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जंगल के जल श्रोतों में शिकारियों ने बिछाया जाल

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तेंदुआ, भालू और चीतल का हुआ शिकार

 दक्षित वन मण्डल पन्ना के पवई वन परिक्षेत्र की घटना

वनकर्मियों की हड़ताल से बेकाबू हुए हालात

पन्ना/ अजीत बढ़ौलिया, पवई (रडार न्यूज) भीषण तपिश भरी गर्मी में जंगल के जल श्रोतों में शातिर शिकारियों की सक्रियता बढ़ गई है। प्यास से तड़पते वन्यजीव पानी की तलाश में जैसे ही जल श्रोतों के आसपास पहुंचते है, शिकारियों के बिछाये जाल में फंस जाते है। सबसे बुरी स्थिति दक्षिण वन मण्डल पन्ना के पवई, मोहन्द्रा, रैपुरा, कल्दा व शाहनगर वन परिक्षेत्रों की है, यहां बड़े पैमाने पर शिकार की घटनायें हो रही हैं। शिकार की घटनाओं का ताजा मामला पवई रेंज का है, जहां तेंदुआ, भालू और चीतल का शिकार हुआ है। आश्चर्य की बात तो यह है कि शिकार की इन घटनाओं से वन विभाग के आला अधिकारी अनजान हैं। जिला मुख्यालय पन्ना से पत्रकारों का दल जब जंगल में पहुंचा तब अधिकारियों को शिकार होने की भनक लगी और घटना स्थल पता करने के लिए सक्रिय हुए। उल्लेखनीय है कि पवई से लगभग 13 किलोमीटर दूर शिकारपुरा बीट अंतर्गत वनोपज जांच नाका धामू से आधा किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में स्थित तलैया में पानी पीने आये तेंदुए का शिकार होने का मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय ग्रामीणों के साथ पत्रकारों का दल जब मौके पर पहुंचा तो जंगल में क्षत-विक्षत व सड़ चुके तेंदुए का शव झाड़ियों के बीच पड़ा मिला। शव की स्थिति व भीषण दुर्गन्ध को देखते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा था कि शिकार की यह घटना तीन से चार दिन पुरानी है। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि तलैया के समीप मुख्य लाईन से विद्युत तार बिछाकर तेंदुए का शिकार किया गया है। इसी तरह शिकारपुरा बीट के ही अंतर्गत चादा घाटी के नीचे चेक डेम के नजदीक एक वयस्क भालू का भी शिकार दो से तीन दिन पूर्व हुआ है। शिकार की इन दोनों ही बड़ी घटनाओं से वन विभाग के आला अधिकारी बुधवार 30 मई तक अनजान रहे। गौरतलब है कि शिकार की दोनों ही घटनायें पवई मुख्यालय के समीप की है, फिर भी वन अधिकारियों को भनक नहीं लग पाई। इससे साफ जाहिर होता है कि इस भीषण गर्मी में प्यास से तड़पते और पानी की तालाश में दर-दर भटक रहे वन्य प्रांणियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।

ऐसे में न जंगल बचेंगे न जानवर-

म.प्र. वन कर्मचारी, अधिकारी संयुक्त मोर्चा की पूर्व घोषित अनिश्चित कालीन हड़ताल की जानकारी के बाद भी पन्ना के दोनों सामान्य वन मण्डल उत्तर एवं दक्षिण के जिम्मेदार अधिकारियों ने वन्य प्रांणियों व जंगल की सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किये। यही वजह है कि जंगल में शिकारी व माफिया बेखौफ होकर घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। प्रशिक्षित मैदानी वन अमले की गैरमौजूदगी से हालात दिनों दिन तेजी से बिगड़ रहे हैं। जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों दक्षिण वन मण्डल पन्ना के रैपुरा-मोहन्द्रा वन परिक्षेत्र के सीमावर्ती ग्रामों में पानी की तलाश में घुसे तेंदुए ने 20 लोगों पर हमला हमला किया था, जिनमें तीन की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। अन्य घटना में पन्ना शहर के समीप मनकी-जरधोवा के जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गये श्रमिक बेटूलाल आदिवासी को बाघ ने अपना शिकार बना लिया था।

बेजुवानों की जान ले रही प्यास-

भीषण सूखा की त्राशदी झेल रहे पन्ना जिले के जंगलों और आबादी क्षेत्रों में जल श्रोतों के सूखने से हाहाकार मचने लगा है। इसे अदूरदर्शिता ही कहा जायेगा कि पन्ना जिला जल अभाव ग्रस्त घोषित होने के बावजूद प्रचण्ड गर्मी के इन मुश्किल दिनों में वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए सामान्य वन मण्डल उत्तर व दक्षिण के अधिकारियों द्वारा जरूरी इंतजाम नहीं किये गये। जबकि सामान्य वन क्षेत्रों का अधिकांश हिस्से के प्राकृतिक जल श्रोत पूर्णतः सूख चुके हैं। नतीजतन पानी की तलाश में भटकते हुए वन्यजीवों के आबादी क्षेत्रों में पहुंचने से वन्य प्रांणियों व मानव के बीच संघर्ष की स्थिति निर्मित हो रही है। इस मौके का फायदा उठाने के लिए जल श्रोतों के आसपास पेशेवर शिकारी सक्रिय हो गये हैं, यह स्थिति अत्यधिक चिन्तनीय है।

चीतल के प्यासे बच्चे का कुत्तों ने किया शिकार-

      प्यास से बेहाल वन्य जीवों के आबादी क्षेत्र में आने पर वे आवारा कुत्तों का भी शिकार बन रहे है। पवई कस्बे के निकट बेंदी हार में पानी की तलाश करते हुए आये चीतलों के झुण्ड में से एक प्यासे बच्चे को आवारा कुत्तों ने अपना शिकार बना लिया। आसपास मौजूद लोगों के मौके पर पहुंचने से आवारा कुत्ते चीतल को खा नहीं पाये। शिकार की यह घटना पवई मुख्यालय के पास की होने के कारण वन विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में आ गई। चीतल के शव का पोस्ट मार्टम कराने के बाद वन अधिकारियों ने उसे जलवा दिया।

इनका कहना है-

       ‘‘पवई वन परिक्षेत्र के अंतर्गत तेंदुआ, भालू व चीतल के शिकार कि जानकारी मिली है। पोस्टमार्टम होेने के बाद ही ज्ञात होगा कि शिकार किस तरह से हुआ है। प्रथम दृष्टया शिकार के इन मामलों में किसी की लापरवाही तय कर पाना मुश्किल है।‘‘
                                                                          मीना मिश्रा, डीएफओ दक्षिण वन मण्डल पन्ना

इनका कहना है-

-‘‘शिकार की घटनाएं बेहद गंभीर मामला है। मैं पवई जा रहा हूं, संबंधित अधिकारियों से शिकार की घटनाओं की जानकारी ली जायेगी। एनटीसीए के मापदण्डों के अनुसार जांच कराई जायेगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आयेगें उसके अनुसार जिम्मेदार अधिकारियों के विरूद्ध एक्शन लिया जायेगा।‘‘
-राघवेन्द्र श्रीवास्तव, मुख्य वन संरक्षक वृत्त छतरपुर

पहली बार देखा सभी का ख्याल रखने वाला शिवराज जैसा मुख्यमंत्री

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सम्मेलनों में मुख्यमंत्री से मिलकर गदगद हैं सभी वर्ग के लोग 

भोपाल। मध्यप्रदेश में किसान, श्रमिक और अन्य गरीब वर्ग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दिल से अपने परिवार का मुखिया मानने लगा है। मुख्यमंत्री का देहाती क्षेत्रों में दिन-रात तूफानी दौरा और गाँव वालों से सहज भाव से मन की बात करने की शैली से ये सभी बहुत प्रभावित हैं। प्रदेशभर में बड़े स्तर पर हो रहे सम्मेलनों में अब गरीब वर्ग, किसान और श्रमिक अपनी मर्जी से मुख्यमंत्री से मिलने और बातचीत के लिये पहुँचने लगे हैं। नौतपा की तेज गर्मी भी लोगों को मुख्यमंत्री से मिलने से रोक नहीं पाई है।

हाल ही में 26 मई को आगर-मालवा में हुए तेंदूपत्ता संग्राहक एवं श्रमिक सम्मेलन में सभी वर्गों के जरूरतमंद महिला-पुरुष मुख्यमंत्री श्री चौहान का अपनापन पाकर गद्गद हो गये। कृषक धीरज सिंह, भगवान सिंह चौहान, राजू बाई, सुजान सिंह, दिनेश कुमार, बहादुर सिंह, दयाराम, विक्रम का कहना है कि हमारी हर समस्या, हर जरूरत बिना हमारे बोले मुख्यमंत्री खुद आगे बढ़कर पूरी कर रहे हैं। जिंदगी में पहली बार देख रहे हैं गरीबों, किसानों और सबका ख्याल रखने वाला शिवराज जैसा मुख्यमंत्री।

सम्मेलन में मुख्यमंत्री से मिलने के बाद किसान धीरज सिंह ने खेती छोड़ने का इरादा बदल दिया है। उनके दो बेटे और एक बेटी है। उनका कहना है कि अब हम खेती का नफा-नुकसान क्यों सोचें। अब तो बेटों को भी खेती में ही लगाऊँगा। मुख्यमंत्री ने भावांतर भुगतान योजना में प्रोत्साहन राशि देकर हमें बर्बाद होने से बचाया है। उन्होंने किसानों के लिये जितना किया है, इसके पहले किसी मुख्यमंत्री ने नहीं किया। ग्राम रातड़िया के किसान दयाराम किसानों के हित में लिये गये फैसलों से खुश हैं और चैन से अगली फसल की तैयारी कर रहे हैं। 



ग्राम पचेटी के किसान भगवान सिंह चौहान ने पिछले साल 100 क्विंटल गेहूँ बेचा था। राज्य सरकार ने उन्हें इस साल, पिछले साल बेचे गेहूँ पर 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी है। समर्थन मूल्य पर चना बेचने पर उन्हें 4400 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ मिला है। पहले चना बेचने पर 3400 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल पाता था। पिछले सीजन में 70 क्विंटल चना बेचा था। इस प्रकार उन्होंने 70 हजार रुपये मुनाफा कमाया है। ग्राम हाबर के किसान शंकरलाल राठौर की पिछले वर्ष फसल खराब हो गई थी। उन्होंने कृषि अधिकारियों की मदद से क्लेम भरा। कम समय में उन्हें 2 हजार रुपये प्रति बीघा की दर से फसल बीमा मुआवजा की राशि मिल गई। ग्राम गंगापुर के किसान सुजान सिंह बरनावत भावांतर भुगतान योजना को किसानों के लिये संजीवनी बताते हैं।

ग्राम रोकड़ा के किसान बहादुर सिंह परम्परागत खेती करते थे। भावांतर भुगतान योजना में अन्य फसलों को भी शामिल करने के बाद उन्होंने सरसों और मसूर भी लगाने का निर्णय लिया। ग्राम कनासिया के किसान विक्रमसोयाबीन का 2800 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलने पर खुश है। ग्राम हिरपुरभज्जा शाजापुर के 55 वर्षीय निर्धन शिवनारायण ने प्रधानमंत्री आवास योजना में घर मिलने पर मुख्यमंत्री की तारीफ की है। पहले उनके सिर पर केवल बरसाती होती थी। अब पक्की छत है। ग्रामीण बाबूलाल अहिरवार ने मुख्यमंत्री पेयजल योजना से उनके गाँव की पीने के पानी की समस्या हल होने पर राज्य शासन का आभार माना है। ग्राम कानड़ के खेतिहर मजदूर रघुराम ने बताया कि पहले मजदूरों की तकलीफ को कोई समझता नहीं था। हम लोग अकेले ही अपनी तकलीफ सहते थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने असंगठित श्रमिक कल्याण योजना लागू कर बहुत बड़ी राहत पहुँचाई है। इसी गाँव की राजूबाई को उज्जवला योजना में गैस कनेक्शन मिलने से उसका परिवार खुश है।

आलिया की ‘‘राजी‘‘ ने की 100 करोड़ के क्लब में इंट्री

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नई दिल्ली। अभिनेत्री आलिया भट्ट की हालिया रिलीज फिल्म ‘‘राजी‘‘ दर्शकों को काफी पसंद आई है। मेघना गुलजार के निर्देशन में बनी आलिया की इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। स्थिति यह है कि फिल्म ने शानदार कमाई के साथ 100 करोड़ के क्लब में एंट्री कर ली है। फिलहाल ये फिल्म 102.50 करोड़ की कमाई कर चुकी है। जंगली पिक्चर्स और धर्मा प्रोडक्शन की इस फिल्म ने बीते शुक्रवार को 2.25 करोड़ रुपए की कमाई की और शनिवार को 89 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4.20 करोड़ रुपए की कमाई की। 17वें दिन रविवार को भी फिल्म ने अच्छा कलेक्शन किया और 4.42 करोड़ की कमाई कर डाली। इस तरह फिल्म ने तीसरे वीक में कुल मिलाकर लगभग 10.87 करोड़ की कमाई करते हुए 100 करोड़ क्लब में शामिल हो गई। बता दें कि फिल्म में आलिया ने कश्मीरी लड़की का किरदार निभाया है, जो पाकिस्तानी सेना में कार्यरत मेजर इकबाल से शादी करती है और भारत के लिए जासूसी करती है। आलिया के जासूस वाले इस किरदार को काफी पसंद किया गया है। बता दें कि इस फिल्म में 1971 के दौरान भारत-और पाकिस्तान के बीच जंग के हालात के दौरान की गई एक कश्मीरी लड़की की सच्ची कहानी पर आधारित है। उल्लेखनीय है कि ये फिल्म रिटायर्ड नेवी ऑफिसर हरिंदर सिक्का के ‘‘नॉवल कॉलिंग सहमत‘‘ पर आधारित है, जिसे जंगली पिक्चर्स और धर्मा प्रोडक्शन ने मिलकर प्रोड्यूस किया है। फिल्म में मेजर इकबाल के रोल में नजर आनेवाले विकी कौशल का कहना है कि इकबाल के किरदार ने पाकिस्तानी ऑफिसर के उस दायरे को तोड़ दिया है जिसे हम पिछले कुछ वक्त से अपनी फिल्म में दिखाते थे। फिल्म में इकबाल एक नरम दिल का अच्छा पाकिस्तानी है। फिल्म में सहमत का किरदार निभाने वाली आलिया भट्ट का कहना है, श्फिल्म राजी पाकिस्तान को नीचा नहीं दिखाती है। हम यह नहीं कह रहे हैं कि हिंदुस्तान के आगे कुछ नहीं। हम तो कह रहे हैं कि वतन के आगे कुछ नहीं। वतन तो मेरा भी हो सकता है और तुम्हारा भी हो सकता है।

बाबरिया के विवादित बयान से कांग्रेस को हो सकता है नुकसान

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पन्ना के कलेक्ट्रेट चैराहे पर प्रदर्शन करते यादव समाज के लोग।

अपमान से आहत यादव समाज में उबाल

दीपक बाबरिया का पुतला फूंककर जताया विरोध

पन्ना। रडार न्यूज  मध्यप्रदेश में पिछले साढ़े 14 वर्षों से सत्ता का वनवास भोग रही मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार में वापिसी की हर संभव कोशिश में जुटे है। इनके प्रयासों को मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी दीपक बाबरिया के कथित विवादित बयान से बड़ा झटका लग सकता है। श्री बाबरिया द्वारा यादव समाज के खिलाफ दिये गये बयान को लेकर यादव समाज में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। इसी क्रम में मंगलवार को अखिल भारतवर्षीय महासभा पन्ना ने कलेक्ट्रेट चैराहे पर मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी दीपक बाबरिया का पुतला जलाते हुए उनके बयान की तीखी निंदा की है।

माफ़ी मांगे बाबरिया-

जिलाध्यक्ष संतोष सिंह यादव ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार और किसी समाज के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि बाबरिया के बयान की जितनी भी अलोचना की जाये वह कम है। उनके इस घोर आपत्तिजनक इस कृत्य से सम्पूर्ण यादव समाज आहत हुआ है। जिसकी हम सब कठोर शब्दों में निंदा करते है। पुतला दहन के दौरान यादव समाज के लोगों द्वारा कलेक्ट्रेट चैराहे पर प्रदर्शन करते हुए मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी दीपक बाबरिया के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई। समाजजनों की मांग है कि श्री बाबरिया से अपने निंदनीय बयान पर आम माफी मांगे अन्यथा बाबरिया के साथ-साथ यादव समाज कांग्रेस का विरोध करने को मजबूर होगा।

पुलिस से हुई झूमा-झटकी-

पानी डालकर पुतले की आग बुझाते पुलिसकर्मी।

                   अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा पन्ना के तत्वाधान में मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे कलेक्ट्रेट चैराहे पर मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी दीपक बाबरिया के पुतला दहन को लेकर यादव समाज के लोगों और पुलिस के बीच जमकर झूमा-झटकी हुई। पुतला दहन को रोकने के लिए पुलिस द्वारा पुतले को छुड़ाने की कोशिश की गई तो यादव समाज के लोग भी विरोध करने लगे। पुलिस की छींना-झपटी के बीच कुछ युवकों ने पुतले को आग लगा दी। और फिर देखते ही देखते पुतला धू-धूकर जलने लगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रदर्शन में कांग्रेस से जुड़े यादव समाज के नेताओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हांलाकि कुछ चर्चित चेहरों ने प्रदर्शन से दूरी बनाये रखी। जिसकी लोगों के बीच खासी चर्चा रही।

ये रहे शामिल-

                   हाथों में भगवा झण्डा लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी दीपक बाबरिया के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों में मुख्य रूप से अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा पन्ना के अध्यक्ष संतोष सिंह यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष रविराज सिंह यादव, बुविप्रा उपाध्यक्ष महेन्द्र प्रताप सिंह यादव, लक्ष्मी यादव, नत्थू सिंह यादव, आशीष यादव, बाबूलाल यादव, रतन सिंह यादव, दशरथ यादव, रवि यादव, कंधी यादव, रंजीत सिंह यादव, भरत सिंह यादव, रूप सिंह यादव, आयुष यादव, सूरज यादव, गणेश सिंह यादव, प्रवीण कुमार यादव, नरेन्द्र सिंह यादव, लक्ष्मण सिंह, त्रिलोक सिंह यादव आदि शामिल रहे। पुतला दहन के पश्चात् यादव समाज द्वारा राज्यपाल के नाम पन्ना एसडीएम विनय दिवेदी को ज्ञापन भी सौंपा गया।

निवेश के लिये उद्योगपतियों की पहली पसंद बना मध्यप्रदेश -श्री शुक्ल

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भोपाल। रडार न्यूज़  उद्योग मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मध्यप्रदेश निवेश के लिए उद्योगपतियों की पहली पसंद बनकर उभरा है। यहाँ राज्य सरकार की ओर से उद्योगों के लिये सभी आवश्यक आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध हैं। उद्योग मंत्री आज यहाँ मध्य भारत के संबसे बड़े प्राइवेट स्टार्टअप इन्क्यूबेशन एंड को-वर्किंग स्पेस के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। माय-स्किल के कार्यपालक निदेशक स्वप्निल त्रिपाठी ने बताया कि को-वर्किंग स्पेस की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि यहाँ उद्यमी एक-दूसरे की कई तरह से मदद करते हैं। यहाँ वर्क-स्पेस में विभिन्न प्रोफेशनल्स के कार्यालय हैं। भारत सरकार के सभी स्टार्टअप से संबंधित स्कीम के बारे में भी यहाँ अवगत कराया जाता है।

इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से पकड़े ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले

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भोपाल में पहले दिन 381 लोगों तोड़े ट्रैफिक के नियम

शाम 7 बजे जारी हुए 28 चालान, आईटीएमएस से चालान की कार्रवाई शुरू

भोपाल। रडार न्यूज़  राजधानी में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करना अब आसान नहीं होगा। भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोशन लिमिटेड के इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) ने ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ सोमवार से चालानी कार्रवाई शुरू कर दी है। पहले दिन एक घंटे में 28 लोगों के चालान बनाए गए। ट्रैफिक नियम तोड़ते हुए 381 लोगों की पहचान की गई। ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ चालानी कार्रवाई संभागायुक्त आजातशत्रु श्रीवास्तव, कलेक्टर डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस आईजी जयदीप प्रसाद, डीआईजी धर्मेंद्र चैधरी, नगर निगम आयुक्त और बीएससीडीसीएल के ईडी अविनाश लवानिया की मौजूदगी में शुरू हुई। शहर में 24 स्थानों पर आईटीएमएस से ट्रैफिक की निगरानी की जा रही है। इसके लिए हाई रेज्यूलूशन कैमरे लगाए गए है। इनकी संख्या 255 से अधिक है। इसमें बिना हेलमेट, स्टॉप लाइन क्रॉस करने, जेब्रा क्रॉसिंग पर वाहन रोकने और निर्धारित स्पीड लिमिट से तेज गति से वाहन चलाने वालों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि शहर के प्रमुख चैराहों और सड़कों पर ट्रैफिक की निगरानी के लिए स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने आईटीएमएस लगाया है। इसका लोकार्पण 8 मई को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने किया था। तब से वाहन चालकों को आईटीएमएस के कंट्रोल रूम से टैफिक नियमों का पालन करने की चेतावनी दी जा रही थी। ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों को मोबाइल पर संदेश भी भेजे जा रहे हैं। चैराहों और सड़कों पर लगे कैमरे ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की तस्वीर ले लेंगे। इसमें ऑटोमेटिक चालान जनरेट हो जाएगा। इसे एक बार सिस्टम के माध्यम से निगरानी करने वाले ऑपरेटर भी क्रॉस चैक करेंगे। इसके बाद नियमानुसार चालान जारी कर दिया जाएगा। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों को चालान उनके वॉट्स एप नंबर, ई-मेल आईडी और साधारण डाक से चालान घर पहुँच जाएगा। इसके लिए आरटीओ में दर्ज वाहनों के रिकॉर्ड के अनुसार वाहन मालिक को फोटो के साथ चालान भेजे जाएंगे। इन चालानों की राशि एमपी ऑन लाईन से जमा की जा सकेगी।

नाकाम हुआ इश्क तो प्रेमी युगल ने दी जान

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पन्ना के धाम मोहल्ला में नाबालिग प्रेमी जोड़े खाया जहर

पन्ना। साथ जीना परिवार और समाज को जब मंजूर नहीं हुआ, तो हताश और निराश होकर प्रेमी युगल ने साथ मरने का फैसला कर अपनी जान दे दी। नाबालिग प्रेमी जोड़े की मौत की स्तब्ध कर देने वाली घटना पन्ना की है। यहां के धाम मोहल्ला में रहने वाले मनीष कुशवाहा पुत्र संजय कुशवाहा 17 वर्ष और पड़ोस में रहने वाली जानकी गुप्ता पुत्री राकेश गुप्ता 16 वर्ष की जहर खाने से मौत हो गई। दोनों को लेकर उनके परिजन शाम करीब 7 बजे जब जिला अस्पताल पहुंचे तो वहां तैनात ड्यूटी डाॅक्टर ने परीक्षण करने के उपरांत उन्हें मृत घोषित कर दिया। चंद मिनट बाद ही यह दुखद खबर शहर में आग की तरह फैल गई। दो नाबालिग पड़ोसियों द्वारा आत्मघाती कदम उठाने को लेकर आम चर्चा है कि उनके बीच लम्बे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। कथित तौर पर दोनों के परिजनों को उनका मिलना-जुलना मंजूर नहीं था। साथ जीने के इनके हसीन सपने जब परिवार की बंदिशों के कारण बिखरने लगे, तो उसकी हताशा में अप्रत्याशित रूप से मौत को गले लगा लिया। घटना के बाद से पीड़ित परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था, कि उनके बच्चे ही उन्हें कभी न भूलने वाला जख्म देकर इस तरह दुनिया को अलविदा कह जाएंगे। इन घटनाओं पर कोतवाली थाना पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम किया है। नगर निरीक्षक अरविंद कुजूर ने बताया कि संदिग्ध अवस्था में मृत दोनों नाबालिग पड़ोसी है। नाबालिग युवक कक्षा 12वीं और लड़की कक्षा 10वीं में अध्यरत थी। उनके बीच प्रेम प्रसंग होने की चर्चाएं हैं, लेकिन जब तक जांच में यह बात सामने नहीं आती, तब तक आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।

शिवराज के पुतले की मांग में भरा सिंदूर, पहनाई चूड़ियाँ

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वन कर्मचारी-अधिकारी संघ ने किया प्रदर्शन

पांचवें दिन भी जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल

वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा करने में अधिकारी हो रहे फेल

पन्ना। रडार न्यूज लंबित मांगों के निराकरण को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे वन कर्मचारी-अधिकारी संयुक्त मोर्चा ने अपनी मांगे पूरी होने तक इस भीषण गर्मी में अपने संघर्ष को जारी रखने का ऐलान किया है। हड़ताल के पांचवे दिन पन्ना में वन कर्मचारियों ने यहां जगात चौकी चौराहे पर प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुतले की मांग में सिंदूर भरा और फिर चूडि़यों का हार पहनाकर जमकर नारेबाजी की गई। वन कर्मचारियों-अधिकारियों के इस अनूठे प्रदर्शन को देखने के लिए उत्सुकतावश चौराहे पर कुछ समय के लिए राहगीरों की भीड़ जमा हो गई।

आग में जल रहे जंगल-

    उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले में वन कर्मचारियों-अधिकारियों की संयुक्त हड़ताल का पहले ही दिन से व्यापक असर देखा जा रहा है। पिछले दिनों हड़ताल के दौरान तेंदुआ, बाघ और भालू के हमले में 21 लोगों के घायल होने तथा एक तेंदूपत्ता श्रमिक बेटूलाल आदिवासी की मौत से वन क्षेत्र से सटे ग्रामों में हाहाकार मचा है। वन्यजीवों के हमले की दहशत के चलते लोग घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे है। वनकर्मियों की हड़ताल से तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य भी काफी प्रभावित है। प्रशिक्षित मैदानी वन कर्मचारियों और रेंजर्स के हड़ताल पर होने के कारण पन्ना टाईगर रिजर्व के जंगलों में लगी आग भी समय रहते बुझ नहीं पा रही है। स्थिति यह है कि वर्तमान में पार्क क्षेत्र का जंगल कई स्थानों पर आग से धधक रहा है। उधर हड़ताली कर्मचारी हर गुजरते दिन के साथ अपने आंदोलन को तेज कर रहे है।

अब मामा भी पछतायेगा-

सोमवार 28 मई को पन्ना के जगात चौकी चौराहे पर हड़ताली वन कर्मचारियों और अधिकारियों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के प्रति अपना आक्रोश प्रकट करते हुए उनके पुतले का महिला की तरह श्रृंगार कर सिंदूर से मांग भरी और फिर प्रतीकात्मक चूडि़यों का हार पहना गया। इस दौरान कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार को कर्मचारी विरोधी करार देते हुए जमकर नारेबाजी की। सर्वविदित है कि बेहद कठिन परिस्थितियों में जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा करने वाले वनकर्मी पुलिस एवं राजस्व विभाग के कर्मचारियों के समान वेतन तथा सुविधायें देने की मांग कर रहे है। मध्यप्रदेश वन कर्मचारी संघ पन्ना के अध्यक्ष महीप कुमार रावत ने चेतावनी भरे अंदाज में इशारों-इशारों में कहा कि वन कर्मचारियों की उपेक्षा करने वाले मामा को भी इस बार पछताना पड़ेगा। समूचे प्रदेश के वन कर्मचारी-अधिकारी एवं अन्य विभागों के कर्मचारी और उनके परिजन समय आने पर अपनी ताकत का बखूबी एहसास करायेंगे।

ये रहे शामिल-

आज के प्रदर्शन में मुख्य रूप से शिशुपाल अहिरवार, जियालाल चौधरी, रमाकांत गर्ग, देवेश कुमार गौतम, बीके खरे, नंदा प्रसाद अहिरवार, विनोद कुमार माझी, रमाकांत त्रिपाठी, राजकुमार अहिरवार, आरएस नर्गेश, ओमप्रकाष शर्मा, केके विश्वकर्मा, आदित्य प्रताप सिंह, रामऔतार चौधरी, दुलारे चौधरी, रामकृपाल, रामदुनिया सेन, रम्मू अहिरवार, प्रेेम नारायण वर्मा व श्रीनिवास पाण्डेय आदि शामिल रहे।

केन की कोख छलनी कर रहे रेत माफिया

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रोक के बावजूद केन नदी में मशीनों से जारी है रेत का अवैध उत्खनन।

स्वीकृत क्षेत्र के बाहर चल रही खदानें

एनजीटी के निर्देशों को ताक पर रखकर मशीनों से निकाल रहे रेत

पन्ना।रडार न्यूज बुन्देलखण्ड अंचल के पन्ना, छतरपुर और बांदा जिले की जीवन रेखा कहलाने वाली केन नदी का अस्तित्व संकट में है। देश की चुनिंदा स्वच्छ जल राशि वाली नदियों में शुमार सदानीरा केन की रेत लूटने की होड़ में माफिया इसे बरसाती नदी में तब्दील करने में तुले है। पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में रेत की संगठित लूट चरम पर है। यहां केन नदी पर स्वीकृत खदानों के बाहर कई किलोमीटर में दैत्याकार मशीनों से पानी के अंदर की रेत निकाली जा रही है। कुछ खदानें तो ऐसी है कि जिनमें रेत कई माह पूर्व ही समाप्त हो चुकी है बावजूद इसके उन खदानों के ई-पिटपास जारी करने पर अब तक कोई रोक नहीं लगाई गई। फलस्वरूप केन नदी में अवैध उत्खनन कर निकाली जाने वाली रेत के परिवहन का गोरखधंधा इन्हीं खदानों के ई-पिटपास बड़े मजे से चल रहा है। विश्वस्त्र सूत्रों से हांसिल जानकारी के अनुसार अजयगढ़ क्षेत्रांतर्गत वर्तमान में केन नदी पर जिगनी, फरस्वाहा, सुनहरा, बाबा का पुरवा, चंदौरा, उदयपुर, मझगांय, बीरा क्रमांक-02, बीरा क्रमांक-01 चांदीपाठी, खरौनी, बरौली, रामनई, बरकोला एवं केन की सहायक नदियों रूंज तथा बागे नदी में हरदी, टिकुरिहा, मगरदहा, खोरा, परनियापुरवा, अमरछी, सहित अन्य स्थानों पर पूर्णतः अवैध तरीके से प्रतिदिन सैकड़ों घन मीटर रेत निकाली जाती है। क्षेत्रीय राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों तथा पन्ना में बैठे खनिज विभाग के अफसरों की सांठगांठ से माफिया नदियों के विनाश की इबारत लिख रहे है। बीच-बीच में होने वाली प्रशासन की कार्यवाही महज दिखावे तक ही सीमित है। जिसका नजीता यह है कि रेत के अवैध उत्खनन पर रोक लगने के बजाय नदी के सूखने के साथ ही यह दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ रहा है। रेत की इस लूट में सबकी अपनी-अपनी हिस्सेदारी है। खदान क्षेत्रों में फैली चर्चाओं पर भरोसा करें तो उक्त सभी स्थानों पर होने वालों अवैध उत्खनन में स्थानीय दबंग, आपराधिक तत्व, माफिया, भाजपा-कांग्रेस के नेता व जनप्रतिनिधि एवं पत्रकार शामिल बताये जा रहे है।

इन खदानों में नहीं बची रेत-

अजयगढ़ क्षेत्र में केन नदी पर स्वीकृत रेत खदान बीरा क्रमांक-01, बीरा क्रंमाक-02, चंदौरा, बरकोला, मझगांय, सुनहरा, उदयपुर खदान के स्वीकृत रकबे में रेत कई माह पहले ही खत्म हो चुकी है। इसकी जानकारी खनिज विभाग समेत अजयगढ़ और पन्ना के प्रशासनिक अधिकारियों को भी है। लेकिन खदान ठेकेदारों से होने वाले ‘‘फीलगुड‘‘ के चक्कर में अब तक न तो इनके ई-पिटपास पर रोक लगाई गई और न ही जिम्मेदार अफसरों ने मौके पर जाकर यह देखना उचित समझा कि खदान में रेत खत्म होने के बावजूद प्रतिदिन इतनी बड़ी मात्रा में रेत कहां से निकाली जा रही है। वहीं धरमपुर क्षेत्र में रूंज और बागे नदी पर एक भी खदान स्वीकृत न होने के बावजूद सत्ताधारी दल भाजपा के नेता, उनके परिजन और स्थानीय दबंगों ने रेत निकालने के लिए कई किलोमीटर में नदियों में खुदाई कर उन्हें खोखला कर दिया है। जिसका दुष्परिणाम यह है कि बड़े क्षेत्र में दोनों ही नदियां सूख चुकी है।

खुलेआम चल रहीं मशीनें-

स्वीकृत क्षेत्र के बाहर चल रहीं अधिकांश रेत खदानें।

मशीनों से रेत के उत्खनन पर एनजीटी की रोक के बावजूद प्रशासन, पुलिस और सत्ता का संरक्षण प्राप्त माफिया केन और उसकी सहायक नदियों की ज्यादा से ज्यादा रेत निकालने के लिए दैत्याकार मशीनों से इन नदियों का सीना ही नहीं बल्कि उनकी कोख भी छलनी कर रहे है। जमीनी हकीकत यह है कि केन नदी के जिगनी घाट में एक भी खदान स्वीकृत न होने के बावजूद वहां चंदौरा खदान ठेकेदार, स्थानीय दबंग, भाजपा संगठन से जुडे़ लोग रात-दिन जेसीबी-पोकलैण्ड मशीनें चलाकर रेत निकाल रहे है। चांदीपाठी खदान में भी दिनदहाड़े लिफ्टर और मशीनें चल रही है। जबकि अन्य खदानों बरकोला, रामनई, बरौली, खरौनी, उदयपुर, बाबा का पुरवा, फरस्वाहा, मझगांय, बीरा क्रमांक-02 और 01 में शाम ढलते ही नदी में मशीनें उतार दी जाती है।

कम हो रही जलधारण क्षमता-

एक ट्रक में बालू लोड करती जेसीबी मशीन।

शिवराज सरकार में मध्यप्रदेश में अवैध उत्खनन लगातार तेजी से बढ़ा है। विभिन्न सर्वेक्षणों के नतीजे इसका प्रमाण है। अब तो विपक्षी दलांे के नेता भी खुलकर शिवराज सरकार पर खेती के बजाय रेती को लाभ का धंधा बनाने का आरोप लगा रहे है। पन्ना जिले में हर तरफ मची खनिज सम्पदा की बेतहाशा लूट को देखते हुए यही प्रतीत हो रहा है कि शासन और प्रशासन ने माफियाओं को पूरी छूट दी रखी है। एक तरफ जहां खुलेआम अवैध पत्थर खदानें चल रही वहीं दूसरी ओर केन नदी से तकरीबन 20 स्थानों पर अवैध तरीके से रेत निकाली जा रही है। जिसका दुष्परिणाम यह है कि नदी की जलधारण क्षमता तेजी से कम हो रही है। केन नदी पर विस्तृत अध्ययन करने वाले सैनड्रप संस्था के भीम सिंह रावत व वेदितम संस्था के सिद्र्धाथ अग्रवाल ने अपनी रिपोर्ट में इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इन दोनों सामाजिक कार्यकर्ताओं की अध्यनरत रिपोर्ट बताती है कि मशीनों से पानी के अंदर की रेत निकाले जाने के कारण केन के जलीय जीव-जन्तु, वनस्पति तेजी से समाप्त हो रही है। इसका सीधा दुष्परिणाम नदी की जैविविधता पर पड़ रहा है। साथ ही केन नदी पर आश्रित मछुआरों और नदी किनारे खेती करने वाले किसानों की समस्यायें लगातार बढ़ रही है। इनका मानना है कि समय रहते केन को नहीं बचाया गया तो केन नदी भी अपनी सहायक नदियों की तरह बरसाती नदी बन सकती है।

न फोन उठाया न मैसेज का जबाब दिया-

केन नदी रेत के अवैध उत्खनन के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो उनके फोन रिसीव नहीं हुए और मैसेज का कोई जवाब नहीं मिला। पन्ना के जिला खनिज अधिकारी संतोष सिंह, कलेक्टर मनोज खत्री व सागर संभाग के कमिश्नर मनोहर दुबे को काॅल करने पर उनका मोबाईल रिसीव नहीं हुआ। वहीं कलेक्टर श्री खत्री को वाट्सएप्प पर जब मैसेज भेजा गया तो उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया। समझ नहीं आता कि जल संरक्षण और संवर्धन की बात करने वाले प्रशासनिक अधिकारी और सरकार के नुमाईंदे केन नदी साथ हो रहे अत्याचार पर खामोश क्यों है।

प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल हुआ दतिया – डॉ. मिश्र

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जनसम्पर्क एवं जल-संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दतिया में सिंधी समाज के अभिनंदन समारोह को संबोधित किया।

भोपाल। जनसम्पर्क एवं जल संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने कहा है कि दतिया अब प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल हो गया है। दतिया शांति का टापू बनकर उभरा है। दतिया में व्यापारियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं। मेडिकल कॉलेज, रेलवे ओवर ब्रिज, हवाई पट्टी से दतिया के चहुँमुखी विकास के द्वार खुले हैं। उन्होंने आज संतराम धाम, दतिया में आयोजित सिंधी समाज के सम्मेलन में यह बात कही।

          डॉ. मिश्र ने सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित सामाजिक समरसता कार्यक्रम में कहा कि आज सामाजिक समरसता पर विचार करने की जरूरत है। हमें निजी स्वार्थों से ऊपर उठकर काम करना होगा। सभी को निजी जीवन में भी सद्भावना को प्राथमिकता देना होगा। कार्यक्रम में सामाजिक समरसता में विशेष योगदान के लिए प्रभुदयाल अहिरवार सहित विभिन्न समाज-सेवियों को शॉल-श्रीफल से सम्मानित किया गया।