“सुनहरी रेत का काला कारोबार: नदियां उजड़ रहीं, गरीबों की रोजी छिन रही… और सिस्टम मौन!”

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पन्ना जिले में केन नदी पर बीरा ग्राम समीप स्थित अजयगढ़-चंदला पुल के नीचे नदी की जलधारा को बाधित करके खुलेआम प्रतिबंधित मशीनों से पानी के अंदर से निकलवाते खनन माफिया।

*    जल गंगा अभियान आगाज़ के बीच पन्ना की नदियों में विनाशलीला जारी

*    रेत माफिया के कहर से केन, बाघिन और रुंज नदी का अस्तित्व संकट में

  अवैध खनन पर रोक लगाने सरपंच और महिला कृषक ने राजस्व अधिकारियों से लगाई गुहार

शादिक खान,पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिला की अजयगढ़ तहसील एक बार फिर अवैध रेत खनन के गंभीर संकट को लेकर सुर्खियों में है। हाल ही में ग्राम पंचायत कटर्रा की सरपंच श्रीमती कमला यादव और एक पीड़ित महिला द्वारा दिए गए दो अलग-अलग आवेदन पत्रों ने न केवल स्थानीय स्तर पर मचे हाहाकार को उजागर किया है, बल्कि शासन-प्रशासन की भूमिका पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पन्ना जिले की जनपद पंचायत अजयगढ़ अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कटर्रा की सरपंच ने रेत माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने खिलाफ एसडीएम से की लिखित शिकायत।
सरपंच कमला यादव द्वारा दिए गए आवेदन में ग्राम कटर्रा के मजरा केवटपुर से गुजरने वाली बाघिन नदी का जिक्र है, जो वर्षों से गरीब केवट समाज के परिवारों की जीवनरेखा रही है। नदी किनारे सब्जी की खेती कर ये परिवार अपना भरण-पोषण करते हैं। लेकिन अब यही जीवनरेखा, अवैध रेत उत्खनन के कारण विनाश के कगार पर पहुंच गई है। आवेदन में स्पष्ट आरोप है कि बालू माफिया दिन-रात मशीनों से नदी का सीना चीर रहे हैं और ग्रामीणों के सब्जी बाग उखाड़कर फेंक रहे हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि विरोध करने पर महिलाओं और बच्चों तक को गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। सरपंच ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह विवाद कभी भी हिंसक रूप ले सकता है।

विधवा महिला के खेत को किया खोखला

रेत माफियाओं द्वारा बाघिन नदी में मशीनों से खनन करके खेत को क्षति पहुंचाने से प्रभावित बेवा केशर बाई केवट ने नायब तहसीलदार अजयगढ़ को आवेदन पत्र देकर कार्रवाई की मांग की।
इसी मामले से जुड़ा एक अन्य आवेदन गरीब विधवा महिला केशर बाई पत्नी स्व. राजू केवट निवासी ग्राम कटर्रा द्वारा कुछ दिन पूर्व अजयगढ़ के नायब तहसीलदार को दिया गया है। इसमें रेत माफियाओं (अवैध उत्खनकर्ता) के रूप में सूरज पटेल, निवासी गढ़ा बागेश्वर धाम, जिला छतरपुर तथा नरेश पटेल निवासी अजयगढ़, जिला पन्ना (म.प्र.) का उल्लेख किया गया है। अनियंत्रित रेत खनन से प्रभावित बेवा महिला आरोप है कि उक्त अनावेदकों द्वारा उसकी जमीन (खेत) के पास 10–15 फीट गहरे गड्ढे कर दिए गए हैं, जिससे खेत धंसने लगे हैं और खेती पूरी तरह चौपट होने की कगार पर है। महिला ने यह भी बताया कि शिकायत करने पर उसे डराया-धमकाया जाता है और खुलेआम कहा जाता है कि “जहां शिकायत करनी है कर लो, खनन बंद नहीं होगा।” अजयगढ़ तहसील क्षेत्र अंतर्गत केवल बाघिन ही नहीं, बल्कि केन नदी और रूंज नदी में भी वर्षों से बड़े पैमाने पर संगठित तरीके से रेत का अवैध खनन जारी है। क्षेत्र में आमचर्चा है कि इस पूरे खेल में सत्ताधारी दल भाजपा के जनप्रतिनिधियों, राजस्व, खनिज विभाग और पुलिस अधिकारियों तक की मिलीभगत है, जिससे माफिया बेखौफ होकर काम कर रहे हैं।

जल संरक्षण बनाम रेत माफिया: दोहरी नीति?

विडंबना यह है कि एक ओर राज्य सरकार द्वारा “जल गंगा संवर्धन अभियान” चलाकर जल स्रोतों के संरक्षण की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर इन्हीं जल स्रोतों-नदियों को अवैध खनन से खत्म होने दिया जा रहा है। यह सवाल अब आम जनता के बीच गूंज रहा है कि आखिर जल संरक्षण के नाम पर अभियान और जमीनी स्तर पर नदियों का विनाश-दोनों साथ कैसे चल रहे हैं? आवेदनों में यह भी उल्लेख है कि माफिया प्रतिबंधित मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, नदी के भीतर तक खुदाई कर रहे हैं और पर्यावरण नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। इसका असर सिर्फ नदियों तक सीमित नहीं है-भूजल स्तर गिर रहा है, खेती बर्बाद हो रही है और ग्रामीणों की आजीविका छिन रही है।

प्रशासन कटघरे में

अजयगढ़ में स्थित अनुविभागीय अधिकारी राजस्व का कार्यालय। (फाइल फोटो)
दोनों आवेदनों में प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने वर्षों से चल रहे इस खुले खेल पर अब तक प्रभावी अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है? क्या यह महज लापरवाही है या फिर संरक्षण का संगठित खेल? लोगों का मानना है, वृहद पैमाने पर करीब एक दशक से खुलेआम जारी रेत की लूट शासन-प्रशासन के संरक्षण के बगैर संभव ही नहीं है। खनन माफिया नदियों को तबाह-बर्बाद करने के साथ नदी किनारे स्थित निजी भूमियों (खेतों) तथा शासकीय भूमि पर बिना किसी लीज स्वीकृति के गहरी खदानें खोदकर रेत निकाल रहा है। बीरा, भानपुर, जिगनी एवं रामनई ग्राम में धड़ल्ले से निजी एवं शासकीय भूमि पर संचालित करीब दजर्न भर अवैध रेत खदानों से प्रतिदिन सैंकड़ों घनमीटर रेत निकाली जा रही है। पन्ना में रेत का यह काला कारोबार अब सिर्फ अवैध खनन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पर्यावरण विनाश, गरीबों की आजीविका छिनने और कानून-व्यवस्था के चरमराने का गंभीर मुद्दा बन चुका है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इन आवेदनों को गंभीरता से लेकर ठोस कार्रवाई करता है या फिर “रेत का यह खेल” यूं ही चलता रहेगा।