* रात के अंधेरे में प्लास्टिक के डिब्बों में भरकर ले जा रहा था मांस
* शातिर शिकारी के कब्जे से 30 किलो मांस और मोटरसाइकिल जब्त
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) होली की पार्टी के लिए जंगली सूअर का शिकार करने वाले शातिर शिकारी की चालाकी काम नहीं आई! मांस को प्लास्टिक के डिब्बों में भरकर रात के अंधेरे में बाइक से ले जा रहे आरोपी को वनकर्मियों ने आखिरकार कड़ी मशक्कत के बाद घेराबंदी कर पकड़ लिया। घटना पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना बफर रेंज के इलाके की है। आरोपी रामू पिता राममिलन सोनकर 28 वर्ष निवासी नरैनी जिला बांदा उत्तर प्रदेश हाल निवास अजयगढ़ जिला पन्ना के कब्जे से वन अमले ने 30 किलोग्राम मांस, मोटरसाइकिल, प्लास्टिक के दो डिब्बे और मांस काटने प्रयुक्त छुरा जब्त किया है। पन्ना बफर रेंज के वन परिक्षेत्राधिकारी अमर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि होली पर्व के मद्देनजर वन अपराध की रोकथाम को लेकर स्टॉफ अलर्ट मोड में था। रेंज के संवेदनशील इलाकों में रात्रि में सघन गश्ती की जा रही थी। इसी दौरान शुक्रवार 14 मार्च को देर शाम काले रंग की बिना नंबर की स्पलेंडर मोटरसाइकिल से सलैया से अजयगढ़ की ओर जा रहे एक संदिग्ध युवक के संबंध सूचना प्राप्त हुई। बाइक में पीछे प्लास्टिक के दो डिब्बे टांगकर ले जा रहे युवक को सलैया के नजदीक जब वनकर्मियों ने रोकने का प्रयास किया तो वह तेजी से भाग निकला।
रेंजर अमर सिंह के नेतृत्व में वनकर्मियों के द्वारा करीब 15 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद हनुमतपुर में घेराबंदी कर आखिरकार आरोपी को दबोंच लिया। दरअसल हनुमतपुर में वनकर्मियों के मुस्तैदी से तैनात होने के चलते शातिर शिकारी भागने में सफल नहीं हो सका। पूछताछ करने पर आरोपी ने अपना नाम-पता रामू पिता राममिलन सोनकर 28 वर्ष निवासी नरैनी हाल निवास अजयगढ़ बताया। प्लास्टिक के डिब्बों को खोलने पर उनमें जंगली सूअर का लगभग 30 किलोग्राम मांस पाया गया। रेंजर अमर सिंह ने बताया कि आरोपी रामू ने सलैया बीट में शिकार की घटना को अंजाम देना स्वीकार किया है। आरोपी के विरुद्ध वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत वन अपराध पंजीबद्ध कर मामले को जांच में लिया है। आज शाम आरोपी युवक को अजयगढ़ के न्यायालय में पेश किया गया जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल पन्ना भेजा गया है।
कुड़रा के जंगल में नीलगाय का शव मिलने का दावा करने वाले व्यक्ति द्वारा उपलब्ध कराया गया फोटो।
* शिकार से जुड़े वीडियो वायरल होने के बाद गायब हुए शव
* उत्तर वन मण्डल पन्ना की धरमपुर रेंज के कुड़रा जंगल का मामला
* डीएफओ बोले- सर्च कराने पर नहीं मिले शव, वीडियो अन्य स्थान के हो सकते हैं
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में सक्रिय सागौन तस्करों की घेराबंदी को लेकर बीते दिवस स्थानीय मीडिया में उत्तर वन मण्डल के मैदानी अमले की सजगता और जांबाजी के चर्चे जब जोरशोर से हो रहे थे उसी समय जंगल के रखवालों की कथित घोर लापरवाही की पोल खोलने वाले कुछ वीडियो वायरल थे। कथित तौर पर जंगल में करंट का तार बिछाकर बेजुबान वन्य जीवों के शिकार की घटना को अज्ञात अपराधियों द्वारा अंजाम देने के सप्ताह भर बाद भी वन अमले को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। अत्यंत ही हैरान करने वाली इस घटना का खुलासा उस वक्त हुआ जब कुछ लोग अपनी गुमी हुई भैंस को खोजने जंगल की ख़ाक छान रहे थे। सड़ांध मार रहे नीलगाय के शव एवं एक अन्य वन्य प्राणी के कंकाल के वीडियो, फोटोग्राफ्स उत्तर वन मण्डल के अफसरों को भेजकर घटना की जानकारी दी गई। इसके चंद घण्टे बाद मामले में आए ट्विस्ट ने हर किसी को चकित कर दिया है। अपनी तस्दीक के आधार वन विभाग के अफसर ऐसी किसी भी घटना को सिरे से ख़ारिज कर रहे हैं। मगर कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब फिलहाल उनके पास नहीं है।
कई दिनों से सड़ रहे थे बेजुबानों के शव
उत्तर वन मण्डल पन्ना की धरमपुर रेन्ज अंतर्गत आने वाली कुड़रा बीट का जंगल वन अपराध की दृष्टि से अत्यंत ही संवेदनशील है। उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इस इलाके में पूर्व में सागौन की अवैध कटाई, तेंदुए के शिकार सहित अन्य कई गंभीर मामले सामने आए हैं। बुधवार 12 मार्च 2025 को यहां वन्य प्राणियों के शिकार की एक ओर बड़ी घटना का खुलासा होने से हड़कंप मच गया। दरअसल धरमपुर निवासी एक व्यक्ति अपनी गुमशुदा भैंस की खोज में नजदीकी कुड़रा जंगल पहुंचा तो वहां का नजारा देख दंग रह गया। पहुंच मार्ग से करीब 200 मीटर दूर जंगल के अंदर से उठ रही भीषण दुर्गन्ध का सबब जानने उक्त व्यक्ति और उसके साथी मौके पर पहुंचें तो वहां कथित तौर पर नीलगाय का शव और एक अन्य वन्य जीव का क्षत-विक्षत कंकाल पड़ा था। समीप ही जमीन में कुछ दूर तक खूंटिया गड़ी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घटनास्थल को देखने पर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि अज्ञात शिकारियों द्वारा खूटियों के सहारे करंट का तार बिछाकर बेजुबान वन्य जीवों का शिकार किया गया है। शवों से उठती भीषण सड़ांध और उनमें बिलबिलाते कीड़ों के मद्देनजर वन्य जीवों की मौत सप्ताह भर पूर्व होने का अनुमान है। प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा अपने मोबाइल फोन से घटनास्थल एवं शवों के वीडियो, फोटोग्राफ्स बनाकर मीडियाकर्मियों को भेजे गए। जिसमें मृत नीलगाय और नजदीक ही पड़ा एक अन्य वन्य प्राणी का क्षत-विक्षत कंकाल साफ़ नजर आ रहा है। एक अन्य वीडियो में जमीन पर गड़ी खूटियां भी दिख रही हैं।
5 घण्टे बाद गायब हो गए शव!
कुड़रा के जंगल में नीलगाय के शव के ही समीप एक अन्य वन्यजीव का कंकाल मिलने का भी दावा किया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत उक्त वीडियो, फोटोग्राफ्स और उन्हें भेजने वाले का मोबाइल नंबर उत्तर वन मण्डल पन्ना के डीएफओ गर्वित गंगवार, एसडीओ दिनेश गौर सहित धरमपुर रेंजर वैभव सिंह चंदेल को सेंड किए गए। जिस पर वन अधिकारियों द्वारा स्टॉफ को मौके पर भेजकर घटना की तस्दीक करवाने के बाद ही आधिकारिक तौर पर टिप्पणी करने की बात कही गई। घटना की तस्दीक करने पर शिकार के कथित मामले में आए ट्विस्ट ने सबको चकित कर दिया है! संबंधित व्यक्ति को लेकर मैदानी वन अमला करीब 5 घण्टे बाद जब मौके पर पहुंचा तो वहां मृत वन्य जीव का शव और कंकाल नहीं मिला।
प्रत्यक्षदर्शी और अफसरों के अलग-अलग दावे
बता दें कि, मृत वन्यजीवों के वीडियो और प्रत्यक्षदर्शी का मोबाइल नम्बर डीएफओ व एसडीओ को दोपहर में करीब सवा ग्यारह बजे भेजकर मामले को इनके संज्ञान में लाया गया था। लेकिन पन्ना कोर्ट में पेशी के चलते धरमपुर रेंजर, संबंधित बीटगार्ड और एसडीओ शाम 4 बजे तक मौके पर नहीं पहुंचे। इस बीच प्रत्यक्षदर्शी और डिप्टी रेंजर के बीच घटनास्थल पर चलने को लेकर बात अवश्य हुई। लेकिन इस बातचीत को लेकर उक्त व्यक्ति तथा वन विभाग के अफसरों के दावे आपस में मेल नहीं खाते हैं। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार डिप्टी रेंजर ने जब उसे कॉल करके साथ में जंगल चलकर घटनास्थल दिखाने को कहा गया तो उसके द्वारा अपनी सहमति दी गई। साथ ही यह कहा गया मैं अपने घर पर हूं आप यहीं आ जाएं, यहां से साथ चलेंगे। जबकि वन विभाग के अफसरों का कहना है कि, उक्त व्यक्ति ने शुरू में जब फोन नहीं उठाया तो उनका मैदानी अमला मौके पर पहुंचकर जंगल के चप्पे-चप्पे को सर्च करता रहा। कई घंटे तक स्टॉफ को जंगल की सघन छानबीन करने के बाद भी वहां कुछ नहीं मिला।
खबर को दबाने सक्रिय रहे बीटगार्ड
बुधवार शाम करीब 4 बजे एसडीओ फॉरेस्ट से जब मीडियाकर्मियों ने शिकार की घटना के संबंध में पूंछा तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। उक्त घटना को गंभीरता से न लेने के सवालों से घिरने पर उनके द्वारा प्रत्यक्षदर्शी के साथ तुरंत स्टॉफ को मौके पर भेजने और स्वयं भी घटनास्थल पर पहुंचने की बात कही गई। इस तरह सूचना देने के लगभग 5 घंटे बाद शाम 4.30 बजे डिप्टी रेंजर जब संबंधित व्यक्ति को लेकर जंगल पहुंचे तो वहां शव और कंकाल नहीं मिला। यह बात जैसे ही एसडीओ साहब को पता चली वे तो वह सुस्ती छोड़ अचानक हरकत में आ गए। एसडीओ ने तुरंत मोबाइल पर सम्बंधित व्यक्ति से बात की और उसे हड़काते हुए झूठी सूचना देने का उलाहना दिया। उक्त व्यक्ति ने भी फोन पर एसडीओ को रगड़ते हुए वन अमले पर निकम्मेपन को छुपाने के लिए वन्य प्राणियों के शवों को गायब करवाने का आरोप लगाया है।
गौर करने वाली बात यह है कि कथित तौर मैदानी वन अमला दोपहर में जब अपने स्तर पर अकेले ही जंगल सर्चिंग कर रहा था तब कुड़रा के बीटगार्ड उक्त घटना को दबाने के लिए पन्ना में मीडियाकर्मियों से संपर्क साध रहे थे। यहां सवाल उठता है कि वन अमले को पहले जब अपनी पड़ताल में और बाद में संबंधित व्यक्ति के साथ मौके पर पहुंचने पर किसी तरह की घटना के कोई साक्ष्य ही नहीं मिले तो बीटगार्ड फिर इतना परेशान क्यों थे? उनके द्वारा यह भी कहा गया कि वरिष्ठ अधिकारियों ने आप लोगों से सम्पर्क कर मीडिया मैनेजमेंट फंडा लागू करने को कहा है। फिर वही सवाल जब कुछ हुआ ही नहीं था तो वन महकमे में इतनी बैचेनी क्यों थी?
सच के खुलासे में नहीं दिलचस्पी
वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के 5 घंटे बाद प्रत्यक्षदर्शी को लेकर घटनास्थल पहुंचे डिप्टी रेंजर जंगल सर्चिंग करते हुए।
यहां सवाल यह भी उत्तर वन मण्डल के अफसरों को शिकार की घटना के साक्ष्य के तौर पर जो वीडियो भेजे गए थे क्या वह फर्जी थे या फिर वाकई वन्य जीवों के शिकार की बड़ी घटना को दबाने के लिए वाकई शव गायब कर दिए गए। इस मामले लेकर गहराते रहस्य के बीच एक बात स्पष्ट है, कोई तो है जो झूठ बोल रहा है। लेकिन वह कौन है, इसका पता लगाने को लेकर वन विभाग के अफसरों की उदासीनता समझ से परे है। जिस स्थान पर वन्य जीवों के शव एवं कंकाल देखने का दावा किया गया वहां डॉग स्क्वायड से सर्चिंग कराना भी उचित नहीं समझा। आखिर सच्चाई की तह तक जाकर उसे सामने लाने को लेकर जिम्मेदारों में इतनी अरुचि क्यों है? जबकि इस मामले का खुलासा इसलिए भी जरुरी हो जाता है क्योंकि वीडियो के आधार पर कथित घटना का दावा किया गया है। मीडिया में इसकी खबर भी प्रकाशित-प्रसारित की गई है। जिसमें वन्य प्राणियों के शव और कंकाल दिखाए गए है। इसलिए वन विभाग के अफसरों का सिर्फ यह कह देना कि शव नहीं मिले तो घटना झूठी है, संतोषजनक उत्तर बिल्कुल भी नहीं है। उन वीडियो का क्या जोकि घटना घटित होने के साक्ष्य के तौर पर वायरल हैं। लोग पूँछ रहे हैं कि शवों को ज़मीन खा गई या आसमान निगल गया! अगर यह मान भी लिया जाए कि जंगली जानवरों के शिकार की घटना घटित नहीं हुई तो वन विभाग स्पष्ट करना चाहिए कि उक्त वीडियो कबके और कहां के हैं? यह कवायद इसलिए भी जरुरी है क्योंकि वन विभाग कतिपय अफसर दबी जुबान बीटगार्ड पर दवाब बनाकर उसे ब्लैकमेल करने की बात कह रहे हैं।
बताते चलें कि महीने भर पूर्व उत्तर वन मण्डल की विश्रामगंज रेंज के सीमवर्ती इलाके में एक सांभर जख्मी हालत में मिला था। सांभर के पैर के ऊपर मौजूद जख्म को लेकर यह दावा किया गया था कि अज्ञात शिकारी द्वारा गोली मारने से घायल हुआ है। वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे घायल सांभर को देखा और मैदानी वन अमला करीब 12 घण्टे तक उसकी निगरानी करता रहा। लेकिन आधिकारिक तौर पर इस बात का पता नहीं चल सका कि सांभर घायल कैसे हुआ। अगले दिन सुबह सांभर के लंगड़ाते हुए जंगल की तरफ भाग निकलने के बाद वन महकमे ने राहत की सांस लेते हुए अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली थी। कुछ ऐसा ही कुड़रा के मामले में भी हो रहा है।
नोट: (सुरक्षा कारणों की वजह से प्रत्यक्षदर्शी का नाम गुप्त रखा गया है)
इनका कहना है-
“हमारे स्टॉफ द्वारा अपने स्तर पर छानबीन की गई बाद में घटना के प्रत्यक्षदर्शी व्यक्ति को लेकर भी डिप्टी रेंजर मौके पर गए लेकिन वहां न तो वन्य जीवों के शव मिले और ना ही शिकार की घटना का कोई साक्ष्य मिला। इसलिए डॉग स्क्वायड से सर्च कराने की आवश्यकता नहीं है। पन्ना में वैसे भी एक ही डॉग है टाइगर रिजर्व में, वह भी बीमार है। फिलहाल पुलिस डॉग ही उपलब्ध है। वन्य जीवों के वीडियो पुराने और किसी अन्य स्थान के हो सकते हैं।”
गर्वित गंगवार, वन मण्डलाधिकारी, उत्तर वन मण्डल, पन्ना।
पन्ना में तहसीलदार को मंत्री प्रहलाद पटेल के खिलाफ ज्ञापन सौंपते हुए कांग्रेस नेतागण।
* सेवादल ने मंत्री के खिलाफ प्रदर्शन कर राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन
* ‘वोट लेने के समय जनता भगवान, वोट लेने के बाद जनता भिखारी’
पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश की जनता को भिखारी कहने वाले पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल विपक्ष के निशाने पर हैं। उनके आपत्तिजनक बयान पर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस सड़कों पर उतरकर मंत्री के खिलाफ प्रदेश भर में धरना-प्रदर्शन कर रही है। पन्ना में सेवादल ने मंत्री पटेल के बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे प्रदेश की 7 करोड़ जनता का अपमान बताया है। कांग्रेस सेवादल ने राज्यपाल के नाम पर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर मंत्री पटेल से प्रदेश की जनता से सार्वजानिक रूप से माफ़ी मंगवाने साथ ही उन्हें तत्काल प्रभाव से मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की है।
मंत्री प्रहलाद पटेल के आपत्तिजनक बयान के बाद उनके खिलाफ विरोध तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में पन्ना में बीते दिवस कांग्रेस के सेवादल प्रकोष्ठ ने मंत्री पटेल के खिलाफ प्रदर्शन कर भारतीय जनता पार्टी को घेरा है। कांग्रेस सेवादल प्रकोष्ठ पन्ना के जिला अध्यक्ष रामबहादुर द्विवेदी भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि मंत्री पटेल का घोर निंदनीय बयान प्रदेश की जनता के प्रति सत्ताधारी दल की घटिया सोच को उजागर करता है। साथ ही इससे भाजपाईयों के दोहरे चरित्र को भलीभांति समझा जा सकता है। चुनाव के समय वोट लेने के लिए ये लोग जनता को भगवान कहते हैं और चुनाव के बाद वही जनता इनके लिए भिखारी हो जाती है। सत्ता के अहंकार में पटेल शायद यह भूल गए हैं कि उन्हें मंत्री के रूप में प्रतिमाह प्राप्त होने वाले वेतन-भत्ते जनता के द्वारा दिए जाने वाले टैक्स से ही मिलते हैं। गरीब जनता को सरकार द्वारा कई तरह की सुविधाएँ देने के एवज में भीख मांगने जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए मंत्री ने जनता के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई है। कांग्रेस सेवादल ने महामहिम राज्यपाल से मंत्री प्रहलाद पटेल से जनता से सार्वजानिक रूप से माफ़ी मंगवाने के साथ ही उन्हें तत्काल प्रभाव से मंत्रिमंडल बर्ख़ास्त करने की मांग की है।
जुमला साबित हो रहे भाजपा के चुनावी वादे
मंत्री प्रहलाद पटेल के आपत्तिजनक बयान के विरोधस्वरूप पन्ना में नारेबाजी करते हुए कांग्रेस नेतागण।
विधानसभा चुनाव के समय भाजपा द्वारा अन्नदाता किसानों समेत महिलाओं, युवाओं से किए गए वादों पर अमल न होने से लोग ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। वोट लेने के लिए भाजपा ने बड़े-बड़े वायदे करते हुए अन्नदाता किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलवाने के लिए गेहूं 2700/-रु ,धान 3100/-रु एवं सोयाबीन 6000/-रु. प्रति क्विंटल खरीदने का ऐलान किया था। लेकिन आज तक चुनावी घोषणाओं पर अमल न करने से जनता जुमलेबाजों की सच्चाई समझ चुकी है। कांग्रेस सेवादल प्रकोष्ठ ने प्रदेश की सरकार को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी पूरी तरह से विफल बताया है। कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में महिलाओं-बालिकाओं, कमजोर वर्गों एवं मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा और नफरत के मामले चिंताजनक तेजी से लगातार बढ़ रहे हैं। ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से पन्ना जिला कांग्रेस अध्यक्ष शिवजीत सिंह, कांग्रेस सेवादल जिलाध्यक्ष रामबहादुर द्विवेदी, शशिकांत दीक्षित, देवेन्द्र सिंह यादव, स्वतंत्र प्रभाकर अवस्थी, मार्तण्ड देव बुंदेला, कदीर खान, अक्षय तिवारी ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष पन्ना, रेहान मोहम्मद, जमाल, अल्ताफ, सरदार सिंह यादव, वैभव थापक सहित अन्य कांग्रेसजन शामिल थे।
* पन्ना, अजयगढ़, देवेन्द्रनगर में अवैध प्लाटिंग से करोड़ों रुपए छापने वालों पर कब होगी एफआईआर?
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिला मुख्यालय सहित आंचलिक नगरीय क्षेत्रों में पिछले कई सालों से स्थानीय निकायों एवं राजस्व विभाग की सांठगांठ से अवैध कॉलोनियां बसाने का गोरखधंधा बहुत बड़े पैमाने पर चल रहा है। अवैध कॉलोनियों के निर्माण को रोकने के लिए कठोर कानून होने के बाद भी जिम्मेदारों के द्वारा उन पर अमल न करने से जिले अवैध कालोनियों का वार्षिक कारोबार एक लगभग एक अरब के आसपास पहुँच चुका है। नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध प्लाटिंग करके नोट छापने वालों में जनप्रतिनिधि, नेतागण, तथाकथित पत्रकार, भू-माफिया व्यवसायी समेत कतिपय नव धनाढ्य शामिल हैं। हैरानी की बात है कि सिर्फ पन्ना जिला मुख्यालय में ही तकरीबन दो दर्जन से अधिक स्थानों पर तेजी से आकार ले रहीं अवैध कालोनियों में धड़ल्ले से प्लाट बिक्री की जा रही है। पन्ना में बैठे राजस्व समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी निहित स्वार्थपूर्ति के चक्कर में अवैध कॉलोनाइजरों की करतूतों की जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं।
बता दें कि कुछ समय पूर्व भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष अंकुर त्रिवेदी के द्वारा पन्ना एसडीएम से एक अवैध प्लाटिंग की लिखित शिकायत की गई थी। पन्ना में सफेदपोश भू-माफिया अवैध कालोनियां बसाकर करोड़ों रुपए बटोरने के साथ कुछ स्थानों पर सरकारी भूमियों को भी बेंच रहे हैं। पन्ना कलेक्टर सुरेश कुमार ने काफी देर से ही सही पर अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई की सुध ली है। हालांकि उनकी कार्रवाई का दायरा फिलहाल गुनौर नगर परिषद क्षेत्र तक ही शामिल है। अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि पन्ना कलेक्टर पन्ना, अजयगढ़, देवेन्द्रनगर, सिमरिया, अमानगंज, पवई सहित अन्य स्थानों पर अवैध कॉलोनियां काटकर उनमें करके शासन को राजस्व की बड़ी क्षति पहुँचाने वालों के खिलाफ नियमानुसार एफआईआर दर्ज करवाने की कार्यवाही करते हैं या फिर अवैध कालोनाइजरों पर अपनी सख्ती को वे गुनौर तक ही सीमित रखते हैं।
अवैध प्लाटिंग कर इन नियम-कानूनों का किया उल्लंघन
प्राप्त जानकारी अनुसार कलेक्टर सुरेश कुमार ने नगर परिषद क्षेत्र गुनौर अंतर्गत अवैध कॉलोनी निर्माण पर संबंधितजनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिला कलेक्टर द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व गुनौर के प्रतिवेदन पर ग्राम गुनौर के विभिन्न सर्वे नंबर एवं रकबा की भूमि पर कॉलोनी निर्माण के दौरान म.प्र. नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 339 की विभिन्न धाराओं तथा म.प्र. नगर पालिका कॉलोनी विकास नियम 2021 के प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर नोटिस जारी करने की कार्यवाही की गई है। एसडीएम द्वारा प्रेषित प्रतिवेदन में उल्लेख है कि संबंधित द्वारा कॉलोनी निर्माण का रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र एवं कॉलोनी विकास की अनुज्ञा प्राप्त किए बगैर कार्य कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से ले-आउट स्वीकृति एवं अनापत्ति प्रमाण पत्र भी प्राप्त नहीं किया गया है। किसी भी प्रकार का आंतरिक विकास किए बगैर तथा बिना रेरा पंजीयन के छोटे-छोटे भूखण्ड विक्रय कर अवैैध कॉलोनी का निर्माण किया जा रहा है।
पेशी में प्रस्तुत करना होगा नोटिस का जवाब
इस संबंध में उपरोक्त कॉलोनी को अनाधिकृत कॉलोनी घोषित करने, उपरोक्त भूमि तथा संबंधित के स्वामित्व की किसी अन्य भूमि को प्रश्नाधीन कॉलोनी में नागरिक अधोसंरचना के विकास कार्य पूर्ण करने के लिए अटैच करने एवं अनाधिकृत कॉलोनी निर्माण का अपराध कारित करने के कारण कारावास व जुर्माना के लिए सक्षम न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही आगामी 17 मार्च को दोपहर 2 बजे कारण बताओ सूचना पत्र का बिन्दुवार प्रत्युत्तर स्वयं अथवा अभिभाषक के माध्यम से अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं अन्यथा एकपक्षीय कार्यवाही कर प्रकरण में प्रस्ताव अनुसार आगामी वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। कोई भी व्यक्ति कॉलोनी को अनाधिकृत कॉलोनी घोषित करने के संबंध में कोई आपत्ति होने पर निर्धारित तिथि के पूर्व न्यायालय में प्रस्तुत कर सकता है।
इन्हें थमाए नोटिस
जिला कलेक्टर द्वारा इन्द्रपुरी कॉलोनी पन्ना निवासी रोहित तिवारी, ग्राम एवं तहसील गुनौर निवासी शकुंतला त्रिपाठी, बिन्द्रावन, अर्चना तिवारी, किशोरी लाल, दयाराम, सुनील कुमार, अनबर बक्श, सुरेन्द्र कुमार, नत्थू सिंह, जीवन लाल, मुलायम देवी, कौशिल्या, रामकिशुन, प्रियंका खरे, फूलबाई गर्ग, शशिकांत, अवधेश प्रताप सिंह, माया बाई पटेल, कौशिल्या बाई, सीताराम, संगीता, लक्ष्मी, राजकुमार एवं गंगा प्रसाद, ग्राम सिली तहसील गुनौर निवासी कमलाकांत, भागीरथ, अंकित सोनी, रामप्रताप पटेल, ग्राम एवं तहसील अमानगंज निवासी बल्देव सेन, ग्राम गभौरा तहसील गुनौर निवासी रामप्रताप पटेल एवं ग्राम सिमरी तहसील गुनौर निवासी निर्मला सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
अमर सिंह की वर्दी पर स्टार लगाकर उप वन क्षेत्रपाल से वन क्षेत्रपाल के पद पर पदोन्नति प्रदान करते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारीगण।
* पीटीआर के पूर्व सुरक्षा श्रमिक ने कलेक्टर से की लिखित शिकायत
* आवेदन के साथ सौंपे दो से अधिक संतान होने के प्रमाणित दस्तावेज
पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश शासन द्वारा जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कई स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। आमलोगों के लिए परिवार नियोजन को अपनाना जहां पूर्णतः स्वैच्छिक है वहीं लोकसेवकों के लिए कई साल पहले इसे अनिवार्य किया जा चुका है। इसके पीछे मंशा है कि सरकारी अधिकारी-कर्मचारी समाज में आदर्श प्रस्तुत करते हुए छोटा परिवार-सुखी परिवार की राह पर दृढ़ता से चले । इस उद्देश्य को पूरा करने लोकसेवकों के लिए ‘हम दो-हमारे दो’ की सीमा निर्धारित है। राज्य शासन ने इस संबंध में बक़ायदा अधिसूचना जारी कर नियम-शर्तें घोषित कर रखी हैं। नियमानुसार अगर किसी लोकसेवक अथवा किसी उम्मीदवार जिसकी दो से अधिक संतानें जीवित है, जिनमें से एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या फिर उसके बाद हुआ हो वह किसी सेवा/पद पर नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा। इस नियम को आधार बनाकर पूर्व सुरक्षा श्रमिक ने पन्ना टाइगर रिजर्व (पीटीआर) की पन्ना बफर रेंज के वन क्षेत्रपाल अमर सिंह की सेवा समाप्त करने की मांग की है। इस संबंध में पन्ना कलेक्टर को सप्रमाण आवेदन पत्र देकर रेंजर की चार संतान होने का दावा किया जा रहा है।
हाल ही में उप वन क्षेत्रपाल से वन क्षेत्रपाल के पद पर पदोन्नत हुए अमर सिंह पिछले कुछ समय से लगातार सुर्ख़ियों में बने हैं। फिर चाहे वह पन्ना बफर रेंज अंतर्गत हुई सागौन की अवैध कटाई की जांच के लिए राजधानी भोपाल से राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल का पन्ना आना हो या फिर वन मार्ग निर्माण के लिए कथित तौर पर वन क्षेत्र में मिट्टी-मुरुम का अवैध खनन कर उपयोग करने का मामला रहा हो। मौजूदा पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन के सबसे चहेते और भरोसेमंद माने-जाने रेंजर अमर सिंह गौंड़ अब एक नए मामले में घिरते नजर आ रहे हैं।
अमर सिंह, वन क्षेत्रपाल, परिक्षेत्र पन्ना बफर।
जिले के मड़ला ग्राम निवासी बब्लू यादव ने 25 फरवरी को जनसुनवाई में पन्ना कलेक्टर को आवेदन पत्र देकर रेंजर अमर सिंह के विरुद्ध गंभीर शिकायत की है। आरोप है कि रेंजर साहब अपने परिवार के सदस्यों की सही जानकारी न देकर नियम विरुद्ध तरीके से शासकीय सेवा में बने हुए हैं। शिकायत में बताया गया है कि है मध्य प्रदेश शासन वन विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ. सी. 03/03/200-03 दिनांक 10 मार्च 2000 के नियमानुसार कोई भी उम्मीदवार जिसकी दो से अधिक जीवित संतानें है, जिनमें से एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या फिर उसके बाद हुआ हो किसी सेवा या नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा। शिकायतकर्ता का दावा है कि, रेंजर अमर सिंह की वर्तमान में 4 जीवित संतान हैं जिसमें 3 का जन्म 26 जनवरी 2001 के बाद हुआ है। अपने दावे की पुष्टि के लिए शिकायतकर्ता ने आवेदन पत्र के साथ रेंजर के परिवार की समग्र आईडी संलग्न की है। उक्त साक्ष्य के आधार पन्ना कलेक्टर से रेंजर के परिवार की सदस्य संख्या की जांच करवाकर सेवा समाप्त करने की मांग की है। साथ ही वन विभाग में कार्यरत इस तरह के अन्य अधिकारी-कर्मचारियों को भी शासकीय सेवा से बर्खास्त करने की मांग उठाई है। आवेदन पत्र की प्रतिलिपि आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रधान मुख्य वन संरक्षक भोपाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) भोपाल और मुख्य वन संरक्षक वृत्त छतरपुर को भेजी है।
पदोन्नति के बाद भी नहीं छोड़ा पन्ना
फाइल फोटो।
वनरक्षक के रूप में पन्ना में पदस्थ हुए अमर सिंह पिछले कई वर्षों से जिले में ही जमे हैं। मजेदार बात यह है कि पन्ना में रहते हुए उन्होंने वनपाल, उप वन क्षेत्रपाल और वन क्षेत्रपाल के पद पर पदोन्नति प्राप्त कर ली लेकिन कभी जिले से बाहर नहीं गए। कुछ समय पहले ही शासन ने अमर सिंह को उप वन क्षेत्रपाल से वन क्षेत्रपाल के पद पर पदोन्नत करते हुए इनकी नवीन पदस्थापना सीधी जिले में करने का आदेश जारी किया था। शासन के आदेश पर पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा जानबूझकर अमल न करने से अमर सिंह पन्ना में ही डटे हुए हैं। बता दें कि, पन्ना पार्क प्रबंधन द्वारा गुरुवार 27 फरवरी को अमर सिंह की वर्दी पर एक-एक और स्टार लगाकर उन्हें वन क्षेत्रपाल के पद पर पदोन्नत किये जाने की औपचारिकता पूरी की गई।
वन क्षेत्रपाल अमर सिंह को पद से पृथक करने के संबंध में पन्ना कलेक्टर को दिए गए आवेदन पत्र की कॉपी।
इसके पूर्व गंगऊ अभ्यारण रेंज के रेंजर गौरव नामदेव का स्थानांतरण कार्य आयोजना ईकाई छतरपुर होने पर पन्ना टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक अंजना सुचिता तिर्की द्वारा 22 फरवरी को उनकी भारमुक्ति के संबंध में पत्र जारी किया गया। क्षेत्र संचालक ने श्री नामदेव को निर्देशित किया है कि गंगऊ अभ्यारण परिक्षेत्र (रेंज) का समस्त प्रभार अमर सिंह, प्रभारी परिक्षेत्राधिकारी पन्ना बफर रेंज को सौंपकर अपनी नवीन पदस्थिति कार्य आयोजना ईकाई छतरपुर में देवें। यहां गौर करने वाली बात यह है कि, पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा अमर सिंह को डिप्टी रेंजर रहते हुए दूसरे परिक्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
इनका कहना है-
मेरा जीवन खुली किताब की तरह है मैनें शासन से कभी किसी तरह की कोई भी जानकारी नहीं छुपाई है। जांच होने पर वस्तुस्थिति पूर्णतः स्पष्ट हो जाएगी। पिछले कुछ समय से मुझे सुनियोजित तरीके से परेशान किया जा रहा है। मैं वन अपराधों से समझौता नहीं करता इसलिए कतिपय लोग जो मुझे अपनी राह में सबसे बड़ा रोड़ा मानते हैं वह शिकवा-शिकायतों के जरिए मेरी छवि को धूमिल करने और मुझे बदनाम करने के अभियान में जुटे हैं।
अमर सिंह, परिक्षेत्राधिकारी पन्ना बफर रेंज।
कलेक्टर कार्यालय से शिकायती आवेदन पत्र प्राप्त होने पर जांच कराई जाएगी, जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर नियमानुसार आगे की कार्याही की जाएगी।
अंजना सुचिता तिर्की, क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।
* परीक्षार्थियों के लिएपरीक्षा कक्ष में प्रात: 8.30 बजे उपस्थित होना अनिवार्य होगा
पन्ना। माध्यमिक शिक्षा मण्डल मध्यप्रदेश द्वारा हायर सेकण्डरी कक्षा 12वीं की वार्षिक परीक्षा मंगलवार 25 फरवरी से आरंभ हो रही है। हायर सेकण्डरी की परीक्षा 25 फरवरी से 25 मार्च तक आयोजित की जाएगी। परीक्षा नियमित तथा स्वाध्यायी परीक्षार्थियों के लिए प्रातः 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगी। सभी परीक्षार्थियों को परीक्षा केन्द्र में प्रातः 8 बजे एवं परीक्षा कक्ष में प्रातः 8.30 बजे उपस्थित होना अनिवार्य होगा। परीक्षा कक्ष में प्रातः 8.45 बजे के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। परीक्षार्थियों को परीक्षा प्रारंभ होने से 10 मिनट पूर्व अर्थात प्रातः 8.50 बजे उत्तर पुस्तिका एवं 5 मिनट पूर्व अर्थात प्रातः 8.55 बजे प्रश्न-पत्र दिए जाएंगे। प्रत्येक परीक्षार्थी का उपस्थिति पत्रक की फोटो से मिलान किया जायेगा। प्रवेश पत्र में भी फोटो लगाना अनिवार्य है। परीक्षार्थी यथासंभव पेयजल की बोतल स्वयं लेकर आएं।
परीक्षा का टाइम टेबल
कक्षा 12वीं के नियमित तथा स्वाध्यायी परीक्षार्थियों की परीक्षा का प्रथम प्रश्न पत्र मंगलवार 25 फरवरी को होगा। इस दिन हिन्दी का प्रश्न पत्र होगा। शुक्रवार 28 फरवरी को अंग्रेजी का प्रश्न पत्र होगा। शनिवार एक मार्च को उर्दू और मराठी का प्रश्न पत्र होगा। मंगलवार 4 मार्च को एनिमल हस्बैण्डरी मिल्क ट्रेड पोल्ट्री फार्मिंग एवं फिशरीज, विज्ञान के तत्व, भारतीय कला का इतिहास, अर्थशास्त्र तथा फिजिक्स का प्रश्न पत्र होगा। बुधवार 5 मार्च को बायोटेक्नॉलाजी, गायन वादन एवं तबला पखावज का प्रश्नपत्र होगा। गुरूवार 6 मार्च को ड्राइंग एण्ड डिजाइन का प्रश्न पत्र होगा। शुक्रवार 7 मार्च को भूगोल, क्रॉप प्रोडक्शन एण्ड हार्टिकल्चर, स्टिल लाईफ एण्ड डिजाइन, शरीर रचना क्रिया-विज्ञान एवं स्वास्थ्य का प्रश्न पत्र होगा। शनिवार 8 मार्च को बायलॉजी, सोमवार 10 मार्च को मनोविज्ञान, मंगलवार 11 मार्च को इन्फॉरमेटिक प्रेक्टिसेस तथा बुधवार 12 मार्च को संस्कृत का प्रश्न पत्र होगा। सोमवार 17 मार्च को केमिस्ट्री, इतिहास, व्यवसाय अध्ययन, एलिमेंट आफ साइंस एण्ड मेथमेटिक्स यूजफुल फार एग्रीकल्चर, ड्राइंग एण्ड पेंटिंग और गृह प्रबंध पोषण एवं वस्त्र विज्ञान के प्रश्न पत्र की परीक्षा होगी। गुरूवार 20 मार्च को समाजशास्त्र तथा शुक्रवार 21 मार्च को नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन फ्रेम वर्क के सभी विषय और शारीरिक शिक्षा का प्रश्न पत्र होगा। शनिवार 22 मार्च को कृषि, होम साइंस (कला समूह) तथा बुक कीपिंग एण्ड एकाउंटेन्सी का प्रश्न पत्र होगा। सोमवार 24 मार्च को राजनीति शास्त्र तथा मंगलवार 25 मार्च को गणित का प्रश्न पत्र होगा।
द्वादश ज्योतिर्लिंगों की भव्य झांकी के शुभारंभ अवसर पर पन्ना नगर के सभी प्रमुख मंदिरों के पुजारियों को ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा सम्मानित किया गया।
* पन्ना के श्री जुगल किशोर मंदिर प्रांगण में 28 फरवरी तक प्राप्त कर सकेंगे दर्शन
* आध्यात्मिक प्रवचन में बताया जाएगा शिव जयंती महोत्सव और महाशिवरात्रि का महत्व
पन्ना। (www.radarnews.in) महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विद्यालय द्वारा नगर के श्री जुगल किशोर जी मंदिर प्रांगण में द्वादश ज्योतिर्लिंगम (बारह ज्योतिर्लिंगों) की भव्य झांकी सजाई गई है। झांकी का शुभारंभ सोमवार 24 फरवरी की सुबह एक गरिमामयी कार्यक्रम में हुआ। इस अवसर पर मंदिर के पुजारी, धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारी, ब्रह्माकुमारी संस्था पन्ना की प्रमुख सीता बहिनजी सहित ब्रह्माकुमारी संस्था पन्ना से जुड़े भाई-बहनें बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने द्वादश ज्योतिर्लिंगों की अनूठी झांकी के दर्शन कर आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। श्रद्धालुओं ने झांकी के आयोजन को लेकर ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की सराहना की है। श्रद्धालुओं का कहना है कि जिन शिव परमात्मा के दर्शन के लिए देश के अलग-अलग स्थानों की मीलों दूर की तीर्थ यात्रा करनी पड़ती है, उनके दर्शन अपने शहर में एक ही स्थान पर प्राप्त होना बहुत ही गौरव और सौभाग्य की बात है।
द्वादश ज्योतिर्लिंगों की भव्य झांकी के शुभारंभ अवसर पर पन्ना नगर के सभी प्रमुख मंदिरों के पुजारियों को ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा सम्मानित किया गया।
ब्रह्माकुमारी संस्था पन्ना की प्रमुख सीता बहिनजी ने बताया कि श्री जुगुल किशोर जी मंदिर प्रांगण में सोमवार 24 फरवरी से लेकर शुक्रवार 28 फरवरी 2025 तक चलने वाली झांकी में श्रद्धालु प्रतिदिन सुबह 6 बजे से 10 बजे तक और दोपहर 12 बजे से रात्रि 10 तक भव्य द्वादश ज्योर्तिलिंगम दर्शन प्राप्त कर सकेंगे। इस अवधि में प्रतिदिन रात्रि में 8 बजे से आध्यात्मिक प्रवचन होंगे। जिसमें परमात्मा शिव के अवतरण और महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य बताया जाएगा।
पन्ना के श्री जुगुल किशोर जी मंदिर में श्रद्धालु 24 फरवरी से लेकर 28 फरवरी 2025 तक प्रतिदिन निर्धारित समय पर द्वादश ज्योतिर्लिंगों की भव्य झांकी के दर्शन लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी बहन जी ने झांकी लगाने के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए जीवन जीने के सूत्र साझा किए। उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्था का परिचय देते हुए इसके उद्देश्यों एवं सेवा कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही, महाशिवरात्रि से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों का आध्यात्मिक रहस्य भी बताया, जैसे कि शिवरात्रि पर धतूरा चढ़ाने, जागरण करने एवं अन्य परंपराओं का गूढ़ महत्व को सरलता से समझाया। उन्होंने बताया कि ये सभी परंपराएं आत्मा की पवित्रता और परमात्मा से संबंध की ओर इंगित करती हैं। झांकी के शुभारंभ कार्यक्रम में मंदिर के सभी पुजारियों का सम्मान किया गया। जिसमें गायत्री परिवार से बुद्ध सिंह; श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर से दिनेश गोस्वामी, श्री जुगल किशोर मंदिर से संतोष तिवारी (मुसद्दी), प्रेम नारायण त्रिपाठी, प्रशांत मिश्रा, मुकेश शर्मा और श्री प्राणनाथ मंदिर से श्याम बिहारी दुबे मुख्य रूप से शामिल थे। सभी ने इस आयोजन की सराहना की और आध्यात्मिक संदेश को समाज तक पहुंचाने की प्रेरणा दी।
पन्ना के सर्किट हाउस में पत्रकारों से जेके सीमेंट प्लांट हादसे पर चर्चा पर करते हुए बालाघाट के पूर्व सांसद कंकर मुंजारे।
* पूर्व सांसद का आरोप- दिल दहलाने वाले हादसे का सच छिपाने शवों को गुपचुप तरीके से ठिकाने लगाया
* मृत मजदूर के परिजनों का हवाला देकर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को जमकर धिक्कारा
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) जेके सीमेंट प्लांट पन्ना में हुए भीषण हादसे में करीब 50 मजदूर असमय काल के गाल में समा गए थे। लगभग इतने ही मजदूर घायल हुए थे। दिल दहलाने वाले इस हादसे का सच छिपाने के लिए जिला प्रशासन की सांठगांठ से सीमेंट प्लांट प्रबंधन ने शवों को गुपचुप तरीके से ठिकाने लगा दिया। हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर चूंकि दूसरे राज्यों के थे इसलिए मृतकों की वास्तविक संख्या पर बड़ी आसानी से पर्दा डाल दिया गया। हालांकि प्रत्यक्षदर्शी मजदूर पहले ही इस सच्चाई को बयां कर चुके हैं। यह दावा बालाघाट के पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने किया है। उन्होंने, हादसे के लिए ठेका कंपनी के अधिकारियों की तरह स्थानीय स्थानीय प्लांट प्रबंधन और जेके सीमेंट कंपनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स के खिलाफ भी आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करने की पुरजोर मांग की है।
पन्ना के तीन दिवसीय दौरे पर आए बालाघाट के पूर्व सांसद एवं संघर्षशील नेता कंकर मुंजारे ने शनिवार 22 फरवरी को सर्किट हाउस में स्थानीय पत्रकारों से कई ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की। इसके पूर्व उन्होंने सिमरिया क़स्बा पहुंचकर सीमेंट प्लांट हादसे में मरने वाले जिले के एकमात्र मजदूर रोहित खरे के शोक संतृप्त परिजनों से भेंटकर अपनी संवेदना व्यक्त की। बता दें कि, मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की अमानगंज तहसील अंतर्गत हरदुआ केन ग्राम में स्थित जेके सीमेंट प्लांट की दूसरी यूनिट प्रोजेक्ट वर्क के दौरान 30 जनवरी 2025 को सुबह करीब 10 बजे निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत की सेटरिंग (शटरिंग) बड़ा हादसा हुआ था। जिला प्रशासन ने इस हादसे में सिर्फ 4 मजदूरों की मौत एवं 19 के घायल होने की आधिकारिक तौर पर पुष्टि की थी।
पूर्व सांसद ने मृत मजदूर रोहित खरे के परिजनों से हादसे को लेकर हुई बातचीत के हवाले से बताया कि अगर स्थानीय लोग सीमेंट फैक्ट्री के बाहर खरे दम्पत्ति के साथ एकजुटता दिखाते हुए हंगामा न करते तो शायद रोहित की मौत को भी अन्य मजदूरों की तरह ही दबा दिया जाता। क्योंकि हादसे के कुछ देर बाद रोहित की मां जब फैक्ट्री के प्रवेश द्वार पर पहुंची तो पहले उन्हें बताया गया कि उनका पुत्र काम पर आया ही नहीं है। रोहित की मां ने कंपनी के गेट पर तैनात कर्मचारियों पर सरासर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए आसपास मौजूद लोगों को बताया कि रोहित मुझे बताकर फैक्ट्री जाने के लिए घर से निकला था। इस खुलासे के बाद स्थानीय लोगों के हंगामा करने पर बमुश्किल शाम 4 बजे खरे दंपत्ति को बताया गया कि हादसे में उनके बेटे की मौत हो चुकी है। परिजनों को मौके पर रोहित के शव को देखने भी नहीं गया और भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच शव को पोस्टमार्टम के लिए पन्ना रवाना कर दिया था। मुंजारे ने बताया कि रोहित अपने परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य था। हादसे में उसकी असमय मौत से खरे परिवार के ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है।
संवेदनहीन हैं पन्ना के जनप्रतिनिधि
जेके सीमेंट प्लांट में हुए हादसे में मृत पन्ना जिले के एकमात्र श्रमिक रोहित खरे के सिमरिया स्थित आवास पहुंचकर पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने शोक संतृप्त परिजनों को ढांढ़स बंधाया।
पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने पन्ना जिले के भाजपा सांसद-विधायकों को धिक्कारते हुए कहा कि वे अपनी अंतरात्मा को जेके सीमेंट कंपनी को बेंच चुके है। इतना बड़ा हादसा होने के बाद सांसद-विधायक ने हादसे की सच्चाई को सामने लाने और मृतकों को इंसाफ दिलाने के लिए निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर आवाज उठाना तो दूर आज तक घायलों एवं मृतकों के परिजनों से मिलना भी उचित नहीं समझा। उन्होंने कहा कि पन्ना जिले के जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता हैरान करने वाली है। जनता के दुःख-दर्द से इनका दूर-दूर तक कोई सरोकार नहीं है, इन्हें तो सिर्फ जेके सीमेंट के हितों की चिंता है। मुंजारे ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी मुख्य विपक्ष की भूमिका का ईमानदारी से निर्वहन नहीं कर रही है, नतीजतन प्रदेश की सरकार पूरी तरह से निरंकुश हो चुकी है। और हर तरफ अराजकता का माहौल है। आपने कहा कि, जेके सीमेंट हादसे, रेत के अवैध खनन सहित पन्ना जिले के अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर आगामी 11 मार्च को राजधानी भोपाल में विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
* द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश पन्ना ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला
पन्ना। (www.radarnews.in) कोर्ट में झूठे (मिथ्या) कथन करने के एक मामले में पन्ना के द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री सुरेन्द्र मेश्राम ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। रेप का केस दर्ज करवाने के बाद पीड़िता कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान घटना से मुकर गई थी। लेकिन उसने मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान देना और आदेश पत्रिका पर हस्ताक्षर करना स्वीकार किया था। इस तरह न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पन्ना के समक्ष दिए गए बयान (कथन) और विशेष न्यायालय में दिए गए बयान विरोधाभासी होने के कारण फरियादिया के विरुद्ध जानबूझकर मिथ्या साक्ष्य देने का अपराध पंजीबद्ध किया गया था। मामले के विचारण उपरांत न्यायालय द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पन्ना ने महिला को धारा 195 भादंसं. के आरोप में दोषसिद्ध पाये जाने पर 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय द्वारा आरोपिया को एक हजार रूपए के अर्थदण्ड से भी दण्डित किया गया। कोर्ट के इस फैसले की सर्वत्र सराहना हो रही है।
यह है पूरा मामला
सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी पन्ना ने प्रकरण की जानकारी देते हुए बताया कि विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी) पन्ना में म.प्र. राज्य विरूद्ध महेन्द्र अंतर्गत धारा-376(2)(एन) एवं धारा 506 भादंवि. तथा धारा-3(2)(5) अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का प्रकरण विचाराधीन था। इस प्रकरण में अभियुक्त महेन्द्र के विरूद्ध पीड़िता (फरियादिया) ने उसके साथ बार-बार बलात्कार करने और ब्लैकमेल कर परेशान करने के संबंध में एक लिखित आवेदन पत्र पुलिस अधीक्षक पन्ना को दिया था। जिसके आधार पर थाना अजयगढ़ में अपराध पजीबद्ध किया गया।
प्रकरण की विवेचना के दौरान महिला (फरियादिया) के कथन न्यायालय के समक्ष लेखबद्ध किए गए। जिसमें फरियादिया ने अभियुक्त महेन्द्र पर बार-बार बलात्कार करने और पति को जान से मारने की धमकी देने का कथन (बयान) किया। पुलिस द्वारा सम्पूर्ण विवेचना पश्चात् प्रकरण विचारण हेतु न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय में केस की सुनवाई के दौरान आरोपी महेन्द्र ने अपराध करने से इंकार किया। फरियादिया को साक्ष्य हेतु न्यायालय में तलब किया गया। फरियादिया न्यायालय में उपस्थित हुई और अपने साक्ष्य में मुकरते हुए बताया कि आरोपी महेन्द्र ने उसके साथ कोई घटना नहीं की। लेकिन उसने मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान देना तथा आदेश पत्रिका पर हस्ताक्षर करना स्वीकार किया। इस तरह पीड़िता द्वारा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पन्ना के समक्ष दिए गए बयान और विशेष न्यायालय में दिए गए बयान विरोधाभासी पाए गए।
कोर्ट ने दर्ज किया था झूठे कथन करने का प्रकरण
प्रतीकात्मक चित्र।
विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी) पन्ना के द्वारा महिला के विरूद्ध जानबूझकर मिथ्या साक्ष्य देने के लिए दंडात्मक कार्यवाही करने निष्कर्ष अंकित किया। जिस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पन्ना द्वारा महिला के विरूद्ध धारा 340, 344 दण्ड प्रक्रिया संहिता एवं धारा 193, 195 भारतीय दण्ड विधान के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। इस प्रकरण का विचारण द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पन्ना श्री सुरेन्द्र मेश्राम के न्यायालय में हुआ। जिसमें शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक लक्ष्मी नारायण द्विवेदी ने की। अभियोजन ने साक्ष्य को क्रमबद्ध तरीके से लेखबद्ध कराकर न्यायालय के समक्ष आरोपी महिला के विरूद्ध अपराध को संदेह से परे प्रमाणित किया। साथ ही आरोपी के कृत्य को गंभीरतम श्रेणी का मानते हुये कठोर से कठोरतम दंड से दंडित किया जाने का अनुरोध किया। अभिलेख पर आए साक्ष्य, अभियोजन के तर्कों एवं न्यायिक दृष्टांतो से सहमत होते हुए न्यायालय द्वारा आरोपी महिला को धारा 195 के अपराध में दोषसिद्ध पाते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1,000 हजार रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।
किसान को जबरन अपनी कार की डिक्की के ठूंसते हुए एसडीओ और उसके साथी।
* पूर्व सीएम कमलनाथ ने एसडीओ की क्रूरता पर प्रदेश सरकार को जमकर सुनाया
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के एक वायरल वीडियो में जल संसाधन (सिंचाई) विभाग के एसडीओ श्रीराम बघेल अन्नदाता किसानों के साथ बदसलूकी करते और एक किसान को जबरन अपनी कार की डिक्की में ठूंसते हुए दिख रहे हैं। एसडीओ की गुंडई को लेकर सोशल मीडिया पर लोग खुलकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने एक्स अकाउंट पर घटना का वीडियो पोस्ट करते हुए इस मामले को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर लिखा- ‘यह प्रशासनिक संवेदनहीनता और क्रूरता की पराकाष्ठा है। स्वतंत्र देश में आखिर किसी नागरिक के साथ इस तरह का व्यवहार कैसे किया जा सकता है? किसान पर अत्याचार करने वालों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए।’ इसके बाद एसडीओ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
शादिक खान, (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से एक विचलित करने वाला वीडियो सामने आया है। इसमें जल संसाधन विभाग के एसडीओ श्रीराम बघेल किसानों से अभद्रता करते नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं वह सरेआम गुंडई करते हुए एक किसान को जबरन कार की डिक्की में बंद करने की कोशिश करते भी दिख रहे हैं।
घटना केवलारी के मलारी ग्राम की है जहां किसानों ने नहर का गेट खोलने की शिकायत की थी। इससे भड़के एसडीओ अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीओ श्रीराम बघेल किसानों से न सिर्फ अभद्र भाषा में बात कर रहे हैं, बल्कि एक किसान धमकाते हुए जबरन कार की डिक्की में बंद करने की कोशिश भी करते दिख रहे हैं। वीडियो में वह किसान को कथित तौर पर कहते नजर आ रहा है कि तुम अपनी सीमा में रहना। मैं किसी भी हद तक जाऊंगा। तुम्हारी ऐसी-तैसी कर दूंगा।
एमपी का प्रशासन किसान विरोधी और संवेदनहीन
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ।
इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एसडीओ के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करने की मांग की है। कमलनाथ ने एक्स पर लिखा कि, मध्य प्रदेश का प्रशासन दिन पर दिन किसान विरोधी और संवेदनहीन होता जा रहा है। सिवनी में एक किसान को जानवरों की तरह पड़कर जल संसाधन विभाग के एसडीओ और उनकी टीम कार की डिग्गी में डाल रहे हैं। किसान उसके साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार न करने के लिए गिड़गिड़ा रहा है लेकिन उस पर दया करने की बजाय सरकारी अमला हंस रहा है और उसका मजाक उड़ा रहा है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने आगे लिखा, यह प्रशासनिक संवेदनहीनता और क्रूरता की पराकाष्ठा है। स्वतंत्र देश में आखिर किसी नागरिक के साथ इस तरह का व्यवहार कैसे किया जा सकता है? किसान पर अत्याचार करने वालों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए और मुकदमा दर्ज कर आपराधिक प्रकरण शुरू किया जाए।