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घुमक्कड़ आदिवासी परिवारों की मदद के लिए आगे आये युवा और प्रशासन

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कलेक्टर के निर्देश पर जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न वितरित किया गया।

* गरीब परिवारों को वितरित की गई खाद्यान्न सामग्री

मुस्तक़ीम खान, रोहित रैकवार- अजयगढ़/पन्ना ।(www.radarnews.in) नोवल कोरोना वायरस संक्रमण की प्रभावी रोकथाम के लिए 21 दिनों का देशव्यापी लॉकडाउन लागू होने के बाद शहर दर शहर, गांव दर गांव भ्रमण कर जड़ी-बूटी बेंचने वाले घुमक्कड़ आदिवासी परिवार खाद्यान्न संकट से जूझ रहे थे। कामधंधा ठप्प होने और जमा पूँजी के साथ-साथ राशन का आभाव होने से भुखमरी कगार पर पहुँच चुके इन परिवारों की बदहाली से जुड़ी खबर को समाजसेवी, युवा नेताओं और जिला प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए इन जरूरतमंदों को तत्परता से मदद पहुँचाई है। जिले की अजयगढ़ तहसील अंतर्गत पिष्टा ग्राम के समीप मुख्य मार्ग किनारे डेरा डालकर रह रहे जड़ी-बूटी विक्रेता आदिवासियों एवं कुल्हाड़ी- हंसिया बेंचने वाले लोहगड़िया परिवारों के राशन समेत आवश्यक वस्तुओं की कमी से जूझने का पता चलते ही आज सुबह पन्ना के युवा इंजीनियर योगेन्द्र भदौरिया ने अजयगढ़ में भाजयुमो जिलाध्यक्ष अमित गुप्ता से सम्पर्क कर उनके एवं साथियों के माध्यम से राशन सामग्री गरीब आदिवासी परिवारों को उपलब्ध कराई गई। उल्लेखनीय है कि इनके पास न तो किसी श्रेणी का राशन कार्ड है और लॉकडाउन घोषित होने के बाद किसी तरह की कोई सरकारी मदद भी नहीं मिली। जिससे इनके लिए अपने परिवार का भरण-पोषण करना काफी मुश्किल हो गया था।
घुमक्कड़ गरीब आदिवासी परिवारों को राशन सामग्री उपलब्ध कराते युवा नेता अमित गुप्ता। 
वहीं आज जब इनकी दयनीय स्थिति के सम्बंध में पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा को जानकारी मिली तो उन्होंने सीईओ जनपद पंचायत को निर्देश दिए कि उन परिवारों से मिलकर उन्हें उचित मूल्य दुकान से खाद्यान्न सामग्री उपलब्ध कराई जाए। सोमवार को दोपहर में करीब 1 बजे अजयगढ़ जनपद सीईओ ने पिष्टा चौराहा पहुंचकर जड़ी-बूटी विक्रेता आदिवासियों एवं लोहगड़िया परिवारों से भेंट कर उनकी समस्या सुनीं। और फिर उनके द्वारा वहां रहे रहे 28 परिवारों को बगैर किसी राशन कार्ड के खाद्यान्न सामग्री उपलब्ध कराई गयी। उन सभी को शासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने की समझाईश दी गयी। उन्हें यह भी निर्देश दिए गए कि इस दौरान लाॅकडाउन चल रहा है अपने घर पर ही रहें। बाहर आना जाना बिल्कुल भी न करें। दोहरी मदद मिलने पर इन गरीब आदिवासियों ने राहत की सांस लेते हुए युवा नेताओं और जिला प्रशासन का आभार जताया है।
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लाॅकडाउन के चलते देश के 13 राज्यों में फंसे पन्ना के 6633 श्रमिक

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सांकेतिक फोटो।

* जिला प्रशासन द्वारा अन्य राज्यों में फंसे श्रमिकों की की जा रही है मदद

पन्ना।(www.radarnews.in) कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए देश में लाॅकडाउन होने के उपरांत पन्ना जिले के अन्य राज्यों में फंसे श्रमिकों की मदद की जा रही है। देश की 13 राज्यों के 62 जिलों में 6633 श्रमिक फंसे हुए हैं। इन सभी श्रमिकों को आवास, भोजन एवं स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए कलेक्टर कर्मवीर शर्मा द्वारा उन जिलों के कलेक्टरों से विभिन्न माध्यमों से सम्पर्क कर व्यवस्था की गयी है। विभिन्न राज्यों से सतत सम्पर्क बनाए रखने का दायित्व सुश्री रचना त्रिपाठी डिप्टी कलेक्टर को सौंपा गया है। वे समय-समय पर संबंधित जिले के अधिकारियों से सम्पर्क कर जानकारियों का आदान प्रदान करती हैं। आवश्यक होने पर संबंधित अधिकारी की बात जिला कलेक्टर श्री शर्मा से कराई जाती हैै। जिससे जिले से बाहर अन्य राज्यों में फंसे व्यक्तियों की सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से की जा रही है।
जिला स्तर पर स्थापित जिला कोरोना नियंत्रण कक्ष में प्राप्त जानकारी के अनुसार आंध्रप्रदेश के रंगारेड्डी में 20 व्यक्ति, दिल्ली में 11, ईस्ट दिल्ली में 4, न्यू दिल्ली में 120, नोयडा में 12, साउथ वेस्ट दिल्ली में 957, गोआ के डिवोलिंग में 5, कालमगोट में 100, नार्थ गोआ में 2 व्यक्ति, गुजराज के जामनगर में 27, कच्छ में 5, कानोज में 6, मेहसाना में 3, पंचमहल में 15, सूरत में 267 व्यक्ति, हरियाणा के चरखीडडरी में 40, डडरी में 35, डुडहला में 10, फरिदाबाद में 100, गुडगांव में 1853, गुरूग्राम में 50, हिसार में 143, झांझर में 2, पालम में 5, पालगांव में 2, रीवाडी में 95 व्यक्ति, जम्मू के गांधीनगर में 40, राजोडी में 15, जम्मू में 300 व्यक्ति, कर्नाटक के कटुमोटापा में 7, उडाप्पी में 6, बेंगलुरू में 6 व्यक्ति को सभी तरह की जीवनयापन संबंधी सुविधाए दी जा रही है।
इसी प्रकार महाराष्ट्र के अहमदनगर में 13, चंडीगढ में 20, कंडवाई में 3, खेरगढ में 50, मुम्बई में 106, पालघर में 52, पुणे में 422, रायगढ में 634, सतारा में 16, सेंघली में 70, शेरगंवा में 12, थाडे में 55 व्यक्ति, पंजाब के पठानकोट में 8, राजस्थान के अजमेर में 26, अलवर में 338, चैपंगी में 8, गणपतीनगर में 10, हनुमानगढ में 10, जयपुर में 9, कोटा में 2 व्यक्ति, तेलंगना के हेदराबाद में 84, सहागराड्डी में 2 व्यक्ति, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 2, कानपुर में 2, मेरठ में 10, प्रयागराज में 5, रोहतक में 5, सिकंदराबाद में 26 व्यक्ति तथा उत्तराखण्ड के देहरादून में 70 एवं सतनगर में 300 व्यक्ति को सुविधायें दी जा रही है।
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नेकी : पूर्व मंत्री कुसुम मेहदेले ने प्रधानमन्त्री आपदा राहत कोष में दिए एक लाख रुपए, कोरोना को हराने नागरिकों से की सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने की अपील

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शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) वैश्विक महामारी घोषित कोरोना वायरस (कोविड-19) संक्रमण की रोकथाम एवं बचाव लिए लोग अपनी सामर्थ्य अनुसार प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में आर्थिक सहयोग देकर देश को इस संकट से मुक्ति दिलाने और मानवता की जीत सुनिश्चित करने में जुटे हैं। इसी क्रम में आज मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री एवं भाजपा की कद्दावर नेत्री सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले ने प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में एक लाख रूपये दिए। उन्होंने एक लाख रूपये का चेक पन्ना तहसीलदार दीपा चतुर्वेदी को अपने निज निवास में सौंपा है। कोरोना से निपटने और वर्तमान में चल रहे लॉकडाउन में जरूरतमंदों की सहायता के लिए पूर्व मंत्री द्वारा राशि दान करने की खबर आते ही इस पुनीत कार्य के लिए सोशल मीडिया पर उनकी जमकर प्रशंसा हो रही है। लोग उन्हें साधुवाद दे रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में एक लाख रूपये का चेक देते हुए पूर्व मंत्री सुश्री मेहदेले ने लोगों से राष्ट्रीय आपदा की घड़ी में स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग देने की अपील की है। आपने देश में कोविड-19 कोरोना के खिलाफ जारी जंग में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फैसलों और उनकी सरकार के द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मोदी जी ने दूरदर्शिता दिखाते हुए समय रहते कड़े फैसले लेकर कोरोना रुपी संकट को विकराल रूप लेने नहीं दिया। वर्तमान में दुनिया के कई विकसित देशों में यह महामारी जहां तेजी से फ़ैल रही है वहीं भारत में कोरोना संक्रमण की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
सुश्री मेहदेले ने कहा कि कोरोना की विनाशलीला की रोकथाम के लिए केन्द्र की तर्ज पर मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार भी बेहतर कार्य कर रही है। इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बधाई के पात्र हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि देश के 130 करोड़ लोग प्रधानमंत्री मोदी जी के आव्हान पर कोरोना को हारने के लिए एकजुटता का संदेश दे रहे हैं। अब तक लोगों ने गजब की संकल्प शक्ति, धैर्य, संयम और अनुशासन का परिचय दिया है। आपने जोर देते हुए कहा कि मुझे पूरी उम्मीद और विशवास है कि इस जंग में कोरोना जरूर हारेगा। पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले ने नागरिकों से अपील की है कि कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखें, लॉकडाउन के दौरान अपने घरों पर रहें और शासन-प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
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कोरोना के खिलाफ जारी जंग में एकजुटता का दिया सन्देश, मोमबत्ती और दियों की रोशनी से जगमगाया शहर

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शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) प्रधानमंत्री के आव्हान पर रविवार को पन्ना सहित आंचलिक क्षेत्रों में रात्रि 9 बजे 9 मिनिट के लिए लोगों ने अपने घरों की लाइट बंद कर दीपक, मोमबत्ती, टार्च और मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट जलाकर कोरोना के खिलाफ जारी जंग में एकजुटता का सन्देश दिया। हजारों-लाखों दियों और मोमबत्ती की रोशनी जगमगाते शहर का नजारा दीपावली का आभास करा रहा था। घरों की छतों-बालकनी एवं दरवाजे पर झिलमिलाती रोशनी कोरोना रूपी आपदा को हर हाल में हारने के लिए तत्पर लोगों के जज्बे और हौसले से रोशन उम्मीद की मशाल नजर आ रही थी। उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण के खतरे से निपटने के लिए पिछले माह लोगों ने प्रधानमंत्री के आव्हान पर जनता कर्फ्यू लगाया था। जनता कर्फ्यू की शाम समय उन सभी योद्धाओं के लिए ताली-थाली-घंटी बजाकर आभार जताया था जोकि अपनी जान की परवाह न कर इस संकट से मुकाबला करने में रात-दिन जुटे हैं। रविवार को दीपक-मोमबत्ती आदि जलाने दौरान कुछ उत्साही लोगों ने आतिशबाजी भी की। लॉकडाउन के चलते अपने घरों में रह रहे लोगों में दीपक प्रज्जवलित करने को लेकर काफी उत्साह देखा गया।
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लॉकडाउन : दिहाड़ी मजदूर और चलते-फिरते जड़ी-बूटी बेंचने वाले आदिवासी बेहाल, अगर मदद न मिली तो इन गरीबों को भूख मार डालेगी

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* खत्म हुई जमा पूँजी सिर्फ एक-दो दिन का राशन ही बचा

* जरुरी वस्तुओं के आभाव से जूझ रहे आदिवासियों ने बताई अपनी मुश्किलें

* जिले की अजयगढ़ तहसील अंतर्गत पिष्टा में सड़क किनारे है इनका डेरा

* पन्ना में नगर पालिका के बाहर खाद्यान्न के लिए महिलाओं ने किया हंगामा

मुस्तक़ीम खान, रोहित रैकवार- अजयगढ़/पन्ना।(www.radarnews.in) कोरोना वायरस संक्रमण के कहर को रोकने के लिए अचानक लागू किये गए 21 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन के चलते दिहाड़ी पर जीवन-यापन करने वाले गरीब, श्रमिक, आदिवासी एवं कमजोर वर्गों की हालत अब बिगड़ने लगी है। सरकारी मदद से वंचित इन परिवारों को खाने के लाले पड़ रहे हैं। लकड़ी बेंचकर या मजदूरी करके गुजर-बसर करने वाले गरीबों ने कोरोना के खिलाफ जारी जंग में किसी तरह अभावों के बीच लॉकडाउन का आधा समय तो काट लिया लेकिन शीघ्र मदद न मिली तो कई गरीब परिवारों को कोरोना से भी खतरनाक भूख के वायरस से जूझना पड़ सकता है। कुछ इसी तरह के हालात जिले की अजयगढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम पिष्टा में अन्तर्राज्जीय राजमार्ग किनारे डेरा डालकर रहे जड़ी-बूटी बेंचने वाले आदिवासी परिवारों के हैं।
विमुक्त-घुमक्कड़ जनजातियों में शामिल जड़ी-बूटी विक्रेताओं की यह हालत इसलिए भी है, क्योंकि वे चलते-फिरते एक शहर से दूसरे शहर में दुर्लभ जंगली जड़ी-बूटियाँ बेंचकर अपना जीवन यापन करते हैं। इनके पास न तो किसी भी श्रेणी का राशन कार्ड है और ना ही लॉकडाउन घोषित होने के बाद अब तक कोई मदद मिली है। इनके पास जो भी थोड़ा बहुत राशन उपलब्ध था वह अब पूरी तरह ख़त्म होने को है, कई जरूरी वस्तुओं का तो पहले से ही अभाव बना है। नाम मात्र की जो जमा पूँजी थी वह भी खर्च हो चुकी है इसलिए दिन-प्रतिदिन आदिवासी परिवारों की मुश्किलें और चुनौतियाँ बढ़ती जा रहीं हैं।
जड़ी-बूटी विक्रेता आदिवासी परिवार के सदस्य एवं बच्चे।
लॉकडाउन के कारण आवाजाही पर रोक होने और कामधंधा पूरी तरह ठप्प होने से इन्हें अब फांकें करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। ख़त्म होते राशन के साथ गहराती चिंता के बीच जड़ी-बूटी विक्रेता आदिवासियों ने अपनी तंगहाली बयां करते हुए बताया कि अगर जल्द मदद न मिली तो दाने-दाने को मोहताज हो जायेंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ माह से पूरी दुनिया वैश्विक महामारी घोषित नोवल कोरोना वायरस(कोविड-19) संक्रमण के तेजी से बढ़ते खतरे को लेकर भयभीत है। कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए वर्तमान में दुनिया भर के कई देशों में टोटल लॉकडाउन चल रहा है। जिससे लोग अपने घरों में ही कैद हैं। हमारे यहाँ अचानक घोषित किये गए 21 दिन के लॉकडाउन के चलते गरीब परिवारों को कोरोना वायरस के साथ-साथ अब भूख से भी जंग लड़नी पड़ रही है।

परिवार में आधा सैंकड़ा से अधिक सदस्य

अजयगढ़ के पिष्टा ग्राम में डेरा डाले आदिवासी जड़ी-बूटी विक्रेता परिवार कबीले की तर्ज पर एक साथ रह रहे हैं। इनके परिवार में तकरीबन आधा सैंकड़ा से अधिक सदस्य हैं, जिनमें बच्चे और बूढ़े भी शामिल हैं। लॉकडाउन के दौरान जरूरी राशन सामग्री समाप्त होने से इनके बच्चे और वृद्धों के लिए परेशानी कहीं अधिक है। इनका कहना है कि हम लोग खाने-पीने की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। हमारे पास अब तक सरकार की कोई मदद सामने नहीं आई। इन हालात में हम करें तो आखिर क्या करें। एक तरफ़ हम कहीं निकल भी नहीं सकते, दूसरे तरफ हमारे छोटे-छोटे बच्चे बूढ़े माँ-बाप व पूरा कबीला खाने-पीने के लिए मोहताज है, जो राशन पानी था वो धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। अगर लॉकडाउन आगे बढ़ा तो हम क्या करेंगे। रसोई गैस ख़त्म हो गई है जिसे भरवाने के लिए रूपये नहीं है। इसलिए कई दिनों से जंगल से लकड़ी लाकर किसी तरह काम चला रहे हैं।
रसोई गैस ख़त्म होने के कारण खाना पकाने के लिए जंगल से लकड़ी लेकर आते आदिवासी।
आदिवासियों ने पत्रकारों से कहा कि आप लोग हमारी आवाज सरकार और अफसरों तक पहुंचाएं। ताकि जरूरी मदद मिल सके। इन लोगों ने बताया कि पिष्टा के सरपंच और सचिव और शासकीय उचित मूल्य दुकान के सैल्समैन से राशन मांगने पर उन्हें कथित तौर पर दुत्कार कर भगा दिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों एवं क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों को सूचना देने के बावजूद इन परिवारों को खाद्यान्न नहीं मिल सका। इसके अलावा अजयगढ़ जनपद क्षेत्र की अंतर्राज्यीय सीमा के पास अपने दुधमुंहे बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे डेरा डालकर रह रहे हंसिया-कुल्हाड़ी बनाने वाले लोहगड़िया समुदाय के भी लगभग दर्जन भर परिवार खाद्यान की समस्या से जूझ रहे हैं।

नपा के सामने महिलाओं ने किया हंगामा

जिला मुख्यालय पन्ना में रहने वाले कई गरीब मजदूर परिवार भी खाद्यान्न संकट से जूझ रहे हैं। लॉकडाउन के चलते काम-धंधा ठप्प होने से रोज कमाने-खाने वालों में भी उन परिवारों के लिए समस्या ज्यादा गंभीर है जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। ऐसे ही परिवारों की कुछ महिलाओं ने रविवार 5 अप्रैल को पन्ना नगर पालिका कार्यालय के सामने जमकर नारेबाजी की। सीएमओ को अपनी परेशानी बताने आईं महिलायें जब नपा कार्यालय पहुंचीं तो वहाँ गेट में अंदर से ताला लगा मिलने पर गरीब महिलायें काफी भड़क उठीं। नारेबाजी करते हुए इनके द्वारा शासन-प्रशासन के लिए काफी भला-बुरा कहा गया।
इन महिलाओं का कहना है कि कलेक्टर के आदेश के बाद भी गरीब-जरूरतमंदों एवं अन्य पात्र परिवारों को निः शुल्क राशन नहीं मिल रहा है। जबकि बिना राशन कार्ड वाले मजदूर परिवारों एवं बाहरी मजदूर परिवारों को उचित मूल्य दुकानों से प्रति व्यक्ति 4 किलो गेहूं,1 किलो चावल एवं अधिकतम हर परिवार को 16 किलो गेहूं और 4 किलो चावल देने आदेश जारी किया गया है। लेकिन खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की मौखिक मनाही चलते सेल्समैन बिना राशन कार्ड वाले बाहरी गरीब श्रमिक परिवारों को खाद्यान नहीं दे रहे हैं। जिससे प्रभावित परिवार भूखों मरने की कगार पर पहुंच चुके हैं। जिला प्रशासन को चाहिए कि खाद्यान्न संकट से जूझ रहे परिवारों को तत्परता से मदद पहुंचाने के लिए मैदानी अमले को आवश्यक निर्देश दिए जायें।
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बाँदा में कोरोना पॉजिटिव केस मिलने पर पन्ना जिले में अलर्ट, यूपी बार्डर को पूरी तरह सील कर सभी रास्तों पर पुलिस ने सख्त किया पहरा, जिले के स्वास्थ्य महकमे में मचा हड़कम्प

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फाइल फोटो।
  • अजयगढ़ के आइसोलेशन सेंटर में रखे गए 4 लोगों के सैम्पल जाँच के लिए भेजे

  • सीमावर्ती 6 ग्राम पंचायतों का विकासखण्ड मुख्यालय से अजयगढ़ सम्पर्क काटा

  • कोरोना संक्रमण की रोकथाम हेतु आम नागरिकों एवं आवाजाही पूरी तरह बंद की गई

  • निरीक्षण पर आए एसपी बोले यूपी बार्डर की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाएंगे

रिजवान खान, पन्ना/अजयगढ़। (www.radarnews.in) पड़ोसी जिला बाँदा उत्तर प्रदेश में नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण का पहला केस सामने आने के बाद से मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में प्रशासनिक हल्कों में हड़कम्प मचा है। कोरोना के खतरे से निपटने के लिए प्रशासन ने जिले के अजयगढ़ तहसील क्षेत्र में आनन-फानन में सतर्कता और निगरानी पहले से कई गुना बढ़ा दी है। शनिवार को पन्ना जिले के पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने अचानक अजयगढ़ पहुंचकर बाँदा से सटे सीमवर्ती इलाकों में स्थित चेक पोस्ट का सघन निरीक्षण किया। पुलिस कप्तान ने जिले में कोरोना वायरस संक्रमण की प्रभावी रोकथाम एवं बचाव के लिए उत्तर प्रदेश को जाने वाले सभी रास्तों पर चौकसी बढ़ाने अजयगढ़ थाना प्रभारी को कड़े निर्देश देते हुए लॉकडाउन की अवधि में आम लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी है। जटिल भौगोलिक संरचना वाले सीमावर्ती इलाके में उत्तर प्रदेश के अंदर स्थित पन्ना जिले की 6 ग्राम पंचायतों का विकासखण्ड मुख्यालय अजयगढ़ से सम्पर्क भी फिलहाल पूरी तरह काट दिया गया। कोरोना संक्रमण के प्रसार के सम्भावित खतरे से लोगों को बचाने के लिए तत्परता से यह कदम उठाया गया है।
अजयगढ़ में सवास्थ्य विभाग समेत अन्य विभागों के खण्ड स्तरीय अधिकारियों-कर्मचारियों की बैठक लेते एसडीएम एवं सीएमएचओ पन्ना।
जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर एल. के. तिवारी भी आज दिनभर अजयगढ़ में ही रहे। उन्होंने स्थानीय डॉक्टरों एवं पैरामेडीकल स्टॉफ की बैठक लेकर उन्हें आवश्यक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा अजयगढ़ के छात्रावास में बने अस्थाई आइसोलेशन सेंटर में रखे गए कोरोना संदिग्ध चार व्यक्तियों के नमूने लेकर उन्हें जाँच के लिए आईसीएमआर लैब जबलपुर भेजा गया। कुल मिलाकर बांदा में कोरोना संक्रमित व्यक्ति मिलने की पुष्टि होने के बाद से पन्ना जिले के सीमावर्ती अजयगढ़ तहसील क्षेत्र में प्रशासनिक हलचल और पाबंदियाँ बढ़ गईं हैं।
उल्लेखनीय है कि पन्ना और बाँदा जिले की सीमाएं आपस में जुड़ीं हैं, जिसकी लम्बाई करीब 50-60 किलोमीटर है। पन्ना पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने अन्तर्राज्जीय सीमा नाका पन्ना चौकी के निरीक्षण के दौरान यूपी बार्डर पर निगरानी बढ़ाने के लिए सीसीटीव्ही कैमरे लगाने की बात कही है। उन्होंने बताया कि इन कैमरों की निगरानी पन्ना में स्थित कण्ट्रोल रूम से की जायेगी। इसके पश्चात उन्होंने बरौली और रामनई का दौरा किया। पुलिस कप्तान के भ्रमण के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीकेएस परिहार, अजयगढ़ एसडीएम बी. बी. पाण्डेय, अजयगढ़ एसडीओपी इसरार मन्सूरी, रक्षित निरीक्षक देविका सिंह एवं अजयगढ़ थाना प्रभारी अरविन्द कुजूर उपस्थित रहे।
अजयगढ़ एसडीएम बी. बी. पाण्डेय ने बताया कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए एहतियात के तौर पर अजयगढ़-पन्ना मार्ग को पूर्णता बंद कर दिया गया है। उत्तरप्रदेश जाने वाले मुख्य मार्ग- रामनगर, पन्ना चौकी व नरदहा पहले से ही बंद हैं। उत्तरप्रदेश की सीमा के अंदर पन्ना जिले के जो गांव स्थित हैं या फिर यूपी से घिरे हैं जैसे कि- चंदौरा, बरौली, खरौनी, नरदहा, रामनई, कटर्रा, मौक़छ, बीरा, नयागांव, बीहर सरवरिया, नयापुरवा, कीरतपुरवा का तिराहा, हरनामपुर एवं खोरा आदि को अजयगढ़ और पन्ना से जोड़ने वाले हर छोटे-बड़े रास्ते को पूरी तरह सील करते हुए वहाँ पुलिस जवानों को तैनात किया गया है। उत्तर प्रदेश के अंदर स्थित पन्ना के ग्रामों में लॉकडाउन की अवधि में सिर्फ प्रशासनिक अमले की आवाजाही रहेगी। आम लोगों के आवागमन पर रोक लगाई गई है। उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले से मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में लोगों के प्रवेश को पूर्णतः प्रतिबंधित करते हुए इसे सख्ती से रोकने के लिए बार्डर पर पुलिस की थ्री लेयर सिक्योरिटी लगाई गई है, ताकि की कोई भी चोरी-छिपे दाखिल न हो सके।

सीमावर्ती 41 गांवों में पुनः होगा सर्वे

अजयगढ़ के आइसोलेशन सेंटर में रुके एक व्यक्ति की कोरोना संक्रमण जांच हेतु सैम्पल लेते हुए स्वास्थ्यकर्मी।
अजयगढ़ एसडीएम श्री पाण्डेय बताया कि पड़ोसी जिला बाँदा में कोरोना पॉजिटिव केस मिलने के बाद इस खतरनाक संक्रमण की रोकथाम के लिए सीमावर्ती इलाके के 41 ग्रामों में सर्दी-खाँसी-जुकाम-बुखार पीड़ित लोगों के का नए सिरे से पुनः सर्वेक्षण कराने का निर्णय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के साथ हुई बैठक में लिया गया। आपने बताया कि अजयगढ़ विकासखण्ड में पदस्थ किए गए 15 चिकित्सक आगामी कुछ दिनों तक बार्डर से सटे हुए गांवों में पूरा फोकस कर क्षेत्रीय लोगों को अपनी सेवाएं देंगे। उल्लेखनीय है कि बाँदा निवासी जो व्यक्ति जाँच में कोरोना संक्रमित पाया गया वह पिछले महीने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित हुए एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद 11 मार्च को वापस लौटा था। बाँदा जिले के प्रशासन के द्वारा उसके सम्पर्क में आए लोगों की छानबीन की जा रही है।
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कोरोना अपडेट : पन्ना जिले में अब तक 13,126 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, 1229 को होम क्वारेन्टाइन में रखा गया, कोरोना संदिग्ध 8 नए लोगों के सैम्पल जाँच लिए भेजे

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सांकेतिक फोटो।

* जिले में कोरोना वायरस रोकथाम एवं बचाव हेतु कार्यवाही जारी

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा महामारी घोषित नोवल कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए जिले में निरंतर कार्यवाही जारी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. एल.के. तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि इनमें विदेश से आए 08 लोगों को पूर्व से ही कम्युलेटिव किया गया है। अन्य राज्यों से 04 अप्रैल को 1741 व्यक्ति का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस प्रकार बाहर से आए कुल 10469 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है। जिले के 876 व्यक्तियों का स्क्रीनिंग की गयी। जिले में अब तक 13126 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें आज 265 लोगों को होम क्वारेन्टाईन किया गया है। अब तक जिले में कुल 1229 व्यक्तियों को होम क्वारेन्टाइन में रखा गया है। कोरोना ओपीडी में सर्दी, खांसी के 118 व्यक्तियों की जांच आज की गयी। अब तक जिले में कोरोना ओपीडी से 1286 व्यक्तियों की जांच की जा चुकी है। शनिवार को कोरोना संदिग्ध 8 नए लोगों के नमूने लिए गए। जिले में कोरोना संक्रमण की जाँच हेतु अब तक 13 नमूने लिए जा चुके हैं। पूर्व में जांच के लिए 05 नमूने भेज गए थे जो सभी निगेटिव पाए गए हैं। अपुष्ट सूत्रों अनुसार आज जिन 8 लोगों के सैम्पल लिए गए उनमें 04 व्यक्ति अजयगढ़ विकासखण्ड से हैं।
सांकेतिक फोटो।
नोवल कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु जिले में अस्थाई रूप से नियोजित 10 आयुष चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ की सर्विलेन्स टीम का विकासखण्ड अजयगढ में स्क्रीनिंग, फाॅलोअप, परीक्षण इत्यादि हेतु कार्य में लगा दिया गया है। जिले की कार्यरत आरआरटी मोबाईल टीम के द्वारा जिले के ग्रामों का भ्रमण कर चिन्हित होम क्वारेन्टाइन घरों में पहुंचकर अब तक 503 घरों में स्वैच्छिक होम आइसोलेशन का स्टीकर चस्पा कर ऐसे व्यक्तियों की कलाई में स्वैच्छिक होम आईसोलेशन एवं मुझे दूसरों को सुरक्षित रखने का गर्व है की सील लगाने का कार्य किया गया हैै।
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कोरोना संक्रमण के साथ-साथ अब बर्ड फ्लू का भी खतरा, पड़ोसी जिला कटनी में बर्ड फ्लू वायरस की पुष्टि

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सांकेतिक फोटो।

* रोकथाम के लिए रैपिड रिस्पांस टीम गठित, जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष भी स्थापित

* जिले के नागरिकों को बर्ड फ्लू से बचाव के लिए विशेष सतर्कता बरतनी होगी

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) वैश्विक महामारी घोषित नोवल कोरोना वायरस संक्रमण के गम्भीर खतरे से समूचा देश व प्रदेश अभी जूझ ही रहा है कि इस बीच एक और वायरस की दस्तक ने पहले से जारी संकट को कहीं अधिक बढ़ा दिया है। इस वायरस का नाम एबियन इन्फ्लुएंजा है, जिससे (बर्ड फ्लू) फैलता है। पन्ना के लोगों लिए चिंताजनक बात यह है कि पड़ोसी जिला कटनी के रीठी में बर्ड फ्लू पाए जाने की अधिकारिक तौर पर पुष्टि हुई है। इसके मद्देनजर जिले के नागरिकों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
सांकेतिक फोटो।
बर्ड फ्लू पक्षियों और मुर्गे-मुर्गियों के जरिए इंसानों में फैलने वाला सर्दी-जुकाम है। आमतौर पर ये बीमारी एक पक्षी से दूसरे को होती है मगर कभी-कभी पक्षियों-मुर्गियों से इंसानों में भी हो जाती है। इसके बाद संक्रमित व्यक्ति के करीबी सम्पर्क में आने वाले दूसरे व्यक्ति में ये बीमारी फैलती है। जिले में इस वायरस से बचाव एवं रोकथाम के लिए जिला एवं खण्ड स्तरीय रैपिड रिस्पांस टीम गठन करने के साथ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। यह टीम अपने-अपने क्षेत्र में सघन भ्रमण कर जलाशयों में प्रवासी पक्षियों के सेम्पल के साथ आसपास के गांव में पाले जाने वाली कुक्कुट (मुर्गे-मुर्गियों) के सेम्पल एकत्र करेंगी। इन सेम्पलों को परीक्षण के लिए दा डायरेक्टर नेशनल इन्स्टिट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी डिजिज आनन्द नगर हाथखेडा भोपाल भेजा जाएगा।
सांकेतिक फोटो।
इस कार्य के लिए जिला स्तरीय रैपिड रिस्पांस टीम एवं कन्ट्रोल रूम का प्रभारी डाॅ. प्रियंका सिंह पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ मोबाइल नम्बर- 9406631543 है। इनके दल में 5 अधिकारी, कर्मचारी शामिल किए गए हैं। विकासखण्ड स्तरीय रैपिड रिस्पांस टीम पन्ना के प्रभारी डाॅ. भावना कुशवाहा पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ, अजयगढ टीम के प्रभारी डाॅ. एम.एल. प्रजापति पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ, गुनौर की टीम के प्रभारी डाॅ. सी.पी. चौरसिया पशु चिकित्सा अधिकारी, पवई टीम के प्रभारी डाॅ. जी.आर. नापित पशु चिकित्सा अधिकारी तथा शाहनगर विकासखण्ड की टीम के प्रभारी डाॅ. अंशू तुमराम पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ को नियुक्त किया गया है।
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टोटल लॉकडाउन : पुलिस की सख्ती के चलते बंद रहा पूरा शहर, घरों से बाहर नहीं निकले लोग, सड़कों में दिनभर पसरा रहा सन्नाटा

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लॉकडाउन के चलते पूर्णतः बंद पड़े पन्ना के बड़ा बाजार में सड़कों पर पसरा संन्नाटा।

* तफरी करने वालों की मोटरसाइकिलें जब्त कर थाना में बैठाया

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) कोरोना वायरस संक्रमण के कहर से लोगों को बचाने के लिए पिछले 10 दिनों से देशव्यापी लॉकडाउन चल रहा है। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में लॉकडाउन को प्रभावी बनाने के लिए लोकहित में धारा-144 लागू की गई है। कोरोना संकट को देखते हुए पन्ना में पुलिस ने लॉकडाउन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के लिए अब पहले से ज्यादा सख्ती शुरू कर दी है। पुलिस की मुस्तैदी और सख्ती के फलस्वरूप शनिवार को जिला मुख्यालय पन्ना में टोटल लॉकडाउन का ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला। दवा दुकानों को छोड़कर आज दिनभर पूरा शहर बंद रहा। लोगों के अपने घरों पर रहने से सड़कों के साथ-साथ गलियों में भी पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। जनता कर्फ्यू के बाद यह दूसरा मौका था जब सुबह महज कुछ घंटे के लिए दूध डेयरी और हाथ ठेला में सब्जी लेकर गली-गली बेंचने वाले दुकानदारों ने ढील की समयावधि समाप्त होते ही बिना किसी देरी के अपनी दुकानें बंद कर दीं। आवश्यक वस्तुओं की बिक्री के सम्बंध में प्रशासन के द्वारा जिले के शहरी क्षेत्रों के लिए नए सिरे से समययावधि एवं तिथियों का निर्धारण किये जाने से पन्ना समेत आंचलिक नगरीय निकायों में आज किराना दुकानें पूरी तरह बंद रहीं।
पन्ना शहर का मुख्य बाजार बड़ा बाजार सहित शहर की समस्त दुकानें पूर्णतः बंद रहीं।
उल्लेखनीय है कि तेजी से फैलने वाले खतरनाक कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम एवं बचाव में सोशल डिस्टेंसिग काफी मददगार साबित हुई है। लिहाजा कुछ दिनों तक सोशल डिस्टेंसिग को कायम रखकर इस आपदा से निपटने लिए लॉकडाउन किया गया है। पन्ना जिले में 99 फीसदी से अधिक लोग तमाम परेशानियों बाबजूद संकट की इस घड़ी में शासन-प्रशासन के निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए लॉकडाउन के चलते पूरे समय अपने घरों पर ही रह रहे हैं। जिले के नागरिकों के द्वारा कोरोना को हराने के लिए जिस तरह पूरी एकजुटता दिखाते हुए अपने घरों में रहकर संयम-अनुशासन और धैर्य का परिचय दिया जा रहा है वह काबिले तारीफ़ है।
आसमान में उड़ान भरते हुए तस्वीरें निकलता ड्रोन कैमरा।
हालाँकि अपवाद स्वरूप चंद नासमझ लोग अभी भी बेवजह घरों से बाहर निकलकर खुद अपने लिए और समाज के लिए खतरा बढ़ाने से बाज नहीं आ रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान सड़कों पर निकलकर तफरी करने वाले अराजक तत्व आज पन्ना पुलिस के निशाने पर रहे। कोतवाली थाना प्रभारी एवं निरीक्षक हरि सिंह ठाकुर नेतृत्व पन्ना के सभी चौराहों में पुलिस जवान, यातायात पुलिसकर्मी मुस्तैदी से ड्यूटी पर तैनात रहे जबकि पुलिस वाहन में सवार गश्ती दल सायरन बजाते हुए दिनभर शहर का भ्रमण करते दिखे। लॉकडाउन की निगरानी में सीसीटीवी और ड्रोन कैमरे की भी मदद ली गई।
लॉकडाउन की निगरानी के लिए पन्ना के चौराहों में तैनात कोतवाली थाना एवं यातायात पुलिस के जवान।
पुलिस जवानों ने घर से बाहर निकलने वाले प्रत्येक व्यक्ति को रोककर उससे कड़ाई से पूँछतांछ की। इस दौरान संतोषजनक जबाब ना दे पाने अथवा बाहर आने की वजह से जुड़ा कोई प्रमाण मौके पर प्रस्तुत न करने पर करीब एक दर्जन से अधिक बहानेबाजों को सबक सिखाने के लिए उनकी मोटरसाकिल जब्त कर उन्हें कोतवाली थाना ले जाया गया। तफरी करने वालों को कई घण्टों तक थाना में बैठाकर रखने के बाद पुलिस ने देर शाम उनके वाहनों चालान काटे और लॉकडाउन के उल्लंघन की पुनरावृत्ति न करने की हिदायत देकर छोड़ दिया। जिले के आंचलिक कस्बों अजयगढ़, देवेन्द्रनगर, अमानगंज, पवई, ककरहटी, गुनौर, शाहनगर, सिमरिया, रैपुरा सहित गांवों में भी लॉकडाउन को लेकर पुलिस की सख्ती देखी गई।
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आइसोलेशन सेंटर परिसर में गूँजी किलकारी, प्रवासी महिला श्रमिक ने दिया बच्चे को जन्म

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ग्राम बरियारपुर भूमियान के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में अपने नवजात शिशु के साथ महिला श्रमिक कल्ली बाई केवट।

* रामनवमीं के दिन जन्म होने पर बच्चे का नाम रखा “राम”

* लॉकडाउन के चलते कई किलोमीटर पैदल चलकर पन्ना पहुँची महिला

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) लाॅकडाउन के बाद महानगरों से वापस आ रहे पलायनकर्ता मजदूरों को स्क्रीनिंग उपरांत कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के उद्देश्य से उनके गृहग्राम के नजदीकी विद्यालयों एवं छात्रावासों में बनाए गए अस्थाई आइसोलेशन सेंटरों में रखा जा रहा है। जिले के अजयगढ़ तहसील क्षेत्र के ग्राम बरियारपुर भूमियान के बालिका छात्रावास में बनाए गये आइसोलेशन सेंटर में रुके श्रमिकों को लॉकडाउन के चलते राज्यों-जिलों की सीमाएं सील होने और सार्वजानिक एवं निजी वाहनों की आवाजाही बंद होने से अपनी घर वापसी के सफर में तमाम परेशानियां उठानी पड़ी हैं। इन थके-हारे श्रमिकों के चेहरे गुरुवार को उस समय ख़ुशी से खिल उठे जब इस आइसोलेशन सेंटर में ठहरी एक गरीब श्रमिक महिला ने सेंटर परिसर में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में एक स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दिया। यह ख़ुशख़बरी मिलते ही महिला का पति और परिजन भी एक पल में तमाम कष्टों को भुलाकर ख़ुशी से झूम उठे। रामनवमीं के पावन अवसर पर बच्चे का जन्म होने पर नवजात का नाम “राम” रखा गया है। प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा पूरी तरह स्वस्थ्य हैं।
जच्चा-बच्चा देखते डॉक्टर एवं स्वास्थ्य विभाग की महिला कर्मचारी।
यात्री बसें ट्रेन एवं अन्य वाहन बंद होने से महानगरों में झुग्गी झोपड़ी में रह कर मजदूरी करने वाले गरीब परिवारों के सामने विकट समस्या खड़ी हो गई है। ना चाहकर भी मजदूर अपने गृहग्राम वापस आने को मजबूर हो गए हैं, जिसे जो सुविधा मिली वापस आना प्रारंभ कर दिया। कोई बस, कोई ट्रक तो कोई अन्य वाहन से जहां तक सुविधा मिली किसी पहुंचे और फिर वाहन नहीं मिलने सिर पर सामान उठाकर पैदल ही घर की ओर चल पड़े। इन मजदूरों के साथ महिलाएं-बच्चे एवं बुजुर्ग सभी शामिल हैं। इसी तरह कई मुश्किलों और चुनौतियों को पार करके परिवार सहित पन्ना पहुँची गर्भवती महिला कल्ली बाई ने यहाँ ग्राम बरियारपुर भूमियान के आइसोलेशन सेंटर परिसर में एक बच्चे को जन्म दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील क्षेत्र के ग्राम बरियारपुर भूमियान के बालिका छात्रावास में बनाए गये आईसोलेशन सेंटर में रूकी मजदूर महिला कल्ली बाई केवट पति रामदीन केवट 24 वर्ष को 1-2 अप्रैल की दरम्यानी रात में प्रसव पीड़ा उठी जिसकी सूचना छात्रावास अधीक्षिका द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अजयगढ़ के डाॅक्टर के. पी. राजपूत को दी गई। जिनके द्वारा स्टाफ नर्स विमलेश सिंह को निर्देश देकर तुरंत श्रमिक महिला को छात्रावास परिसर में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया गया। जहां गुरुवार 2 अप्रैल की सुबह लगभग 09ः45 बजे कल्ली बाई ने एक बच्चे को जन्म दिया। बच्चे का वजन 2 किलो 600 ग्राम बताया गया है। रामनवमीं के दिन बच्चे का जन्म होने की खबर आते ही बरियारपुर भूमियान के आइसोलेशन परिसर में ठहरे श्रमिकों एवं महिला के परिजनों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और छात्रावास स्टॉफ सहित ग्राम पंचायत के कर्मचारियों द्वारा इस नवजात और प्रसूता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
मथुरा से इस तरह पन्ना पहुँचा श्रमिक परिवार 
उल्लेखनीय है कि अजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम बरियारपुर भूमियान निवासी रामदीन केवट सपरिवार उत्तर प्रदेश के मथुरा के पालीखेड़ा में रहकर मजदूरी करता था। लाॅकडाउन के बाद अपने गांव पहुंचने वापस जाने के लिए केवट परिवार 29 मार्च 2020 को मथुरा से मिनी ट्रक में सवार होकर आगरा के लिए निकला। उक्त वाहन चालक ने रामदीन केवट और परिजनों को आगरा से 22 किलोमीटर पहले छोड़ दिया। इसके बाद वे पैदल चलकर आगरा पहुंचे, जहां से एक ट्रक ने झांसी छोड़ दिया और झांसी से 407 वाहन ने बरुआसागर तक पहुंचा दिया। वहां से ये लोग रेवाड़ी पहुंचे। रेवाड़ी से एक स्कूल बस ने इन्हें हरपालपुर पहुँचाया। हरपालपुर से बस में सवार होकर बमीठा तक आए। और फिर रामदीन केवट अपनी गर्भवती पत्नी के साथ 39 किलोमीटर पैदल चलकर 31 मार्च को अपने गाँव के नजदीक स्थित बरियारपुर डैम के तक पहुंचा। जहां से कोविड-19 दल प्रभारी द्वारा सचिव पप्पू लाल द्वारा इस श्रमिक परिवार को स्क्रीनिंग उपरान्त बरियारपुर छात्रावास के आइसोलेशन केन्द्र में एहतियात के तौर ठहराया गया। बहरहाल कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन में सकुशल वापस गृहग्राम लौटने और बच्चे के जन्म से हर्षित यह मजदूर परिवार उन्हें मदद करने सभी लोगों और ईश्वर के प्रति अनुग्रहीत है।
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