पन्ना जिले के उत्तर सामान्य वनमण्डल की अजयगढ़ रेन्ज अंतर्गत बारिश में फूटा नवनिर्मित तालाब।
* पन्ना जिले के चर्चित उत्तर सामान्य वन मण्डल का मामला
* डीएफओ को नहीं थी जानकारी, बोले- आपके द्वारा भेजे गए वीडियो-फोटो से चला पता
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में पिछले माह जुलाई में हुई बारिश ने घटिया निर्माण कार्यों की पोल खोलकर रख दी है। लोक निर्माण विभाग की लगभग 60 करोड़ की लागत वाली नवनिर्मित 3 सड़कों के धंसने-गड्ढों में तब्दील होने एवं पुलियों-रपटों के बहने के कारण पन्ना से लेकर राजधानी भोपाल तक जबरदस्त हड़कंप मचा है। अब इसी कड़ी में पन्ना के उत्तर सामान्य वन मण्डल अंतर्गत वन क्षेत्र में निर्मित आधा दर्जन तालाब एवं परकोलेशन टैंक के फूटने का मामला सामने आया है। इनकी लागत लगभग 1 करोड़ रुपए के आसपास बताई जा रही है। उत्तर वनमंडल में व्याप्त अंधेरगर्दी का अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि, वन परिक्षेत्र अजयगढ़ एवं धरमपुर के जंगल में महीने भर से फूटी पड़ी जल संरचनाओं की डीएफओ गर्वित गंगवार को जानकारी ही नहीं थी। आज शाम मोबाइल पर हुई अनौपचारिक चर्चा के दौरान डीएफओ ने बिना किसी लागलपेट के स्वीकार किया ‘रडार न्यूज़’ द्वारा भेजे गए फोटो-वीडियो से उन्हें तालाबों एवं पी-टैंकों के क्षतिग्रस्त होने का पता चला। डीएफओ की इस स्वीकारोक्ति से उत्तर वन मंडल की बहुमूल्य वन संपदा की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवालिया लग गया है।
फाइल फोटो।
सूबे की मोहन सरकार के वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप अहिरवार के निर्वाचन क्षेत्र चंदला विधानसभा सीट की सीमा से लगे पन्ना जिले का उत्तर सामान्य वन मण्डल टाइगर-तेंदुओं की संदिग्ध मौत, सागौन की अवैध कटाई, वन क्षेत्र में हीरा-पत्थर के बेतहाशा अवैध खनन, वन भूमि पर अतिक्रमण और भारी भ्रष्टाचार के चलते पिछले कई महीनों से सुर्ख़ियों में बना है। उत्तर वन मण्डल हावी कमीशनखोरी और अराजकता को देखते यह कहना अतिश्यक्तिपूर्ण न होगा कि यहां जंगलराज चल रहा है। कथित प्री-पेड रीचार्ज व्यवस्था से मनचाही मैदानी पोस्टिंग पाने वाले अफसरों ने उत्तर वन मण्डल को चारागाह में तब्दील कर दिया है। वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा को पूरी तरह से श्रमिकों के भरोसे छोड़कर उत्तर वन मण्डल के वनरक्षक से लेकर बड़े अफसर विभागीय निर्माण कार्यों में ठेकेदारी, सामग्री खरीदी में कमीशनखोरी और हर महीने बिल-बाउचर भुगतान सुनिश्चित करवाकर अपने आर्थिक हित साधने के एक सूत्रीय अभियान में जुटे हैं। ज्यादा से ज्यादा राशि डकारने के चक्कर में वन विभाग के अफसरों के बीच मची होड़ ने विभागीय निर्माण कार्यों का दिवाला निकाल दिया है। जिसका ताज़ा उदाहरण वन परिक्षेत्र अजयगढ़ एवं धरमपुर अंतर्गत बारिश में क्षतिग्रस्त हुए आधा दर्जन तालाब और परकोलेशन टैंक (पी-टैंक) हैं।
अजयगढ़ रेंज की धवारी बीट अंतर्गत बारिश में क्षतिग्रस्त परकोलेशन टैंक।
बता दें कि, पिछले महीने हुई बारिश में बहने वाले अधिकांश तालाब एवं परकोलेशन टैंक का निर्माण हाल ही में हुआ था। जल संरक्षण से जुड़े इन कार्यों की गुणवत्ता का सहज अंदाजा सिर्फ इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी ये पहली बारिश भी नहीं झेल सके। बारिश ने उत्तर वन मण्डल में चल रहे घटिया निर्माण कार्यों एवं कमीशनखोरी के गोरखधंधे की पोल खोलकर रख दी है।
इन स्थानों पर फूटे तालाब
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार उत्तर वन मण्डल की अजयगढ़ रेंज अंतर्गत अटल भू-जल योजना से कुछ माह पूर्व निर्मित करीब 25 लाख की लागत का तालाब पहली बारिश में ही गुब्बारे की तरह फूट गया। अजयगढ़ रेंज की धवारी बीट में भी नवनिर्मित तालाब फूटा है। धावरी बीट में ही वर्ष 2025 में कैम्पा मद तथा आरडीएफ (विकास) से वर्ष 2022 से हुए पौधरोपण के नजदीक स्थित परकोलेशन टैंक और परकोलेशन पिट भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। धरमपुर रेंज अंतर्गत सिल्हाई बीट में निर्मित परकोलेशन टैंक के फूटने के वीडियो और तस्वीरें भी निकलकर आई हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो अजयगढ़ एवं धरमपुर रेंज की अन्य बीटों में भी अटल भू-जल योजना के तालाब फूटे हैं। साथ ही उत्तर वन मण्डल के अन्य वन परिक्षेत्रों देवेन्द्रनगर, पन्ना एवं विश्रामगंज में अन्य योजनाओं से बने तालाबों-परकोलेशन टैंक, परकोलेशन पिट के क्षतिग्रस्त होने की चर्चाएं भी दबी जुबान विभाग के अंदरखाने चल रही हैं।
इनका कहना है-
“बारिश में अजयगढ़ एवं धरमपुर रेंज अंतर्गत तालाब और परकोलेशन टैंक फूटने की मुझे जानकारी नहीं थी। आपके द्वारा भेजे गए वीडियो-फोटो से मुझे पता चला है। सभी रेंज ऑफिसर्स को जंगल में निर्मित जल संरचनाओं की स्थिति का भौतिक सत्यापन करके 3 दिवस के अंदर जानकारी भेजने के निर्देश दिए हैं। आपने जो फोटो भेजे हैं उसमें कुछ परकोलेशन पिट भी शामिल हैं। फील्ड से जानकारी आने के बाद जल संरचनाओं के फूटने के कारणों का पता लगाया जाएगा यदि कार्य की गुणवत्ता से समझौता होने के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधितों की जवाबदेही सुनिश्चित कर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।”
गर्वित गंगवार, डीएफओ, उत्तर सामान्य वनमण्डल, पन्ना।
पिकअप में मिली अवैध शराब मामले में प्रकरण पंजीबद्ध करने की मांग को लेकर रैपुरा थाना के बाहर नारेबाजी करते हुए भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ता।
* भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ताओं ने रैपुरा में पकड़ा था शराब से लोड पिकअप वाहन
* कार्यकर्ताओं का आरोप शराब परिवहन परमिट और शराब पेटियों में अंकित बैच नंबर में पाई गई भिन्नता
* जिला आबकारी अधिकारी पन्ना का दावा पिकअप में नियमानुसार ड्यूटी पैड शराब का हो रहा था परिवहन
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में शराब की अवैध बिक्री एवं तस्करी के मामले हर दिन सामने आने से जमकर बवाल मच रहा है। मौजूदा आबकारी ठेकेदार द्वारा गांव-गांव संचालित की जा रहीं शराब की अवैध दुकानों में शराब की बेरोकटोक डिलेवरी होने से आक्रोशित ग्रामीण आंदोलित हो रहे हैं। तेज़ी से फलफूल रहे शराब के अवैध कारोबार पर जिला प्रशासन के द्वारा प्रभावी रोक न लगाने के कारण ग्रामीणों एवं नशा मुक्ति आंदोलन चलाने वाले संगठन के कार्यकर्ताओं को मज़बूरी में आगे आना पड़ रहा है। आमजन के द्वारा पकड़ी जाने वाली अवैध शराब के मामलों में कार्यवाही को लेकर आबकारी और पुलिस महकमे की ढुलमुल रवैये के कारण तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो रही है। जिले के अजयगढ़ थाना अंतर्गत देवरा भापतपुर गांव के बाद अब रैपुरा क़स्बा में ऐसा ही मामला सामने आया है। सोमवार शाम भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा अवैध शराब से लोड पिकअप वाहन पकड़ने के मामले में आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध न होने से जमकर हंगामा बरपा है। ठोस कार्रवाई की मांग को लेकर अड़े भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ता रैपुरा थाना के बाहर पिछले 29 घंटे से अनवरत धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे हैं। समाचार लिखे जाने तक उनका आंदोलन जारी था।
जिले के दूरस्थ क़स्बा रैपुरा में सोमवार 11 जुलाई 2025 की शाम लगभग 6 बजे भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा सफ़ेद रंग के एक पिकअप वाहन को पकड़ा गया। जिसमें 121 पेटी शराब लोड थी। वाहन के चालक व हेल्पर के पास उपलब्ध परिवहन परमिट अनुसार कथित तौर पर मोहन्द्रा से बघवारकला दुकान के लिए शराब का परिवहन किया जाना था। लेकिन पिकअप वाहन को अवैध तरीके से रैपुरा लाया गया। भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ता कार्यवाही कराने पिकअप को स्थानीय पुलिस थाना ले गए। जहां थाना प्रभारी से आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करने की मांग की गई। कथित तौर पर थाना प्रभारी ने शराब की मात्रा अधिक होने का हवाला देते हुए कार्रवाई को लेकर आबकारी विभाग से सम्पर्क करने का सुझाव दिया।
अवैध शराब पकड़ने की सूचना मिलने पर सोमवार मध्य रात्रि में क्षेत्र के आबकारी निरीक्षक हरीश पांडेय रैपुरा पहुंचे। इस दौरान जब उनकी मौजूदगी में शराब परिवहन परमिट में दर्ज बैच नम्बर एवं शराब की पेटियों-बोतलों में अंकित बैच नंबर की जांच की गई तो दोनों में कथित भिन्नता पाई गई। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि, बैच नंबर में भिन्नता पाए जाने पर प्रथम दृष्टया अवैध शराब का मामला प्रतीत होने के बाद भी आबकारी निरीक्षक ने आबकारी एक्ट की धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध नहीं किया। नियमानुसार कार्यवाही न होने आक्रोशित भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ता पूरी रात और मंगलवार 12 अगस्त को रात्रि 11 बजे तक रैपुरा थाना के बाहर धरना-प्रदर्शन करते रहे। स्थानीय पुलिस बल द्वारा उन्हें थाना परिसर को खाली करने के लिए धमकाया गया जिसके चलते कई बार पुलिस से उनकी नोंकझोक भी हुई। कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया जब तक प्रकरण पंजीबद्ध करने की न्यायोचित मांग पूरी नहीं होती वे थाना परिसर में ही डटे रहेंगे।
शराब का अवैध परिवहन करते पकड़ी पिकअप से शराब की पेटियों को उतारकर रैपुरा थाना परिसर में रखते हुए भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ता।
आज (मंगलवार) देर शाम सहायक जिला आबकारी अधिकरी शम्भू दयाल जाटव एवं आबकारी निरीक्षक हरीश पाण्डेय ने रैपुरा पहुंचकर वहां धरना-प्रदर्शन कर रहे भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ताओं से विस्तृत चर्चा कर गतिरोध को समाप्त कराने का प्रयास किया। लेकिन देर रात्रि 11 बजे तक उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। आबकारी अधिकारियों की ओर से शराब मामले की जांच करने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्यवाही का आश्वासन दिए जाने पर आंदोलनरत कार्यकर्ता धरना-प्रदर्शन समाप्त करने के लिए राजी नहीं हुए। उनकी मांग थी कि प्रकरण दर्ज करने के बाद विस्तृत जांच की जाए। प्रदर्शकारियों का आरोप है, प्रथम दृष्टया शराब का अवैध परिवहन साबित होने के बाद भी पुलिस एवं आबकारी अधिकारी ठेकेदार को बचाने के लिए प्रकरण दर्ज करने से इंकार कर रहे हैं। शराब ठेकेदार से सांठगांठ के चलते प्रशासन स्वयं तो उसकी अवैध शराब को पकड़ता नहीं लेकिन आमलोग जब इस पर अंकुश लगाने की पहल करते हैं तो उन्हें प्रोत्साहित करने के बजाए हतोत्साहित किया जाता है।
इनका कहना है-
‘रैपुरा में सोमवार को पकड़ी गई शराब का ड्यूटी पैड करने के बाद नियमानुसार परिवहन किया जा रहा था। हमारे एडीओ साहब शम्भू दयाल जाटव और क्षेत्र के आबकारी निरीक्षक आज शाम से ही रैपुरा में मौजूद हैं। गतिरोध को समाप्त कराने उनके द्वारा भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ताओं से लगातार चर्चा की जा रही है। हमने उनके पास सन्देश पहुंचाया है, प्रकरण की विस्तृत जांच करने का अवसर दिया जाए, जांच में यदि शराब अवैध पाई जाती है तो संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।’
नरेश सिंह यादव, क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।
* वन संरक्षक वृत्त छतरपुर नरेश सिंह यादव ने क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व का अतिरिक्त कार्यभार ग्रहण किया
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या का शून्य से शतक तक पहुंचना बेमिशाल उपलब्धि है। पूरी दुनिया के लिए कौतुहल और शोध का विषय बनीं पन्ना की यह सफलता पूर्व के अधिकारियों एवं मैदानी वन अमले की कड़ी मेहनत, लगन और समर्पण का प्रतिफल है। पूर्व क्षेत्र संचालक आर श्रीनिवास मूर्ति का इसमें विशेष और अविस्मरणीय योगदान है। बाघों को पुनः आबाद करने के लिए यहां लोगों ने भी काफी त्याग किया है। ‘जन समर्थन से बाघ संरक्षण’ सिर्फ नारा नहीं बल्कि हमारा उद्देश्य है। पार्क क्षेत्र में बाघों एवं अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए सघन निगरानी और पैदल गश्ती पर विशेष जोर दिया जाएगा। वन अपराधों की रोकथाम के लिए मुखबिर तंत्र को भी अधिक सशक्त और सक्रिय करेंगे। साथ ही जन समर्थन से बाघ संरक्षण की भावना को मजबूत करने के लिए ईमानदार प्रयास किए जाएंगे। यह बात पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) के नवागत क्षेत्र संचालक नरेश सिंह यादव ने कही।
भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं वन संरक्षक, छतरपुर वृत्त (Conservator Forest) नरेश सिंह यादव ने सोमवार सुबह 10 बजे पन्ना पहुंचकर पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक का अतिरिक्त पदभार ग्रहण कर लिया। श्री यादव कुछ वर्ष पूर्व पन्ना में उत्तर वन मंडल डीएफओ के पद पर कार्यरत थे, इसलिए वे जिले की भौगौलिक स्थिति, वन्यजीव एवं वन संरक्षण से जुड़ी स्थानीय चुनौतियों से भलीभांति परिचित हैं। उम्मीद की जा रही पन्ना के संबंध में आपकी जानकारी और अनुभव का लाभ वन एवं वन्यजीव संरक्षण-संवर्धन पन्ना टाइगर रिजर्व को मिलेगा।
पदभार ग्रहण करने के बाद नवागत क्षेत्र संचालक (Field Director) नरेश सिंह यादव ने ‘रडार न्यूज़’ से विशेष चर्चा में कहा कि, बाघ संरक्षण में पन्ना के नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से सतत संवाद बनाए रखते हुए उनका सक्रिय सहयोग लिया जाएगा। पार्क की गतिविधियों में और अधिक पारदर्शिता लाई जाएगी। पार्क से जुड़ीं आवश्यक सूचनाएं अथवा जानकारी अब नियमित रूप से मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचेंगी। पार्क क्षेत्र के नजदीक स्थित गांवों के रहवासियों से नियमित रूप से सम्पर्क-संवाद स्थापित किया जाएगा। आपने बताया कि, मैंने पन्ना टाइगर रिजर्व की गश्ती के सबंध जानकारी प्राप्त की है। वर्तमान में मानसून सीजन सहित अन्य दिनों में भी पैदल गश्ती को बढ़ाया जाएगा ताकि चप्पे-चप्पे की सही जानकारी तुरंत मिल सके।
फाइल फोटो।
क्षेत्र संचालक श्री यादव ने कहा कि, मैं स्वयं भी पार्क का पैदल निरीक्षण और रात्रि में वनरक्षक आवास अथवा जांच नाकों में प्रवास करके धरातल पर पार्क की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था की समीक्षा करूंगा। आपने बताया कि उत्तर वन मण्डल पन्ना का डीएफओ रहते हुए पहले भी मैं इसी तरह कार्य करता रहा हूं। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि, आप मैदानी हालात से अवगत होते हैं। वहीं जंगल की सुरक्षा में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कर्मचारियों सुरक्षा श्रमिक, वनकर्मी, वनपाल, उप वनक्षेत्रपाल से सीधा संवाद होने से आपसी समन्वय और टीम भावना का विकास होता है।
पन्ना जिले अजयगढ़ थाना अंतर्गत देवरा भापतपुर गांव में ग्रामीणों द्वारा दबोंचे गए शराब तस्कर और उनसे जब्त अवैध देशी शराब।
* पन्ना जिले में शराब ठेका की आड़ में खुलेआम चल रहा माफियाराज
* अजयगढ़ सहित अन्य शराब दुकानों से शराब तस्करी के वीडियो आए दिन हो रहे वायरल
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के अति पिछड़े एवं गरीब जिलों में शामिल पन्ना में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में शराब ठेका की आड़ में संगठित माफ़ियाराज धड़ल्ले से चल रहा है। जिले में देशी एवं अंग्रेजी शराब की उपलब्धता 24X7 सुनिश्चित करके नोट छापने के मकसद से ठेकेदार ने गांव-गांव और गली-गली शराब की अवैध दुकानें खुलवा दी हैं। शराब की लाइसेंसी दुकानों से ठेकेदार के गुर्गे आसपास के गावों में खुलेआम शराब की डिलेवरी कर रहे हैं। शराब की अवैध बिक्री-तस्करी को कथित तौर पर स्थानीय प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की मूक सहमति प्राप्त होने से हालात तेज़ी से बद से बद्तर हो चुके हैं। जिसका अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि, वर्तमान में शांतिपूर्ण माहौल को बनाए रखने और अपने बच्चों को नशे से बचाने की चुनौती से जूझ रहे आमलोग अपना काम-धंधा छोड़कर अवैध शराब की धरपकड़ करने को मजबूर हैं। जिले के रैपुरा क़स्बा के बाद शनिवार को अजयगढ़ थाना अंतर्गत ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है।
अजयगढ़ के देवरा भापतपुर गांव में बिना नंबर की बाइक से शराब की तस्करी करते युवकों को ग्रामीणों ने रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद शराब तस्करों के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही कराने के लिए लगभग छह घंटे तक परेशान रहे ग्रामीणों का जो अनुभव रहा उससे जिले के आबकारी और पुलिस महकमे की मौजूदा कार्यप्रणाली की खबर मिलती है।
जिले के अजयगढ़ थाना अंतर्गत शनिवार 9 अगस्त को दोपहर लगभग 12 बजे शराब ठेकेदार के कथित दो कर्मचारी बिना नम्बर की मोटर साइकिल लेकर देवरा भापतपुर ग्राम पहुंचे तो ग्रामीणों ने घेराबंदी कर उन्हें दबोंच लिया। दोनों युवक चार पेटी देशी प्लेन शराब लिए थे। लेकिन उनके पास शराब की खरीदी और परिवहन से सम्बंधित आवश्यक वैध दस्तावेज मौजूद नहीं थे। ग्रामीणों द्वारा पूंछतांछ करने पर युवकों ने बताया कि वे शराब ठेकेदार के कर्मचारी हैं और क्षेत्र के गांवों में शराब पहुंचाने का काम करते हैं। रक्षाबंधन पर्व के पावन दिन गांवों में शराब की डिलेवरी से माहौल ख़राब होने की आशंका से आक्रोशित ग्रामीणों द्वारा शराब तस्करों के फोटो-वीडियो बनाए गए ताकि बाद में कार्यवाही में किसी तरह की कोई लीपापोती न हो सके।
पुलिस को पहुंचने 3 घंटे लगे
फाइल फोटो।
ग्रामीणों द्वारा शराब तस्करों को पकड़ने की सूचना तुरंत थाना पुलिस को दी गई। बता दें कि, हनमतपुर पुलिस चौकी से देवरा भापतपुर ग्राम पहुंचने में बमुश्किल 10-15 मिनिट लगते हैं। लेकिन सूचना देने के 3 घंटे बाद पुलिस जवान मौके पर पहुंचे। इस बीच पुलिस की इस सुस्ती का पूरा फायदा उठाते हुए दोनों तस्कर ग्रामीणों की पकड़ से भाग निकले। मौके पर पहुंचें पुलिसकर्मियों द्वारा ग्रामीणों से शराब की पेटियां और फरार आरोपियों की बाइक की मांग की गई। जिस पर ग्रामीणों ने पुलिस जवानों को आरोपियों के फोटो-वीडियो दिखाते हुए ठेकेदार से संपर्क करके आरोपियों को मौके पर लाकर उन्हीं से अवैध शराब और बाइक की जब्ती करने की बात कही। पुलिस जवान ग्रामीणों की इस मांग पर राजी नहीं हुए। दरअसल, ग्रामीण आशंकित थे कि शराब ठेकेदार से सांठगांठ के चलते पुलिस कहीं उल्टा उन्हें ही आरोपी न बना दे। कार्यवाही के तरीके और प्रक्रिया को लेकर बने गतिरोध के चलते पुलिसकर्मी खाली हाथ वापस लौट गए। शाम लगभग छह बजे जब पुलिस अधिकारियों और थाना प्रभारी अजयगढ़ के संज्ञान में मामला लाया गया तब कहीं जाकर शराब को जब्त करके प्रकरण पंजीबद्ध करने एवं फरार आरोपियों की धरपकड़ की कार्रवाई शुरू हो सकी। बता दें कि अजयगढ़ समेत जिले की अन्य शराब दुकानों से शराब की तस्करी के वीडियो आय दिन वायरल हो रहे हैं। जिससे आबकारी एवं पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आबकारी अधिकारी बोले निरीक्षक से बात करो
आबकारी ठेकेदार के लिए शराब की तस्करी करने वाले आरोपियों से जब्त अवैध शराब और मोटर साइकिल।
पुलिस जब काफी देर तक देवरा भापतपुर नहीं पहुंची तो ग्रामीणों ने क्षेत्रीय पत्रकार के जरिए आबकारी विभाग के अफसरों को कार्रवाई के लिए सूचित किया। पत्रकार आशीष यादव द्वारा दोपहर में करीब 1 बजे जिला आबकारी अधिकारी मुकेश मौर्य से सम्पर्क करने पर उन्होंने कहा, पन्ना से कार्रवाई के लिए स्टॉफ को भेजने में काफी समय लगेगा, अजयगढ़ क्षेत्र आबकारी निरीक्षक मुकेश पाण्डेय के कार्यक्षेत्र में आता है इसलिए आप उनसे बात कर लें। यहां गौर करने वाली बात यह है कि, आबकारी अधिकारी ने स्वयं अपने सहयोगी को सूचित कर कार्यवाही के लिए निर्देशित करने के बजाए पत्रकार को ही आबकारी निरीक्षक से सम्पर्क करने का सुझाव देकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
आबकारी अधिकारी के इस गैर जिम्मेदाराना रवैये समझा जा सकता है कि ठेकेदार की अवैध शराब पकड़ने को लेकर वे कितने संजीदा हैं। बात यहीं समाप्त नहीं होती! अगले ही पल आशीष ने आबकारी निरीक्षक से बात की तो उन्होंने जो कुछ बताया उससे आबकारी अधिकारी के सुझाव को लेकर और भी हैरानी हुई। पत्रकार आशीष यादव से आबकारी निरीक्षक मुकेश पाण्डेय ने कहा कि आज त्यौहार है इसलिए मैं पन्ना से बाहर हूँ, सतना आ गया था। आप ऐसा करें पुलिस से सम्पर्क कर उन्हें अवैध शराब की जानकारी दे दें।
विदित हो कि, नियमानुसार शासकीय कर्मचारी अगर अपना मुख्यालय छोड़कर बाहर जाता है तो उसे अपने वरिष्ठ अधिकारी को सूचित कर अनुमति लेनी होती है। यहां सवाल उठता है आबकारी निरीक्षक पाण्डेय जिला आबकारी अधिकारी से अनुमति लेकर मुख्यालय से बाहर गए थे या फिर उन्होंने बगैर अनुमति के मुख्यालय छोड़ा था। क्योंकि आबकारी अधिकारी सूचनाकर्ता को जब अपने निरीक्षक से सम्पर्क करने के लिए कहते हैं तो बहुत संभव है उन्हें पाण्डेय के पन्ना से बाहर होने की जानकारी नहीं रही होगी।
निरीक्षक बोला ठेकेदार के ऑफिस आ जाओ
उधर, मुख्यालय छोड़ने के बाद आबकारी निरीक्षक ने भी अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह आजाद होने वाले अंदाज में सूचनाकर्ता को पुलिस से संपर्क करने के लिए कह दिया। मजेदार बात यह है कि शाम के समय जब जिले के शीर्ष प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में मामले को लाया गया तो अपने ठेकेदार पर मेहरबान आबकारी विभाग के अफसरों में अंदरखाने हलचल शुरू हो गई। मामले के तूल पकड़ने पर बदनामी के डर से आबकारी निरीक्षक ने देर शाम पत्रकार से सम्पर्क कर कार्यवाही के संबंध में पूंछतांछ की। साथ ही अपनी तरफ से सफाई देते हुए बताया कि, मैं वापस लौट आया हूँ। मजेदार बात यह है आबकारी निरीक्षक पत्रकार से कहते हैं, आप आबकारी ठेकेदार के ऑफिस आ जाएं वहीं बैठकर बात करते हैं। पत्रकार ने आबकारी ठेकेदार के ऑफिस में आने से साफ़ इंकार करते हुए निरीक्षक मुकेश पाण्डेय को बताया शायद अजयगढ़ पुलिस ने प्रकरण पर कार्यवाही शुरू कर कर दी है आप चाहें तो थाना प्रभारी से बात कर लें। यहाँ घटनाक्रम के विस्तृत ब्योरे का उल्लेख आपको सिर्फ यह बताने के लिए किया गया है कि पन्ना जिले में वर्तमान में आबकारी ठेकेदार की अवैध शराब बिक्री एवं तस्करी की रोकथाम को लेकर जिम्मेदार कितने सजग, संवेदनशील और ईमानदार हैं। जिस ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही करनी है सूचनाकर्ता को उसी के ऑफिस में चर्चा के लिए बुलाने से निरीक्षक की मंशा का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
झोलाछाप (फर्जी) डॉक्टर को प्रशांत विश्वास को न्यायालय में पेश करने के लिए ले जाते हुए पुलिस जवान।
* बिना किसी चिकित्सीय योग्यता के कर रहा था ग्रामीणों का इलाज
पन्ना।(www.radarnews.in) जिले के रैपुरा थाना अंतर्गत गलत इलाज के कारण आदिवासी महिला की असमय मौत होने के मामले में साल भर से फरार चल रहे झोलाछाप (फर्जी) डॉक्टर को पन्ना पुलिस ने उत्तर प्रदेश के महोबा से गिरफ्तार किया है। आरोपी प्रशांत विश्वास 28 वर्ष के विरुद्ध थाना रैपुरा में अपराध क्रमांक 134/24 धारा 304 ए भारतीय दंड विधान एवं धारा 24 मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम, 1987 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध है। आरोपी झोलाछाप डॉक्टर बिना किसी चिकित्सीय योग्यता के थाना रैपुरा थाना अंतर्गत बघवारकला ग्राम में अवैध क्लीनिक संचालित कर ग्रामीणों का इलाज करता था।
सोशल मीडिया पर पुलिस के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार फरियादी सुरेन्द्र सिंह आदिवासी निवासी ग्राम लखनचौरी दिनांक 13 जून 2024 थाना रैपुरा आकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी मां प्रकाश रानी आदिवासी का इलाज बघवारकला में स्थित एक कथित बंगाली डॉक्टर प्रशांत विश्वास द्वारा किया गया। इलाज के दौरान प्रशांत विश्वास द्वारा प्रकाश रानी को इंजेक्शन, बोतल एवं दवाएं दी गईं। इंजेक्शन लगाए जाने के तुरंत बाद सुरेन्द्र की मां की अचानक तेजी से तबियत बिगड़ी और कुछ ही देर में मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। फरियादी की रिपोर्ट पर पुलिस द्वारा मर्ग क्रमांक 16/2024 पंजीबद्ध कर जांच में लिया गया। मृतिका का पोस्टमार्टम रैपुरा में कराया गया। मर्ग जांच के दौरान मृतिका की पोस्टमार्टम क्यूरी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया, कि दी गई दवाएं मरीज की स्थिति के अनुरूप नहीं थीं। इंजेक्शन गलत रूट से दिया गया। साथ ही दवाओं के ओवरडोज तथा संभावित ड्रग टॉक्सिसिटी एवं हाइपरसेंसिटिविटी के कारण मरीज की मृत्यु होना संभव है।
विवेचना दौरान यह तथ्य उजागर हुआ कि आरोपी प्रशांत विश्वास न तो किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सा संस्थान से प्रशिक्षित है, न ही उसके पास कोई चिकित्सकीय पंजीयन अथवा प्रमाण पत्र है। उसने सिर्फ 12वीं कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त की है। इसके बावजूद वह लंबे समय से अवैध रूप से चिकित्सकीय गतिविधियों में संलिप्त था। पीएम रिपोर्ट एवं अन्य तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि आरोपी प्रशांत विश्वास द्वारा यह जानते हुए कि उसके पास चिकित्सा का विधिक ज्ञान एवं आवश्यक योग्यता नहीं है, फिर भी उसने गंभीर चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनाई थी। जिससे मरीज की मृत्यु हो गई थी। आरोपी घटना के बाद से ही लगातार फरार चल रहा था। रैपुरा थाना पुलिस ने मुखबिर तंत्र के सहयोग से आरोपी प्रशांत विश्वास पिता प्रभात विश्वास 28 वर्ष निवासी ग्राम ढाका पाड़ा थाना गाई पाड़ा जिला उत्तर 24 परगना पश्चिम बंगाल को उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद अंतर्गत सौनकपुर से गिरफ्तार करने का दावा किया है। आरोपी को ज्यूडिशियल रिमांड पर न्यायालय पवई में पेश किया गया है।
कार्यालय कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग संभाग पन्ना। (फाइल फोटो)
* पहली बारिश में ही बह गया 10 करोड़ की लागत वाली छतैनी सड़क पर बना रपटा
* बारिश के सीजन में आवागमन अवरुद्ध होने क्षेत्रवासियों की बढ़ी मुश्किलें
* जान जोखिम में डालकर ख़तरनाक़ नाला पार करने को मजबूर हैं ग्रामीण
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के अति पिछड़े पन्ना जिले में लोक निर्माण विभाग के निर्माण कार्यों में वृहद पैमाने पर चल रहे भ्रष्टाचार के खेल की बारिश ने पोल खोलकर रख दी है। केन्द्रीय सड़क निधि योजना (CRF) से लगभग 40 करोड़ की लागत से नवनिर्मित सकरिया-गुनौर-डिघौरा सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढों को छिपाने के लिए बारिश के रुकने का इंतज़ार न करके आनन-फानन में पेंच रिपेयरिंग करा दी। सीआरएफ सड़क पर पैबंद लगवाकर पीडब्ल्यूडी के तकनीकी अधिकारियों ने अभी राहत की सांस ली ही थी कि तभी पन्ना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत जिला खनिज प्रतिष्ठान मद से 10 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन भैरहा-श्रीशोभन-पिपरहाई-छतैनी मार्ग का रपटा बहने की खबर आ गई।
पन्ना जिले के अजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत भैरहा-श्रीशोभन-पिपरहाई-छतैनी मार्ग पर निर्मित छतैनी का रपटा पहली बारिश में ही बह गया।
छतैनी के खड़ारा नाला पर बने रपटा की फेसवॉल पहली ही बारिश में पूरी तरह ढह गई और नाले के तेज बहाव में ह्यूम पाइप बहने से आवागमन पूरी तरह से अवरुद्ध हो चुका है। कथित घटिया निर्माण कार्य का दंश झेल रहे क्षेत्रवासी बारिश के सीजन में पूर्व की तरह जान जोखिम में डालकर नाला पार करने को मजबूर हैं। लोक निर्माण से लोक कल्याण के बड़े-बड़े दावे करने वाली सूबे की मोहन सरकार और क्षेत्र के जनप्रतिनिधि निर्माण कार्यों में हो रहे भ्रष्टाचार पर पूरी तरह से मौन हैं।
जिले के अजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत आने वाले श्रीशोभन-पिपरहाई-छतैनी ग्राम हर साल बारिश के सीजन में टापू में तब्दील हो जाते थे। दरअसल इन गावों के पहुंच मार्ग पर पड़ने वाले नदी-नालों पर कोई पुल-पुलिया या रपटा नहीं बना था। साथ ही रास्ता कच्चा होने से मानसून सीजन में कीचड़-दलदल से सराबोर हो जाता था। बारिश के सीजन में क्षेत्रीय ग्रामीणों को आवागमन में होने वाली भारी परेशानी को देखते हुए उन्हें इससे निजात दिलाने के लिए साल लोक निर्माण विभाग के तकनीकी अधिकारियों द्वारा करीब 3 वर्ष पूर्व सड़क निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया। फलस्वरूप दिनांक 4 अक्टूबर 2023 को छतैनी सड़क निर्माण के लिए डीएमएफ फंड से 9 करोड़ 35 लाख रुपए की स्वीकृति मिल गई। लगभग 7 किलोमीटर की लंबाई वाली इस सड़क में 7 पुलियों एवं 1 रपटा का निर्माण शामिल है।
बारिश में क्षतिग्रस्त हुआ रपटा।
बारहमासी आवागमन सुविधा प्रदान करने वाली सड़क की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी होने से क्षेत्रीय ग्रामीण कल तक काफी प्रसन्न नजर आ रहे थे लेकिन निर्माण कार्य शुरू होते ही उसमें कथित लीपापोती का खेल शुरू होने से ग्रामीणों की ख़ुशी देखते ही देखते नाराजगी में तब्दील होती चली गई। सड़क का अर्थवर्क गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप न होने एवं पुलियों तथा रपटा निर्माण में बगैर किसी अनुमति के स्थानीय नालों की मिट्टीयुक्त रेत का धड़ल्ले से उपयोग किए जाने पर युवा समाजसेवी संजय सिंह राजपूत एवं क्षेत्रवासियों ने कई बार कड़ी आपत्ति जताई। साथ ही घटिया निर्माण की लिखित शिकायत शासन-प्रशासन समेत भ्रष्टाचार की रोकथाम करने वाली एजेंसियों से भी की गई। लेकिन लोनिवि अधिकारियों से सांठगांठ के चलते ठेकेदार की मनमानी बदस्तूर जारी रही। युवा समाजसेवी संजय सिंह राजपूत का आरोप है कि सड़क ठेकेदार अशोक गुप्ता सत्तारूढ़ दल भाजपा के बड़े नेता हैं इसलिए क्षेत्रवासियों की शिकायत पर जांच के नाम पर पत्राचार का खेल करते हुए महज़ औपचारिकता निभाई जा रही है।
घटिया निर्माण के चलते बह गया रपटा
भैरहा-श्रीशोभन-पिपरहाई-छतैनी मार्ग पर छतैनी नाला पर बना रपटा गत दिनों पानी के तेज बह गया था। पहली बारिश में ही रपटा के बहने से प्रभावित क्षेत्रवासियों की नाराज़गी स्वाभाविक है। समाजवादी पार्टी के नेता देवेन्द्र सिंह लोधी पप्पू का कहना है शासन-प्रशासन के शीर्ष पदों पर आसीन महानुभाव अगर समय रहते हम क्षेत्रवासियों की घटिया निर्माण कार्य की शिकायत का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराते तो आज शायद यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति निर्मित न होती। लेकिन ठेकेदार का सत्तारूढ़ दल से सीधा कनेक्शन होने और कथित कमीशन के चक्कर में जिम्मेदार घटिया निर्माण को जानबूझकर नजरअंदाज करते रहे। परिणामस्वरूप विगत दिनों हुई बारिश के चलते छतैनी नाला में पानी का दवाब बढ़ने पर रपटा की फेसवॉल और ह्यूम पाइप बह गए।
समाजवादी पार्टी नेता देवेन्द्र सिंह लोधी।
क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है, लाखों रुपये की लागत से निर्मित रपटा के बहने के लिए गुणवत्ताविहीन कार्य कराने वाला ठेकेदार एवं पीडब्ल्यूडी के अधिकारी जिम्मेदार हैं। ग्रामीणों ने उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही की मांग की है। सपा नेता देवेन्द्र ने भैरहा और छतैनी में रपटा के स्थान पर मीडियम ब्रिज का निर्माण कराने की मांग उठाई है। क्योंकि तेज बारिश होने पर दोनों ही रपटा कई फिट तक पानी में डूब जाते हैं।
निर्माण अधूरा था तभी अतिवृष्टि हो गई
लोक निर्माण विभाग संभाग पन्ना के प्रभारी कार्यपालन यंत्री जेपी सोनकर छतैनी रपटा का निर्माण कार्य गुणवत्ताविहीन होने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहते हैं यह सब बातें पूर्णतः निराधार है। उनके अनुसार रपटा का निर्माण कार्य अपूर्ण था और इसी दौरान पिछले माह जिले में अतिवृष्टि होने से छतैनी नाला का जलस्तर 15-20 फिट तक बढ़ गया। जाहिर सी बात है, विपुल जलराशि का दवाब एवं तेज प्रवाह अधूरा रपटा नहीं झेल पाया और क्षतिग्रस्त हो गया। कार्यपालन यंत्री श्री सोनकर बुधवार 6 अगस्त को अजयगढ़ क्षेत्र के भ्रमण पर थे, इस दौरान उन्होंने छतैनी पहुंचकर क्षतिग्रस्त रपटा का निरीक्षण किया। श्री सोनकर ने बताया कि इसी मार्ग पर भैरहा में ठेकेदार ने 38 रो ह्यूम पाइप का बड़ा रपटा बनाया है। अतिवृष्टि के दौरान उसके ऊपर से भी पहली बार में ही 12-15 फिट तक पानी निकल गया लेकिन रपटा का कुछ नहीं बिगड़ा। अपने दावे के समर्थन में उनके द्वारा रडार न्यूज़ को भैरहा रपटा के जियो टैग फोटो भेजे गए।
भैरहा-श्रीशोभन-पिपरहाई-छतैनी मार्ग पर भैरहा ग्राम में निर्मित रपटे का लोनिवि कार्यपालन यंत्री द्वारा उपलब्ध कराया गया चित्र।
एक सवाल के जवाब में श्री सोनकर ने बताया, छतैनी रपटा की फेसवॉल की ऊंचाई अधिक नहीं थी, वहां तक हमें निर्माण करना था लेकिन बारिश जल्दी होने से कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका। छतैनी के 7 रो ह्यूम पाइप रपटा का निर्माण भी भैरहा की ही तर्ज पर होना था। आपने कहा कि, जिन लोगों को ऐसा लगता है कि छतैनी रपटा घटिया निर्माण की वजह से क्षतिग्रस्त हुआ है तो वह मौके पर डैमेज स्ट्रक्चर की कोर कटिंग करके किसी भी लैब में जांच करवा सकते हैं। जहां तक ग्रामीणों की असुविधा का सवाल है तो नाला पर पहले कभी रपटा नहीं बना था, लोगों को अब तक नाला में उतरकर ही आवागमन करना पड़ता था। ग्रामीणों को पहली बार बारहमासी आवागमन सुविधा प्रदान करने की दिशा में काम जारी है, बारिश की वजह से इसमें थोड़ा विलंब हुआ जिसका हमें खेद है।
* पन्ना में पदस्थ ड्रग इंस्पेक्टर राजधानी भोपाल में अटैच
* जिले में पंजीकृत 3 सौ दवा दुकानों की निगरानी की नहीं व्यवस्था
पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के अति पिछड़े पन्ना जिले में कथित तौर पर नकली, नशीली एवं जोशवर्धक दवाओं का गैरकानूनी कारोबार संचालित होने की ख़बरें बीच-बीच में लगातार सुनाई देती रही हैं। अब इसी कड़ी में एक्सपायरी दवाओं की बिक्री का मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय पन्ना में स्थित सबसे बड़ी दवा दुकान राज मेडिकल स्टोर पर जिला पंचायत से जुड़ीं एक महिला जनप्रतिनिधि को एक्सपायरी डेट की दवाएं बेंचने का आरोप है। महिला जनप्रतिनिधि द्वारा इस मामले की शिकायत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से की गई। मामला जिले के प्रशासनिक मुखिया कलेक्टर सुरेश कुमार के संज्ञान में होने की भी जानकारी मिली है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि एक्सपायरी डेट की दवा बिक्री महज़ लापरवाही का नतीज़ा है या फिर मामला कुछ ओर ही है। प्रकरण गंभीर होने के बावजूद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा तत्काल प्रभाव से कोई एक्शन न लेना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
जिला पंचायत पन्ना की अध्यक्ष मीना राजे परमार को बीते दिवस राज मेडिकल स्टोर से एक्सपायरी डेट की दवाओं की बिक्री कर दी गई। जिला पंचायत अध्यक्ष ने जब दवाओं पर गौर किया तो वह दंग रह गईं, क्योंकि उनके उपयोग की अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी थी। उन्होंने आनन-फानन इसकी सूचना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (पदेन उपसंचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन) को दी। जब इस संबंध में जिला पंचायत अध्यक्ष से संपर्क किया तो उन्होंने एक्सपायरी डेट की दवाइयां प्राप्त होने की बात स्वीकार की। उक्त दवाओं के सेवन से किसी तरह की कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या न होने की जानकारी देते हुए आपने बताया मैं स्वयं इसे देख लूंगी, बस इतना कहकर उन्होंने फोन काट दिया।
वहीं राज मेडिकल स्टोर संचालक ने बिना किसी लाग-लपेट के इस मामले को अपने कर्मचारी की गलती (लापरवाही) बताया है। उन्होंने बताया कि छांटकर अलग की गई एक्सपायरी दवाओं की भूलवश डिलेवरी कर दी थी लेकिन जैसे ही यह बात संज्ञान में आई तो बिना किसी देरी के बदलकर दूसरी दवाएं दी गईं। राज मेडिकल स्टोर संचालक पुष्पराज पाटकर ने कहा कि, हम अपने ग्राहकों की सेहत और सुरक्षा के साथ कभी कोई समझौता नहीं करते। नियम-कानूनों का पालन करते हुए अपने ग्राहकों को सही दवाएं देना कई दशकों से हमारी पहचान और विश्वसनीयता का सबसे मजबूत पक्ष है। इस भरोसे को आगे भी कायम रखने के लिए हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
शिकायत मिलने पर आई डीआई की याद
एक्सपायरी डेट की दवा बिक्री संबंधी शिकायत प्राप्त होने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तिवारी ने पन्ना में पदस्थ डीआई को तलब किया तो उन्हें पता चला कि जिले के अतिरिक्त प्रभार पर रहे ड्रग इंस्पेक्टर का अन्यत्र तबादला हो चुका है। उनके स्थान पर पन्ना में महिला औषधि निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर) को पदस्थ किया गया था। लेकिन वह राजधानी भोपाल में स्थित मुख्यालय में अटैच हैं। सीएमएचओ ने महिला औषधि निरीक्षक का मोबाइल नंबर खंगालकर उनसे बात की और उन्हें पन्ना में अपनी सेवाएं देने के लिए कहा। सीएमएचओ डॉ. तिवारी के अनुसार यदि डीआई शीघ्र ही पन्ना में आकर अपनी सेवाएं नहीं देती तो उनका अटैचमेंट समाप्त करवाने के लिए कलेक्टर सर का पत्र नियंत्रक औषधि प्रशासन को प्रेषित किया जाएगा।
बता दें कि डॉ. तिवारी को पन्ना में प्रभारी सीएमएचओ के रूप पदस्थ हुए लगभग दो माह हो चुके हैं लेकिन हालिया घटनाक्रम के पूर्व उन्हें डीआई की पदस्थापना के संबंध कोई जानकारी ही नहीं थी। सवाल उठता है, डीआई अगर पन्ना लौट भी आती हैं तो क्या वह अकेले जिले भर के लगभग 300 मेडिकल स्टोर्स की नियमित रूप से निगरानी कैसे कर पायेंगी। दवा दुकानों का संचालन नियम-कानूनों के अनुसार हो इसके लिए जरुरी है कि डीआई का अटेचमेंट समाप्त करवाकर उन्हें पन्ना लाया जाए साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर जिला स्तरीय/खंड स्तरीय कमेटियों से मेडिकल स्टोर का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित कराया जाए।
अजयगढ़ की दवा दुकानों पर पड़े थे छापे
उल्लेखनीय है कि, जिले में दवाओं के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए कुछ माह पूर्व तत्कालीन ड्रग इंस्पेक्टर रामलखन पटेल के नेतृत्व में अजयगढ़ स्थित दवा दुकानों पर छापामार कार्रवाई की गई थी। लेकिन इसकी जद में आने से बचने के अजयगढ़ के अधिकांश केमिस्ट अपनी दुकानें बंद कर भूमिगत हो गए थे। जिले में कई वर्षों बाद दवा दुकानों पर की गई यह पहली बड़ी कार्रवाई थी, जिससे केमिस्टों (दवा दुकानदारों) में हड़कंप मचना स्वाभाविक था। छापामार कार्यवाही में दवा दुकानों में किस तरह की अनियमितताएं पाई गईं और उस पर संबंधितों के विरुद्ध क्या कार्यवाही सुनिश्चित की गई इसकी जानकारी मीडिया को आज तक नहीं दी गई। सूत्रों से पता चला है कि पन्ना जिले में अधिकांश दवा दुकानें किराए के फार्मेसी लाइसेंस पर संचालित हैं। अर्थात फार्मेसी काउंसिल का पंजीयन जिस व्यक्ति के नाम पर है उसकी जगह दवा दुकान कोई और चला रहा है। दवा दुकानें निर्धारित योग्यता-पात्रताधारी द्वारा संचालित न करने के ही कारण आए दी गड़बड़ी की ख़बरें मिल रहीं है। इनकी रोकथाम के लिए दवा दुकानों का नियमित निरीक्षण बेहद आवश्यक है।
* कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने स्टेडियम के विकास कार्यों के संबंध में ली बैठक
पन्ना। राज्यसभा सांसद एवं केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डाॅ. एल. मुरूगन द्वारा नज़रबाग (छत्रसाल) स्टेडियम में युवाओं एवं खिलाड़ियों की सुविधाओं के दृष्टिगत सांसद निधि से विभिन्न विकास कार्यों के लिए 2 करोड़ रूपए राशि की स्वीकृति प्रदान की गई है। शनिवार को कलेक्टर सुरेश कुमार एवं पुलिस अधीक्षक साईं कृष्ण एस थोटा ने स्टेडियम परिसर में विकास कार्यों के संबंध में संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की। मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल दमोह द्वारा उक्त कार्य करवाया जाएगा। इसके दृष्टिगत हाउसिंग बोर्ड के कार्यपालन यंत्री आर.के. बाथम को एक सप्ताह में आवश्यक सर्वे कार्य पूर्ण करने तथा पूर्व से स्वीकृत कार्यों का परीक्षण कर निर्धारित कार्य योजनानुसार नवीन कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए। यहां फ्लड लाइट सहित अन्य कार्य भी पृथक से होंगे, जबकि निर्धारित राशि से तय कार्यों को पूर्ण किया जाएगा।
कलेक्टर ने निर्माण एजेंसी के अधिकारी से कार्यों के संबंध में विस्तृत चर्चा कर गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के लिए कहा। साथ ही प्रस्तावित कार्यों की पूर्व तैयारी के संबंध में भी विचार विमर्श किया। यहां प्रथम चरण में स्वीमिंग पूल एवं टेनिस कोर्ट के निर्माण सहित अन्य विकास कार्य कराए जाएंगे। साथ ही भविष्य में अन्य आवश्यक कार्यों का प्रस्ताव भी भेजा जाएगा। इस दौरान तलैया फील्ड में पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन एवं नगर पालिका द्वारा संचालित कार्यों की जानकारी लेकर आवश्यक समन्वय के निर्देश भी दिए।
कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा परिसर में निर्माणाधीन बहुउद्देशीय भवन के कार्यों तथा प्रस्तावित कार्यों के संबंध में स्थल का अवलोकन भी किया गया। साथ ही अन्य मार्गों से अतिक्रमण हटवाकर स्टेडियम पहुंच मार्ग को सुगम बनाने के लिए भी निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक द्वारा युवा खिलाड़ियों की सुविधाओं के दृष्टिगत महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। बैठक में संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
पन्ना। कलेक्टर न्यायालय पन्ना द्वारा ग्राम पवई स्थित सर्वे नंबर 3971 रकवा 1.114 हेक्टेयर भूमि पर छोटे-छोटे भू-खण्ड विक्रय कर अनधिकृत काॅलोनी निर्माण के संबंध में क्षेत्र की आम जनता एवं जनसामान्य को आवश्यक कार्यवाही के संबंध में सूचित किया गया है। अनावेदकगण पन्नालाल, विन्द्रावन, दिलीप, विनोद कुमार, सुहद्री बाई, राधा बाई, गीता बाई एवं सुमन बाई सभी पुत्र एवं पुत्री भगवानदास पटेल निवासी तहसील पवई द्वारा बगैर काॅलोनी निर्माण का रजिस्ट्रीकरण प्रमाण पत्र एवं काॅलोनी विकास की अनुज्ञा के बिना अनधिकृत काॅलोनी का निर्माण किया जा रहा था। इनके द्वारा नगर तथा ग्राम निवेश से ले आउट स्वीकृति, अनापत्ति प्रमाण पत्र भी प्राप्त नहीं किया गया एवं न ही रेरा में पंजीयन करवाया गया। काॅलोनी में किसी भी प्रकार का आंतरिक विकास भी नहीं कराया गया।
कलेक्टर सुरेश कुमार द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पवई की आदेश पत्रिका के साथ संलग्न राजस्व निरीक्षक प्रतिवेदन के आधार पर अनधिकृत काॅलोनी घोषित करने के संबंध में कार्रवाई की जा रही है। किसी भी व्यक्ति द्वारा इस संबंध में अपनी आपत्ति कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत की जा सकती है।
पन्ना के कमलाबाई तालाब में जलयोग कर नशा मुक्ति का सन्देश देते युवा पत्रकार संजय सिंह राजपूत।
* बिना किसी सहारे के पानी की सतह पर लेट कर लिखा नशामुक्ति पर निबंध
* मोबाइल चलाया, न्यूज़ पेपर पढ़ा और पोस्टर दिखाकर नशे से दूर रहने की अपील
पन्ना। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा नशे से दूरी है जरूरी कार्यक्रम के तहत 15 जुलाई से 30 जुलाई तक चलाए गए जन जागरूकता अभियान के आखिरी दिन आज बुधवार 30 जुलाई 2025 को पन्ना नगर के सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार संजय सिंह राजपूत के द्वारा जलयोग और पानी में अद्भुत कला का प्रदर्शन कर नशामुक्ति का संदेश दिया गया। सुबह लगभग 10 बजे बायपास रोड पन्ना में स्थित कमलाबाई के ताल में कई गणमान्य नागरिकों एवं पत्रकारों की उपस्थिति में संजय सिंह राजपूत के द्वारा पानी की सतह पर लाकर पहले एक पेज का नशा मुक्ति के संबंध में निबंध लिखा गया उसके बाद उन्होंने पानी की सतह पर लेटे-लेटे ही अखबार पड़ा और फिर मोबाइल भी चलाया जिसमें वीडियो कॉल पर दो व्यक्तियों से बात की एवं इसके बाद नशे से दूरी है जरूरी कार्यक्रम का पोस्टर हाथों में लेकर नशामुक्ति का संदेश दिया।
युवा पत्रकार श्री राजपूत ने बताया कि यह क्रिया कोई भी कर सकता है किसी भी उम्र और किसी भी वजन का व्यक्ति केवल नियमित अभ्यास और शारीरिक संतुलन से जलयोग एवं जल की यह समस्त क्रियाएं कर सकता है। संजय ने आगे बताया कि यह क्रिया उन्होंने 17 साल की उम्र में प्रारंभ की थी तब उनका वजन लगभग 50 किलो था आज श्री राजपूत का वजन 120 किलो से अधिक है लेकिन वह जल की सभी क्रियाएं आसानी से कर सकते हैं।
युवा पत्रकार संजय सिंह राजपूत तालाब के पानी की सतह पर रोजाना 1-2 घंटे लेटे हुए बड़ी सुगमता से करते हैं अपने दैनिक कार्य।
संजय ने नशे के दुष्परिणामों के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि अधिकतर दुर्घटनाएं विवाद लड़ाई झगड़ा एवं अपराध नशे की वजह से ही होते हैं नशे की वजह से ही घरेलू हिंसा एवं मानसिक तनाव उत्पन्न होता है और लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाते हैं नशे के आदि व्यक्ति की संतान में भी समस्या आ सकती है ऐसे खतरनाक नशीले पदार्थों का सेवन करना स्वयं एवं आने वाली पीढ़ी के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है इसलिए नशे से दूर रहकर शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहकर अच्छे नागरिक बन सकते हैं।