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पन्ना में एक और तेंदुए की संदिग्ध मौत | बरियारपुर डैम में मिला शव

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संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मादा तेंदुआ और उसके शव पर स्पष्ट नजर आता गहरा जख्म।

शरीर पर गहरा घाव होने से करंट लगाकर शिकार करने की आशंका

सरकोहा में जिस तेंदुए के अवशेष मिले थे उसका करंट लगाकर किया गया था शिकार

शिकार के मामले में एक आरोपी गिरफ्तार 3 अन्य की तलाश जारी

डीएफओ ने दो लापरवाह वनकर्मियों को तत्काल प्रभाव सेकिया निलंबित

पन्ना। रडार न्यूज  मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में बेजुबान वन्य जीवों के शिकार और संदिग्ध मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक वर्ष से भी कम समय में यहां के दोनों सामान्य वन मंडलों उत्तर और दक्षिण के अंतर्गत अब तक तीन तेंदुओं और एक भालू का शिकार हो चुका है। इसके अलावा एक हांथी और दो तेंदुओं की पानी में डूबने से संदिग्ध परिस्थितियों में असमय मौत होने का मामला प्रकाश में आया है। वहीं पन्ना टाईगर रिजर्व अंतर्गत रेडियो कॉलर वाली एक बाघिन शिकारियों का निशाना बन चुकी है। इसी क्रम में मंगलवार 24 जुलाई को जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में केन नदी पर बने बरियारपुर डैम में मंगलवार को एक मादा तेंदुए का शव मिलने से हड़कम्प मचा है। मादा तेंदुए के शरीर पर पिछले पैरों के पास एक गहरा घाव होने से यह अंदेशा जताया जा रहा है कि इसकी मौत भी करंट लगने से हुई है। हलांकि उक्त तेंदुआ पानी में बहकर यहां तक कैसे पहुंचा इसका अभी पता नहीं चल पाया है। सूचना मिलने पर अजयगढ़ रेंजर अजय वाजपेयी हमराही वन अमले के साथ बरियारपुर डैम पहुंचे। जहां उत्तरप्रदेश की ओर जाने वाली नहर के गेट के पास पानी में जमा कचरे के बीच मृत तेंदुए का शव तैर रहा था। वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देकर उसे पानी से बाहर निकाला गया और पंचनामा आदि कार्रवाई के बाद पन्ना लाकर पोस्टमार्टम के लिए स्मृति वन में सुरक्षित रखवाया गया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगा मौत का खुलासा
डैम के पानी में कचरे के बीच तैरता मादा तेंदुआ का शव।

युवा मादा तेंदुए के शव की स्थिति और उससे उठ रही दुर्गंध के मद्देनजर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि तेंदुए की मौत 2-3 दिन पूर्व हुई है। उत्तर वन मंडल पन्ना के डीएफओ नरेश सिंह यादव ने बताया कि डैम में जिस स्थान पर तेंदुआ मृत पाया गया वहां से उत्तर वन मंडल की अजयगढ़ रेंज की बरियारपुर बीट 5 किलोमीटर और पन्ना टाईगर रिज़र्व की कुड़ई बीट महज 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आपका कहना है कि तेंदुए का शव देखने पर प्रथम दृष्ट्या ऐसा लगता है कि शिकार नहीं हुआ क्योंकि उसके सभी अंग सुरक्षित हैं। जहां तक जख्म के निशान का सवाल है वह पानी में बहने के दौरान किसी से टकराने या फिर कहीं फंसने के कारण भी हो सकता है।

पन्ना का बरियारपुर डैम।

डीएफओ श्री यादव के अनुसार तेंदुए की मौत कब और कैसे हुई आधिकारिक तौर पर इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने पर हो पायेगा। अभी थोड़ी ही देर बाद पन्ना टाईगर रिज़र्व के वन्य प्राणी चिकित्सक संजीव गुप्ता द्वार स्मृति वन पन्ना में तेंदुए का पोस्टमार्टम किया जायेगा। जिसके बाद मुख्य वन संरक्षक वृत्त छतरपुर की उपस्थिति में शव का वहीं पर दाह संस्कार किया जायेगा। गौरतलब है कि पन्ना जिले में पूर्व में शिकारियों और वन्य जीवों के अंगों की तस्करी करने वाले गिरोह के सक्रीय होने के खुलासे के बीच वन्य प्राणियों के शिकार व संदिग्ध मौत की घटनायें लगातार सामने आ रहीं हैं। अत्यंत ही चिंताजनक यह स्थिति इस बात का साफ संकेत है कि पन्ना जिले के सामान्य और संरक्षित वन क्षेत्रों में विचरण करने वाले बाघ-तेंदुआ और दूसरे वन्य जीव सुरक्षित नहीं हैं।

जंगली सुअर को मारने फैलाया था करंट शिकार बना तेंदुआ
मलबे से तेंदुए के अवशेष अलग करते वनकर्मी।

उत्तर वन मंडल पन्ना की विश्रामगंज रेंज की सरकोहा बीट अंतर्गत कुछ दिन पूर्व मिले तेंदुए के अवशेष का खुलासा करते हुए डीएफओ नरेश सिंह यादव ने बताया कि करीब डेढ़ माह पूर्व उक्त तेंदुए का करंट लगाकर शिकार किया गया था। इस मामले में मुख्य आरोपी करण सिंह यादव निवासी ग्राम कृष्णा कल्याणपुर को गिरफ्तार कर न्यालय में पेश किया गया जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल भेजा गया है। उक्त आरोपी ने पूंछतांछ में बताया कि जंगली सुअर के शिकार के लिए करण सिंह यादव व उसके तीन अन्य साथियों ने एक खेत में करंट फैलाया था किंतु उसकी चपेट में तेंदुआ आ गया। इस मामले वन विभाग की टीम तीन अन्य फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए उनकी तलाश में जुटी है। उल्लेखनीय है कि करंट मृत तेंदुए का शव सड़-गलकर कर चंद हड्डियों और जबड़े के अवशेष में तब्दील हो गया था लेकिन संबंधितों को डेढ़ माह तक इसकी भनक तक नहीं लगी। डीएफओ नरेश सिंह यादव ने इसे प्रथम दृष्टया दायित्वों के निर्वाहन में घोर लापरवाही मानते हुए बीट गार्ड सरकोहा भागी लाल पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। जबकि सर्किल प्रभारी रानीपुर राजकुमार तिवारी को नोटिस भेजकर जबाब मांगा है। तेंदुए के शिकार के इस गंभीर मामले में विश्रामगंज रेंजर और उप वन मंडलाधिकारी के विरुद्ध अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

चंदन के पेड़ों की कटाई मामले हुई कार्रवाई

चंदन का कटे हुए पेड़ का ठूंठ ।

अजयगढ़ में उत्तर वन मंडल के धरमपुर और अजयगढ़ वन परिक्षेत्र कार्यालय परिसर में स्थित नर्सरी से चंदन के चार पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में वनरक्षक मुकेश कुमार मिश्रा निलंबित किया गया है।इसके अलावा डिप्टी रेंजर जयकरण तिवारी को कारण बताओ नोटिस और स्थाईकर्मी सियाराम रजक को सेवाएं समाप्त करने का नोटिस भेजा गया है। उल्लेखनीय है कि तेंदुए के शिकार और चंदन के पेड़ों की कटाई की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के सामने आने से उत्तर वन मंडल पन्ना की काफी किरकिरी हुई है। साथ ही इससे वन और वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर मैदानी वन अमले द्वारा बरती जा रही घोर लापरवाही के चलते निर्मित अराजकतापूर्ण स्थिति और अफसरों के लचर प्रबंधन की पोल खुल गई है।

एएनएम हत्याकाण्ड : मासूम बेटे की गवाही से डॉक्टर पिता और ताऊ को आजीवन कारावास

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सांकेतिक फोटो।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पन्ना अनुराग दिवेदी ने सुनाया फैसला

दहेज की मांग को लेकर एक वर्ष पूर्व की गई थी एएनएम पूजा सिंह सेंगर की हत्या

पन्ना। रडार न्यूज मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ कस्बा में करीब एक वर्ष पूर्व हुई एएनएम पूजा सिंह की सनसनीखेज जघन्य हत्या के मामले में विचारण उपरांत अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पन्ना अनुराग दिवेदी ने मृतिका के आरोपी पति डॉक्टर राकेश सिंह सेंगर एवं जेठ रमेश सिंह सेंगर को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोनों अभियुक्तों को ढ़ाई-ढ़ाई हज़ार रुपये के अर्थदण्ड से भी दण्डित किया गया है। दहेज की मांग को लेकर पूजा की हत्या करने मामले आई विटनिस रहे उसके चार साल के मासूम बेटे आर्यन उर्फ राज सिंह द्वारा न्यालय में दी गई गवाही हत्यारोपी पिता और डॉक्टर राकेश सिंह सेंगर और ताऊ रमेश सिंह सेंगर को उनके गुनाह की सजा दिलाने में सबसे अधिक महत्वपूर्ण साबित हुई ।

हत्या के इस बहुचर्चित मामले में अभियोजन की ओर से पैरवी करने वाले जिला लोक अभियोजन अधिकारी पन्ना प्रवीण कुमार सिंह ने न्यालय द्वारा पारित निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि 18 मई 2017 को राकेश सिंह सेंगर पिता लाल बहादुर सेंगर निवासी कीरतपुर थाना धरमपुर हाल निवासी अजयगढ़ ने स्थानीय थाना पुलिस को सूचना दी थी कि उसकी पत्नि पूजा सिंह सेंगर ने फांसी लगा ली है, जिससे उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस द्वारा की गई जांच के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतिका के शरीर में चोटें होने, पूजा को विवाह के बाद से ही पति और ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ित करने संबंधी मायके पक्ष के लोगों द्वारा दी गई जानकारी, घटना के साक्ष्य व मृतिका के चार वर्षीय पुत्र द्वारा बताए गये घटनाक्रम के आधार पर पुलिस ने आरोपी राकेश सिंह सेंगर एवं उसके बड़े भाई रमेश सिंह सेंगर के विरूद्ध दहेज प्रताड़ना व हत्या का मामला पंजीबद्ध किया गया था।

मम्मा को पहले पीटा फिर रस्सी से लटका दिया

प्रकरण की विवेचना उपरांत इसे विचारण हेतु न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अपराध की प्रकृति को देखते इसे जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरण के रूप में चिन्हित किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय में अभियोजन की ओर से महत्पूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत किए गये। साथ ही साक्षियों के कथन कराये गये। इस घटना के आई विटनिस मृतिका पूजा सिंह सेंगर के चार साल के मासूम बेटे आर्यन उर्फ राज सिंह ने अपने कथनों में बड़ी ही निर्दोषिता के साथ न्यालय को बताया कि- “मम्मा को पापा ने चप्पल और वाइपर से पीटा और फिर ताऊ जी ने उन्हें रस्सी से लटका दिया। मासूम ने बताया कि जिस समय उसकी मां के साथ यह क्रूरता हो रही थी उस समय मैं उसी कमरे में सोफे पर बैठा रोते हुए सबकुछ देख रहा था।” मासूम बच्चे की अहम गवाही और मृतिका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पन्ना अनुराग दिवेदी ने अभियोजन के प्रकरण को युक्तियुक्त संदेह से परे मानते हुए पूजा सिंह की हत्या के आरोप में उसके दहेज लोभी पति डॉक्टर राकेश सिंह सेंगर एवं जेठ रमेश सिंह सेंगर को दोषी माना है।

इन धाराओं में हुई सजा

न्यालय ने अभियुक्त डॉक्टर राकेश सिंह सेंगर पिता लाल बहादुर सेंगर 36 वर्ष व उसके बड़े भाई रमेश सिंह सेंगर पिता लाल बहादुर सेंगर 45 वर्ष दोनों निवासी ग्राम कीरतपुर थाना धरमपरु हाल निवासी चौबियाना मोहल्ला अजयगढ़ जिला पन्ना को धारा 302, 34 भादवि में अजीवन कारावास एवं 1 हजार रुपये के अर्थदण्ड, धारा 498ए में 3 वर्ष का कारावास व एक हजार रुपये के अर्थदण्ड के साथ साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत 2 वर्ष के कारावास व 500 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है।

केन्द्र के सहयोग से मध्यप्रदेश अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल : शिवराज सिंह

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुना में विकास पर्व एवं किसान महासम्मेलन को संबोधित किया।

चम्बल एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य इसी वर्ष शुरू होगा :  गडकरी

 5130 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण 

मुख्यमंत्री ने किसानों के खातों में ट्रांसफर किये फसल बीमा योजना के 43.90 करोड़

भोपाल। रडार न्यूज  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को गुना में विकास पर्व एवं किसान महा-सम्मेलन में 5 हजार 130 करोड़ की लागत के विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने फसल बीमा योजना में किसानों के बैंक खातों में 43 करोड़ 90 लाख की बीमा राशि ऑनलाईन ट्रांसफर की। कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के 43 हजार 882 हितग्राहियों को हित-लाभ भी वितरित किये गये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि केन्द्र सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश अब बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर निकलकर देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है। केन्द्र द्वारा प्रदेश को सड़कों के निर्माण के लिये 13 हजार 500 करोड़ रूपये की राशि दी गई, जिससे प्रदेश में बेहतर सड़कों का निर्माण संभव हो सका है। मुख्यमंत्री जन-कल्याण (संबल) योजना के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कृषि को लाभ का धंधा बनाने तथा कृषि उत्पादन दोगुना करने के संकल्प को प्रदेश में पूरा करने के लिये सभी संभव प्रयास किये जा रहे हैं।

देश में 100 नये राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुना में विकास पर्व एवं किसान महासम्मेलन को संबोधित किया।

केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि ग्वालियर क्षेत्र के चम्बल एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य इसी वर्ष शीघ्र शुरू किया जायेगा। इसके लिये जमीन अधिग्रहण का कार्य शुरू हो गया है। इसके बन जाने से अंचल के लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे, उद्योग धंधे विकसित होंगे तथा आवागमन के लिये एक नया मार्ग मिलेगा। उन्होंने बताया कि दिल्ली और मुम्बई के बीच एक नये हाई-वे का निर्माण किया जा रहा है। जिस पर एक लाख करोड़ रूपये की राशि व्यय होगी। यह हाई-वे राजस्थान, मध्यप्रदेश्, गुजरात, महाराष्ट्र राज्यों से गुजरेगा। इस हाई-वे में मध्यप्रदेश की 250 किलोमीटर की सड़क शामिल है। यह हाई-वे भी प्रदेश के विकास में सहायक होगा। श्री गडकरी ने बताया कि केन-बेतवा-लिंक नदी प्रोजेक्ट के पानी के बँटवारे के संबंध में शीघ्र ही समाधानकारक निराकरण किया जायेगा। केन्द्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि देश में 100 नये राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य शुरू किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री चौहान और केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी को समारोह में एनआरएलएम के स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित सामग्री भेंट की गई। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों ने संबल योजना के क्रियान्वयन के लिये मुख्यमंत्री को आभार-पत्र भेंट किया। गुना अभिभाषक संघ द्वारा भी प्रदेश में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट के लिये मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया गया। समारोह में लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह, जिले के प्रभारी मंत्री जयभान सिंह पवैया, सांसद रोडमल नागर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अर्चना चौहान, विधायक पन्नालाल शाक्य और सुश्री ममता मीना, अन्य जन-प्रतिनिधि और विशाल जन-समुदाय मौजूद था।

प्रतिभाशाली दिव्यांग छात्र-छात्राओं को भी मिलेंगे लेपटॉप

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सांकेतिक फोटो।

नि:शक्तजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना से एक हजार दिव्यांग छात्र-छात्राएँ होंगे लाभान्वित 

भोपाल। रडार न्यूज    मुख्यमंत्री नि:शक्तजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत दिव्यांग छात्र-छात्राओं को भी लेपटॉप और ट्रायसाइकिल प्रदान की जाएगी। इस योजना में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक के साथ 9वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले दिव्यांग छात्र-छात्राएँ लाभान्वित होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  गोपाल भार्गव ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना से लगभग एक हजार दिव्यांग छात्र-छात्राएँ लाभान्वित होंगे। पंचायत एवं सामाजिक न्याय विभाग द्वारा संचालित इस योजना में 9वीं परीक्षा में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त और 10वीं कक्षा अथवा आई.टी.आई. में प्रवेश लिये दृष्टि बाधित, श्रवण बाधित, अस्थि बाधित तथा मंद बुद्धि छात्र-छात्राएँ लाभान्वित होंगे। आई.टी.आई. में प्रवेश लेने पर उन्हीं दिव्यांग छात्र-छात्राओं को लेपटॉप प्रदान किया जाएगा, जिनके द्वारा कम्प्यूटर ऑपरेटर, प्रोग्रामिंग असिस्टेंट अथवा कम्प्यूटर आधारित कोर्स में प्रवेश लिया गया है।

इसी क्रम में ऐसे अस्थि-बाधित छात्र-छात्राओं को मोटर ट्रायसाइकिल प्रदान की जायेगी, जिन्होने 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है और स्नातक पाठयक्रम प्रवेश ले रहे है और जिनका कमर के नीचे का 60 प्रतिशत अथवा अधिक भाग प्रभावित है। इस योजना में स्पष्ट किया गया है कि लाभार्थी को यह सुविधा एक बार प्रवेश के अवसर पर ही प्रदान की जाएगी।

बहेलियों की बस्ती के पास तेंदुए की हड्डियां और जबड़ा मिला | फॉरेंसिक जांच से खुलेगा मौत का राज

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मलबे से तेंदुए के अवशेष अलग करते वनकर्मी।

पन्ना के उत्तर वन मंडल की घटना, शिकार होने की क्षेत्र में है चर्चा

वन्य प्राणी चिकित्सक के अनुसार एक से डेढ़ माह पूर्व हुई तेंदुए की मौत 

डीएफओ ने लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दिये संकेत

पन्ना। रडार न्यूज  बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम की ऐतिहासिक सफलता से पूरी दुनिया में विख्यात हुए मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में बड़ी बिल्लियों(बाघ-तेंदुआ) समेत दूसरे वन्य जीवों के शिकार की चिंताजनक घटनाएं लगातार सामने आ रहीं है। यहां हाल ही में भालू के शिकार से संबंधित एक प्रकरण में शिकारियों और वन्य जीवों के अंगों की तस्करी करने वाले गिरोह के सक्रिय होने के सुराग मिले हैं। इन हालात में पन्ना के बाघों और दूसरे वन्यजीवों पर मंडराते गंभीर खतरे के बीच जंगल से एक और बुरी खबर आई है। उत्तर वन मण्डल पन्ना की विश्रामगंज रेंज के अंतर्गत तेंदुए की हड्डियां जबड़ा और नाखून मिले है। जिला मुख्यालय पन्ना से करीब 10 किलोमीटर दूर रानीपुर सर्किल की सरकोहा बीट में जिस स्थान पर तेंदुए के अवशेष पाये गये वहां पास में ही बहेलियों की बस्ती स्थित है। वन्यप्राणी चिकित्सक डॉक्टर एस.के. गुप्ता ने तेंदुए की मौत करीब एक से डेढ़ माह पूर्व होने का अंदेशा जताया है। तेंदुए का शिकार हुआ या फिर उसकी स्वभाविक मौत हुई है, इसका पता लगाने के लिए अवशेषों को जांच हेतु वेटनरी यूनिवर्सटी जबलपुर की फॉरेंसिक लैब भेजा जा रहा है। वहां से रिपोर्ट आने पर तेंदुए की मौत के वास्तिविक कारणों का अधिकारिकतौर पर पता चल पायेगा। उधर तेंदुए के अवशेष बरामद होने के बाद से ही उसका शिकार होने की चर्चायें क्षेत्र में व्याप्त है। तेंदुए की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का हैरान करने वाला यह मामला शुक्रवार 21 जुलाई 2018 को ऐसे समय प्रकाश में आया है जब आरके गुप्ता, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक भोपाल और राघवेन्द्र श्रीवास्वत, मुख्य वन संरक्षक छतरपुर वृत्त पन्ना जिले के दौरे पर है। दोनों ही वरिष्ठ अधिकारियों ने पन्ना में बढ़ती शिकार की घटनाओं पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए तत्परता से इनकी प्रभावी रोकथाम के लिए आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं।

मैदानी वन अमले को नहीं लगी भनक-

जंगल में गुफा के अंदर से तेंदुए के अवशेष अलग करते वनकर्मी।

तेंदुए की संदिग्ध मौत की खबर सबसे पहले पन्ना टाईगर रिज़र्व के अधिकारियों को मिली थी। सरकोहा बीट अंतर्गत जिस स्थान पर अवशेष पाए गए दरअसल वह उत्तर वन मंडल का क्षेत्र है इसलिए सबंधित अधिकारियों को कार्रवाई हेतु सूचित किया गया। शुक्रवार को नरेन्द्र सिंह परिहार, उप वन मंडलाधिकारी विश्रामगंज और रेंजर मनोज सिंह बघेल मौके पर पहुंचे तो जंगल में दो चट्टानों के बीच छोटी सी गुफानुमा गड्ढे से अज्ञात वन्य जीव की कुछ हड्डियां, जबड़ा और नाखून बरामद हुए। पन्ना टाईगर रिज़र्व के वन्य प्राणी चिकित्सक एस. के. गुप्ता ने उक्त अवशेष तेंदुए के होना बताया है। तेंदुए की मौत करीब एक से डेढ़ माह पूर्व होने के कारण उसका शरीर गलकर मिट्टी में मिलने की संभावना जताई जा रही है। उत्तर वन मण्डल के डीएफओ नरेश सिंह यादव ने तेंदुए की मौत की घटना को अत्यंत ही गंभीरता से लिया है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में स्वीकार किया कि प्रथम दृष्टया मैदानी वन अमले द्वारा घोर लापरवाही बरती गई। तेंदुए की मौत को एक से डेढ़ माह होने के बाद भी संबधित बीट गार्ड, सर्किल प्रभारी और रेंजर को इसकी भनक तक नहीं लगी। इससे स्पष्ट है कि मैदानी अमले द्वारा अपने क्षेत्र का भ्रमण नहीं किया गया है। श्री यादव ने इस मामले में लापरवाह कर्मचारियों-अधिकारियों के खिलाफ शीघ्र ही सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। उन्होंने रडार न्यूज़ से चर्चा में कहा कि वनों और वन्य जीवों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसमें किसी भी तरह की लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुखबिर तंत्र को किया सक्रिय-

सांकेतिक फोटो।

तेंदुए की संदिग्ध मौत के खुलासे को लेकर मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया है ताकि फॉरेंसिक लैब से जांच रिपोर्ट आने तक वास्तविकता का पता लगाया जा सके। घटनास्थल से करीब 3-4 किलोमीटर की दूरी पर गांधी ग्राम में बहेलियों की बस्ती स्थित होने के मद्देनजर उत्तर वन मण्डल के डीएफओ नरेश सिंह यादव ने तेंदुए के शिकार की संभावना से इंकार नहीं किया है। कई वर्षों तक प्रदेश स्तर पर एंटी पोचिंग स्क्वॉड में सेवायें दे चुके डीएफओ श्री यादव ने इस मामले चुनौती के रूप में लिया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा यदि तेंदुए का शिकार होना पाया गया तो इस मामले का जल्द से जल्द खुलासा करते हुए शिकारियों को जेल पहुंचाया जायेगा। मालूम होकि पिछले 7-8 माह के अंदर पन्ना जिले के संरक्षित व सामान्य वन क्षेत्रों में दो तेंदुओं, एक कॉलर वाली युवा बाघिन और भालू का शिकार हो चुका है। इन घटनाओं से बेजुबान निरीह वन्य प्राणियों पर आसन्न गंभीर खतरे और उससे बेपरवाह वन विभाग में व्याप्त अराजकता पूर्ण स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। शिकारियों और वन्यजीवों के अंगों की तस्करी करने वाले गिरोहों के का नेटवर्क फैलने से हालात इतने ख़राब हो चुके हैं यदि शीघ्र ही संयुक्त रूप से ठोस प्रयास नहीं किये गए तो पन्ना के उत्तर-दक्षिण वन मंडल व टाईगर रिज़र्व में विचरण करने वाले बाघों-तेंदुओं को ज्यादा दिनों तक बचा पाना संभव नहीं होगा।

शिकारियों और तस्करों के निशाने पर पन्ना के बाघ व दूसरे वन्य जीव !

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फाइल फोटो।

भालू के शिकार की घटना से हुआ चौंकाने वाला खुलासा

तस्कर को बेंचने के लिए शिकारी ने छिपा रखा था भालू का सेक्सुअल पार्ट

पन्ना टाईगर रिज़र्व और समान्य वन क्षेत्र में सुरक्षित नहीं बेजुबान वन्य प्राणी

लगातार चिंताजनक तेजी से बढ़ रहीं हैं शिकार की घटनायें

पन्ना। रडार न्यूज़   मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में दक्षिण वन मंडल की पवई रेंज अंतर्गत करीब डेढ़ माह पूर्व शिकार हुए नर भालू का प्राइवेट पार्ट (जननांग) पॉलीथीन में लिपटा हुआ बरामद किया गया है। वन विभाग की टीम ने शिकारपुरा ग्राम में जिस स्थान से भालू के शरीर के महत्वपूर्ण अवशेष बरामद किये है, वह शिकार के आरोप में पवई जेल में बंद जाहर सिंह आदिवासी के घर के ठीक पीछे स्थित है। शिकार के इस मामले में अब तक हुए हैरान करने वाले खुलासों और सभी कड़ियों को आपस में जोड़कर देखने से यह स्पष्ट है कि पन्ना जिले में वन्यजीवों के शिकार और उनके अंगों की तस्करी का गोरखधंधा चल रहा है। जिसका पता वन विभाग को अब जाकर चला। जानकारी अनुसार मंगलवार को आरोपी जाहर सिंह आदिवासी की पत्नी अंजू आदिवासी उससे मिलने जेल गयी थी, इस दौरान दौरान जाहर ने उसे घर के पास बांस के पेड़ में भालू के कुछ अवशेष छिपाकर रखने की बात बताई। अंजू ने वापिस घर पहुंचकर जब बांस के झाड़ के पास जाकर देखा तो वहां एक पॉलथीन छिपी हुई पाई गई। उसने इसकी जानकारी गांव के लोगों को दी। इस बीच शिकार हुए भालू के गायब अन्य अवशेषों का सुराग लगाने में जुटी वन विभाग को जब यह खबर मिली तो पवई रेंजर शिशुपाल अहिरवार के नेतृत्व में डॉग स्कवॉड के साथ शिकारपुरा पहुंची टीम ने जाहर सिंह के घर के समीप लगे बांस भिर्रा में छिपाकर रखी गई संदिग्ध पॉलीथीन को अपने कब्जे में लिया। जब उसे खोला गया तो उसके अंदर से भालू का सेक्सुअल पार्ट और बाल बरामद हुए।

करंट लगाकर शिकार किये गए भालू का शव।

                   उल्लेखनीय है कि 30 मई 2018 को पवई रेंज की शिकारपुरा बीट में भालू एवं तेंदुए का करंट लगाकर शिकार किये जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया था। उस समय रेंजर से लेकर अधीनस्थ वन कर्मचारी प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। कुछ दिनों बाद हड़ताल समाप्त होने पर काम पर लौटे पवई रेंजर शिशुपाल अहिरवार द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में तत्परता से कार्रवाई करते शिकार के इन चुनौतीपूर्ण मामलों का खुलासा किया गया। पिछले माह तेंदुऐ के शिकार मामले में शिकारपुरा ग्राम के तीन आरोपियों को पकड़ा गया था। वहीं कुछ दिन पूर्व भालू के शिकार के मामले में जाहर सिंह आदिवासी समेत अब तक तीन आरोपियों से जबड़ा एवं पंजा जप्त कर इन्हें भी जेल भेजा जा चुका है।

दवा बनाने में होता है उपयोग-

बांस भिर्रा में छिपाकर रखी गई पॉलीथीन को निकालते वन कर्मचारी।

वन्य जीवों की कई प्रजातियां आज संकटग्रस्त हैं, जिनके विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। इसके पीछे वैसे तो कई कारण जिनमें अवैध व्यापार के उद्द्देश्य से किये जाने वाले शिकार के कारण भी कई वन्य प्राणियों का अस्तित्व संकट में है। वन्य जीवों के अंगों का व्यापार करने वाले अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिलने वाली ऊंची कीमत के कारण अवैध शिकार के लिए प्रेरित हो रहे हैं। दरअसल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वन्य जीवों के अंगों की जबरदस्त मांग है। जानकारों की मानें तो हाथी, बाघ, शेर, तेंदुआ, पेंगोलिन, भालू, सर्प आदि वन्य जीवों की खाल व दांतों का उपयोग सजावट, चमड़ा और गहने बनाने में किया जाता है। जबकि इनकी हड्डियां और जननांगों का उपयोग कई गंभीर बीमारियों और कामोत्तेजक शक्ति बढ़ाने की परम्परागत दवाएं बनाने में किया जाता है।

                          कई अध्ययनों से यह पता चला है कि भारत में वन्य जीवों के अंगों का इस्तेमाल रूहानी (तंत्र-मंत्र) मकसद से भी किया जाता है।अंधविश्वास के चलते कुछ लोग अपनी खुशकिस्मती या गुड लक लाने के लिए वन्य जीवों के अंगों की बनी ताबीज और अंगूठी भी पहनते हैं अथवा उनके अंगों को घर में रखते हैं। भालू के शिकार की घटना पर गौर करें तो शातिर शिकारी जाहर सिंह आदिवासी और उसके साथियों ने जिस तरह भालू के महत्वपूर्ण अंगो को मृत शरीर से अलग करके आपस में बांट लिया था उससे अंगों के अवैध व्यापर की आशंका को बल मिल रहा है। वन विभाग की जांच भी इसी दिशा में चल रही है। सूत्र बताते हैं कि इस मामले की यदि गहन जांच-पड़ताल की जाये तो सम्भवतः वन्य जीवों के अंगो की तस्करी करने वाले बड़े गिरोह का खुलासा हो सकता है।

कहीं फिर ना उजड़ जाये बाघों का संसार-

सांकेतिक फोटो।

शिकार के चलते वर्ष 2008 में पन्ना टाईगर रिजर्व पूर्णतः बाघ विहीन हो गया था। यहां पुनः बाघों को आबाद करने के लिए पुनर्स्थापना कार्यक्रम चलाया गया। जिसकी ऐतिहासिक सफलता के फलस्वरूप आज यहां बाघों का भरा पूरा संसार आबाद हो चुका है। वर्तमान में इनकी संख्या करीब 35 तक बताई जा रही है। पन्ना जिले में पिछले 7-8 महीने पूर्व टाईगर रिजर्व की गहरीघाट रेंज अंतर्गत फंदा लगाकर एक युवा बाघिन का शिकार किया गया और सामान्य वन मंडल दक्षिण में 3 तेंदुओं की मौत हुई जिनमें दो का शिकार पवई रेंज अंतर्गत क्लच वायर का फंदा लगाकर और जलस्रोत के समीप करंट बिछाकर किया गया था। पवई रेंज की शिकारपुरा बीट में 30 मई 2018 को तेंदुए के साथ ही भालू का शिकार होने का मामला प्रकाश में आया था।

मड़ला स्थित पन्ना टाईगर रिजर्व का प्रवेश द्वार।

भालू के मृत शरीर से जिस तरह उसके महत्वपूर्ण अंगों को निकालने के बाद शिकारियों ने आपस में बंटवारा कर उन्हें छिपाकर रखा उससे यह संकेत मिले हैं कि मौका पाकर वे उन्हें बेंचने की फ़िराक में थे। प्रकरण जांच में होने के कारण दक्षिण वन मंडल के अधिकारी इस संबंध में फिलहाल खुलकर कुछ भी बताने से कतरा रहे हैं पर दबी जुबान वे वन्य जीवों के अंगों की तस्करी को स्वीकार कर रहे हैं। इससे साफ जाहिर है कि पन्ना जिले में शिकारियों और वन्य जीवों के अंगों का अवैध व्यापार करने वाले तस्कर गिरोह पुनः सक्रिय हो गए हैं।

लगातार सामने आईं शिकार की घटनाएं इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि पन्ना जिले में बेजुबान और निरीह वन्य प्राणियों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यहां पर कड़ी सुरक्षा और चौबीस घंटे निगरानी वाले टाईगर रिज़र्व में रेडियो कॉलर वाले बाघ ही जब शिकार बन रहे हैं तो सामान्य वन क्षेत्रों में विचरण करने वाले वन्य जीव कितने महफूज हैं, इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। चिंताजनक बात यह है कि यदि शीघ्र संकटग्रस्त वन्य जीवों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध करने के साथ शिकारियों और तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त नहीं किया गया तो वर्तमान हालत को देखते हुए यह कहना अतिश्योक्तिपूर्ण ना होगा पन्ना टाईगर रिज़र्व एक बार फिर बाघ विहीन हो सकता है।

इनका कहना है-

पन्ना टाईगर रिज़र्व सहित सामान्य वन मंडलों में मौजूदा समय बेहद लचर प्रबंधन, जबाबदेही के अभाव और वन्य प्राणियों सहित वन संपदा की सुरक्षा को लेकर बरती जा रही घोर लापरवाही के दुष्परिणाम लगातार सामने आरहे हैं। इस स्थिति में यदि तत्काल आवश्यक सुधार नहीं किया गया तो निश्चित ही पन्ना के बाघों और दूसरे वन्य जीवों को बचा पाना संभव नहीं होगा। क्योंकि पन्ना जिले में पिछले एक साल से कई शिकारी गिरोह सक्रिय हैं। मैं यह दावे के साथ कह रहा हूं यदि पन्ना के बाघों और दूसरे वन्य जीवों की पूरी ईमानदारी के साथ और पारदर्शी तरीके से गणना कराई जाये तो कई बाघ गायब मिलेंगे।
                                   – राजेश दीक्षित, प्रतिनिधि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण।

 

सतना में 287 करोड़ 75 लाख की लागत से बनेगा मेडिकल कॉलेज

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सतना में मेडिकल कॉलेज का भूमि-पूजन किया।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चौहान ने रखी आधार-शिला

सतना। रडार न्यूज़ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि आने वाले कुछ साल में सतना के स्वरूप को बदलकर अत्याधुनिक रूप दिया जाएगा। सतना को आगे बढ़ाने और विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह बात बी.टी.आई. मैदान, सतना में मेडिकल कॉलेज और नल-जल योजनाओं के शिलान्यास समारोह में कही। मेडिकल कॉलेज और 750 बिस्तरीय अस्पताल भवन की लागत 287 करोड़ 75 लाख है। मुख्यमंत्री ने तीन नल-जल योजनाओं का शिलान्यास किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सतना के विकास में मेडिकल कॉलेज मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी 75 प्रतिशत अंक लायेंगे, मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलने पर उनकी फीस सरकार भरेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज सह 750 बिस्तरीय अस्पताल में चौबीस घंटे इमरजेंसी सेवाएँ मिलेंगी। इसमें 10 आपरेशन थियेटर होंगे। यहाँ 100 व्यक्तियों के ठहरने के लिए धर्मशाला भी बनाई जाएगी।

सतना के औधोगिक विकास पर पौने 17 करोड़ खर्च होंगे
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सतना में मेडिकल कॉलेज का भूमि-पूजन समारोह को संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सतना के औद्योगिक विकास के लिए 16 करोड़ 74 लाख की राशि खर्च की जाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले चार साल में गरीबों को झुग्गी-झोपड़ी से मुक्ति दिलाकर उन्हें पक्के मकान बनाकर दिए जायेंगे। श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार गरीबों के जीवन में उजाला लाने का प्रयास कर रही है। गरीबों के बिजली के बिलों की भरपाई राज्य सरकार करेगी और उनको हर माह 200 रूपये फ्लैट रेट पर बिजली देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने पहले मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य से विकासशील राज्य बनाया, उसके बाद विकसित राज्य बनाया और अब मध्यप्रदेश को समृद्ध राज्य बनाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों एवं मीसाबंदियों का सम्मान किया।

सांसद गणेश सिंह और अन्य जन-प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य प्रभात झा, विधायक शंकरलाल तिवारी, महापौर श्रीमती ममता पाण्डेय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुधा सिंह सहित अन्य जन-प्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित थे।

 35 लाख 56 हजार आवासहीनों को मिले भू-खण्ड पट्टे

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सांकेतिक फोटो।
 भोपाल। रडार न्यूज़     राज्य शासन द्वारा आवासहीन व्यक्तियों को आवास के लिये भू-खण्ड उपलब्ध कराने के लिये चलाये जा रहे भू-खण्ड अधिकार में 17 जुलाई तक 35 लाख 56 हजार 45 भूमिहीन व्यक्तियों को आवास के लिये भू-खण्ड दिये जा चुके हैं। राज्य शासन द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि यदि किसी व्यक्ति ने 31 दिसम्बर, 2014 के पहले निवास और उसके अनुषांगिक प्रयोजन के लिये भवन का निर्माण कर लिया है, तो वह जमीन उसे आवंटित कर दी जायेगी। इस संबंध में अधिनियमों में जरूरी संशोधन किये जा चुके हैं। यह आवासीय भू-खण्ड आबादी क्षेत्र में, घोषित आबादी में, दखलरहित भूमि में व्यवस्थापन, वास-स्थान दखलकार अधिनियम और नगरीय क्षेत्रों में पट्टाधृति अधिकार के अंतर्गत दिये गये हैं।

राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने जानकारी दी है कि एक जनवरी 2018 के बाद जिला श्योपुर में 1510, मुरैना में 301, भिण्ड में 49 हजार 850, शिवपुरी में 46 हजार 372, गुना में 6284, अशोकनगर में 13 हजार 191, दतिया में 2200, देवास में 34 हजार 83, रतलाम में 12 हजार 718, शाजापुर में 38 हजार 637, आगर में 12 हजार 668, मंदसौर में 23 हजार 417, नीमच में 39 हजार 875, उज्जैन में 24 हजार 992, इंदौर में 1065, धार में 5566, झाबुआ में 2290, खरगोन में 84 हजार 293, बड़वानी में 12 हजार 427, बुरहानपुर में 6805 और अलीराजपुर में 1247 व्यक्ति को आवासीय पट्टे वितरित किये जा चुके हैं।

इसी तरह जिला भोपाल में 8 हजार 441, सीहोर में 9 हजार 329, रायसेन में 59 हजार 956, राजगढ़ में 60 हजार 352, विदिशा में 50 हजार 730, बैतूल में 5 हजार 137, होशंगाबाद में 446, हरदा में 21 हजार 964, सागर में 8 हजार 230, दमोह में एक लाख 33 हजार 28, छतरपुर में 3029, टीकमगढ़ में 609, पन्ना में 1259, जबलपुर में 6 हजार 620, कटनी में 3 हजार 450, नरसिंहपुर में 49 हजार 972, छिन्दवाड़ा में 4 हजार 818, मण्डला में एक हजार 699, डिण्डोरी में 14 हजार 531, सिवनी में 5 हजार 987, बालाघाट में 2 हजार 820, रीवा में 9 हजार 452, सिंगरौली में एक हजार 185, सीधी में 14 हजार 931, सतना में 7 हजार 746, शहडोल में 4 हजार 711, अनूपपुर में 358 और उमरिया में 16 हजार 298 भूमिहीन व्यक्तियों को आवासीय भूमि के पट्टे वितरित किये गये हैं। शेष 7 लाख 99 हजार 700 आवासहीनों को पट्टे देने की कार्यवाही जारी है। उल्लेखनीय है कि भू-खण्ड अधिकार अभियान के अंतर्गत एक जनवरी, 2018 के पहले 26 लाख 63 हजार 935 और एक जनवरी, 2018 के बाद 8 लाख 92 हजार 110 भू-खण्ड के पट्टे आवास के लिये पात्र भूमिहीन व्यक्तियों को वितरित किये जा चुके हैं।

एनएमडीसी लिमिटेड हीरा खनन परियोजना को मिला “अवार्ड ऑफ एक्सलेन्स”

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हीरा खनन परियोजना प्रबंधक राजीव शर्मा को प्रशस्ति पत्र और मेमेंटों सौंपते उप महाप्रबंधक कार्मिक बी. के. माधव एवं वरिष्ठ प्रबंधक खनन संजय कुमार।

अधिकतम संख्या में अप्रेंटिस नियोजित करने के लिए किया गया सम्मानित

पन्ना। रडार न्यूज  उज्जवल किस्म के हीरों के उत्पादन के लिए दुनियाभर में विख्यात पन्ना जिले के मझगवां कस्बा में स्थित एनएमडीसी लिमिटेड की हीरा खनन परियोजन से एक अच्छी खबर आई है। “विश्व युवा कौशल दिवस” के अवसर पर अधिकतम संख्या में अप्रेंटिस नियोजित करने के लिए मध्य प्रदेश शासन द्वारा एनएमडीसी लिमिटेड, हीरा खनन परियोजन को “अवार्ड ऑफ एक्सलेन्स” प्रदान कर सम्मानित किया गया है । कौशल विकास निदेशालय के अंतर्गत तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग द्वारा 15 जुलाई 2018 को भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में परियोजना को यह सम्मान प्रदान किया गया । हीरा खनन परियोजना की ओर से यह पुरस्कार संजय कुमार वरिष्ठ प्रबंधक, खनन ने ग्रहण किया ।

मंगलवार 17 जुलाई 2018 को उप महाप्रबंधक कार्मिक बी. के. माधव एवं वरिष्ठ प्रबंधक खनन संजय कुमार ने हीरा खनन परियोजना प्रबंधक राजीव शर्मा को प्रशस्ति पत्र और मेमेंटों प्रस्तुत किया । इस अवसर पर परियोजना प्रबंधक एवं उप महाप्रबंधक कार्मिक ने इस सम्मान के लिए राज्य प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्राचार्य आईटीआई पन्ना को धन्यवाद ज्ञापित किया है ।

“विश्व युवा कौशल दिवस” के अवसर पर कौशल विकास एवं रोजगार विभाग द्वारा भोपाल में आयोजित कार्यक्रम का फोटो।

उल्लेखनीय है कि हीरक जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुकी एनएमडीसी लिमिटेड की हीरा खनन परियोजना सदैव ही क्षेत्र में सामुदायिक विकास हेतु ईमानदार और सार्थक प्रयास करती रही है। नैगम सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत परियोजना निकटवर्ती ग्रामीनजनों को शिक्षा, स्वास्थ्य,परिवहन, पेयजलए युवाओं के कौशल विकास जैसी जीवनपयोगी मूलभूत सेवाएं प्रदान कर रही है। अप्रेंटिस एक्ट 1961 के अंतर्गत एनएमडीसी लिमिटेड विविध तकनीकी एवं गैर तकनीकी शिक्षण क्षेत्र में युवाओं को व्यवहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती आई है और भविष्य में भी सतत रूप से अवसर प्रदान करती रहेगी ।

आईटीआई या पॉलिटेक्निक कॉलेज से डिप्लोमा प्राप्त करने वाले तकनीकी एवं गैर तकनीकी शिक्षण क्षेत्र में युवाओं को अप्रेंटिसशिप के माध्यम से एनएमडीसी लिमिटेड, हीरा खनन परियोजना द्वारा अच्छे माहौल में व्यवहारिक कार्य अनुभव प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया जाता है। इससे युवाओं का कौशल उन्नयन होने से उनकी कार्यकुशलता और कार्यक्षमता बढ़ती है।

नर्मदा मैया बदलेगी सीहोर जिले के सिंचाई से वंचित क्षेत्र की तस्वीर

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आष्टा जिला सीहोर में नर्मदा-पार्वती लिंक परियोजना के प्रथम एवं द्वितीय चरण का भूमि-पूजन किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा 3415 करोड़ की नर्मदा-पार्वती लिंक परियोजना का शिलान्यास 

डेढ़ लाख से ज्यादा बीमित कृषकों के खातों में 482 करोड़ रुपये की राशि हुई जमा 

भोपाल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज सीहोर जिले की महत्वाकांक्षी नर्मदा-पार्वती लिंक परियोजना का शिलान्यास किया। परियोजना के पहले और दूसरे चरण में इंदिरा सागर जलाशय से लगभग 295 मीटर ऊँचाई तक पानी लिफ्ट कर किसानों के खेतों तक पाइप लाइन से पहुँचाया जायेगा। इसके लिए पहला पंपिंग स्टेशन कन्नौद तहसील के धरमपुरी में बनाया जाएगा। दूसरे पंपिंग स्टेशन से आष्टा तहसील के सिंगारचोली गाँव के पास निर्मित जंक्शन स्ट्रक्चर में डालकर खेतों तक पहुँचाने की व्यवस्था होगी। योजना से सीहोर जिले की आष्टा, जावर तथा इछावर तहसील के 187 गाँव का लगभग ढाई लाख एकड़ रकबा सिंचित होगा। 
आष्टा में आज संपन्न शिलान्यास समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि परियोजना के पूरा होने पर सीहोर जिले के किसानों की तकदीर और क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी। परियोजना से किसानों को ढाई हेक्टेयर तक के चक में पाइप लाइन से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा। योजना से सीहोर जिले के उन किसानों को सिंचाई का लाभ मिलने लगेगा, जो भौगोलिक रूप से नर्मदा नदी से ऊँचाई पर बसे हैं। किसानों को सिंचाई के लिए पानी जल्दी मिल सके, इसके लिए नहरों के स्थान पर पाइप लाइन से सिंचाई की व्यवस्था की जा रही है।

नर्मदा-क्षिप्रा-कालीसिंध-पार्वती को जोड़ने पर 20 लाख करोड़ खर्च होंगे-

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नर्मदा-क्षिप्रा-कालीसिंध-पार्वती नदियों को जोड़ा जा रहा है। इस पर करीब 20 लाख करोड़ की लागत आएगी और साढ़े सात लाख हेक्टेयर ऐसे क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी, जहाँ किसान केवल अच्छी वर्षा होने पर ही फसल ले पाते थे। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने पर क्षेत्र में पीने के पानी की समस्या से भी निजात मिलेगी।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सरकार हर हाल में किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने और खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आज ही सीहोर जिले के एक लाख इक्यावन हजार से अधिक किसानों के खातों में फसल बीमा योजना की 482 करोड़ से अधिक राशि जमा करवाई गई है। पिछले साल बेचे गए गेहूँ पर 200 रुपये प्रति क्विंटल के मान से बोनस दिया गया। श्री चौहान ने विभिन्न फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि इसका लाभ भी प्रदेश के किसानों को मिलेगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश की सोयाबीन को चीन निर्यात करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, इससे भी प्रदेश के किसानों को फायदा होगा।

मध्यप्रदेश के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए शुरू की गई संबल योजना की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह योजना देश भर में अनूठी है। अभी तक प्रदेश में करीब दो करोड़ असंगठित श्रमिकों ने योजना में अपना पंजीयन करवाया है। गरीब परिवारों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा, चिकित्सा देने की व्यवस्था संबल योजना में की गई है।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अब बिजली के भारी-भरकम बिल गरीबों को परेशान नहीं करेंगे। प्रदेश के सभी जिलों में शिविर लगाकर गरीबों के बिजली के बिल माफ किए जा रहे हैं। इसके बाद उन्हें हर माह 200 रुपये महीने के मान से बिजली बिल दिए जाएंगे। इसमें चार बल्ब, दो पंखे, एक कूलर और टी.वी. चलाया जा सकेगा। अंसगठित क्षेत्र के पंजीकृत श्रमिकों को रहने के लिए जमीन तथा मकान बनाकर दिए जाएंगे। श्री चौहान ने प्रदेश के विकास के लिए सभी के सहयोग की अपेक्षा की है।

 194 करोड़ से ज्‍यादा के विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन-

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर जिले के आष्टा में नर्मदा-पार्वती लिंक परियोजना के प्रथम और द्वितीय चरण के भूमि-पूजन कार्यक्रम में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया।

इसके पहले मुख्यमंत्री श्री चौहान ने 119 करोड़ 11 लाख रुपये की लागत से 22 कार्यों का भूमि-पूजन तथा 75 करोड़ 9 लाख लागत के 6 निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने सभा-स्थल के समीप वृक्षारोपण कर नागरिकों से एक पौधा अवश्य लगाने की अपील की। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह, नर्मदा घाटी विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लालसिंह आर्य, सांसद मनोहर ऊँटवाल, विधायक रणजीत सिंह गुणवान, सुदेश राय, जसवंत सिंह हाड़ा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती उर्मिला मरेठा और पाठ़य-पुस्तक निगम के अध्यक्ष रायसिंह सैंधव उपस्थित थे।