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तेंदूपत्ता उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने वैज्ञानिक पद्धति से किया जाएगा शाखकर्तन

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तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य के संयुक्त प्रशिक्षण को दक्षिण वन मण्डल पन्ना के डीएफओ अनुपम शर्मा ने संबोधित किया। प्रशिक्षण में उत्तर वन मण्डल पन्ना के डीएफओ धीरेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा भी फील्ड स्टॉफ को महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

*      तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य का संयुक्त प्रशिक्षण संपन्न

*     15 से 25 मार्च के मध्य किया जाएगा शाखकर्तन कार्य

*     शाखकर्तन कार्य के लिए 62 रुपए प्रति मानक बोरा दर निर्धारित

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिले के उत्तर सामान्य वन मण्डल एवं दक्षिण सामान्य वन मण्डल के संयुक्त तत्वावधान में तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य का प्रशिक्षण का आयोजन गत दिवस स्मृति वन परिसर पन्ना में किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तर पन्ना वनमण्डल अधिकारी धीरेन्द्र प्रताप सिंह, दक्षिण पन्ना वनमण्डल अधिकारी अनुपम शर्मा, प्रशिक्षु भारतीय वन सेवा अधिकारी अक्षत जैन एवं अंशुल तिवारी, उपवनमण्डल अधिकारी नितिन निगम, प्रशिक्षु राज्य वन सेवा अधिकारी अंकुर गुप्ता सहित दोनों वनमण्डलों के परिक्षेत्र अधिकारी, वनकर्मी, प्राथमिक लघुवनोपज सहकारी समितियों के प्रबंधक, प्रभारी विक्रम सिंह बुंदेला तथा तेंदूपत्ता क्रेता उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को तेंदू पौधों की वैज्ञानिक कटाई एवं शाखकर्तन की विधि का व्यवहारिक प्रदर्शन कराया गया। आगामी तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य 15 से 25 मार्च के मध्य पन्ना जिले के वन क्षेत्रों में निर्धारित रूप से किया जाएगा।
तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य के संयुक्त प्रशिक्षण में दक्षिण वन मण्डल पन्ना तथा उत्तर वन मण्डल पन्ना के अधिकारी-कर्मचारी, वनोपज समितियों के प्रबंधक उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण में बताया गया कि तेंदूपत्ता शाखकर्तन वन प्रबंधन की एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत तेंदूपत्ता के छोटे (20 सेंटीमीटर से कम गोलाई के) पौधों की नियंत्रित कटाई की जाती है। इससे पौधों में नई कोपलों का विकास तेजी से होता है तथा समान आकार, कोमल एवं उच्च गुणवत्ता वाले पत्तों की प्राप्ति सुनिश्चित होती है। शाखकर्तन के बाद विकसित होने वाले पत्ते संग्रहण के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ता है। सही समय एवं तकनीक से किया गया शाखकर्तन तेंदूपत्ता उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों को बेहतर बनाता है। शासन ने इस वर्ष तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य के लिए 62 रुपए प्रति मानक बोरा दर निर्धारित की है।
तेंदूपत्ता संग्रहण प्रदेश के वनाश्रित एवं आदिवासी परिवारों की आजीविका का एक महत्वपूर्ण आधार है। संग्रहण सीजन के दौरान ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होता है तथा सहकारी समितियों के माध्यम से उन्हें प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और वन संरक्षण में समुदाय की सहभागिता भी बढ़ती है। तेंदूपत्ता से होने वाली आय अनेक परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहारा प्रदान करती है।
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बीजेपी की नई टीम: जिला कार्यकारिणी में कई युवा चेहरों को मिला मौका, सामाजिक प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल

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 21 सदस्यीय कार्यकारिणी में सवर्णों का दबदबा

 5 ब्राह्मण और 5 क्षत्रिय नेताओं को बनाया पदाधिकारी

  एससी के नेता हुए निराश, नहीं मिल सका स्थान

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) भारतीय जनता पार्टी जिला इकाई पन्ना की नई 21 सदस्यीय कार्यकारिणी की घोषणा जिला अध्यक्ष बृजेन्द्र मिश्रा द्वारा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से की गई। नई टीम में अनुभवी और जमीनी आधार वाले नेताओं के साथ कई युवा चेहरों को शामिल किया गया है। संगठन ने इसे संतुलित और प्रभावी कार्यकारिणी बताया है। अनुभव और युवा ऊर्जा के समन्वय के साथ नई टीम उतारने का दावा किया है, हालांकि सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर पार्टी के अंदर और बाहर चर्चा भी तेज हो गई है। घोषित कार्यकारिणी में सवर्ण वर्ग के नेताओं का दबदबा स्पष्ट नजर आता है। जारी सूची के अनुसार 21 में से 12 पद सवर्ण समाज से जुड़े नेताओं को मिले हैं, जिनमें 5 ब्राह्मण और 5 क्षत्रिय चेहरों के अलावा वैश्य तथा कायस्थ समाज से 1-1 प्रतिनिधि शामिल हैं। वहीं अनुसूचित जाति वर्ग (एससी) को इस बार जिला कार्यकारिणी में स्थान नहीं मिल पाया है, जिससे राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। जिले की तीन विधानसभा सीटों में से गुनौर सीट एससी के लिए आरक्षित है और वहां से भाजपा विधायक भी हैं। ऐसे में एससी वर्ग को प्रतिनिधित्व न मिलना संगठनात्मक संतुलन की दृष्टि से चर्चा का विषय बन गया है। जिला कार्यकारिणी में इस बार आधी आबादी यानी महिलाओं (नेत्रियों) का प्रतिनिधित्व सिर्फ 4 पदों पर सिमट गया।

संतुलित कार्यकारिणी के चक्कर में असंतुलन

वर्तमान राजनीति में सामाजिक/जातिगत समीकरणों की अहम भूमिका को देखते हुए माना जा रहा था कि कार्यकारिणी गठन में व्यापक प्रतिनिधित्व का ध्यान रखा जाएगा। और यह पूरी तरह से समावेशी सोच पर आधारित होगी। जिला अध्यक्ष बृजेन्द्र मिश्रा को संगठनात्मक प्रबंधन में कुशल माना जाता है, लेकिन इस सूची में कुछ वर्गों की अनुपस्थिति को लेकर पार्टी के भीतर ही धीमे स्वर में असंतोष की चर्चा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घोषित सूची में पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह के करीबी माने जाने वाले नेताओं का प्रभाव अधिक दिखता है, जबकि गुनौर विधायक डॉ. राजेश वर्मा और पवई विधायक प्रहलाद लोधी खेमे के समर्थकों को अपेक्षाकृत कम अवसर मिला है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सूत्रों के अनुसार एक महामंत्री, दो मंत्री और मीडिया प्रभारी से जुड़े कुछ पदों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण उन्हें फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। संभावना जताई जा रही है कि आगामी नियुक्तियों के जरिए सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की जा सकती है।

मूल कार्यकर्ताओं पर भरोसा

पिछड़ा वर्ग से आने वाले बीजेपी के एक बड़े नेता ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर जिला कार्यकारिणी में सामाजिक असंतुलन पर असंतोष जताया है। उन्होंने तार्किक सवाल उठाते हुए कहा, पन्ना जिलाध्यक्ष व क्षेत्रीय सांसद वीडी शर्मा ब्राह्मण हैं और पन्ना विधायक क्षत्रिय समाज से आते हैं, इसके बाद भी 21 पदाधिकारियों वाली कार्यकारिणी में 10 पदों पर इन्हीं दोनों जातियों के नेताओं को नियुक्त करना क्या उचित है? इनका मानना है अन्य छूटी हुई जातियों के सक्रिय व कर्मठ युवाओं को अगर पदाधिकारी बनाया जाता तो कार्यकर्ताओं में अच्छा संदेश जाता। सामाजिक न्याय की मांग जब हर क्षेत्र में पुरजोर तरीके से उठाई जा रही उस समय इस तरह के मामले सामने आना निश्चित ही बेहद चिंताजनक है। भाजपा नेता ने एक सवाल के जवाब में बताया कि उनकी नजर में नई टीम की एक प्रमुख विशेषता यह है कि संगठन ने लंबे समय से सक्रिय, वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी है। बता दें कि, विधानसभा एवं लोकसभा चुनावों के दौरान दलबदल कर भाजपा में आने वाले चेहरों को सूची में स्थान नहीं मिला। इसे संगठन के ‘मूल भाजपाइयों’ पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।

माधवेन्द्र को बनाया महामंत्री

भाजपा की नई जिला कार्यकारिणी के कुछ सकारात्मक और मजबूत पक्ष भी जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। जिसमें एक प्रमुख पक्ष यह भी है कि संगठन ने जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले नेताओं को तरजीह दी है। मजबूत जनाधार रखने वाले जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष माधवेन्द्र सिंह (मद्धू राजा) को जिला महामंत्री बनाया जाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। जिला उपाध्यक्ष बनाए गए सुशील त्रिपाठी योग्य, अनुभवी नेता माने जाते हैं। वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप मजूमदार को कार्यालय मंत्री बनाकर भाजपा ने पन्ना विधानसभा के अपने समर्पित बंगाली समुदाय के वोटरों को मैसेज दिया है। राजनीतिक जटिलताओं के साथ पब्लिक के मिजाज को भली-भांति समझकर रणनीति बनाने में माहिर मजूमदार की कार्यकुशलता से सभी परिचित हैं। वहीं पन्ना के व्यापार मंडल में प्रभावी दखल रखने वाले युवा नेता कमल लालवानी, संघर्षशील एवं सक्रिय भास्कर पाण्डेय को जिला उपाध्यक्ष नियुक्त करने के साथ अन्य कई क्षमतावान युवाओं को आगे लाने का काम किया है। पन्ना की पार्षद श्रीमती संगीता राय को जिला मंत्री बनाकर पार्टी ने जिला कार्यकारिणी में महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करते हुए उनकी सक्रियता को सम्मान दिया है।

किसे क्या जिम्मेदारी मिली

भाजपा जिला पन्ना की घोषित नई कार्यकारिणी में कई सक्रिय युवा चेहरों को स्थान मिला।
भारतीय जनता पार्टी जिला इकाई पन्ना की 25 फरवरी को जारी नई जिला कार्यकारिणी में महामंत्री पद पर माधवेंद्र सिंह (मद्धू राजा) और राजेन्द्र कुशवाहा को नियुक्त किया गया है। जिला उपाध्यक्ष के रूप में श्रीमती सुषमा आदिवासी, दीपेन्द्र सिंह, सुशील त्रिपाठी, कमल लालवानी, श्रीमती पूनम यादव, भास्कर पाण्डेय, शैलेन्द्र श्रीवास्तव और शैलेन्द्र सिंह राजपूत को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला मंत्री पद पर कमलेश लोधी, कौशल किशोर लोधी, अवध तिवारी, श्रीमती संगीता राय, श्रीमती विजय राजे और जगदीश पटेल को शामिल किया गया है। वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी दशरथ गुप्ता को कोषाध्यक्ष के रूप में दी गई है, जबकि नागेन्द्र सिंह और राकेश चौबे को सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है। कार्यालय संचालन की जिम्मेदारी प्रदीप मजूमदार को कार्यालय मंत्री और ध्रुव चौबे को सह-कार्यालय मंत्री के रूप में सौंपी गई है। नई जिला कार्यकारिणी के सामने संगठन को बूथ स्तर तक सशक्त करने, सामाजिक संतुलन बनाए रखने और आगामी चुनावी रणनीति को धार देने की चुनौती रहेगी। जहां एक ओर भाजपा ने अनुभव, प्रतिबद्धता और युवा ऊर्जा के मिश्रण के साथ टीम घोषित की है वहीं सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान किस तरह होता है, यह आगामी समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल नई कार्यकारिणी के गठन ने पन्ना में सत्ताधारी दल भाजपा की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।
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बड़ी कार्रवाई: स्लॉटर हाउस ले जाए जा रहे 105 मूक पशुओं की बचाई जान

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पशुओं का अवैध रूप से परिवहन करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली अजयगढ़ थाना की पुलिस टीम।

   अजयगढ़ थाना पुलिस ने भैंस वंशीय पशुओं से भरे 4 वाहन किए जब्त

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) अवैध पशु परिवहन और पशु क्रूरता के विरुद्ध जिले की अजयगढ़ थाना पुलिस ने बीती रात बड़ी कार्रवाई करते हुए 105 भैंस वंशीय पशुओं को मुक्त कराया है। चार मालवाहक वाहनों में भूसे की तरह ठूंस-ठूंसकर भरे गए बेजुबान एवं निरीह पशुओं को कथित तौर पर उत्तर प्रदेश के बूचड़खाने (स्लॉटर हाउस) ले जाया जा रहा था। कुछ पशुओं के मुंह और पैर रस्सियों से बंधे हुए थे। पुलिस ने मवेशियों से भरे वाहनों को जब्त कर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। भूख-प्यास से बेहाल पशुओं को समुचित देखभाल के साथ सुरक्षा की दृष्टि से भानपुर ग्राम की गौशाला भेजा गया। यह कार्रवाई नवागत थाना प्रभारी निरीक्षक हरि सिंह ठाकुर के नेतृत्व में हमराही पुलिस बल द्वारा की गई।

मुखबिर की सूचना पर रात में घेराबंदी

पुलिस के अनुसार, 24 फरवरी 2026 की रात्रि थाना प्रभारी को सूचना प्राप्त हुई थी कि पन्ना की ओर से कुछ वाहन मवेशियों को क्रूरतापूर्वक भरकर अजयगढ़ की ओर ले जाए जा रहे हैं, जिन्हें आगे चलकर बूचड़खाने, उत्तर प्रदेश भेजे जाने की तैयारी है। सूचना मिलते ही पुलिस टीमों का गठन कर ग्राम सिंहपुर से कस्बा अजयगढ़ तक विभिन्न स्थानों पर घेराबंदी कर चेकिंग शुरू की गई।

वाहन चेकिंग में सामने आई क्रूरता

वाहनों में भूसे की तरह भरकर स्लॉटर हाऊस ले जाए जा रहे थे भैंस वंशीय पशु।
जांच के दौरान पिकअप क्रमांक UP-71 AT- 8812 से 16, डीसीएम क्रमांक UP-71 CT- 1253 से 57, पिकअप क्रमांक UP- 71 AT- 1702 से 18 तथा पिकअप क्रमांक UP- 71 AT- 8141 से 14 भैंस वंशीय पशु बरामद किए गए। सभी पशु अत्यंत संकुचित स्थिति में ठूंस-ठूंसकर भरे पाए गए थे। कई पशुओं के मुंह और पैर रस्सियों से बांधे गए थे तथा परिवहन के दौरान उनके लिए खाने-पीने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी। पुलिस ने सभी 105 भैंस वंशीय पशुओं को सुरक्षित मुक्त कर सुरक्षार्थ गौशाला भानपुर में भिजवाया है, जहां उनकी देखभाल की व्यवस्था की गई है। परिवहन में प्रयुक्त एक डीसीएम और तीन बोलेरो पिकअप वाहन भी जब्त कर लिए गए हैं। पुलिस के अनुसार जब्त मवेशियों एवं वाहनों सहित कुल लगभग 31 लाख रुपये का मशरूका जप्त किया गया है।

पुलिस ने दर्ज किए चार प्रकरण

पशुओं का अवैध रूप से परिवहन करने तथा पशु क्रूरता के मामले में आरोपियों जब्त वाहनों के साथ अजयगढ़ थाना की पुलिस टीम।
मामले में पुलिस ने चार अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर उत्तर प्रदेश के जिला फतेहपुर निवासी 7 व्यक्तियों को आरोपी बनाया है। जिनमें अमीर हसन (40) निवासी ग्राम सिचोली थाना थरियांव जिला फतेहपुर, असलम खान (24) निवासी ग्राम हनुमानपुर थाना थरियांव जिला फतेहपुर, सलीम (36) निवासी रामपुर थाना थरियांव जिला फतेहपुर, सोहेल (25) निवासी रामपुर थाना थरियांव जिला फतेहपुर, मोहम्मद आलम (20) निवासी ग्राम हनुमानपुर थाना थरियांव जिला फतेहपुर, सुलेमान (26) निवासी खेसहन थाना गाजीपुर जिला फतेहपुर तथा चांद मियां (38) निवासी गोसपुर थाना हथगांव जिला फतेहपुर उत्तर प्रदेश शामिल हैं।

…तो की जाएगी वैधानिक कार्रवाई

हरि सिंह ठाकुर निरीक्षक, थाना प्रभारी अजयगढ़ जिला पन्ना।
थाना प्रभारी निरीक्षक हरि सिंह ठाकुर ने बताया कि आरोपियों के विरुद्ध पशु क्रूरता अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है। थाना क्षेत्र में अवैध पशु परिवहन और पशु क्रूरता के मामलों पर सतत निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के विरुद्ध किसी भी प्रकार की गतिविधि पाए जाने पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस द्वारा जब्त वाहनों के दस्तावेजों और परिवहन संबंधी अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
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कुड़रा के जंगल में कुल्हाड़ी का आतंक, बेजुबान पेड़ों का कत्लेआम जारी

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पन्ना जिले के अजयगढ़ कस्बा में स्थित वन परिक्षेत्र अधिकारी अजयगढ़ एवं धरमपुर का कार्यालय भवन। (फाइल फोटो)

   उत्तर वन मण्डल पन्ना के परिक्षेत्र धरमपुर अंतर्गत सीमवर्ती जंगल का मामला

*   सागौन के ताज़ा ठूंठ बने सबूत, वन अमले की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

ईमानदारी से जंगल सुरक्षा न कर वन अपराधों पर पर्दा डालने में जुटा मैदानी अमला

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में दोनों सामान्य वन मण्डलों उत्तर-दक्षिण से इन दिनों जिस तरह की खबरें बाहर आ रही हैं वे अत्यंत चिंताजनक होने के साथ स्थिति के पूरी तरह से असमान्य होने का संकेत दे रहीं है। वानिकी एवं निर्माण कार्यों से नोट छापने के चक्कर में वन विभाग का मैदानी अमला जंगल और जानवरों की सुरक्षा से मुंह मोड़ चुका है। दक्षिण वन मण्डल के परिक्षेत्र कल्दा अंतर्गत पौधरोपण कार्य के लिए वन क्षेत्र में कथित तौर पर ब्लास्टिंग कराए जाने, जेसीबी मशीन से खुदाई करवाकर पत्थर निकालने और पौधारोपण कार्य करने वाले मेहनतकश मजदूरों की खून-पसीने की कमाई (मजदूरी) हड़पते हुए उनका शोषण करने की खबर सुर्ख़ियों में बनी है। वहीं उत्तर सामान्य वन मण्डल पन्ना की बात करें तो पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे जंगलों में अवैध कटाई की गतिविधियां जारी होने के गंभीर संकेत मिले हैं। वन परिक्षेत्र धरमपुर अंतर्गत अंतर्गत सर्किल नरदहा की बीट कुड़रा और मैहावा के सीमावर्ती जंगलों में की अवैध कटाई बेरोकटोक चल रही है।
वन परिक्षेत्र धरमपुर अंतर्गत कुड़रा के जंगल में हाल ही में काटे गए सागौन वृक्ष का ठूंठ और आसपास बिखरी पड़ी छाल।
सप्ताह भर के अंदर दूसरी बार शनिवार 21 फरवरी को क्षेत्र के भ्रमण पर पहुंचे पत्रकारों को जंगल के भीतर सागौन सहित जलाऊ लकड़ी के वृक्षों के कई ताज़ा ठूंठ दिखाई दिए। कटे हुए वृक्षों की लाल ताज़ा लकड़ी, आसपास बिखरी छाल और अधकटे तनों के अवशेष यह दर्शा रहे थे कि कटाई हाल के दिनों में ही की गई है। मोटे सागौन के ठूंठ इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि इमारती लकड़ी पर भी हाथ साफ किया जा रहा है। भ्रमण के दौरान घने जंगल के भीतर से वृक्ष पर कुल्हाड़ी चलने की “ठक-ठक” की आवाजें भी सुनाई दीं। जैसे ही बाहरी मौजूदगी का आभास हुआ, यह आवाज अचानक बंद हो गई। यह घटनाक्रम स्वयं संकेत देता है कि जंगल के भीतर कुछ छिपाने की कोशिश की जा रही थी। यह बात तब और पुख्ता हो गई जब बियाबान जंगल के अंदर की स्याह हकीकत उजागर होने से भयभीत और परेशान मैदानी वन अमले द्वारा अपने अधिकारियों की शह पर पत्रकारों को जंगल भ्रमण तथा विभागीय कार्यों का अवलोकन करने से रोकने तमाम हथकंडे आजमाए गए।

निगरानी व्यवस्था पर सवाल

वन अपराध की दृष्टि से अत्यंत ही संवेदनशील कुड़रा के जंगल में अवैध कटाई सहित अन्य गतिविधियों के प्रमाण मिलने से वन विभाग की नियमित गश्त और कड़ी निगरानी के दावे पर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मसलन, कुड़रा ग्राम में जहां दो वन रक्षकों के आवास स्थित हैं और लगभग दर्जनभर श्रमिक जंगल की सुरक्षा के नाम पर तैनात हैं वहां वृक्षों की कटाई बिना जानकारी के कैसे संभव हो रही है? क्या विभाग को वाकई इसकी भनक नहीं लगी या फिर जानबूझकर अवैध कटाई की अनदेखी की जा रही है? जानकारों का मानना है, कुड़रा-मैहवा बीट के जंगल की जटिल भौगोलिक स्थिति, कुड़रा एवं धरमपुर में वन अमले की पर्याप्त संख्या में मौजूदगी के मद्देनजर इनकी सहमति अथवा संलिप्तता के बगैर किसी तरह की अवैध गतिविधि संभव ही नहीं है।

पत्रकारों के मददगार को धमकाया

वन परिक्षेत्र धरमपुर अंतर्गत विभगीय कार्यों की जमीनी हकीकत जानने पहुंचे पत्रकारों को वन अमले के असहयोग का सामना करना पड़ा। पहले तो वन अमले ने मौके तक ले जाने में अनिच्छा दिखाई गई। पत्रकारों ने जब स्थानीय ग्रामीण बब्बू लोध की मदद ली तो उसे सुरक्षा श्रमिकों के द्वारा चेतावनी दी गई। वृद्ध बब्बू को धमकाते हुए एक सुरक्षा श्रमिक बोला यदि वह पत्रकारों को जंगल के भीतर लेकर गया या विभागीय कार्यों से जुड़ी खबरें कवर करवाईं, तो परिणाम अच्छे नहीं होंगे। सुरक्षा श्रमिकों का यह रवैया कई संदेह खड़े करता है। सवाल यह है कि, यदि सब कुछ पारदर्शी है, तो पत्रकारों को रोकने और स्थानीय व्यक्ति पर दबाव बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह सब व्यक्तिगत स्तर पर हुआ या फिर किसी वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश पर पत्रकारों के भ्रमण को बाधित करने की कोशिश की गई। इसका जबाव तो सुरक्षा श्रमिक, संबंधित सर्किल प्रभारी और परिक्षेत्राधिकारी धरमपुर ही दे सकते हैं। लेकिन इस घटनाक्रम से एक बात पूरी तरह से स्पष्ट है, मैदानी वन अमला अगर निष्ठापूर्वक और ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वाहन कर रहा होता तो उन्हें पत्रकारों के भ्रमण को रोकने के लिए घटिया हथकंडे आजमाने की जरुरत न पड़ती।

टाइगर मूवमेंट का हवाला, लेकिन चरवाहे बेखौफ

उल्लेखनीय है कि चार दिन पूर्व पत्रकार जब पहली बार कुड़रा जंगल के भ्रमण पहुंचे थे तो धरमपुर रेंजर वैभव सिंह चंदेल ने मैहावा बीट में टाइगर और तेंदुए के मूवमेंट का हवाला देकर पत्रकारों को वहां जाने से रोका था। उन्होंने सुझाव दिया था कि, खतरे को देखते हुए आपको वन अमले को साथ लेकर जाना चाहिए। लेकिन अभी कोई साथ नहीं जा सकता, आप लोग अगली बार जब आएं तो किसी को बोल दूंगा। शनिवार को पुनः कुड़रा पहुंचने से पूर्व रेंजर श्री चंदेल को सूचित किया तो उन्होंने स्टॉफ के गिद्ध गणना में व्यस्त होने का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए। वन अमले की असहजता-असहयोग से उपजीं तमाम शंकाओं के बीच पत्रकारों को भ्रमण के दौरान उसी क्षेत्र में कई चरवाहे भैंस चराते मिले। चरवाहों ने जंगल में टाइगर या लेपर्ड के विचरण को कोरी अफवाह बताया। चरवाहों ने बताया बाहरी लोगों को जंगल में आने से रोकने के लिए टाइगर-तेंदुए की मौजूदगी का भय फैलाया जाता है। यदि विभाग का दावा सही भी माना जाए, तो यह और गंभीर प्रश्न खड़ा करता है,जिस जंगल में टाइगर और तेंदुआ जैसे वन्यजीव मौजूद हों, वहां दिनदहाड़े सागौन की अवैध कटाई कैसे हो रही है? नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि कुड़रा जंगल में अवैध कटाई के साथ अवैध खनन और बेजुबान वन्यजीवों का शिकार भी जारी है। यदि यह सही है, तो यह वन संपदा और वन्यजीवों दोनों के लिए गंभीर खतरा है।
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कांग्रेस नेता पप्पू दीक्षित दो दिन की पुलिस रिमांड पर, फरियादी को धमकाने के आरोप में करीबी गिरफ्तार

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कांग्रेस नेता को आपराधिक मामले में बचाने के लिए फरियादी महिला को धमकाने और समझौता करने का दवाब बनाने वाला आरोपी समिति प्रबंधक सतीश श्रीवास्तव।

*    गरीब आदिवासी महिला की बेशकीमती जमीन हड़पने का बहुचर्चित मामला 

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मध्यप्रदेश के इस जिले में मजदूरों के नाम पर सबसे बड़ा भ्रष्टाचार!

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उत्तर वन मंडल के वन परिक्षेत्र अजयगढ़ अंतर्गत पौधारोपण के लिए मजदूरों के नाम पर ट्रैक्टरों से गड्ढों की खुदाई कराई गई।

*     पौधारोपण के लिए ट्रैक्टर लगाकर खुदवाए करोड़ों गड्ढे, मजदूरों के नाम पर बनाए प्रमाणक

*     उत्तर वन मण्डल पन्ना में व्याप्त भ्रष्टाचार की लगातार खुल रही परतें

*     पूर्व डीएफओ गंगवार जाते-जाते कर गए थे लगभग 50 फीसदी भुगतान

*      वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पूर्व शेष भुगतान को लेकर वन अमला सक्रिय

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले का उत्तर वन मंडल भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका है। यहां विगत कई वर्षों से जंगलराज कायम होने से चौतरफा लूट-खसोट मची है। जिसका अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभागीय निर्माण कार्यों की स्वीकृत राशि में बमुश्किल 30-40 फीसदी राशि ही धरातल पर खर्च की जा रही है। परिक्षेत्र अजयगढ़, धरमपुर में अटल भू-जल योजना तथा दूसरे परिक्षेत्रों में अन्य मद से निर्मित तालाबों, पर्कुलेशन टैंक एवं पर्कुलेशन पिट निर्माण की करोड़ों रुपए की राशि को पलीता लगाने के बाद अब पौधारोपण की तैयारी से जुड़े कार्यों में वृहद स्तर पर खेला चल रहा है। उत्तर वन मण्डल के अजयगढ़ परिक्षेत्र में आगामी मानसून सीजन में पौधारोपण कराने के लिए जो कुछ किया गया वह सिर्फ अनियमितता नहीं बल्कि मजदूरों के हक पर खुला डाका है। पौधारोपण के लिए लाखों गड्ढों की खुदाई ट्रैक्टरों (मशीनों) से कराई जबकि कागजों में इन्हें मजदूरों द्वारा खुदवाया जाना दर्शाया गया। उन्हें मजदूरी देने के नाम पर लगभग 50 फीसदी राशि का भुगतान भी किया जा चुका है। अब वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पूर्व शेष राशि का भुगतान कराने की तैयारी चल रही है। पौधारोपण कार्यों में भ्रष्टाचार सिर्फ अजयगढ़ रेंज तक सीमित नहीं, वनमण्डल की अन्य रेन्जों में भी इसी तर्ज पर मजदूरों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया। इस खुलासे के बाद भी अगर शेष बचा मजदूरी भुगतान किया जाता है तो संभवतः यह मध्य प्रदेश में किसी एक वित्तीय वर्ष में मजदूरों के नाम पर होने वाला अब तक का सबसे बड़ा घोटाला हो सकता है।

गड्ढे खुद दे रहे मशीनों के कार्य की गवाही

पौधारोपण के गड्ढों की खुदाई ट्रैक्टरों से कराने के चक्कर में गड्ढे वर्ग की आकृति के बजाए गोलाकार हो गए।
विगत दिवस परिक्षेत्र (रेन्ज) अजयगढ़ की बीट धवारी के वन कक्ष क्रमांक पी-194, बीट टौरिया के कक्ष क्रमांक पी-177 और बीट देवराभापतपुर के भ्रमण पर पहुंचे मीडियाकर्मियों को कई जगह हजारों की तादाद में गोलाकार गड्ढे देखने को मिले। इन अजब-गजब गड्ढों को कैमरों में कैद करने के बाद जब मौके पर उपस्थित वनरक्षक से पूछताछ की तो उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के ऑफ रिकार्ड स्वीकार किया कि गड्ढे ट्रैक्टरों से कराए गए हैं। साथ ही यह भी बताया कि जल्द से जल्द काम कराने के प्रेशर में यह सब करना पड़ा। मजदूरों के नाम पर मशीनों को रोजगार देने का यह फर्जीवाड़ा अजयगढ़ परिक्षेत्र की अन्य बीटों के साथ-साथ वन मण्डल की सभी रेन्जों में हुआ है। इस तरह देखें तो ट्रैक्टर चालकों को ठेके देकर कराए गए गड्ढों की तादाद कई लाखों में पहुंच जाती है। जाहिर है, इतने वृहद पैमाने पर अनियमितता होना रेंजर से लेकर अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता के बगैर संभव ही नहीं है।

वर्ग की आकृति में होते हैं गड्ढे

वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि, विभागीय पौधारोपण कार्यों में आमतौर पौधों की प्रजाति के अनुसार वर्ग की आकृति में चार साइज के गड्ढों की खुदाई की जाती है, जिसका उल्लेख वर्किंग प्लान में है। सबसे छोटी साइज का गड्ढा 30x30x30 सेंटीमीटर का होता है अर्थात फिट में देखें तो इसकी लम्बाई, चौड़ाई और गहराई 1 फिट रहती है। इस साइज के गड्ढों में आमतौर पर सागौन (टीक) का रोपण किया जाता है। इन गड्ढों के बीच की दूरी 2 मीटर होती है। दूसरी साइज का गड्ढा 30x30x45 का होता है। इसकी लंबाई, चौड़ाई एक फिट लेकिन गहराई डेढ़ फिट रहती है। इन गड्ढों में रोपित किए जाने वाले पौधों की आपस की दूरी 2.5 या 3 मीटर हो सकती है। तीसरा साइज 45x45x45 सेंटीमीटर का है, यह मध्यम आकार का गड्ढा होता है जिसकी लंबाई, चौड़ाई और गहराई डेढ़ फिट होती है। इनमें छोटे झाड़ वाले पौधे लगाए जाते हैं। मध्यम आकार वाले गड्ढों का आपस में डिस्टेंस 3 मीटर होता है। चौथा गड्ढा सबसे बड़े साइज का 60x60x60 सेंटीमीटर का रहता है। अर्थात इनकी लम्बाई, चौड़ाई और गहराई सब एक सामान 2 फिट की रहती है। बड़े साइज के गड्ढों में बड़े झाड़ वाले पौधे लगाए जाते हैं। इन गड्ढों के बीच की दूरी 4 मीटर हो सकती है। साइज के हिसाब से अगर गड्ढों की खुदाई की राशि को देखें तो प्रत्येक गड्ढे की खुदाई सहित अन्य कार्य के लिए वर्तमान में प्रचलित दरों के अनुसार 13 रुपए लेकर 25 रुपए तक मजदूरी भुगतान करने का प्रावधान है।

अब मजदूर लगाकर गड्ढों में सुधार

पौधारोपण के लिए वन परिक्षेत्र अजयगढ़ अंतर्गत ट्रैक्टर लगाकर ठेके पर कराए गए गोलाकार गड्ढों का कुछ स्थानों पर मजदूर लगाकर सुधार कराया जा रहा है। रुपए बचाने के चक्कर में मशीनों से कराई गई गड्ढों की खुदाई पर पर्दा डालने के लिए अब मजदूर लगाकर उन्हें निर्धारित आकार-साइज देने काम शुरू हो गया है। मीडियाकर्मियों को निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर मजदूर गोलाकार गड्ढों को सही आकार देने के साथ मशीन से कराए गए कार्य के साक्ष्यों को मिटाते हुए नजर आए। वन विभाग के जानकारों की मानें तो पौधारोपण गड्ढा खुदाई के दोहरे कार्य के बावजूद प्रत्येक गड्ढे की मजदूरी राशि का अधिकतम 50 फीसदी ही खर्च आएगा। इस तरह गड्ढों की मजदूरी की शेष 50 फीसदी राशि का कार्य प्रभारी वनरक्षक से लेकर भुगतान कर्ता अधिकारी के बीच बंदरबांट हो जाएगा। और गड्ढों में सुधार करते मजदूरों के फोटोग्राफ्स निकालकर कागजों में साबित कर दिया जाएगा कि काम मशीनों ने नहीं बल्कि मजदूरों/श्रमिकों ने ही किया है। दरअसल, जहां पूरा तंत्र ही भ्रष्टाचार में आकण्ठ डूबा हो वहां सब संभव है। मशीनों से लाखों-करोड़ों गड्ढों की खुदाई पर विभागीय अधिकारियों द्वारा सख्ती से रोक न लगाना फर्जीवाड़े में उनकी संलिप्तता का स्पष्ट संकेत है।

सीमेंट पोल में अंदर मिट्टी, ऊपर कंक्रीट

बीट टौरिया में पौधारोपण सुरक्षा जाली लगाने के लिए खड़े किए सीमेंट पोल में सिर्फ ऊपर जमीन की सतह पर कंक्रीट डालकर अंदर मिट्टी भर गई।
पौधारोपण तैयारी कार्य में भ्रष्टाचार सिर्फ गड्ढों की खुदाई तक सीमित नहीं है। स्थल पर इससे जुड़े अब तक जितने भी कार्य हुए हैं सभी में हद दर्जे की लीपापोती की गई। पौधों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग जाली लगाने खड़े किये गए सीमेंट पोल के होल से कंक्रीट मसाला गायब है। अभी जिन बीटों में पोल (खम्भे) लगाए गए उनकी फिलिंग प्रोजेक्ट रिपोर्ट अनुसार कंक्रीट मटेरियल से न करके मिट्टी से कर दी गई। सीमेंट पोल के होल में झोल करने वालों ने निरीक्षणकर्ताओं की नजर में धूल झोंकने के लिए जमीन की सतह पर लगभग 10 सेंटीमीटर कंक्रीट मसाला पोल के चारों तरफ डाला है। ताकि ऊपर से देखने पर ऐसा प्रतीत हो कि अंदर भी कंक्रीट मटेरियल लगाया है। जानकारों के मुताबिक, कंक्रीट मसाले की चोरी का सीधा असर सीमेंट पोल की मजबूती पर पड़ना तय है। बता दें कि, सीमेंट पोल को तमाम विषम परिस्थितियों में को सालों-साल तक मजबूती से खड़े रखने के लिए जमीन के अंदर डेढ़ फिट की गहराई तक कंक्रीट मटेरियल से कवर किया जाता है। जबकि जमीन की ऊपरी सतह पर 10 सेंटीमीटर कंक्रीट पोल के चारों तरफ लगाया जाता है। पोल के गड्ढे में कंक्रीट मसाला न डालने से उनके लूज होकर गिरने का खतरा बना रहेगा। पौधारोपण सुरक्षा जाली फेंसिंग भार सीमेंट पोल झेल सकें, इसके लिए प्रत्येक 3 पोल्स के बाद सपोर्टिंग पोल (दो पोल) खड़े किये जाते हैं।

नवागत डीएफओ की कार्रवाई पर रहेगी नजर

उत्तर वन मण्डल कार्यालय पन्ना। (फाइल फोटो)
उत्तर वन मण्डल पन्ना अंतर्गत पौधारोपण कार्य में व्यापक पैमाने पर हुई अनियमितताएं कथित तौर पर पूर्व डीएफओ गर्वित गंगवार के कार्यकाल के अंतिम दिनों में की गई हैं। डीएफओ ऑफिस के सूत्रों की मानें तो गंगवार साहब जाते-जाते पौधारोपण के प्रमाणकों का बड़ी तादाद में भुगतान भी कर गए हैं। अब जो राशि शेष बची है उसका भुगतान चालू वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पूर्व कराने के लिए कार्य प्रभारी बीट गार्ड से लेकर संबंधित परिक्षेत्राधिकारी (रेंज ऑफिसर) सक्रिय हैं। पौधारोपण कार्य में फर्जीवाड़ा और कार्य की गुणवत्ता से समझौते का मामला उत्तर वन मण्डल के नवागत धीरेन्द्र प्रताप सिंह डीएफओ के संज्ञान में है। ऐसे में अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नवागत डीएफओ लंबित भुगतान करके इस भ्रष्टाचार को आगे बढ़ाते हैं या फिर फर्जी प्रमाणकों के भुगतान पर रोक लगाकर तत्परता से गहन जांच उपरांत दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।

इनका कहना है-

“पौधारोपण कार्य में अनियमितताएं होने का मामला संज्ञान में आने पर जांच के आदेश दिए हैं। आप सोमवार को कार्यालय आएं बैठकर बात करते हैं, आप जहां भी मेरे वन मण्डल के कार्यों को देखना चाहते हैं मेरे साथ मेरी गाड़ी से चलिए, मैं स्वयं आपको लेकर चलूंगा।”

धीरेन्द्र प्रताप सिंह, वनमण्डलाधिकारी, उत्तर वन मण्डल, पन्ना।

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एम्बुलेंस से शराब तस्करी का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार, 120 लीटर अवैध शराब जब्त

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अवैध शराब का परिवहन करने के मामले में गुनौर थाना पुलिस टीम द्वारा एम्बुलेंस वाहन कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

*     सरकारी आपातकालीन सेवा के दुरुपयोग से हड़कंप

*     पन्ना जिले की गुनौर थाना पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ा वाहन

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिले में अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच गुनौर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। तस्कर सरकारी आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा 108 का दुरुपयोग कर अवैध शराब का परिवहन कर रहे थे। पुलिस ने एम्बुलेंस वाहन से 120 लीटर देशी मदिरा बरामद करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
थाना प्रभारी गुनौर निरीक्षक माधवी अग्निहोत्री के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मुखबिर सूचना पर 12-13 फरवरी की दरम्यानी रात कार्रवाई करते हुए महेबा रोड स्थित बेलही महादेव मंदिर के मुख्य द्वार के पास घेराबंदी कर संदिग्ध एम्बुलेंस को पकड़ा। तलाशी के दौरान वाहन क्रमांक CG-04NS-7479 से 10 पेटियों में भरी करीब 120 लीटर (475 क्वार्टर) देशी मसाला शराब बरामद की गई, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 60 हजार रुपये बताई गई है। मौके से 1,000 रुपये नकद भी जब्त किए गए। पुलिस ने एम्बुलेंस चालक सहित तीन आरोपियों लोकेन्द्र लोधी सीलघाट कुम्हारी जिला दमोह, विधा प्रसाद दाहायत कुड़ई पटेरा जिला दमोह और अभिषेक राजपूत रनेह जिला दमोह को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ थाना गुनौर में आबकारी एक्ट की धारा 34(2) के तहत अपराध क्रमांक 40/2026 दर्ज किया है। आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया।

अपराध का तरीका चिंताजनक

इस मामले का शराब की बढ़ती तस्करी के साथ सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा के लिए संचालित 108 एम्बुलेंस का उपयोग अवैध गतिविधि में किया गया। यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि आम जनता के भरोसे और आपातकालीन सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि एम्बुलेंस जैसी सेवा का दुरुपयोग बढ़ता है तो वास्तविक मरीजों को समय पर सहायता मिलने में बाधा उत्पन्न हो सकती है।पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी माधवी अग्निहोत्री सहित पुलिस टीम के अन्य सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि अवैध शराब कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी प्रकार के नए तरीके से की जा रही तस्करी पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
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अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने युवा अधिवक्ता ने प्रशासन को भेजा लीगल नोटिस

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अधिवक्ता शैलेष विश्वकर्मा, जिला एवं सत्र न्यायालय पन्ना।

  हाईकोर्ट जाने की चेतावनी, पुलिस-आबकारी की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

पन्ना।(www.radarnews.in) जिले में गांव-गांव और गली-गली फैलते जा रहे अवैध शराब कारोबार को लेकर अब कानूनी स्तर पर बड़ा कदम उठाया गया है। जिला एवं सत्र न्यायालय पन्ना के युवा अधिवक्ता शैलेश विश्वकर्मा ने जिले में अवैध शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने तथा शराब कारोबारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर जिला कलेक्टर पन्ना, पुलिस अधीक्षक पन्ना एवं जिला आबकारी अधिकारी पन्ना को 15 दिवसीय मियादी लीगल नोटिस डाक के माध्यम से प्रेषित किया है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि पन्ना जिले में आबकारी ठेकेदार द्वारा लाइसेंसी दुकानों से शराब उठाकर आसपास के गांवों और मोहल्लों में अवैध रूप से बिक्री कराई जा रही है। इस अवैध कारोबार से जहां एक ओर शासन के राजस्व को भारी क्षति पहुंच रही है, वहीं दूसरी ओर गांव-गांव में नशे का जाल फैलने से सामाजिक माहौल बिगड़ता जा रहा है और युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में जा रही है।

रोजनों लाखों का अवैध कारोबार

नोटिस के अनुसार जिले में प्रतिदिन लाखों रुपये की अवैध शराब बिक्री होने का अनुमान है। अधिवक्ता शैलेश विश्वकर्मा ने अपने नोटिस में यह भी उल्लेख किया है कि अवैध शराब के कारण गांवों में शांति भंग हो रही है, आए दिन विवाद, हंगामा और आपराधिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ रही है, जिनका पारिवारिक और सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा है।

पुलिस-आबकारी की भूमिका पर उठे सवाल

नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि अवैध शराब बिक्री को लेकर पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में है। कई बार ग्रामीणों द्वारा शराब तस्करी करते हुए ठेकेदारों के गुर्गों को पकड़ा गया, जिसके वीडियो भी सामने आए, बावजूद इसके प्रभावी और समान कार्रवाई नहीं की जा रही। आरोप है कि कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों पर होती है, जबकि ठेकेदारों से जुड़े अवैध नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई से परहेज किया जा रहा है। अधिवक्ता शैलेश विश्वकर्मा ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिवस की अवधि में अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर अथवा अन्य सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र होंगे, जिसकी सम्पूर्ण जवाबदेही संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी। गौरतलब है कि पन्ना जिले में अप्रैल 2025 से अवैध शराब कारोबार को लेकर हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। ऐसे में लीगल नोटिस के माध्यम से उठाया गया यह कदम प्रशासन के लिए एक कड़ी चेतावनी माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस नोटिस के बाद क्या ठोस कार्रवाई करता है।
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जंगल के रक्षक ही बने भक्षक: अवैध सागौन कटाई कराने के मामले में वनरक्षक पर प्रकरण दर्ज, निलंबन

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फाइल फोटो।

*    पीटीआर के बफर क्षेत्र में गश्त के दौरान खुला मामला, सुरक्षा श्रमिक भी आरोपी

  सागौन की छिलाई करते समय वन अमले को देख भाग निकले, पहचान में आया बीटगार्ड और श्रमिक

  7 नग सागौन सिल्लियां जब्त कर आरोपियों के विरुद्ध तत्परता से की गई प्रभावी कार्रवाई

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जंगल की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वालों की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व से एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) के पन्ना बफर परिक्षेत्र में अवैध सागौन कटाई कराए जाने के मामले में एक वनरक्षक (बीटगार्ड) के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण दर्ज करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में एक वन सुरक्षा श्रमिक को भी आरोपी बनाया गया है। सोशल मीडिया पर जारी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई जानकारी के अनुसार यह मामला दिनांक 8 फरवरी 2026 का है, जब परिक्षेत्र सहायक छापर एवं अन्य वनकर्मियों द्वारा बीट छापर क्षेत्र में नियमित गश्त की जा रही थी। गश्त के दौरान कक्ष क्रमांक पी-293 में कुछ व्यक्तियों को सागौन लकड़ी की छिलाई कर सिल्ली बनाते हुए देखा गया।

भागते समय पहचाने गए दोनों आरोपी

जंगल गश्त के दौरान अचानक वन अमले के मौके पर पहुंचने से सागौन की सिल्लियों को छोड़ आरोपी भाग निकले।
वन स्टाफ द्वारा मौके पर घेराबंदी कर आरोपियों को पकड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन सभी आरोपी घने जंगल का लाभ उठाकर फरार हो गए। हालांकि भागते समय दो व्यक्तियों की पहचान की गई, जिनमें बिहारी पिता रामलगन यादव, निवासी ग्राम बनहरीकलां, जो बीट छापर में समिति सुरक्षा श्रमिक के रूप में कार्यरत है तथा संतोष प्रजापति, पदस्थ वनरक्षक बीटगार्ड छापर शामिल हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार इन दोनों की प्रथम दृष्टया अवैध कटाई में संलिप्त पाई गई है। घटनास्थल की तलाशी के दौरान वन विभाग द्वारा सागौन लकड़ी की कुल सात सिल्लियां जब्त की गईं, जिनका कुल घनफल 1.526 घन मीटर बताया गया है। जब्त सामग्री के आधार पर आरोपी बिहारी यादव एवं वनरक्षक संतोष प्रजापति के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया।

प्रतिवेदन के आधार पर तत्काल निलंबन

पूरे घटनाक्रम का प्रतिवेदन परिक्षेत्र अधिकारी पन्ना बफर द्वारा तैयार कर सहायक संचालक मड़ला के माध्यम से 10 फरवरी 2026 को क्षेत्र संचालक कार्यालय भेजा गया। प्रतिवेदन के परीक्षण के बाद प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर वनरक्षक संतोष प्रजापति को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए गए। पन्ना टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के उप संचालक वीरेन्द्र कुमार पटेल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा है कि वन क्षेत्र में अवैध गतिविधियों में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह विभाग का कर्मचारी ही क्यों न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि जंगल की सुरक्षा से जुड़े पदों पर बैठे लोगों से और अधिक जवाबदेही अपेक्षित है।
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बॉर्डर पर जुए के फड़ से 3 जिलों के 11 जुआरी पकड़े गए, नकदी सिर्फ 27 हजार जब्त, लग्जरी गाड़ियों से पहुंचे थे खेलने

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पन्ना-सतना जिले के बॉर्डर क्षेत्र में दबिश देकर जुआरियों को पकड़ने वाली देवेन्द्रगर थाना पुलिस टीम।

*     देवेन्द्रनगर थाना अंतर्गत पन्ना-सतना बॉर्डर के जंगल क्षेत्र में हुई कार्रवाई

*     पुलिस के दावे को लेकर संदेह, जुआ फड़ में 5 से 7 लाख रुपए होने की जनचर्चा

पन्ना।(www.radarnews.in) जिले देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत पन्ना-सतना बॉर्डर क्षेत्र में जुए के फड़ पर की गई पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सोशल मीडिया पर पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी दी गई है कि जंगल के इलाके में दबिश देकर पुलिस ने 11 जुआरियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दावा किया है कि यह कार्रवाई 9-10 फरवरी की दरम्यानी रात को की गई, जब कुछ लोग सीमा क्षेत्र में जुए का फड़ संचालित कर रहे थे। पुलिस के अनुसार सूचना मिलने पर देवेन्द्रनगर थाना पुलिस ने पन्ना-सतना सीमा के पास ग्राम गिरवारा के जंगल क्षेत्र में दबिश दी, जहां रात्रि के अंधेरे में प्रकाश की व्यवस्था कर ताश के पत्तों से जुआ खेला जा रहा था। मौके से सभी आरोपियों को घेराबंदी कर पकड़ने का दावा किया गया है। पुलिस का यह भी कहना है कि यह फड़ लंबे समय से पन्ना, सतना और दमोह जिलों की सीमा से सटे इलाकों में स्थान बदल-बदलकर संचालित किया जा रहा था।

जुआ खेलते इनको किया गिरफ्तार

जंगल में जुआ खेलने आए जुआरियों जब्त बोलेरो कार।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में देवेंद्रनगर थाना क्षेत्र के ग्राम गिरवारा निवासी नरेन्द्र वर्मा 26 वर्ष और भंडारी कुशवाहा 27 वर्ष शामिल हैं। सतना जिले के जसो थाना अंतर्गत खगई निवासी बलवान सिंह बुंदेला 63 वर्ष, कोलगवां थाना क्षेत्र के आदर्श नगर घुरडांग निवासी पुष्पेन्द्र कुशवाहा 19 वर्ष, ज्ञानेंद्र सिंह दीक्षित 27वर्ष तथा दीपेन्द्र द्विवेदी 25 वर्ष को भी मौके से पकड़े जाने का दावा किया गया है। इसके अलावा पन्ना शहर के बेनीसागर मोहल्ला निवासी राजू कुशवाहा 40 वर्ष और रामकिशोर मिश्रा 56 वर्ष, सिमरिया थाना क्षेत्र के महोड़ निवासी राकेश सिंह बैस 44 वर्ष तथा करिया निवासी राजवेन्द्र लोध 38 वर्ष के साथ-साथ दमोह जिले के गैसाबाद थाना अंतर्गत ग्राम कचनारी निवासी 29 वर्षीय सतेन्द्र राजपूत के नाम भी पुलिस द्वारा जारी सूची में शामिल बताए गए हैं।

नकदी कम मिलने से कार्रवाई को लेकर संदेह

जुआरियों के कब्जे से पुलिस के द्वारा जब्त की गई बलेनो कार।
पुलिस ने अपने दावे में बताया है कि आरोपियों के पास से कुल 27 हजार रुपये नकद, एक बलेनो कार, एक बोलेरो कार, 12 मोबाइल फोन और जुआ खेलने में प्रयुक्त ताश के पत्तों की गड्डी जब्त की गई है। हालांकि कार्रवाई के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि जब आरोपी लग्जरी वाहनों से जुआ खेलने पहुंचे थे, तो मौके से इतनी कम नकदी की बरामदगी कैसे हुई। इधर क्षेत्र में यह जनचर्चा भी है कि जुए के फड़ पर मौजूद नकदी की मात्रा पुलिस द्वारा बताई गई राशि से कहीं अधिक थी। अपुष्ट चर्चाओं के अनुसार फड़ 5 से 7 लाख रुपए जुआरियों के पास मौजूद थे। जिससे शेष राशि कहां गई और वह जब्त क्यों नहीं हो पाई इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। इन्हीं चर्चाओं के चलते पुलिस की कार्रवाई पर सवाल और संदेह भी व्यक्त किए जा रहे हैं। जनचर्चाओं में कितनी हकीकत और कितना फसाना है, यह तो सिर्फ देवेन्द्रगर थाना पुलिस और जुआरी ही बेहतर बता सकते हैं। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध देवेन्द्रनगर थाना में जुआ एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई किए जाने का दावा किया है।
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