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पन्ना-दमोह हाइवे पर व्यारमा नदी पुल क्षतिग्रस्त, यातायात तत्काल प्रभाव से बंद

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दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर।

  छोटे और भारी वाहनों के लिए चार वैकल्पिक मार्ग निर्धारित

*     अब पन्ना जिले से दमोह जाने के लिए तय करनी होगी 40 किमी की अतिरिक्त दूरी

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले को पड़ोसी जिला दमोह से जोड़ने वाले राजमार्ग क्रमांक 55 के किमी 66/6 में व्यारमा नदी पर स्थित पुल (गैसाबाद पुल) के क्षतिग्रस्त होने के कारण हादसे की आशंका को देखते दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने पुल से होकर यातायात को तत्काल प्रभाव से पूर्णतः बंद करने आदेश जारी किया है। कलेक्टर के आदेश पर आज मंगलवार शाम (29 जुलाई 2025) से ही अमल शुरू हो गया है। यात्रियों एवं वाहनों की सुविधा के लिए कलेक्टर ने चार वैकल्पिक मार्गों से होकर यातायात करने की अनुमति प्रदान की है। वैकल्पिक मार्गों में 3 मार्ग छोटे वाहनों के लिए उपयुक्त बताए गए हैं जबकि एकमात्र हटा-पटेरा-कुण्डलपुर-कोटा-मोहन्द्रा-सिमरिया मार्ग से होकर भारी वाहन दमोह से सिमरिया और सिमरिया से दमोह के बीच आवागमन कर सकेंगे। व्यारमा नदी पुल से यातायात बंद होने के बाद वैकल्पिक मार्गों से आवागमन करने वाले यात्रियों एवं वाहनों को अब लगभग 20 से 40 किलोमीटर तक की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। जाहिर है इस बदलाव के चलते लोगों को सुरक्षित यात्रा करने के लिए थोड़ा परेशान होना पड़ेगा।
दमोह-पन्ना स्टेट हाईवे 55 पर व्यारमा नदी पर बने पुल से होकर यातायात प्रतिबंधित करने का आदेश।
दमोह कलेक्टर श्री कोचर ने सड़क विकास निगम लिमिटेड सागर के संभागीय प्रबंधक के पत्र दिनांक 29 जुलाई 2025 का हवाला देते हुए बताया है कि दमोह-हटा, गैसाबाद, सिमरिया, पन्ना मार्ग राजमार्ग क्रमांक 55 के किमी 66/6 में व्यारमा नदी पर स्थित पुल के निरीक्षण के दौरान क्षतिग्रस्त पाये जाने पर पुल से होकर यातायात को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है। हादसे की आशंका को देखते यह निर्णय लिया गया है। इसके स्थान पर अब वैकल्पिक मार्गों से यातायात संचालित किया जायेगा। कलेक्टर ने जनसामान्य की सुविधा एवं सुरक्षित यातायात की दृष्टि से चार वैकल्पिक मार्गों से छोटे एवं भारी वाहनों को आवागमन करने की अनुमति प्रदान की है। जिनमें हटा-मड़ियादो-वर्धा-जैतपुर-सिमरिया-मार्ग, हटा-रनेह-बंधा-माढवा-मोहन्द्रा-सिमरिया मार्ग एवं हटा-हिनौता-कचनारी-दादपुर-वर्धा-जैतपुर-सिमरिया मार्ग को छोटे वाहनों के लिए उपयुक्त बताया है। जबकि भारी वाहनों के यातायात के लिए हटा-पटेरा-कुण्डलपुर-कोटा-मोहन्द्रा-सिमरिया मार्ग को उपयुक्त माना है। इस बदलाव के बाद पन्ना-सिमरिया से दमोह जाने वाले यात्रियों और वाहनों को लगभग 41 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। दमोह कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में इस बात का उल्लेख नहीं है कि व्यारमा नदी पुल से होकर आवागमन कब तक बंद रहेगा।

आठ सौ किलो से अधिक नकली घी को प्रशासन ने नष्ट कराया

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नकली घी का सुरक्षित तरीके से विनष्टीकरण करवाते हुए डॉ. डीपी प्रजापति एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश राय।

न्यायालय का फैसला आने के बाद कराया विनष्टीकरण

जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर मिट्टी में मिलाया नकली घी

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग पन्ना ने सोमवार को 829 किलो नकली घी (अमानक घी) को सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया। गड्ढे में दफ़न किए गए नकली घी का बाजार मूल्य लगभग 8 लाख रुपए बताया जा रहा है। विभाग की लैब जांच में घी के सैंपल फेल होने पर इस मामले में न्यायालय अपर कलेक्टर ने कुछ समय पूर्व फैसला सुनाते हुए घी विक्रेता इंद्रजीत गुप्ता पर 1 लाख 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था। सालभर से प्लास्टिक के डिब्बों में रखे जब्तशुदा नकली घी के विनष्टीकरण की कार्रवाई को इंसानों एवं पशुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई है।

पन्ना में पकड़ी थी नकली घी की फैक्ट्री

नगर पालिका परिषद पन्ना के कचरा वाहन में रखे डिब्बों में भरा नकली घी।
प्राप्त जानकारी अनुसार, 30 जून 2024 को थाना प्रभारी कोतवाली पन्ना रोहित मिश्रा को सूचना प्राप्त हुई थी कि इंद्रपुरी कॉलोनी में नकली घी बनाने की फैक्ट्री चल रही है। थाना प्रभारी द्वारा खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश राय को जानकारी देकर संयुक्त रूप से छापामार कार्रवाई की गई थी। जहां 15-15 लीटर के 56 डिब्बों में संदिग्ध घी मिलने पर कारखाना (फैक्ट्री) सील करके सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए थे। जांच में सैंपल फेल हो जाने पर प्रकरण अपर कलेक्टर के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। जिस पर अपर कलेक्टर नीलाम्बर मिश्र ने नकली घी विक्रेता इंद्रजीत गुप्ता पर 1 लाख 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाकर नकली घी को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने का आदेश पारित किया था।

गड्ढे में घी डालकर मिट्टी का पुराव कराया

गड्ढे में भरे गए नकली घी के ऊपर मिट्टी का पुराव करती जेसीबी मशीन।
अपर कलेक्टर के आदेश के परिपालन में सोमवार 28 जुलाई 2025 को नकली घी से भरे डिब्बों को नगर पालिका के कचरा संग्रहण वाहन से परिवहन कर शहर के बाहरी क्षेत्र में ले जाया गया। जहां डॉ. डीपी प्रजापति एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार राय की उपस्थिति में नकली घी के विनष्टीकरण की कार्रवाई की गई। मौके पर जेसीबी मशीन से गहरा गड्ढा खुदवाकर उसमें नकली घी डाला गया और फिर ऊपर से मिट्टी का पुराव कर दिया।

एनएचआरसी ने रीवा के एक प्राइवेट स्कूल में अमानवीय व्यवहार का शिकार छात्र को 50,000 की राहत राशि दिलाई

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 दोषी अटेंडेंट की सेवा समाप्त और कक्षा शिक्षक छह माह के लिए निलंबित

*   आयोग ने को बच्चों के साथ शारीरिक दंड या मानसिक उत्पीड़न की मनाही को दोहराया

नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की अनुशंसा पर मध्यप्रदेश के रीवा जिले में एक निजी विद्यालय में शिक्षक और कर्मचारियों द्वारा पांच वर्षीय छात्र के साथ किए गए अमानवीय व्यवहार के मामले में राज्य सरकार ने पीड़ित को 50,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की है। आयोग द्वारा जिलाधीश को नोटिस और शर्तानुसार समन भेजे जाने के पश्चात यह सूचित किया गया कि दोषी अटेंडेंट की सेवा समाप्त कर दी गई है और कक्षा शिक्षक को छह माह के लिए निलंबित कर दिया गया है।
ज़िला अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि कक्षा शिक्षक ने बच्चे को एक अटेंडेंट के पास भेजा, जिसने उसे अपने गंदे कपड़े खुद धोने और उन्हें ही दोबारा पहनने पर मजबूर किया, जिससे बच्चा बीमार हो गया। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 238 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसकी जांच जारी है।
आयोग ने इस संबंध में 23 जनवरी, 2025 को मामला दर्ज किया था। रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर आयोग ने टिप्पणी की कि स्पष्ट रूप से आरोपी अटेंडेंट और कक्षा शिक्षक ने बल का प्रयोग किया होगा, जिससे बच्चे को पूरी कक्षा के सामने मानसिक और शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ अपमान भी सहना पड़़ा। ‘बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’ की धारा 17 के अंतर्गत किसी भी बच्चे के साथ शारीरिक दंड या मानसिक उत्पीड़न करने की मनाही है।

उद्योग-व्यापार को नई ऊंचाई प्रदान करेगा यूके से मुक्त व्यापार समझौता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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भारत और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौता हो गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एफटीए के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी का किया अभिनंदन

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते यानि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट-FTA की उल्लेखनीय उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हार्दिक अभिनंदन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में गरीब, किसान, युवाओं के साथ-साथ समूचा भारत गौरवान्वित हो रहा है। प्रधानमंत्री ने ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर जो करार किया है, यह न केवल उद्योग, व्यापार और रोजगार की दृष्टि से, बल्कि वैश्विक संबंधों की दृष्टि से भी भारत को नई ऊंचाईयों पर लेकर जाएगा। भारत सरकार के “मेक इन इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” जैसे अभियानों से वैश्विक स्तर पर मिला विस्तार देश की बढ़ती प्रतिष्ठा का अतुलनीय उदाहरण है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हम सभी को एफटीए के स्वर्णिम अवसर का लाभ उठाते हुए आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए। मध्यप्रदेश को भी भविष्य में ब्रिटेन के साथ हुए इस मुक्त व्यापार समझौते का भरपूर लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि नये मुक्त व्यापार समझौते से मध्यप्रदेश को कृषि सेक्टर, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, सर्विस सेक्टर, एविएशन सेक्टर, लेदर इंडस्ट्री, प्लास्टिक एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर सहित मैन्युफैक्चरिंग एवं इंडस्ट्रियल ग्रोथ में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मीडिया को जारी संदेश में यह विचार व्यक्त किए।

लोकायुक्त की कार्यवाही: भृत्य से रिश्वत लेते लिपिक को रंगे हाथ पकड़ा

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पन्ना जिले के तहसील कार्यालय अमानगंज में लिपिक के विरुद्ध ट्रैप कार्यवाही करने के बाद प्रकरण पंजीबद्ध करते हुए लोकायुक्त सागर की टीम।

  अवकाश का समायोजन कर वेतन जारी करने के एवज में मांगी थी रिश्वत

*    भृत्य का आरोप, तहसील कार्यालय अमानगंज में घूस दिए बगैर नहीं होता कोई काम

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में सरकारी कार्यालयों में ‘दाम कराए काम’ की नीति अघोषित तौर पर लागू होने के कारण यहां आए दिन लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई के मामले सामने आ रहे हैं। जिले में इस वर्ष अब तक कई अधिकारी-कर्मचारियों के रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद भी सरकारी अमला सुधरने को तैयार नहीं है। यहां रिश्वत की डिमांड से सिर्फ आम आदमी ही नहीं बल्कि छोटे कर्मचारी भी काफी परेशान हैं। अपने जायज काम करवाने के लिए कर्मचारियों को भी घूस (रिश्वत) देनी पड़ रही है। ऐसा ही एक मामला जिले की अमानगंज तहसील कार्यालय में सामने आया है। जहां गुरुवार 24 जुलाई 2025 को लोकायुक्त की टीम ने भृत्य से दो हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए लिपिक इकबाल खान को रंगे हाथ पकड़ा है। रिश्वत की डिमांड लंबित वेतन और जीपीएफ की राशि निकालने के एवज में की गई थी।
पत्रकारों को ट्रैप कार्यवाही की जानकारी देते लोकायुक्त निरीक्षक एवं ट्रैप दल प्रभारी कमल सिंह उइके।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय लोकयुक्त सागर के निरीक्षक एवं ट्रैप दल प्रभारी कमल सिंह उइके ने जानकारी देते हुए बताया कि अमानगंज तहसील में नाजिर के पद पर तैनात लिपिक इकबाल खान अपने ही कार्यालय के भृत्य सुदामा प्रसाद दुबे के चिकित्सीय अवकाश को अर्जित अवकाश में समायोजित कर वेतन बनाने एवं जीपीएफ की राशि निकालने के एवज 5,000 (पांच हजार रुपए) मांग रहा था। लेकिन सुदामा अपनी मेहनत की कमाई का कुछ हिस्सा रिश्वत में देने के सख्त खिलाफ थे। रिश्वत की डिमांड के चलते वेतन अटकने से परेशान भृत्य ने लिपिक को सबक सिखाने पुलिस अधीक्षक लोकयुक्त सागर के कार्यालय में संपर्क किया। भृत्य द्वारा दिए गए शिकायती आवेदन पत्र की तस्दीक होने पर भ्रष्ट लिपिक को ट्रैप करने दल गठित किया गया।
शिकायतकर्ता सुदामा प्रसाद दुबे।
पूर्व योजना अनुसार गुरुवार को भृत्य सुदामा प्रसाद दुबे ने तहसील कार्यालय में दोपहर के समय लिपिक इकबाल खान को दो हजार रुपए देकर जैसे ही इशारा किया तभी वहां मुस्तैद लोकायुक्त की टीम ने लिपिक को दबोंच लिया। लिपिक के कब्जे से कैमिकल युक्त नोट जब्त कर लोकायुक्त टीम ने उसके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया है। फरियादी सुदामा प्रसाद ने पत्रकारों को बताया कि अमानगंज तहसील कार्यालय में सिर्फ उन्हीं के काम होते हैं या तो जिनकी सिफारिश सत्तारूढ़ दल के बड़े नेता-जनप्रतिनिधि करते है या फिर वे जो यहां रिश्वत की चढ़ोत्री चढ़ाते हैं। उसने बताया कि, स्वास्थ्य संबंधी समस्या के चलते मुझे वेतन की सख्त जरुरत थी लेकिन बाबू जी मेरी परेशानी को समझने को तैयार नहीं थे। इसलिए मजबूर होकर मुझे लोकायुक्त संगठन से सम्पर्क करना पड़ा।

शराब माफिया को किसका संरक्षण! गांव-गांव खुल गई अवैध शराब दुकान, पन्ना में प्रतिबंध बेअसर

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जिले की अजयगढ़ की शराब दुकान से शराब की पेटियां आसपास के गावों में अवैध बिक्री के लिए ले जाते युवक।

*    ढकोसला साबित हो रहे ‘नशे से दूरी के नारे’

 जिले के प्रशासनिक मुखिया को नहीं शराब तस्करी की जानकारी

 आबकारी अधिकारी से जानकारी मांगने पर ठेकेदार का मुनीम दौड़ा चला आया

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) नशे के भयंकर दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक कर नशा मुक्त समाज बनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से पन्ना पुलिस द्वारा इन दिनों ‘नशे से दूरी है जरुरी’ अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत जन-जन को नशा मुक्ति का संदेश देने विभिन्न गतिविधियों के आयोजन के बीच जिले में अलग-अलग स्थानों से शराब तस्करी के वीडियो-फोटोग्राफ्स वायरल होने से न सिर्फ अभियान का मजाक उड़ रहा है बल्कि जिम्मेदारों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शराब ठेकेदार के गुर्गे खुलेआम तस्करी कर गांव-गांव, गली-गली शराब पहुंचा रहे हैं। आंचलिक क्षेत्रों में गांव-गांव अघोषित तौर अवैध शराब दुकान संचालित होने से ‘नशे से दूरी का नारा’ क्या सफल हो पाएगा? वहीं पन्ना नगर के अंदर शराब बिक्री पर लगा प्रतिबंध भी बेअसर साबित हो रहा है। शराब की अवैध बिक्री के साथ ही अधिकतम खुदरा मूल्य (रिटेल प्राइस) से भी अधिक कीमत पर शराब बेंचकर ठेकेदार नोट छापने का काम कर रहा है। जिम्मेदारों की मेहरबानी से जिले में शराब ठेका की आड़ में मुक़म्मल तरीके से शराब माफिया राज कायम हो गया है।
वर्ष 2025-26 के लिए सम्पूर्ण पन्ना जिले का आबकारी ठेका 177 करोड़ रुपए में लेने वाले ठेकेदार का किसी भी सूरत में घाटा न हो, इसके लिए स्थानीय प्रशासन-पुलिस एवं आबकारी विभाग के अफसरों ने उसे अघोषित तौर पर लूट की खुली छूट दे रखी है। ठेकेदार पर यह मेहरबानी परस्पर स्वार्थपूर्ति के सिद्धांत पर आधारित बताई जाती है। अर्थात जब ठेकेदार को प्रॉफिट होगा तभी तो सबको महीने पर हिस्सा बंटेगा। अपना-अपना हिस्सा सुरक्षित करने के चक्कर में शराब ठेकेदार के हितैषी बने कतिपय अफसरों ने उसकी करतूतों से अपनी नजर फेर ली है।
कमिश्नर सागर संभाग के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट।
सबसे मजेदार बात यह है कि, संभागीय मुख्यालय सागर में बैठे कमिश्नर अनिल सुचारी पन्ना जिले में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब बेंचे जाने और शराब की अवैध बिक्री को लेकर खुलकर सख्त नाराजगी जाहिर कर रहे हैं, लेकिन पन्ना में ऐसा कुछ हो रहा है, इसकी जानकारी कलेक्टर सुरेश कुमार को  नहीं है। सवाल पूंछने पर वे सीधा-सपाट जवाब देते हुए कहते मुझे आप ही यह सब बता रहे है। मेरे पास तो इस संबंध में आज तक एक भी शिकायत नहीं आई। बहुत संभव है कि गांव-गांव पहुंचाई जा रही अवैध शराब को लेकर किसी ने जिले के प्रशासनिक मुखिया से लिखित शिकायत ना की हो। इसी तरह शराब के शौकीनों ने साहब के समक्ष उपस्थित होकर न बताया हो कि, हुजूर ठेकेदार हमारी जेब काट रहा है। लेकिन यहां सवाल उठता है, शिकायत न मिलने का तर्क देकर क्या सच्चाई को नकारा जा सकता है। खासकर तब जबकि शराब पीने वाले पहचान उजागर न करने की शर्त पर निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब मिलने की जानकारी दे रहे हैं। वहीं शराब की दुपहिया-चार पहिया वाहनों से तस्करी किए जाने के वीडियो-फोटो सोशल मीडिया पर आए दिन वायरल हो रहे हैं।

अजयगढ़ दुकान का वीडियो हुआ था वायरल

पन्ना जिले अजयगढ़ की शराब दुकान सहित अन्य दुकानों से खुलेआम चल रहा शराब तस्करी का खेल।
जिले के अजयगढ़ क़स्बा में स्थित शराब दुकान से शराब की तस्करी होने का वीडियो-तस्वीरें हाल ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसमें साफ़ तौर पर देखा जा सकता है, दो व्यक्ति हाथ में शराब की पेटी लेकर दुकान से निकलते है और सामने खड़ी सफ़ेद रंग के बोलेरो वाहन में उन्हें लोड कर देते हैं। यह वीडियो-फोटोग्राफ्स शनिवार 19 जुलाई की रात्रि 10 बजकर 10 मिनिट के हैं। इसके पहले भी शराब की तस्करी के कई वीडियो वायरल हुए हैं। शराब दुकान के आसपास रहने वाले लोग नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताते हैं कि दिनभर में कई बार शराब की पेटियां दुपहिया-चार पहिया वाहनों से आसपास के गांवों में पहुंचाई जाती हैं। शराब दुकान के आसपास लगे सीसीटीव्ही कैमरों से इस बात की तस्दीक की जा सकती है। शराब तस्करी के मामले में प्रशासन के तमशबीन रुख को देखते हुए लोग खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं।

थाना के पास पकड़ी अवैध शराब

रैपुरा थाना अंतर्गत शराब की तस्करी करते दो युवकों भगवती मानव कल्याण संगठन व भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा रंगे हाथ पकड़ा गया।
मंगलवार 22 जुलाई 2025 पन्ना जिले के रैपुरा क़स्बा में बाइक से शराब की तस्करी कर रहे दो युवकों को भगवती मानव कल्याण संगठन व भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा 2 पेटी देशी प्लेन अवैध शराब के साथ रंगे हाथ पकड़ा गया। नशामुक्ति अभियान चला रहे इन संगठनों की ओर शराब तस्करों की धरपकड़ के पूर्व पुलिस को सूचना दी गई थी। प्राप्त जानकारी अनुसार रैपुरा थाना अंतर्गत बिना नंबर की बाइक से शराब की तस्करी कर रहे दो युवकों को पटी रोड पर पुलिस थाना से महज दो सौ मीटर की दूरी पर पकड़ा गया। भगवती मानव कल्याण संगठन व भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के कार्यकर्ताओं ने तस्करों के कब्जे से 2 पेटी (100 पाव देशी प्लेन) अवैध शराब और हीरो कंपनी की एचएफ डीलक्स बाइक जब्त की है। पकड़े गए आरोपी संतराम निवासी अमानगंज जिला पन्ना एवं दीपराज निवासी जिला छतरपुर को रैपुरा थाना ले जाया गया। भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के कार्यकर्ताओं की ओर से दोनों शराब तस्करों के विरुद्ध बकायदा एफआईआर दर्ज कराई। यहां गौर करने वाली बात है कि, शराब के अवैध परिवहन एवं बिक्री पर रोक लगाने के लिए के लिए कार्रवाई करने वाला आबकारी विभाग अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभा रहा है। इसलिए आमलोगों को शराब माफिया के खिलाफ आगे आना पड़ रहा है।

दुकानों से क्यूआर कोड और रेट सूची गायब

जिले की सभी शराब दुकानों का ठेका इस बार एक ही ठेकेदार को मिला है। पन्ना के बाजार पर एकाधिकार होने के कारण ठेकेदार द्वारा प्रशासन सेटिंग कर मोनोपोली चलाते हुए ठेका के पहले दिन यानी 01 अप्रैल 2025 से ही निर्धारित दर से अधिक कीमत पर लगातार शराब बेंची जा रही है। लोगों से शराब की अधिक कीमत वसूलने से जुड़ीं कई ख़बरें जब मीडिया में आई तो आबकारी विभाग के अफसरों ने खानापूर्ति करते हुए शराब दुकानों के बाहर क्यूआर कोड और रेट सूची लगवाकर फोटो सेशन कराया। बताया गया कि लोग क्यूआर कोड स्कैन कर शराब के विभिन्न ब्रांड की अलग-अलग मात्रा वाली बोतलों की वास्तविक कीमत जान सकते हैं और उसी के अनुसार भुगतान कर सकते हैं। आबकारी विभाग के प्रचारजीवी निरीक्षक द्वारा इस सबके जरिए यह बताने-दिखाने की कोशिश की गई अब सबकुछ ठीक है। लेकिन सच्चाई यह है कि लोगों से आज भी शराब की अधिक कीमत वसूली जा रही है। अधिकांश शराब दुकानों से ठेकेदार ने क्यूआर कोड और रेट सूची निकलवाकर कचरे में फेंक दी। शराब ठेकेदार द्वारा चलाई जा रही मोनोपोली से प्रशासन का कथित तौर पर अनभिज्ञ होना मजाक से ज्यादा कुछ नहीं है।

डीईओ को फोन लगाते ही आया मुनीम

पन्ना का नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन। (फाइल फोटो)
शराब की तस्करी एवं निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब बिक्री पर अंकुश न लग पाने के संबंध में रडार न्यूज़ ने जिला आबकारी अधिकारी (District Excise Officer) पन्ना मुकेश मौर्य से उनका पक्ष जानने के लिए मोबाइल पर सम्पर्क किया तो उन्होंने कुछ लोगों के साथ बैठे होने के कारण दस मिनिट बाद कॉल बैक करने की बात कही। मेरे द्वारा उनसे कहा गया, आपके फोन की आधा घंटे तक प्रतीक्ष करूंगा यदि आप संपर्क नहीं करते तो यह समझा जाएगा कि आप आबकारी ठेकेदार की मनमानी पर जवाब देने से बच रहे हैं। बुधवार 23 जुलाई की देर शाम हुई इस बातचीत को लेकर सबसे ज्यादा हैरानी तब हुई जब आधा घंटे बाद डीईओ साहब का कॉल तो नहीं आया लेकिन एक अंजान व्यक्ति ने मुझे फोन किया। उसने स्वयं को शराब ठेकेदार का प्रतिनिधि बताया। उसके द्वारा शराब ठेका संचालन में सहयोग की अपेक्षा के साथ मिलने का आग्रह किया गया। काफी मना करने के बाद भी वह व्यक्ति मिठाई का डिब्बा लेकर मेरे घर आ गया। स्वयं को शराब ठेकेदार का मुनीम बताने वाले सुरेश शिवहरे नामक व्यक्ति ने कहा कि डीईओ साहब का फोन आया था इसलिए आपसे मिलने आया हूँ। उसकी मिठाई को अस्वीकार करने साथ ही अवैध गतिविधियों में किसी तरह का कोई सहयोग करने से स्पष्ट मना करने पर वह चंद मिनिट बाद वापस लौट गया। यहां इस घटनाक्रम का उल्लेख अपनी ईमानदारी का बखान करने के लिए नहीं बल्कि यह बताने-समझाने के लिए किया गया है कि, आबकारी विभाग के अफसर अपनी हदों से बाहर जाकर विभागीय ठेकेदार के अवैध कारोबार को संरक्षण देने में जुटे हैं।
इनका कहना है-
“जिले में शराब की तस्करी और निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री किए जाने की मुझे जानकारी नहीं है, मुझे यह आपने ही बताया है। इस संबंध में मेरे पास आज तक एक भी शिकायत नहीं आई। अगर कोई ठेकेदार की मनमानी की शिकायत करता है और वह सही पाई जाती है तो नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।”

सुरेश कुमार, कलेक्टर, जिला पन्ना।

“अवैध शराब की धरपकड़ के कुछ मामलों में पूर्व में संबंधित दुकान के शराब विक्रेता एवं ठेकेदार को आरोपी बनाए जाने की बात सही है। अब शराब विक्रेता को तो आरोपी बना सकते है लेकिन आबकारी विभाग के शीर्ष अधिकारी के निर्देश हैं कि ठेकेदार के विरुद्ध जब तक पुख्ता साक्ष्य मौजूद न हो उसे आरोपी न बनाया जाए। साथ ही ठेकेदार को आरोपी बनाने से पहले कलेक्टर से अनुमति लेना भी अनिवार्य कर दिया गया है। प्रक्रिया संबंधी जटिलताओं के बाद भी शराब के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जरुरत पड़ने पर यह कदम भी उठाया जाएगा।”

साईं कृष्णा एस. थोटा, पुलिस अधीक्षक, जिला पन्ना।

प्रधानमंत्री सड़क की बारिश में बह गई पुलिया, 48 घंटे से गांव का सम्पर्क टूटा

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पन्ना जिले में गत दिवस अतिवृष्टि के दौरान बरियारपुर कुर्मियान गांव को अजयगढ़ से जोड़ने वाली पीएमजीएसवाई सड़क की पुलिया पानी में बह गई।

 पन्ना जिले के बरियारपुर कुर्मियान गांव के पहुँच मार्ग का मामला

  आठ साल पहले निर्मित सड़क वर्तमान में है मेंटेनेंस अवधि में

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में गत दिनों अतिवृष्टि के चलते बाढ़ जैसे हालात निर्मित रहे। नदी-नालों के उफान पर होने से कई गावों एवं इलाकों का उनके तहसील व जिला मुख्यालय से कई घंटों तक संपर्क टूटा रहा। भारी बारिश के बीच जिले के अजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत बरियारपुर कुर्मियान ग्राम के पहुँच मार्ग एवं पुलिया का कुछ हिस्सा पानी में बह गया। जिससे गांव का सम्पर्क विकासखंड मुख्यालय से पूरी तरह से टूट चुका है। लगभग 48 घंटे बाद भी सीधे सम्पर्क को बहाल करने के लिए प्रशासन की ओर से किसी तरह की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण गांव के लोग अपनी जान जोखिम में डालने अथवा कुछ किलोमीटर लंबा चक्कर काटकर आवागमन करने को मजबूर हैं।
गांव की दूरी की जानकारी देने वाला मील का पत्थर।
बरियारपुर कुर्मियान ग्राम को विकासखंड मुख्यालय अजयगढ़ से जोड़ने तथा ग्रामीणों को बारहमासी सुगम आवागमन सुविधा मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करीब 4 किलोमीटर लम्बाई वाले पहुँच मार्ग का निर्माण कराया गया था। अजयगढ़ मुख्य मार्ग से बरियारपुर कुर्मियान ग्राम तक जाने वाले सम्पर्क मार्ग का निर्माण लगभग 8 वर्ष पूर्व हुआ था। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) पन्ना के सहायक मैनेजर रोहित जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री सड़कों का गारंटी पीरियड 5 वर्ष का होता है। भारी बारिश के चलते क्षतिग्रस्त हुई बरियारपुर कुर्मियान ग्राम की सड़क का गारंटी पीरियड लगभग 3 साल पहले समाप्त हो चुका है। वर्तमान में यह सड़क मेंटेनेंस पीरियड में है। अतिवृष्टि में उक्त सड़क एवं पुलिया का कुछ हिस्सा बहने के कारण गांव का सम्पर्क टूट चुका है। ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए आवागमन सुविधा बहाल करने के लिए तात्कालिक व्यवस्था बनाने के संबंध में अजयगढ़ एसडीएम से चर्चा हुई है। स्थल पर डायवर्सन निर्माण में आ रही समस्या से उन्हें अवगत कराया है, यथाशीघ्र समस्या का समाधान होते ही डायवर्सन बनाकर आवागमन को बहाल कर दिया जाएगा। वहीं वर्षाकाल समाप्त होने के बाद फल्ड डैमेज के प्रावधान के तहत सड़क एवं पुलिया के क्षतिग्रस्त हिस्से का सुधार कार्य कराया जाएगा। पीएमजीएसवाई के सहायक मैनेजर श्री जैन सड़क एवं पुलिया के बहने का कारण अतिवृष्टि को मानते हैं, वे सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता होने अथवा निर्माण के दौरान निर्धारित अनुपात में मटेरियल न डालने जैसे ग्रामीणों के आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर रहे हैं।

क्यों बह गई पुलिया?

बरियारपुर कुर्मियान पहुंच मार्ग की पुलिया एवं सड़क का कुछ हिस्सा शुक्रवार की सुबह जब अचानक पानी में बहा तब वहां बारिश हो रही थी। सड़क के क्षतिग्रस्त होने के 4 दिन पूर्व से उक्त इलाके सहित समूचे पन्ना जिले में रुक-रूककर लगातार भारी बारिश होने के कारण हर तरफ पानी-पानी हो चुका था। केन की सहायक नदियों-नालों के उफान पर होने से पानी की निकासी पर्याप्त मात्रा में संभव नहीं हो पा रही थी। इन परिस्थितियों में बरियारपुर कुर्मियान पहुंच मार्ग पर बने स्लैब कल्वर्ट (पुलिया) के आसपास भरे पानी का दवाब अत्याधिक बढ़ने के कारण सड़क एवं पुलिया को जोड़ने वाले हिस्से एप्रोच स्लैब के नीचे की मिट्टी का कटाव हो गया। जिससे सड़क और पुलिया का खोखला हो चुका हिस्सा पानी में बह गया।

केन्द्र सरकार की मजदूर-किसान-कर्मचारी विरोधी और कार्पोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ हल्लाबोला

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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद के तहत पन्ना के मझगवां में हीरा खनन परियोजना के बाहर कालीपट्टी बांधकर केन्द्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते इंटक से सम्बद्ध कर्मचारी एवं ठेका श्रमिक।

 ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का पन्ना में दिखा मिला-जुला असर

 हीरा खनन परियोजना, बीएसएनएल एवं एलआईसी कर्मचारियों ने किया धरना-प्रदर्शन

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) केन्द्र की मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ आज बुधवार 9 जुलाई 2025 को 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों एवं अन्य स्वतंत्र महासंघों द्वारा बुलाए गए भारत बंद का मध्य प्रदेश के पन्ना में मिला-जुला असर दिखा। राष्ट्रव्यापी हड़ताल में केन्द्र सरकार के विभिन्न सार्वजानिक उपक्रमों के कर्मचारियों एवं श्रमिकों ने सहभागिता कर अपनी आवाज़ बुलंद की। भारत बंद का सर्वाधिक असर भारतीय जीवन बीमा निगम के स्थानीय कार्यालय में देखा गया। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से वहां कामकाज दिनभर प्रभावित रहा।
पन्ना के मझगवां में स्थित एनएमडीसी लिमिटेड (NMDC Limited) की हीरा खनन परियोजना (Diamond Mining Project) में इंटक (INTUC) ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल को अपना समर्थन दिया। यहां इंटक से से सम्बद्ध कर्मचारियों/ठेका श्रमिकों ने परियोजना के गेट के बाहर एकत्र होकर केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। सांकेतिक विरोध-प्रदर्शन के बाद डीएमपी के सभी कर्मचारी कालीपट्टी लगाकर अपनी ड्यूटी पर चले गए। पन्ना जिला मुख्यालय में स्थित भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के कर्मचारियों ने भारत बंद का समर्थन करते हुए कार्यालय परिसर में जमकर हल्लाबोला। उल्लेखनीय है कि हीरा खनन परियोजना सहित अन्य संस्थानों में भारतीय मजदूर संघ (BMS) से जुड़े कर्मचारी तथा श्रमिक आज के भारत बंद में शामिल नहीं हुए। वहीं पन्ना की बैकिंग सेवाएं, डाक सेवाएं राष्ट्रव्यापी हड़ताल से पूर्णतः अछूती रहीं। अर्थात राष्ट्रीयकृत बैंकों एवं डाकघरों में कामकाज रोज की तरह सामान्य गति से चलता रहा।

श्रमिक विरोधी 4 संहिताओं को रद्द किया जाए

केंद्रीय व्यापार संघों (केंद्रीय ट्रेड यूनियनों) और स्वतंत्र महासंघों के संयुक्त मंच द्वारा घोषित राष्ट्रव्यापी औद्योगिक हड़ताल को इंटक यूनियन द्वारा एनएमडीसी लिमिटेड की हीरा खनन परियोजना (Diamond Mining Project) मझगवां में अपना समर्थन दिया। डीएमपी में सुबह के समय एकत्र इंटक के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं कर्मचारियों को महामंत्री चंद्रदेव यादव ने संबोधित करते हुए कहा कि, यह हड़ताल श्रमिकों और देश के नागरिकों की चिंता और आकांक्षा की एक सामूहिक अभिव्यक्ति है। यह मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए एक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक कार्रवाई के रूप में की जा रही है जो लाखों कामकाजी लोगों को प्रभावित कर रहे हैं। इस अवसर इंटक नेता श्री यादव ने हड़ताल की 9 सूत्रीय जायज़ एवं लंबित मांगों का प्रमुखता से उल्लेख किया। साथ ही तत्परता से सभी मांगों का निराकरण किए जाने को लेकर नारेबाजी की गई।
लंबित मांगों में मुख्य रूप से- चार श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए जो श्रमिकों के कड़े मेहनत से अर्जित अधिकारों को कम करती हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और सरकारी विभागों के निजीकरण को रोका जाए और राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) को रद्द किया जाए। ठेका प्रणाली और निश्चित अवधि की नौकरी को समाप्त किया जाए और सभी के लिए नियमित रोजगार सुनिश्चित किया जाए। सभी श्रमिकों के लिए रुपए 26,000 प्रति माह का न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए, जो मुद्रास्फीति से जुड़ा हो। न्यूनतम पेंशन रुपए 9,000 प्रति माह सुनिश्चित की जाए और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों सहित सभी श्रेणियों के श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए। राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) को रद्द करने और सभी सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने सहित अन्य मांगें शामिल हैं। डीएमपी के बाहर हुए सांकेतिक प्रदर्शन में इंटक पदाधिकारी रामसुख, सुरेश अनुरागी, समीर प्रधान ,भागवत सिंह, शंकर साखरे, मोहित सैनी व अन्य कर्मचारी गण उपस्थित रहे।
एलआईसी ऑफिस के बाहर दिया धरना
बुधवार 9 जुलाई 2025 को भारत बंद को अपना समर्थन देते हुए भारतीय जीवन बीमा निगम कार्यालय पन्ना के बाहर नारेबाजी करते हड़ताली कर्मचारी।
सतना डिवीजन इंश्योरेंस इम्प्लाइज एसोसियेशन शाखा इकाई पन्ना ने भारत बंद को अपना समर्थन दिया। बुधवार को इंश्योरेंस इम्प्लाइज एसोसियेशन से जुड़े कर्मचारी अपना कामकाज छोड़ भारतीय जीवन बीमा निगम कार्यालय का गेट बंद करके बाहर बाहर धरना पर बैठ गए। पन्ना में कई घंटे तक धरना-प्रदर्शन के चलते एलआईसी (LIC) ऑफिस में दैनिक कार्य लगभग ठप्प रहा। राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल बीमा कर्मचारियों ने केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे निजीकरण को लेकर गहरा आक्रोश जताया। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को निजीकरण और विनिवेश के जरिये बेंचने के फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की गई। इस अवसर पर धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वरिष्ठ कर्मचारी नेता अरुण मिश्रा ने हड़ताल की जनहित और राष्ट्रहित से जुड़ी प्रमुख मांगों के संबंध में विस्तार से बताया।
इंश्योरेंस इम्प्लाइज एसोसियेशन की मांग है कि, सार्वजानिक बैंकों और एलआईसी में निजीकरण एवं विनिवेश बंद किया जाए। बीमा क्षेत्र में सौ फीसदी एफडीआई बढ़ोत्तरी पर रोक लगे। आउटसोर्सिंग एवं ठेके की नौकरियों पर रोक लगाई जाए। पर्याप्त भर्ती सुनिश्चित की जाए। ट्रेड यूनियनों के अधिकारों पर हमला बंद किया जाए। सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों का विलय करो। मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं को वापस लेने सहित अन्य मांगें शामिल हैं।

विश्व की सबसे बुजुर्ग हथिनी वत्सला का निधन

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पन्ना टाइगर रिजर्व में पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रही विश्व की सबसे बुजुर्ग हथिनी वत्सला। (फाइल फोटो)

  वन्यजीव प्रेमियों और पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन में शोक की लहर

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) में कई वर्षों तक पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रही विश्व की सबसे बुजुर्ग हथिनी (World’s Oldest Elephant) वत्सला (Vatsala) अब नहीं रही। वत्सला ने आज यानी मंगलवार 08 जुलाई 2025 को लगभग 100 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उसने पीटीआर की हिनौता रेंज अंतर्गत दोपहर में 01:30 बजे उसने अन्तिम सांस ली। अपने नाम को सार्थक करने वाली वत्सला वास्तव में प्रेम-स्नेह और ममता की मिसाल थी। दुनिया की सबसे उम्रदराज हथिनी के निधन की खबर आने के बाद से वन्यजीव प्रेमियों एवं पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन में शोक की शोक की लहर व्याप्त है।
पन्ना टाइगर रिजर्व वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि परिक्षेत्र हिनौता के हाथी कैम्प से बुजुर्ग हथिनी को नहाने के लिए प्रतिदिन समीप स्थित खैरईया नाला ले जाया जाता था। आज नाला के पास अचानक आगे के पैर के नाखून टूट जाने के कारण वत्सला वहीं बैठ गई। वनकर्मियों द्वारा उसको उठाने का काफी प्रयास किया गया लेकिन उन्हें कोई सफलता मिली। इसी बीच दोपहर 01:30 बजे विश्व की सबसे उम्रदराज हथिनी वत्सला ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

केरल में गुजरा प्रारंभिक जीवन

प्रेम और स्नेह का प्रतीक रही हथिनी वत्सला केरल के जंगलों में पैदा हुई और वहीं पर पली-बढ़ी। इसका प्रारंभिक जीवन केरल के नीलांबुर वन मण्डल में वनोपज के परिवहन में गुजरा। वर्ष 1971 में इसे मध्य प्रदेश के होशंगाबाद (नर्मदापुरम) लाया गया। लगभग 20 साल तक होशंगबाद में रहने के बाद वत्सला ने वर्ष 1993 में पन्ना टाइगर रिजर्व में पदार्पण किया और फिर आख़िरी सांस तक पन्ना में ही रही। पन्ना टाइगर रिजर्व के भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों के लिए विश्व की सबसे बुजुर्ग हथिनी वत्सला आकर्षण का प्रमुख केन्द्र रही। शांत स्वाभाव की यह हथिनी अपने पास आने वाले पर्यटकों को हमेशा ही प्रेम, सुरक्षा एवं भावनात्वक जुड़ाव का एहसास कराती थी और बदले में सबसे ढेर सारा प्यार भी पाती थी। जिसका अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि पर्यटक वत्सला को अपने हाथों से खाद्य पदार्थ खिलाने के अविस्मरणीय पलों को जीने के लिए सहर्ष शुल्क अदा करते थे।

मोतियाबिंद ने छीन ली थी आंखों की रोशनी

वत्सला की अधिक उम्र एवं सेहत से जुड़ी समस्याओं के मद्देनजर वर्ष 2003 पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने इसे रिटायर्ड कर गश्ती कार्य से मुक्त कर दिया था। शतायु (Centenarians) हो चुकी वत्सला बढ़ती उम्र के साथ होने वाली स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रही थी। वत्सला का पाचन तंत्र कमजोर हो चुका था। इसलिए उसे खाने में दलिया या विशेष भोजन ही दिया जाता रहा है। करीब पांच वर्ष पूर्व 2020 में दोनों आंखों में मोतियाबिंद होने के कारण उसे दिखाई देना देना बंद हो गया था। आंखों की रोशनी खोने के बाद वत्सला के लिए जिंदगी दिन-प्रतिदिन मुश्किल होती चली गई। बिना किसी सहारे के चलना और जमीन रगड़ती अपनी लंबी सूंड को संभालना उसके लिए सबसे बड़ी समस्या बन गया। बुजुर्ग हथिनी की देखरेख करने वाला कर्मचारी मनीराम उसकी सूंड पकड़कर घुमाने ले जाता था। उसे हिनौता के हाथी कैम्प में रखा जाता था।

हाथियों के दल का करती थी नेतृत्व

पन्ना टाइगर रिजर्व के अन्तर्गत कैम्प के हाथियों में सबसे बुजुर्ग सदस्य होने के नाते वत्सला अपनी जिम्मेदारी को न सिर्फ अच्छी तरह समझती थी बल्कि तीन दशक तक उसे बखूबी निभाती रही है। सबसे उम्रदराज होने के कारण जाहिर है वह हाथियों के पूरे दल का कुशलतापूर्वक नेतृत्व करती रही है। कुनबे में जब भी कोई हथिनी बच्चे को जन्म देती थी तो वत्सला प्रसव के समय कुशल दाई की भूमिका निभाती थी। और प्रसव उपरांत वह नानी अथवा दादी की तरह बच्चों की देखभाल करती थी। परिणामस्वरूप पीटीआर में बाघों के साथ हाथियों का कुनबा भी बढ़ता गया। वर्तमान में पन्ना टाइगर रिजर्व में हाथियों के कुनबे की सदस्य संख्या एक दर्जन से अधिक है।

बेहतर इलाज से दो बार बची जान

पन्ना टाइगर रिजर्व के हिनौता स्थित हाथी कैम्प में वत्सला को स्पर्श करते बच्चे। (फाइल फोटो)
पन्ना टाइगर रिजर्व के ही एक गुस्सैल हाथी रामबहादुर ने दो बार प्राणघातक हमला कर वत्सला को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उस दौरान अगर वन्यप्राणी चिकित्सक (Wildlife Doctor) डॉ. संजीव गुप्ता ने वत्सला को अपनी निगरानी में रखकर बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के साथ कई महीने तक नियमित रूप से उसकी विशेष देखभाल न की होती तो शायद वह शतायु होने का कीर्तिमान स्थापित न कर पाती। वत्सला के निधन से शोकमग्न डॉ. गुप्ता उस घटना को याद करते हुए बताते हैं कि हाथी रामबहदुर ने मद के दौरान पहला हमला वर्ष 2003 और दूसरा हमला 2008 में किया था। डॉ. गुप्ता ने बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व की मड़ला रेंज अंतर्गत जूड़ी हाथी कैंप में नर हाथी रामबहादुर ने मद के दौरान वत्सला के पेट पर जब हमला किया तो उसके दांत पेट में अंदर तक घुस गए। हाथी ने झटके के साथ सिर को ऊपर किया, जिससे वत्सला का पेट फट गया और उसकी आंतें बाहर निकल आईं थी। डॉ. गुप्ता ने 6 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद 200 टांके लगाए तथा पूरे 9 महीने तक वत्सला का इलाज किया। समुचित देखरेख व बेहतर इलाज से अगस्त 2004 में वत्सला का घाव भर गया। लेकिन फरवरी 2008 में नर हाथी रामबहादुर ने दुबारा अपने दांतों से वत्सला हथिनी पर हमला करके गहरा घाव कर दिया, जो 6 माह तक चले उपचार से ठीक हुआ। इस तरह दो बार नई जिंदगी मिलने पर वत्सला सबसे उम्रदराज हथिनी होने का रिकार्ड बनाकर हमेशा के लिए अमर हो गई। पन्ना टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक अंजना सुचिता तिर्की ने प्रेस में जारी विज्ञप्ति में बताया कि प्रबंधन द्वारा वन्यप्राणी चिकित्सक एवं विशेषज्ञों से समय-समय पर वत्सला हथिनी के स्वास्थ्य का परीक्षण कराया जाता था, जिससे वह यहां के विरल एवं शुष्क वन क्षेत्र में भी दीर्घकाल तक जीवित रही। टाइगर रिजर्व अन्तर्गत बाघ पुनर्स्थापना योजना में वत्सला का अहम योगदान रहा है।

प्रक्रिया को ठेंगा दिखाकर दैवेभो को स्थाईकर्मी बनाया, आपत्ति आई तो नौकरी से निकाला

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फाइल फोटो।

  भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे आरईएस के प्रभारी कार्यपालन यंत्री का कारनामा

  दैनिक वेतनभोगी को स्थाईकर्मी में विनियमित करने पर डीए ने उठाई थी आपत्ति

  सेवा बहाली के लिए उच्च न्यायालय जबलपुर की शरण में पहुंचा पूर्व कर्मचारी

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) भ्रष्टाचार के अनेक गंभीर आरोपों के चलते लोकायुक्त जांच का सामना कर रहे ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग (आरईएस) पन्ना के प्रभारी कार्यपालन यंत्री भगवान दास कोरी का कच्चा चिट्ठा एक से बढ़कर एक हैरान करने वाले काले कारनामों से भरा पड़ा है। फिर चाहे वह किराए पर लिए गए वाहनों के भुगतान में वित्तीय गड़बड़ी कर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाना, ठेकेदारों के दस्तावेजों की बगैर जांच करोड़ों की लागत वाले निर्माण कार्यों के अनुबंध निष्पादित करना या फिर छात्रावासों की मरम्मत में लीपापोती का मामला हो। आरईएस के इन चर्चित घपलों-घोटालों के संबंध में तो कई लोगों को थोड़ी-बहुत जानकारी है, लेकिन एक प्रकरण ऐसा भी जिससे अधिकांश लोग पूरी तरह अनभिज्ञ हैं! यह मामला चयन प्रक्रिया का कथित तौर पर मखौल उड़ाते हुए दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी को स्थाईकर्मी में विनियमित करने से जुड़ा है।
दरअसल, कोरी साहब पर आरोप है कि उन्होंने शासन के दिशा-निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए बिना उचित चयन प्रक्रिया अपनाए बगैर अपने कार्यालय के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी को पहले तो स्थाईकर्मी में विनयमित कर दिया। बाद में जब इस पर आपत्ती आई तो उस गरीब कर्मचारी को नौकरी से ही निकाल दिया। मगर, पूर्व कर्मचारी सेवा बहाली की उम्मीद में बिना किसी सैलरी के लगभग एक साल से लगातार कार्यालय में अपनी सेवाएं दे रहा है। साथ ही हाजिरी रजिस्टर में वह अपने हस्ताक्षर भी कर रहा है। लेकिन सेवा बहाली एवं सैलरी भुगतान मामले में शासन-प्रशासन स्तर पर कोई कार्यवाही न होते देख प्रभावित व्यक्ति ने न्याय के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर का दरवाजा खटखटाया है। मामला हाईकोर्ट पहुंचने से इन दिनों आरईएस ऑफिस पन्ना में अंदरखाने जबरदस्त हड़कंप मचा है। कोर्ट में प्रकरण के सभी पहलुओं पर बारीकी से गौर किए जाने की पूर्ण संभावना को देखते हुए, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी को स्थाईकर्मी बनाने और फिर अचानक उसकी सेवा समाप्त करने वाले अफसरों की धड़कनें तेज हो गई हैं।
कार्यालय कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग, पन्ना में कई सालों से दैनिक वेतन भोगी (दैवेभो) के तौर पर कार्यरत घनश्याम रैकवार को वर्ष 2023 में स्थाईकर्मी में विनियमित किया गया था। दैवेभो को स्थाईकर्मी बनाने की कार्रवाई आरईएस के प्रभारी कार्यपालन यंत्री भगवान दास (बीडी) कोरी ने अपने पहले कार्यकाल में की थी। आरईएस के संभागीय लेखा अधिकारी (डिविजनल अकाउंटेंट) आनंद दयाल द्वारा इस कार्रवाई पर दिनांक 01 फरवरी 2024 को आपत्ति दर्ज करवाते हुए बकायदा प्रपत्र-60 जारी किया गया। जिसमें नियम-निर्देशों तथा प्रक्रिया का का हवाला देकर लेख किया, दैवेभो घनश्याम रैकवार को के विपरीत स्थाईकर्मी बनाया गया है। डिविजनल अकाउंटेंट (डीए) ने अपनी आपत्ति (प्रपत्र-60) के संदर्भ में मध्य प्रदेश शासन सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय भोपाल के परिपत्र क्रमांक एफ 5-1/2013/1/3 भोपाल दिनांक 07 अक्टूबर 2016 का उल्लेख किया है। इस परिपत्र के परिशिष्ट ‘अ’ के बिंदु क्रमांक-01 में जिला स्तर के चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों की पूर्ति हेतु चयन करने के लिए संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति में कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, जिले के संबंधित विभाग के कार्यालय प्रमुख एवं अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के नामांकित अधिकारी को बतौर सदस्य शामिल किया गया है।

चयन प्रक्रिया के विपरीत जाकर बनाया स्थाईकर्मी

रडार न्यूज़ को विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार आरईएस पन्ना के डीए आनंद दयाल ने दिनांक 12 फरवरी 2024 को अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग भोपाल को लिखे गए पत्र में दैवेभो को स्थाईकर्मी बनाए जाने के निर्णय पर आपत्तियों का उल्लेख किया है। जिसमें बताया गया है कि संदर्भित परिपत्र परिशिष्ट ‘अ’ के निर्देशानुसार दैवेभो को स्थाईकर्मी विनयमित करने (बनाने) की कार्रवाई चयन समिति द्वारा नहीं की गई। साथ ही पूर्व दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी घनश्याम रैकवार की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों को देखने से पता चलता है कि सिर्फ तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत पन्ना के अनुमोदन पर उसे स्थाईकर्मी बना दिया था। तब जिला पंचायत की कमान युवा आईएएस अफसर संघ प्रिय जिला हाथों में थी।
विनियमित करने की आपत्ति में लेख है कि, संदर्भित परिपत्र के अनुच्छेद 1.8 के अनुसार, “ऐसे दैनिक वेतन भोगी जो दिनांक 16 मई 2007 को कार्यरत थे व दिनांक 01 सितंबर 2016 को भी कार्यरत है, इस वेतन क्रम एवं अन्य लाभों के लिए पात्र होंगे।” यहां गौर करने वाली बात यह है कि, आरईएस ऑफिस पन्ना में घनश्याम द्वारा 2017 से सेवाएं देना प्रारंभ किया गया। प्रशासनिक प्रक्रिया के जानकारों का मानना है कि इस प्रकरण में आरईएस के प्रभारी कार्यपालन यंत्री कोरी एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा दैवेभो को मनमाने तरीके से स्थाईकर्मी बनाकर शासन के दिशा-निर्देशों के साथ मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम,1965 के नियम 3(1)(ii) एवं (iii), मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 (CCA Rules), मध्यप्रदेश कार्य विभागीय मैन्युअल (MP Works Manual), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(d) समेत अन्य नियम-कानूनों तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्पष्ट तौर पर उल्लंघन किया गया।

विनयमित किया, नियुक्ति नहीं की

दैवेभो कर्मचारी को स्थाईकर्मी बनाने पर जारी प्रपत्र-60 के संबंध में प्रभारी कार्यपालन यंत्री कोरी ने दिनांक 02 फ़रवरी 2024 को संभागीय लेखाधिकारी को दिए गए स्पष्टीकरण में विभाग के शीर्ष अधिकारी द्वारा जारी पत्र का हवाला देते हुए घनश्याम को स्थाईकर्मी में विनयमित करने की योजना का लाभ देने की प्रक्रिया/कार्रवाई को पूर्णतः सही ठहराया है। कार्यपालन यंत्री के अनुसार प्रमुख अभियंता (Engineer-in-Chief) ग्रामीण यांत्रिकी सेवा भोपाल के पत्र क्रमांक 6450/22/वि-3/ग्रा.यां.से./2016 भोपाल दिनांक के आधार पर कार्यालय में पदस्थ दैवेभो कर्मचारी घनश्याम रैकवार को स्थाईकर्मी में विनियमित करने की योजना का लाभ दिया गया है न की किसी प्रकार की नियुक्ति की गई है।
चयन समिति के जरिए नियुक्ति के सवाल पर बताया है कि सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र के विषय में भी स्पष्ट रूप से दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों के लिए स्थाईकर्मियों को विनियमित करने की योजना का उल्लेख है। जबकि परिपत्र के बिंदु क्रमांक 02 में उल्लेखित ‘संलग्न परिशिष्ट-अ’ स्थाईकर्मियों की नियुक्ति के संबंध जिस समिति का हवाला दिया है, वह समिति ‘कार्यरत दैनिक वेतन भोगी स्थाईकर्मियों को चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर नियमित सेवा के अधिक अवसर उपलब्ध जाने बावत’ (चयन प्रक्रिया) का गठन किया गया है, न की स्थाईकर्मी में विनियमित करने के लिए। दैवेभो घनश्याम को स्थाईकर्मी में विनियमित करने की सूचना आरईएस पन्ना के द्वारा पत्र क्रमांक-1894 के जरिए दिनांक 01 जून 2023 प्रमुख अभियंता को भेजी गई थी।

…तो फिर नौकरी से निकाला क्यों?

बीडी कोरी, प्रभारी कार्यपालन यंत्री, आरईएस पन्ना।
दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी घनश्याम को स्थाईकर्मी में विनयमित करने की प्रक्रिया/कार्यवाही को सही ठहरा रहे प्रभारी कार्यपालन यंत्री बीडी कोरी उसे सेवा से पृथक करने के अपने फैसले से जुड़े सवाल पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। स्वाभाविक सा सवाल है, अगर वाकई सबकुछ नियमानुसार किया गया था तो फिर घनश्याम रैकवार को अचानक नौकरी से निकाल क्यों दिया। जबकि स्थाईकर्मी के रूप में घनशयाम द्वारा आरईएस ऑफिस पन्ना लगभग छह माह तक अपनी सेवाएं दी गईं, जिसका उसे बकायदा वेतन भुगतान भी किया गया था। विदित हो कि, स्थाईकर्मी को नियमित कर्मचारी के समकक्ष माना जाता है। इसलिए स्थाईकर्मी में विनियमित होने के बाद घनश्याम रैकवार को सेवा से पृथक करने का निर्णय क्या वैधानिक दृष्टि से उचित है।
प्रभारी कार्यपालन यंत्री के पास इन सवालों के ठोस जवाब नहीं है। उनका कहना है, डीए की आपत्ति के चलते घनश्याम को नौकरी से हटाने का निर्णय लिया था। लेकिन वे यह नहीं बता पा रहे हैं कि, स्थाईकर्मी में विनियमित करने की कार्रवाई यदि नियमानुकूल एवं शासन के निर्देशनुसार की गई थी, तो उस पर डीए द्वारा दर्ज कराई गईं आपत्तियों का निराकरण किया जाना चाहिए या फिर स्थाईकर्मी को सेवा बाहर कर देना सही है। कुल मिलाकर इस अजब-गजब प्रकरण में कुछ तो ऐसा हुआ है जो कि पूर्णतः अनुचित है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उच्च न्यायालय इस मामले में क्या फैसला सुनाता है। इस संबंध आरईएस पन्ना के मौजूदा प्रभारी कार्यपालन यंत्री कोरी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया लेकिन कई बार रिंग जाने के बाद भी उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ।