक पन्ना टाइगर रिजर्व कार्यालय परिसर में क्षेत्र संचालक से मिलने का इंतजार करते रहे, लेकिन आरोप है कि नरेश यादव अपने कक्ष से बाहर नहीं आए और न ही ग्रामीणों की समस्याएं सुनने का समय निकाला। क्षेत्र संचालक के इस रवैये से ग्रामीण निराश और आक्रोशित हो गए। अंततः उन्होंने कार्यालय परिसर में नारेबाज़ी की और बिना ज्ञापन सौंपे वापस लौट गए। ग्रामीणों का आरोप है कि पीटीआर प्रबंधन एक ओर बाघ संरक्षण के लिए जन समर्थन की बात करता है, वहीं दूसरी ओर पार्क क्षेत्र से सटे गांवों के रहवासियों की सुरक्षा, मूलभूत सुविधाओं और जान-माल के खतरे को नजरअंदाज किया जा रहा है।
डीडी के गरीब विरोधी बयान पर भड़के प्रतिनिधि
वन क्षेत्र के ग्रामीणों के प्रतिनिधि एवं समाजसेवी रामविशाल गौंड ने बताया कि वे स्वयं क्षेत्र संचालक नरेश यादव के कक्ष में पहुंचे और बाहर कार्यालय परिसर में खड़े ग्रामीणों की जानकारी देते हुए उनसे बाहर आकर समस्याएं सुनने व ज्ञापन लेने का आग्रह किया। उस समय कक्ष में पन्ना टाइगर रिजर्व के नवागत उप संचालक वीरेन्द्र पटेल (Deputy Director) भी मौजूद थे। श्री पटेल ने रामविशाल को वन क्षेत्र से सटे गांवों में बिजली, सड़क और पानी की पाइप लाइन के लिए विभिन्न विभागों से लंबित अनुमतियों की स्थिति से अवगत कराया। इसी दौरान उप संचालक ने कथित रूप से असंवेदनशील और बेतुका सवाल करते हुए पूछा कि जिस गांव में बिजली की मांग की जा रही है, वहां आर्थिक रूप से सक्षम कितने लोग रहते हैं। रामविशाल द्वारा शत-प्रतिशत गरीब आदिवासी आबादी होने की जानकारी देने पर उप संचालक ने कहा कि “इसीलिए गांव को बिजली नहीं मिल पा रही है।”
इस कथन को गरीबों का अपमान बताते हुए रामविशाल ने कड़ा एतराज जताया और पूछा कि क्या गरीबों को बुनियादी सुविधाएं (Basic Amenities)पाने का अधिकार नहीं है। इसके बाद उप संचालक ने सफाई देते हुए कहा कि गरीब लोग बिजली का बिल जमा नहीं कर पाते। रामविशाल ने इस तर्क को गरीबों का मजाक उड़ाने वाला और तथ्यहीन बताते हुए खारिज किया और कहा कि देशभर में करोड़ों गरीब परिवारों के घरों में बिजली कनेक्शन हैं। इस बहस के बाद रामविशाल कक्ष से बाहर आ गए, लेकिन इसके बावजूद काफी देर तक इंतजार के बाद भी न तो क्षेत्र संचालक और न ही उप संचालक बाहर आए और न ही ग्रामीणों का ज्ञापन लेना जरूरी समझा। पीटीआर प्रबंधन के इस अप्रत्याशित रवैए से निराश और आक्रोशित आधा दर्जन गांवों- बाँधीकाला, इटवां, बराछ, डोभा, जरधोवा और कोटा गुंजापुर के ग्रामीण वापस लौट गए।
कई गंभीर सवाल छोड़ गया घटनाक्रम
क्षेत्र संचालक अथवा उप संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व के द्वारा बाहर आकर ज्ञापन ग्रहण न करने से निराश ग्रामीण ट्रेक्टर-ट्रॉली से वापस लौट गए।
इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जब मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है और एक बालक की जान जा चुकी है, तब क्या क्षेत्र संचालक का ग्रामीणों से मिलने से बचना एक लोकसेवक के दायित्वों के अनुरूप है? यदि यही रवैया जारी रहा तो क्या भविष्य में पन्ना टाइगर रिजर्व को पार्क क्षेत्र से सटे गांवों का जन समर्थन मिल पाएगा? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया और सुरक्षा व बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो इसके दूरगामी और गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
इनका कहना है-
“आप सभी लोग मेरे व्यवहार को बेहतर जानते हैं कि, व्यक्तिगत तौर पर मैं कभी किसी का अनादर नहीं करता। ज्ञापन सौंपने आए ग्रामीणों एक प्रतिनिधि मेरे कक्ष में आए थे, मैनें उनकी पूरी बात सुनीं और आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया। मुझे क्योंकि शासकीय कार्य के सिलसिले में जाना था इसलिए मैं निकल गया। बाद में ग्रामीणों द्वारा की गई नारेबाजी की मुझे जानकारी नहीं है।”
नरेश यादव, प्रभारी क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।
“ग्रामीणों के प्रतिनिधि पहले मुझसे एफडी सर के चैंबर में मिले फिर वे मेरे चैंबर आए थे। मैनें उन्हें पूरा सम्मान दिया और कोटा-गुंजापुर में विद्युत लाइन के लिए यूजर एजेंसी द्वारा 7-8 वर्ष पूर्व अनुमति हेतु परिवेश पोर्टल के जरिए मांगी गई स्वीकृति की वस्तुस्थिति से अवगत कराया। यूजर एजेंसी से कुछ दस्तावेज चाहे गए थे जो कि उनके द्वारा आज तक प्रस्तुत नहीं किए गए, इसकी उन्हें जानकारी दी गई। पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन किसी भी तरह से विकास में बाधक नहीं है। देखिए मैं ग्रामीण परिवेश और निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से हूं, इसलिए ग्रामीण जन-जीवन की समस्याओं के प्रति संवेदनशील हूं और मेरी सहानुभूति रहती है। मेरे द्वारा ग्रामीण प्रतिनिधि से चर्चा के दौरान किसी तरह की अनुचित अथवा अपमानजनक टिप्पणी नहीं की गई। मेरी बातों को शायद वे गलत समझ बैठे। ग्रामीण प्रतिनिधि ने ज्ञापन नहीं सौंपा, ज्ञापन लेने में मुझे कोई समस्या नहीं थी। दरअसल, हमारी चर्चा के बीच ग्रामीण वापस जा चुके थे इसलिए वे भी ज्ञापन दिए बगैर ही चले गए। लोकसेवक लोक की सेवा के लिए ही है, ग्रामीण जब भी आना चाहें उनका स्वागत है, हम सदैव उनकी सहायता के लिए तत्पर और प्रतिबद्ध हैं, यदि वे मुझे बुलाते हैं तो मैं स्वयं चलकर उनके पास जाऊंगा।”
* पन्ना जिले के गुनौर थाना अंतर्गत पड़ेरी ग्राम की घटना
* पति ने आग की लपटों से निकलकर बचाई जान, अस्पताल में भर्ती
* अग्निकांड को लेकर ग्रामीणों में संदेह, सभी पहलुओं की जांच में जुटी पुलिस
पन्ना/गुनौर।(www.radarnews.in) जिले के गुनौर थाना के समीपी गांव पड़ेरी में बीती रात एक हृदयविदारक हादसा हो गया। खेत में बने कच्चे घर में अचानक आग लगने से 75 वर्षीय वृद्ध महिला श्याम बाई की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि उनके पति गोरेलाल प्रजापति आग की लपटों से घिरे घर से बाहर निकलकर किसी तरह जान बचाने में सफल रहे। हालांकि आग की चपेट में आने से वे गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुनौर में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना के समय वृद्ध दंपती घर के अंदर सो रहे थे। थाना प्रभारी गुनौर माधवी अग्निहोत्री ने बताया कि ठंड से बचाव के लिए कमरे के भीतर आग जलाई गई थी। देर रात दोनों की आंख लग गई और संभवतः उसी दौरान आग भड़क उठी। कुछ ही पलों में आग ने पूरे कमरे को अपनी चपेट में ले लिया। आग की तेज लपटों में घिरी वृद्ध महिला बाहर नहीं निकल सकीं और उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
आग लगते ही आसपास अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग तेजी से फैल चुकी थी। सूचना मिलने के बावजूद फायर ब्रिगेड समय पर मौके पर नहीं पहुंच सकी, जिससे आग पर काबू पाने में देर हुई और बड़ा दुखद हादसा हो गया। घटना की सूचना पर गुनौर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। आग लगने के वास्तविक कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल सका है। वहीं गांव में कुछ लोग इस दर्दनाक हादसे को संदेहास्पद भी मान रहे हैं, जिसे लेकर पुलिस सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। इस घटना के बाद पूरे गांव सहित अंचल में शोक की लहर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से फायर ब्रिगेड की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
रेल लाइन ठेका कंपनी के चोरी गए सामान को जब्त करने के साथ देवेंद्रनगर थाना प्रभारी ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार।
* नागौद-खजुराहो रेल खंड प्रोजेक्ट अंतर्गत देवेंद्रनगर के फुलवारी से हुई थी बड़ी चोरी, दो आरोपी गिरफ्तार
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन अंतर्गत नागौद-खजुराहो रेल खंड पर पन्ना जिले के देवेंद्रनगर थाना क्षेत्र में फुलवारी ग्राम स्थित रेलवे स्टेशन भवन से लाखों रुपये के इलेक्ट्रिकल सामान की चोरी के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस सनसनीखेज चोरी का हैरान करने वाला पहलू यह है कि, वारदात का मास्टरमाइंड कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट में कार्यरत इलेक्ट्रिकल इंजीनियर ही निकला। थाना प्रभारी देवेंद्रनगर उप निरीक्षक संतोष यादव के नेतृत्व में की गई कार्रवाई में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी गया पूरा सामान, घटना में प्रयुक्त वाहन और मोबाइल फोन जब्त किया है। कुल जब्त सामान की कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई गई है।
स्टोर रूम से उड़ाया था लाखों का सामान
पुलिस के अनुसार, के-3 कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा नागौद से खजुराहो तक रेलवे लाइन निर्माण का कार्य किया जा रहा है। ग्राम फुलवारी स्थित रेलवे स्टेशन भवन के एक हाल में कंपनी का स्टोर रूम बनाया गया था, जहां लगभग 30 लाख रुपये का इलेक्ट्रिकल सामान रखा हुआ था। फरियादी रामप्रसाद शर्मा ने बताया कि 31 दिसंबर को वह अपने गृह ग्राम गया हुआ था। 21 जनवरी को वापस लौटने पर जब स्टोर रूम का निरीक्षण किया गया, तो वहां से केबल, वायर, पीवीसी पाइप व अन्य इलेक्ट्रिकल सामग्री गायब मिली। चोरी गए सामान की कीमत करीब 15,17,808 आंकी गई। मामले में देवेंद्रनगर थाना में अपराध क्रमांक 57/26 धारा 331(4), 305(ए) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
इंजीनियर ने ही रची थी चोरी की साजिश
जांच के दौरान पुलिस को तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर सूचना के आधार पर प्रोजेक्ट में कार्यरत इलेक्ट्रिकल इंजीनियर अंकित माथुर पर संदेह हुआ। पूछताछ में उसने चोरी की साजिश रचने और वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की। आरोपी अंकित माथुर, पिता दिनेश माथुर, उम्र 35 वर्ष, निवासी 32 लीलाधर कॉलोनी, भानपुर, थाना छोलामंदिर, जिला भोपाल (म.प्र.) ने पुलिस को बताया कि चोरी किया गया इलेक्ट्रिकल सामान उसने नागौद निवासी व्यापारी को बेच दिया था। इस खुलासे के बाद पुलिस ने चोरी का माल खरीदने वाले आरोपी राकेश गर्ग, पिता रामकरण गर्ग, उम्र 39 वर्ष, निवासी हरदुआ मोहल्ला, थाना नागौद, जिला सतना (म.प्र.) को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसके गोदाम से चोरी गया पूरा सामान बरामद कर लिया।
20 लाख का मशरूका जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी गया इलेक्ट्रिकल सामान जिसकी कीमत करीब 15,17,808 है, बरामद किया है। इसमें 4 ड्रम केबल पीवीसी SQM, 25 एमएम पीवीसी पाइप, पीवीसी बेंड, जंक्शन बॉक्स और विभिन्न साइज के इलेक्ट्रिकल वायर शामिल हैं। इसके अलावा घटना में प्रयुक्त एक छोटा हाथी पिकअप वाहन और एक मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है। कुल जब्त मशरूका की अनुमानित कीमत करीब 20 लाख बताई गई है।
पत्नी और बेटे की हत्या की उच्च स्तरीय जांच कराने एवं आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर पन्ना में पुलिस अधीक्षक के नाम आवेदन देने के बाद पीड़ित राकेश और उसके जीजा ने मीडिया से चर्चा की।
* पन्ना जिले के अजयगढ़ थाना क्षेत्र का बहुचर्चित मामला
* गला घोंटकर कत्ल करने से पूर्व मृतिका के साथ की गई थी दरिंदगी
* आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से 5 साल के मासूम को भी बेरहमी से मार डाला था
* संदेहियों पर सख्ती करने के बजाए पुलिस पर मृतकों के परिजनों को प्रताड़ित करने का आरोप
चेतावनी: इस खबर में दी गई कुछ जानकारी और चित्र आपको विचलित कर सकते हैं।
निर्मम हत्या से पूर्व महिला के साथ रेप होने की पुष्टि होने पर मृतिका, उसके मृत बच्चे, पति एवं परिवारजनों की पहचान गुप्त रखते हुए खबर में काल्पनिक नामों का उल्लेख किया गया है।
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में अजयगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत लगभग चार माह पूर्व सामने आई मां-बेटे के अंधे कत्ल की झकझोर देने वाली वारदात पुलिस के लिए आज भी अबूझ पहेली बनी हुई है। बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने वाले आरोपियों को गिरफ्तार करना तो दूर पुलिस उनका सुराग तक नहीं लगा पाई है। इस मामले में मृतिका के पति राकेश (परिवर्तित नाम) का सब्र अब जवाब देने लगा है। पुलिस की नाकामी पर उसकी नाराजगी और सवाल उठाना स्वाभाविक है। पत्नी और बेटे को इंसाफ दिलाने दर-दर भटक रहे पीड़ित ने अजयगढ़ पुलिस की जांच एवं कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए संदेहियों को लेकर नरमी बरतने और उल्टा उसके ही निरपराध परिवारजनों को प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। पीड़ित राकेश (परिवर्तित नाम) ने पुलिस अधीक्षक पन्ना के नाम आवेदन पत्र देकर दोहरे अंधे हत्याकांड के खुलासे के लिए उच्च स्तरीय जांच कराने और दो व्यक्तियों के नामों का उल्लेख कर उन पर 4-5 अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देने का गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस के रवैये से हताश-निराश हो चुके पीड़ित ने चेतावनी दी है, यदि 7 दिवस के अंदर हत्याकांड खुलासा नहीं हुआ तो वह मजबूर होकर अनिश्चिकालीन धरने पर बैठ जाएगा।
रोंगटे खड़े करने वाला था घटनास्थल का मंजर
चार माह पूर्व घर के अंदर कमरे में इस स्थिति में मिले थे मां-बेटे के शव।
17 सितंबर 2025 की सुबह अजयगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत एक तंग कमरे में मां-बेटे के शव जिस अवस्था में मिले, उसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। घटनास्थल के फोटो-वीडियो रोंगटे खड़े करने वाले थे। कमरे में बिखरा सामान, अस्त-व्यस्त कपड़े और फर्श पर पड़े शव किसी भयावह दरिंदगी की गवाही दे रहे थे। मृतिका मीरा (परिवर्तित नाम) 28 वर्ष का शव नग्न अवस्था में मिला था। उसके मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था और उसी से गला कसकर हत्या की गई थी। परिस्थितियों और साक्ष्यों के आधार पर हत्या से पूर्व उसके साथ बलात्कार किए जाने की आशंका जताई गई थी। जिसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित अन्य जांचों में हुई है। मीरा का पांच वर्षीय बेटा सौरभ (परिवर्तित नाम) भी उसी कमरे में मृत मिला। उसके मुंह में भी कपड़ा ठूंसा गया और गला घोंटकर उसकी हत्या की गई थी। आशंका है कि अज्ञात आरोपियों ने बच्चे को सिर्फ इसलिए मार डाला क्योंकि वह उन्हें पहचान सकता था। जबकि आठ माह का छोटा बेटा उसी कमरे में सकुशल सिलाई मशीन के ऊपर बैठा मिला था। अंधे कत्ल की वारदात 16-17 सितंबर की दरम्यानी रात की है। मां-बेटे को उनके ही घर पर अज्ञात आरोपियों द्वारा बड़ी ही बेरहमी से कत्ल किए जाने की खबर सोशल मीडिया पर आने के बाद समूचे पन्ना जिले में सनसनी और जबरदस्त आक्रोश फ़ैल गया था।
अवैध संबंध बनाने से इंकार पर ली जान
दरिंदों से अपनी आबरू और जान बचाने मीरा (परिवर्तित नाम) द्वारा किए गए संघर्ष की गवाही देते उसके टूटे हुए आभूषण।
मृतिका के पति राकेश के अनुसार, घटना से एक दिन पहले उसकी पत्नी मीरा ने उसे फोन कर बताया था कि पड़ोस में रहने वाला विजय (परिवर्तित नाम) उस पर अवैध संबंध बनाने का दबाव बना रहा है और इंकार करने पर जान से मारने की धमकी दे रहा है। राकेश उस समय मजदूरी के सिलसिले में गुड़गांव में था। अगली सुबह उसे सूचना मिली कि उसकी पत्नी और बच्चे की हत्या कर दी गई है। राकेश का आरोप है कि इसी दबाव और धमकी की परिणति के रूप में वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस अधीक्षक के नाम दिए गए आवेदन पत्र उसने अपने पड़ोसी विजय (परिवर्तित नाम), एक पंचायत सचिव पर नामजद और 4-5 सहोगियों के साथ मिलकर पत्नी-बेटे की हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है।
संदेहियों पर नरमी, पीड़ित पक्ष को कर रहे प्रताड़ित
फाइल फोटो।
पीड़ित का आरोप है उसने पुलिस को दोनों नामजद संदेहियों की हत्याकांड में संलिप्तता के संबंध में कई बार बताया, लेकिन सांठगांठ के चलते संदेहियों पर सख्ती न कर पुलिस उसके भाइयों, जीजा और भाभी को ही लगातार प्रताड़ित कर रही है। जबकि पुलिस ने मेरे दो भाइयों का डीएनए टेस्ट भी कराया, जिसका रिजल्ट मिसमैच रहा। इसके बाद भी परिजनों की प्रताड़ना का सिलसिला जारी है। आवेदक ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने संदेहियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के बजाय उसे और उसके भाइयों को थाने में बैठाकर घंटों पूछताछ की, हथकड़ी लगाई गई और मानसिक प्रताड़ना दी गई। इतना ही नहीं, राकेश के बहनोई (जीजा) के साथ भी थाने में कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार किया गया। पुलिस ने बर्बरता करते हुए जीजा के मुंह में डंडा डाला था, जिससे उनके दांतों को गंभीर क्षति पहुंची है। पीड़ित का कहना है कि वह पिछले चार महीनों से हर तरह की प्रताड़ना सहन कर लगातार पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन जांच में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। वहीं अजयगढ़ थाना प्रभारी ने बताया, आवेदक ने जिन व्यक्तियों पर संदेह जताया था उनके डीएनए सैम्पल भी जांच में मिसमैच पाए गए हैं। पूछताछ करने पर भी संलिप्तता के साक्ष्य फिलहाल नहीं मिले हैं।
कॉल डिटेल रिकॉर्डकी हो गहन जांच
पीड़ित राकेश ने मांग की है कि, उसकी पत्नी मीरा जिस मोबाइल नंबर का उपयोग करती थी अगर उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की गहन जांच की जाए और प्रभावशाली नामजद संदेहियों से सख्ती से पूछताछ की जाए तो दोहरे हत्याकांड का खुलासा हो सकता है। आरोप है कि, अजयगढ़ थाना प्रभारी बखत सिंह जानबूझकर मामले का खुलासा नहीं कर रहे हैं। पीड़ित नेअजयगढ़ पुलिस की भूमिका पर अविश्वास जताते हुए पुलिस अधीक्षक से प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। राकेश का कहना है कि यदि सात दिनों के भीतर मामले का खुलासा नहीं हुआ तो वह मजबूर होकर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करेगा।
इनका कहना है-
आवेदक के द्वारा बताए गए संदेही आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की गई थी, संलिप्तता का पता लगाने आवश्यक टेस्ट भी कराए गए लेकिन फिलहाल कोई साक्ष्य नहीं मिला। मामला अत्यंत ही संवेदनशील है, इसलिए सिर्फ किसी के संदेह या आरोप के आधार पर किसी को आरोपी नहीं बनाया जा सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन एवं निगरानी में प्रकरण की जांच चल रही है। पीड़ित पक्ष को कभी प्रताड़ित नहीं किया गया, वैधानिक प्रक्रिया के तहत उनसे पूछताछ की गई थी। हम हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं इसलिए पूछतांछ के लिए उन्हें बुलाया था। सीडीआर के आधार पर भी कई लोगों से पूछताछ की गई है। अंधे क़त्ल का यह मामला पूरी तरह से वैज्ञानिक साक्ष्यों पर निर्भर है, उम्मीद है जल्द ही ठोस साक्ष्य मिलने पर प्रकरण का खुलासा किया जाएगा।