* पन्ना जिले की अजयगढ़ जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत नंदनपुर का मामला
* कलेक्टर से भ्रष्टाचार की शिकायत करने से नाराज़ था ग्राम रोजगार सहायक
* मध्यप्रदेश में नहीं थम रहीं आदिवासियों के उत्पीड़न की घटनाएं
मुस्तकीम खान, अजयगढ़/पन्ना (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश से आदिवासियों के उत्पीड़न की हैरान करने वाली घटनाएं लगातार सामने आ रहीं है। इसी क्रम में प्रदेश के पन्ना जिले में एक आदिवासी सरपंच पति के साथ पंचायत के ग्राम रोजगार सहायक व अन्य के द्वारा दिनदहाड़े मारपीट करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है। घटना जिले अजयगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत नंदनपुर की है। जहां आदिवासी सरपंच शिवकली गौंड़ के पति श्यामलाल गौंड़ के द्वारा कुछ दिन पूर्व पंचायत के ग्राम रोजगार सहायक सुरेन्द्र के भ्रष्टाचार सहित अन्य कारनामों की शिकायत पन्ना कलेक्टर व अन्य अधिकारियों से की गई थी। शिकायत की भनक लगने के बाद से ही ग्राम रोजगार सहायक (जीआरएस) काफी आक्रोशित था और सरपंच पति श्यामलाल की इस हिमाकत का उससे बदला लेने फ़िराक में था।

बीते दिवस जब ग्राम पंचायत नंदनपुर में आयोजित ग्राम सभा में सम्मलित होने के लिए सम्बंधित अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय ग्रामीण पंचायत भवन में मौजूद थे, तभी आदिवासी सरपंच शिवकली गौंड़ अपने पति श्यामलाल गौंड़ के साथ वहां पहुंची। पंचायत भवन के बाहर खड़े रोजगार सहायक सुरेन्द्र एवं उसके साथियों ने दबंगई दिखाते सरपंच को गालियां देनी शुरू कर दी। गालियां देने से मना करने पर सुरेन्द्र ने सरपंच पति श्यामलाल को पंचायत भवन के सामने ही पटक-पटक कर जमकर पीटा। जिससे वह बुरी तरह से घायल हो गया। सरपंच पति ने मौके से भागकर किसी तरह अपनी जान बचाई। पीड़ित ने मारपीट, गाली-गलौंज की घटना की शिकायत धरमपुर थाना में की है। जिस पर थाना पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध 294, 323, 506, 34 एवं एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के तहत आपराधिक पंजीबद्ध कर माले को विवेचना में लिया है। इस घटनाक्रम के बाद से आदिवासी महिला सरपंच और उसका परिवार अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर अत्यंत ही भयभीत है।
मध्यप्रदेश : पन्ना जिले में जनपद पंचायत अजयगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत नंदनपुर की आदिवासी सरपंच के पति श्यामलाल गौंड़ के साथ रोजगार सहायक द्वारा मारपीट करने का वीडियो वायरल है। श्यामलाल ने रोजगार सहायक के कारनामों की शिकायत की थी, जिसे लेकर नाराज़गी के चलते घटना को अंजाम दिया गया। pic.twitter.com/XcLUp07VWt
— Radar News (@RadarNews4) August 18, 2023
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शनिवार 12 अगस्त को दोपहर करीब ढाई बजे नवागत कलेक्टर हरजिंदर सिंह के अचानक जिला चिकित्सालय के निरीक्षण पर पहुँचने से हड़कंप मच गया। कलेक्टर के सख्त तेवर देख डॉक्टर, नर्सेस एवं पैरामेडिकल स्टॉफ सकते में आ गया। निरीक्षण के दौरन कलेक्टर श्री सिंह ने वार्ड में भर्ती मरीजों से चर्चा की। भ्रमण के दौरान अस्पताल परिसर और शौचालयों एवं अन्य स्थानों पर साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की हिदायत दी। अस्पताल में उपलब्ध दवाओं और निःशुल्क जांच इत्यादि के संबंध में चिकित्सकों से जानकारी लेकर पात्र मरीजों को शासकीय योजनाओं के लाभ के संबंध में भी निर्देशित किया। कई वार्ड में भर्ती मरीज के परिजनों को बाहर सोते हुए पाए जाने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और तत्काल जिला शहरी विकास अभिकरण के परियोजना अधिकारी शशिकपूर गढ़पाले को मरीज के परिजनों के लिए रैनबसेरा में सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
मेटरनिटी वार्ड के भ्रमण के दौरान अजयगढ़ निवासी महिला नीता द्वारा जिला कलेक्टर को अवगत कराया गया कि प्रसव उपरांत डिस्चार्ज होने पर घर जाने के लिए किसी भी प्रकार का वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया है। इस शिकायत पर मेटरनिटी वार्ड की इंचार्ज नर्सिंग सिस्टर सरला घोटे से जानकारी तलब कर लापरवाही प्रमाणित पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की कार्यवाही की। निलंबन अवधि में नर्सिंग सिस्टर का मुख्यालय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र धरमसागर तालाब पन्ना निर्धारित किया गया है। इस दौरान इन्हें जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी। कलेक्टर श्री सिंह ने बताया कि महिला चिकित्सक और अन्य मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने भ्रमण के दौरान अस्पताल ब्लॉक में बनने वाले क्रिटिकल केयर यूनिट के स्थल का मुआयना भी किया।
सिहारन ग्राम विश्व आदिवासी दिवस को गौरव दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व मंत्री राजा पटैरिया शामिल हुए। इस अवसर पर गांधीवादी-समाजवादी-आंबेडकरवादी नेता एवं प्रखर वक्ता राजा पटैरिया ने वर्तमान में मध्यप्रदेश, मणिपुर सहित देश के दूसरे राज्यों में आदिवासी समाज के लोगों के खिलाफ बढ़ती हिंसा, उत्पीड़न और शोषण की हैरान करने वाली घटनाओं के सामने पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आदिवासियों समेत अन्य कमजोर तबकों के खिलाफ फैलाई जा नफरत और हिंसा की प्रभावी रोकथाम को लेकर राज्य एवं केन्द्र सरकार की नाकामी करार दिया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि, सत्ताधारी दल की विभाजनकारी राजनीति के कारण आज देश के कई हिस्से जल रहे है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजा पटैरिया ने जोर देते उपस्थित जनसमुदाय को भरोसा दिलाया कि शोषित वर्गों विशेष कर आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हो रहे अन्याय के खिलाफ उनका संघर्ष गांधीवादी तरीके से आखिरी साँस तक जारी रहेगा। इसके लिए मुझे चाहे जितनी बार जेल जाना पड़े, मैं संघर्ष पथ पर आगे बढ़ता रहूँगा। पटैरिया की इस वैचारिक प्रतिबद्धता को सुनकर उपस्थित जनसमुदाय ने भारी हर्ष ध्वनि से स्वागत करते हुए इस संघर्ष में हर क़दम पर उनका साथ देने के नारे लगाए।



कार्यक्रम में मंच में मुख्य रूप से भाजपा जिलाध्यक्ष राम बिहारी चौरसिया पन्ना जिला प्रभारी उमेश शुक्ला जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मीना राजे नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती मीना पाण्डेय, अजयगढ़ नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती सीता गुप्ता, श्रीमती आशा गुप्ता, नगर पालिका विधायक प्रतिनिधि विष्णु पाण्डेय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष संतोष यादव, श्रीमान बबलू पाठक, जय प्रकाश चतुर्वेदी, आशीष तिवारी, श्रीमती चंद्रप्रभा तिवारी और पन्ना विधानसभा में निवासरत सभी जिला पदाधिकारी प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित थे। इस अवसर पर कार्यक्रम का सफल संचालन महामंत्री विवेक मिश्रा ने किया तथा आभार प्रदर्शन विधानसभा प्रभारी उमेश निगम ने किया ।
उल्लेखनीय है कि, वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अंतिम समय में अप्रत्याशित निर्णय लेते हुए पन्ना सीट से कुसुम सिंह महदेले का टिकिट काटकर बृजेन्द्र प्रताप सिंह को प्रत्याशी घोषित किया था। जबकि पन्ना सीट से 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहीं सुश्री महदेले ने जहां प्रंचड जीत दर्ज कराई थी, वहीं पवई सीट पर बृजेन्द्र प्रताप को करारी शिकस्त मिली थी। बड़ी जीत के बावजूद भाजपा संगठन ने महदेले का टिकिट काटकर पवई में पराजित हुए बृजेन्द्र प्रताप सिंह को 2018 में पन्ना सीट से चुनावी समर में उतारा था। पहले बिना किसी ठोस कारण टिकिट काटने फिर कोई दायित्व न सौंपे जाने से दिग्गज नेत्री महदेले की भाजपा संगठन से तल्खी और दूरियां बढ़ती चली गईं जोकि बरक़रार है। पन्ना सीट पर मजबूत जनाधार रखने वाली पूर्व मंत्री सुश्री महदेले की नाराज़गी आसन्न विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र काफी मायने रखती है। 










