शहीद पिता को मासूम बेटे ने दी मुखाग्नि, नम हुई आंखें

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शहीद जवान आशीष त्रिपाठी के शव को सलामी देती सशस्त्र जवानों की गारद।

बीएसएफ जवान आशीष का राजकीय सम्मान के साथ किया गया अंतिम संस्कार

पन्ना के सपूत को नम आंखों से दी विदाई, अंतिम यात्रा में शामिल हुए सैंकड़ों लोग

पन्ना। रडार न्यूज़ त्रिपुरा के आरकेपुर में तैनात बीएसएफ के जवान पन्ना निवासी आशीष त्रिपाठी पुत्र शिवसागर त्रिपाठी की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। तिरंगे में लिपटा उनका शव गुरूवार देर रात्रि पन्ना लाया गया। यहां इंद्रपुरी कॉलोनी स्थित मुक्तिधाम में भारत माता की जय और शहीद आशीष त्रिपाठी अमर रहे के जयकारों के बीच राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पन्ना के सपूत को विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। छः वर्षीय बेटे अस्तित्व त्रिपाठी ने अपने चाचा सौरभ का हांथ पकड़कर जब शहीद पिता को दी मुखाग्नि दी तो यह देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखों से आंसू छलक उठे।

तिरंगे में लिपटे पिता के शव को चूमता मासूम अस्तित्व त्रिपाठी।

दाह संस्कार से पूर्व सशस्त्र जवानों की गारद ने सैन्य सम्मान के साथ जवान के शव को सलामी दी। इस मौके पर पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों, राजनेताओं, पत्रकारों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में बीएसएफ की 164 बटालियन में निरीक्षक के पद पर त्रिपुरा के आरकेपुर में पदस्थ रहे आशीष त्रिपाठी की 3 जुलाई को अचानक तबियत बिगड़ने पर मिलेट्री हाॅस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान उनका दुखद निधन हो गया। आशीष की इस तरह अचानक मृत्यु होने की दुखद सुचना जब उनके परिजनों को मिली तो कोहराम मच गया। जांबाज आशीष को करीब से जानने वालों को तो इस ख़बर पर यकीन ही नहीं हो रहा था। गुरुवार देर रात जब सेना के जवान अपने साथी का पार्थिव शरीर लेकर पहुंचे तो शहीद के माता-पिता, पत्नी व अन्य परिजन शव से लिपट कर रोने लगे।

पैतृक गांव में शोक की लहर-
बीएसफ जवान आशीष त्रिपाठी को अंतिम विदाई देने उमड़े सैंकड़ों लोग।

आज शहीद आशीष की अंतिम यात्रा में उनके पैतृक ग्राम फरस्वाहा से भी बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने शामिल होकर अपने वीर सपूत को श्रद्धांजली अर्पित की। अंतिम यात्रा में सैंकड़ों लोग शामिल हुए इस दौरान सबकी आंखें नम थीं। मालूम हो कि श्री त्रिपाठी अपने पीछे भरे-पूरे परिवार के साथ 6 वर्षीय पुत्र व पत्नि को छोड़ गये। उनके निधन पर शहर के गणमान्य नागरिकों व पत्रकारों ने शोक संवेदनाए व्यक्त कीं है।

12 वर्षों तक की देश की सेवा-
अपने शहीद पिता को मुखाग्नि देता मासूम अस्तित्व त्रिपाठी।

राष्ट्रप्रेम की प्रबल भावना और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा रखने वाले आशीष ने आज से करीब 12 वर्ष पूर्व 2006 में भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसफ) में सब इंस्पेक्टर के पद पर भर्ती हुए थे। कश्मीर, पंजाब व त्रिपुरा पदस्थापना के दौरान बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उन्होंने सदैव पूरी कर्तव्यनिष्ठा, मेहनत और लगन के साथ देश की सीमाओं की सुरक्षा के दायित्व को बखूबी निभाया। मुख्यालय में तैनाती के दौरान भी उनकी सेवाएं उत्कृष्ट रहीं। फलस्वरूप शानदार सर्विस रिकार्ड के चलते आशीष त्रिपाठी को सेना में निरीक्षक के पद पर पदोन्नति मिली थी।

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