एम-स्ट्राइप्स प्रणाली के जरिए एकत्र होने वाला डेटा वन विभाग को वन्यजीवों की गतिविधियों का वास्तविक आकलन करने में मदद करेगा। इससे संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, गश्त की प्रभावशीलता बढ़ाने और वन्यजीव संरक्षण संबंधी निर्णयों को अधिक सटीक बनाने में सहायता मिलेगी। पन्ना टाइगर रिजर्व की विशेषज्ञ टीम ने प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों की तकनीकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया, जिससे उन्हें फील्ड में एप के प्रभावी उपयोग की व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 26 मई को उत्तर पन्ना वन मंडल तथा 28 मई को दक्षिण पन्ना एवं छतरपुर वन मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया। वन अधिकारियों के अनुसार टाइगर रिजर्व में सफल साबित हुई यह तकनीक अब सामान्य वन क्षेत्रों में भी वन्यजीव सुरक्षा का मजबूत आधार बनेगी। इससे बाघों और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर अधिक सटीक एवं रियल टाइम निगरानी संभव होगी, वहीं मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और संरक्षण प्रयासों को भी नई मजबूती मिलेगी।