Homeबुंदेलखण्डउर्पाजन केन्द्रों में भीगा हजारों क्विंटल गेंहू

उर्पाजन केन्द्रों में भीगा हजारों क्विंटल गेंहू

आंधी-तूफान के साथ आई बारिश ने खोली व्यवस्थाओं की पोल

पन्ना। रडार न्यूज भीषण आंधी तूफान के साथ हुई बेमौसम बारिश ने देश के कई हिस्सों में तबाही मचाने के साथ पन्ना में भी काफी क्षति पहुंचाई है। वर्तमान में गेंहू खरीदी के चलते जिले के सभी उर्पाजन केन्द्रों पर खुले आसमान के नीचे पडा हजारों क्विंटल गेंहू असमय हुई बारिश में तर-बतर हो गया। गेंहू की परिवहन व्यवस्था सही न होने के कारण बारिश में बरी तरह भीगे गेंहू के खराब होने की आशंका जताई जा रही है। जिला मुख्यालय पन्ना के नजदीक ग्राम लक्ष्मीपुर स्थित पर ही खुले आसमान के नीचे पडा 139 क्विंटल गेंहू बारिश की भेंट चढ़ गया। केन्द्र के लोगों ने बाहर पडे गेंहू को बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन तेज बारिश के चलते गेंहू को खासा नुकसान हुआ। हालाकि केन्द्र के लोगों ने अनाज को ढ़कने के लिये भारी मशक्कत की। जिससे कुछ हद तक फसल को बचाया जा सका। लेकिन बारिश के बाद अनाज में नमी होने से भी फसल को नुकसान होने का खतरा बना हुआ। अब किसी तरह  केन्द्र में बचे हुए अनाज को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। विदित हो कि पूर्व में भी इसी तरह अचानक हुई बारिश से यहां खासा नुकसान हुआ था। बावजूद इसके यहां अनाज की सुरक्षा के लिये माकूल इंतेजाम नहीं किये गये।

गेंहू सुखाने, बंद की खरीदी

पन्ना, बारिश में गीला हुआ लक्ष्मीपुर मंडी का गेंहू.

लक्ष्मीपुर गेंहू खरीदी केन्द्र में उपस्थित मिले समिति सेवक नरेन्द्र कुमार तिवारी ने बताया कि शनिवार के दिन दोपहर 2 बजे तक खरीदी को स्थगित कर गेंहू को सुखाने का कार्य किया जायेगा। उन्होंने बताया कि आज दिन भर अनाज को सुखाने का कार्य किया गया, जिससे काफी हद तक नुकसान को कम किया जा सका। विदित हो कि बेमौसम बारिश से जहां शासन का खरीदा हुआ, अनाज बर्बाद हुआ, वहीं किसानों को भी इससे नुकसान हुआ है। कई स्थानों पर किसानों का खुले में रखा अनाज बारिश में भीग गया।

नहीं है सुरक्षा के पर्याप्त इंतेजाम

गौरतलब है कि जिले में अब पर्याए¢त मात्रा में वेयर हाउस उपलब्ध है। लेकिन गेंहू खरीदी केन्द्रों से वेयर हाउस तक अनाज को पहुंचाने की पर्याए¢त व्यवस्था नहीं है। जिससे अधिकांश दिन खरीदी केन्द्रों में ही अनाज पड़ा रहता है। इस तरह की बेमौसम आई मुसीबत से शासन को बड़ी हानि होती है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देने चाहिये और प्रतिदिन अनाज को भण्डारण तक पहुंचाने की व्यवस्था कराई जानी चाहिये, ताकि इस तरह के नुकसान को रोका जा सके।

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