साप्ताहिक बाजार परिसर में दुकानों के निर्माण का विरोध क्यों कर रहे हैं छोटे व्यापारी !

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फाइल फोटो।

*    नीलामी में दुकानें खरीदकर हाट-बाजार में पैर जमा लेंगे बड़े व्यापारी

*    स्थान के आभाव में फुटकर दुकानदारों को होना पड़ सकता है बेदखल

  नगर परिषद अजयगढ़ पर बड़े व्यापारियों के आर्थिक हितों के लिए पथ विक्रेताओं की आजीविका को संकट में डालने का आरोप

  छोटे दुकानदारों की मांग- परिसर का सीमांकन करवाकर अतिक्रमण हटाने के बाद हो दुकानों का निर्माण

शादिक खान, पन्ना/अजयगढ़। (www.radarnews.in) जिले के अजयगढ़ क़स्बा के साप्तहिक हाट-बाजार (सब्जी मंडी) परिसर में आधा सैंकड़ा से अधिक दुकानों के निर्माण का पुरजोर विरोध हो रहा है। इससे सीधे तौर प्रभावित होने की आशंका से घिरे स्थानीय पथ विक्रेताओं, छोटे व फुटकर व्यापारियों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। विगत दिवस आक्रोशित व्यापारियों के एक समूह ने सब्जी मंडी पहुंचकर भारी हंगामा करते हुए दुकानों का निर्माण कार्य बंद करवा दिया था। सब्जी विक्रेताओं की मांग है कि, सबसे पहले साप्ताहिक बाजार परिसर का सीमांकन करवाकर अतिक्रमण को हटाया जाए। उसके बाद दुकानों का निर्माण कराना उचित होगा। फुटकर व्यापारियों का मानना है, वे लोग साप्ताहिक सब्जी मंडी के अंदर कई दशकों से जमीन के जिस टुकड़े पर दुकानें लगाकर अपनी आजीविका चलाते रहे हैं, उस स्थान को उनसे छीनकर बड़े व्यापारियों को आवंटित करने के लिए दुकानों के निर्माण की योजना बनाई गई है।
छोटे दुकानदार नगर परिषद की दुकान निर्माण की योजना को सब्जी मंडी से अपनी सुनियोजित बेदखली के तौर पर देख रहे है। नगर परिषद अध्यक्ष सीता सरोज गुप्ता इस तरह की आशंकाओं को पूर्णतः निराधार बताते हुए सिरे से खारिज़ करती हैं, लेकिन वे अपनी बात नाराज दुकानदारों को नहीं समझा पा रही हैं। नगर परिषद के 13 पार्षदों ने भी फुटकर व्यापारियों की जायज़ मांग का समर्थन करते हुए दुकानों के निर्माण पर लिखित में अपनी आपत्ती दर्ज कराई है। इस गतिरोध के चलते दुकानों के निर्माण एवं मंडी के विकास की योजना खटाई में पड़ गई है।
अतिक्रमण की चपेट में है अजयगढ़ के साप्ताहिक बाजार (सब्जी मंडी) का बड़ा भू-भाग।
उल्लेखनीय है कि, वर्तमान में अजयगढ़ का साप्ताहिक हाट-बाजार (सब्जी मंडी) जिस स्थल पर लगती उसे दिनांक 26 मई 1970 को तत्कालीन ग्राम पंचायत अजयगढ़ ने अपने प्रस्ताव में भूमि खसरा नंबर- 33/1 और रकबा 2.80 एकड़ एवं आराजी खसरा नंबर- 36/1 रकबा 1.78 एकड़ को साप्तहिक बाजार की बैठकी व्यवस्था हेतु उपयुक्त बताया गया था। अजयगढ़ क़स्बा के बीचों-बीच स्थित इस बेशकीमती जमीन के बड़े भू-भाग पर बाद के सालों में बड़े व्यापरियों ने अतिक्रमण कर अपनी दुकानें बना लीं। मंडी की जमीन पर अतिक्रमण पैर पसारता रहा और नगर परिषद तथा राजस्व विभाग के तत्कालीन अफसर तमशबीन बने रहे। सब्जी मंडी में दुकानें लगाने वाले फुटकर व्यापारियों की शिकायत के बाद भी अतिक्रमणकरियों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया।
करीब 4-5 वर्ष पूर्व नगर पंचायत ने साप्ताहिक बाजार की बैठकी को व्यवस्थित करने की मंशा से डेढ़ दर्जन गुमटियों का निर्माण कराया था। इन गुमटियों पर शुरू से ही बड़े व्यापारी नजरें गढ़ाए हुए थे। नगर परिषद की सांठगांठ से बड़े व्यापारियों ने पहले तो गुमटियों पर कब्ज़ा जमाया फिर उन्हें पक्की दुकानों में पक्की दुकानों में तब्दील कर लिया। इस तरह साप्ताहिक बाजार (सब्जी मंडी) के लिए आरक्षित कुल भूमि का 25 फीसदी हिस्सा कथित तौर पर अतिक्रमण (अवैध निर्माण) की चपेट में आ गया।

बढ़ रहीं दुकानें, सिकुड़ रही जमीन

दुकानों का निर्माण कार्य बंद करवाने पहुंचे आक्रोशित छोटे व्यापारियों को समझाते हुए तहसीलदार अजयगढ़ सुरेन्द्र अहिरवार।
फुटकर व्यापारी अरविंद कुशवाहा का कहना है, साप्तहिक हाट बाजार (सब्जी मंडी) परिसर अजयगढ़ में दुकानें लगाने वाले छोटे और फुटकर दुकानदारों की तादाद जहां साल दर साल लगातार बढ़ रही वहीं मंडी की जमीन अतिक्रमण के कारण तेजी से सिकुड़ रही है। वर्तमान में फुटकर सब्जी, बांस के बर्तन, मसालों, मनिहारी, फलों और जूते-चप्पल की करीब चार सौ दुकानें यहां लगती हैं। अब अगर मंडी परिसर में 53 दुकानों का निर्माण हुआ तो परिसर का रिक्त स्थान सिर्फ आधे से भी कम रह जाएगा। इस स्थिति में साप्ताहिक बाजार के दिन गुरूवार को मंडी परिसर में जमीन पर अपनी दुकानें लगाने वाले छोटे एवं फुटकर दुकानदारों की बैठकी के लिए शेष बचने वाली रिक्त भूमि कम पड़ जाएगी। गौर करने वाली बात यह भी है कि, 95 फीसदी फुटकर व्यापारियों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे 4-5 लाख रुपये खर्च करके मंडी में बनने वाली दुकानों को नीलामी में खरीद सकें। जिनकी दुकानों में सामान ही बमुश्किल कुछ हजार रुपए का रहता है, वे गरीब दुकानदार नगर परिषद की दुकानें खरीदने के लिए रुपए कहां से लाएंगे? इससे साफ़ जाहिर है कि, नगर परिषद की दुकानें खरीदकर बड़े व्यापारी मंडी परिसर की प्राइम लोकेशन में आबाद हो जायेंगे। जबकि स्थान के आभाव में बड़ी संख्या में फुटकर व्यापरियों को साप्ताहिक बाजार से बेदखल होना पड़ सकता है। आशंका यह भी जताई जा रही है कि प्रभावित होने वाले दुकानदारों की आजीविका भी संकट में पड़ सकती है।

अतिक्रमण हटाने के बाद हो दुकानों का निर्माण

अजयगढ़ के साप्तहिक हाट बाजार में फुटकर व्यापारियों के लिए बनाई गईं गुमटियों पर बड़े व्यापारियों ने कब्ज़ा जमाकर उन्हें दुकानों में परिवर्तित कर दिया।
दुकानों के निर्माण के विरोध का नेतृत्व कर रहे सब्जी विक्रेता प्रेम रैकवार ने बताया कि वह लोग साप्तहिक मंडी परिसर में दुकानों के निर्माण के पूरी तरह खिलाफ नहीं है। लेकिन उनकी कुछ बाजिव मांगें हैं, जिनसे लिखित और मौखिक तौर पर नगर परिषद अध्यक्ष, सीएमओ सहित राजस्व अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। प्रेम रैकवार ने बताया, सभी फुटकर व्यापारी चाहते है कि दुकानों के निर्माण से पूर्व सर्वप्रथम मंडी परिसर का सीमांकन करवाकर अतिक्रमण को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। इस कार्रवाई से मंडी के मौजूदा खाली परिसर में 25 फीसदी क्षेत्रफल का इजाफा होगा। उसके बाद स्वीकृत 53 दुकानों, टीन शेड सहित अन्य निर्माण कार्य कराए जाएं। लेकिन शर्त यह है कि नगर परिषद सिर्फ 50 फीसदी दुकानों की नीलामी कर शेष 50 फीसदी दुकानों को किराए के आधार पर फुटकर दुकानदारों को आवंटित किया जाए। अगर ऐसा होता है तो मंडी से एक भी दुकानदार को बाहर नहीं होना पड़ेगा। साथ ही साप्ताहिक बाजार की बैठकी भी व्यवस्थित हो जाएगी।

गतिरोध को दूर करने संजीदा नहीं जिम्मेदार

विगत दिनों अजयगढ़ के प्रवास पर आए मध्य प्रदेश शासन के राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार को मंडी में दुकानों के निर्माण पर रोक लगाने के संबध में ज्ञापन सौंपते हुए स्थानीय सब्जी विक्रेता। (फाइल फोटो)
बता दें कि, अजयगढ़ नगर परिषद के 13 पार्षदों ने फुटकर व्यापारियों के प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया है। पार्षदों की मांग है, सब्जी मंडी का सीमांकन कराने के बाद वहां से सम्पूर्ण अतिक्रमण हटाया जाए, उसके बाद पथ विक्रेताओं, छोटे व फुटकर दुकानदारों को विश्वास में लेकर उनकी सहमति से ही दुकानों का निर्माण कार्य कराया जाए। सब्जी विक्रेता मोहम्मद लियाकत ने बताया कि इस मुद्दे पर नगर परिषद अध्यक्ष सीता सरोज गुप्ता, सीएमओ राजेन्द्र सिंह, प्रभारी तहसीलदार अजयगढ़ सुरेन्द्र अहिरवार से फुटकर विक्रेताओं से कई दौर की बातचीत हुई लेकिन ठोस आश्वासन न मिलने के कारण कोई नतीज़ा नहीं निकल सका। दरअसल, मंडी का सीमांकन करवाकर वहां से बड़े व्यापारियों, रसूखदारों के अतिक्रमण तत्काल प्रभाव से हटाने एवं 50 फीसदी दुकानें फुटकर व्यापारियों को देने के मुद्दे पर जिम्मेदारों के ढुलमुल और उदासीनतापूर्ण रवैये के कारण गतिरोध बरक़रार है। इस मसले का सर्वमान्य हल निकालने में हो रही देरी का खामियाजा दुकान निर्माण कार्य का ठेका लेने वाले निर्दोष संविदाकार (ठेकेदार) को भुगतना पड़ रहा है।

इनका कहना है-
“साप्ताहिक बाजार (सब्जी मंडी) परिसर से एक भी दुकानदार को बेदखल नहीं किया जाएगा, फुटकर व्यापारियों के हितों का पूरा ध्यान रखते हुए दुकानों के साथ-साथ 3 टीनशेड वाले चबूतरों का भी निर्माण कराया जाएगा। चबूतरों पर छोटे दुकानदार व्यवस्थित तरीके से अपनी दुकानें लगा सकेंगे। दुकानों के निर्माण संबंधी प्रस्ताव को सभी पार्षदों की सहमति से ही स्वीकृति प्रदान की गई थी। मंडी परिसर के सीमांकन हेतु राजस्व विभाग के अधिकारियों बात हो चुकी है। जल्द ही हमसब मिलकर इस मसले का समाधान निकाल लेंगे।”

सीता सरोज गुप्ता अध्यक्ष नगर परिषद अजयगढ़ जिला पन्ना (म.प्र.)।

“साप्ताहिक बाजार (सब्जी मंडी) परिसर का सीमांकन कराने के लिए तहसीलदार अजयगढ़ को सप्ताह भर पूर्व पत्र प्रेषित किया जा चुका है। दुकानों का निर्माण सिर्फ बड़े व्यापारियों के लिए कराया जा रहा है यह कहना उचित नहीं होगा, छोटे व्यापारी बैंक लोन लेकर दुकानें प्राप्त कर सकते हैं। फुटकर विक्रेताओं के लिए दुकानों के आरक्षण को लेकर नगर पालिका एक्ट में क्या प्रावधान यह देखना पड़ेगा। वैसे इस संबंध में परिषद को निर्णय लेना है। वर्तमान में दुकानों का निर्माण कार्य बंद है। मंडी की भूमि पर निर्माणाधीन मकान पर भी स्टे लगवा दिया है।”

राजेन्द्र सिंह, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर परिषद अजयगढ़।

“फुटकर सब्जी विक्रेताओं के विरोध के चलते पखवाड़े भर से निर्माण कार्य ठप्प पड़ा है। बीच में तीन बार कार्य शुरू कराने का प्रयास किया गया था लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल सकी। मेरी लेबर एक सप्ताह तक इंतजार करती रही, बिना किसी काम के उनको मजदूरी का भुगतना करना पड़ा है। नगर परिषद अध्यक्ष व सीएमओ इस मामले का समाधान निकालने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। 53 दुकानों का निर्माण करीब 1 करोड़ की लागत से किया जाना है। टीन शेड तथा वॉशरूम निर्माण का ठेका अलग से है।”
राजेन्द्र भाटी, संविदाकार, बांदा, उत्तर प्रदेश।
“राजस्व रिकार्ड में सब्जी मंडी का परिसर नजूल भूमि के रूप में दर्ज है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी को इसकी जानकारी देकर उनसे हाट-बाजार के लिए भूमि को प्रक्रियानुसार आवंटित कराने का सुझाव दिया है। नजूल भूमि का रकबा काफी बड़ा है, इसलिए नगर परिषद अपनी आवश्यकतानुसार जितनी भूमि का आवंटन हाट-बाजार के लिए कराती है उसका सीमांकन कर दिया जाएगा।”

सुरेन्द्र अहिरवार, तहसीलदार अजयगढ़ जिला पन्ना।