किशोरी के साथ रेप करने वाले आरोपी को 14 वर्ष का सश्रम कारावास

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जिला एवं सत्र न्यायालय पन्ना का फाइल फोटो।

* विशेष न्यायाधीश पन्ना अमिताभ मिश्रा ने सुनाया फैसला

पन्ना। (www.radarnews.in) जिले के देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत इटमा ग्राम में माह अप्रैल 2017 में अनुसूचित जनजाति की एक 11 वर्षीय लड़की के साथ दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी ट्रक कंडेक्टर राजूराम यादव पिता संतु यादव 22 वर्ष निवासी ग्राम रमजुआ भाजीखेरा थाना सिंहपुर जिला सतना को दोषी मानते हुए न्यायालय ने 14 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश पन्ना अमिताभ मिश्रा द्वारा सुनाये गये अपने फैसले में अभियुक्त को दो हजार रुपए के अर्थदण्ड से भी दण्डित किया है।
अभियोजन की ओर से मामले की पैरवी करने वाले विशेष लोक अभियोजक जीतेन्द्र सिंह बैस ने जानकारी देते हुए बताया कि 11 अप्रैल 2017 की दरिम्यानी रात लगभग 12 बजे ग्राम इटमा में खेत में बनीं झोपड़ी में अपने माता-पिता के साथ निवासरत 11 वर्षीय लड़की जब लघुशंका के लिये झोपड़ी से बाहर निकली तब उसके माता-पिता अंदर ही सो रहे थे। इस दौरान ट्रक में अक्सर भूसा लेने गाँव आने वाला ट्रक कंडेक्टर राजूराम यादव ने नाबालिग को रोककर उससे माचिस मांगी। लड़की के मना करने के बाद राजूराम उसका मुंह दबाकर खींचते हुए झोपड़ी के पास स्थित गढ्ढे में ले गया और वहाँ सौ रूपये का लालच देते हुए उसके साथ जबरन बलात्कार किया। पीड़िता के चींखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर जब उसके माता-पिता व नाना दौड़े तो आरोपी मौके से भाग निकला। इस घटना की रिपोर्ट पर देवेन्द्रनगर थाना पुलिस द्वारा राजूराम यादव के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध करते हुए उसकी गिरफ्तारी उपरांत विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया। जहां मामले में दर्ज हुये विशेष प्रकरण के विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों के कथनों के आधार पर न्यायालय द्वारा आरोपित को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई।
सांकेतिक चित्र।

इन धाराओं में हुई सजा

विशेष न्यायाधीश पन्ना अमिताभ मिश्रा द्वारा सुनाये गये अपने फैसले में अभियुक्त राजूराम यादव को दोषी मानते हुए आईपीसी की धारा 376(2) वैकल्पिक धारा 3(क), सहपठित धारा 4 लैगिंग अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के अंतर्गत 14 वर्ष के सश्रम कारावास व एक हजार रूपये के अर्थदण्ड तथा अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(5) के अंतर्गत भी 14 वर्ष के सश्रम कारावास व एक हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है।