द बर्निंग बस : तीर्थयात्रियों से भरी बस में शार्ट-सर्किट से भड़की भीषण आग, जान बचाने लिए खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर निकले यात्री, चंद मिनिट में जलकर ख़ाक हुई बस

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* पन्ना-छतरपुर मार्ग पर स्मृति वन के समीप हुआ हादसा

* रात्रि 3 बजे बस में आग लगते ही फैली अफरा-तफरी, नींद में थे यात्री

* चालक-परिचालक की सूझबूझ और तत्परता से बाल-बाल बचे 50 तीर्थयात्री

* बस अग्निकांड से मड़ला घाटी में 3 वर्ष पूर्व हुए भयानक हादसे की यादें हुई ताजा

शादिक खान, पन्ना। रडार न्यूज   महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले से 50 तीर्थ यात्रियों को लेकर गंगासागर जा रही बस में सोमवार देर रात 3 बजे शार्ट-सर्किट के कारण अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग की लपटों ने प्रचंड रूप धारण करते हुए पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। बस के चालक-परिचालक ने सजगता दिखाते हुए बड़ी ही सूझबूझ और तत्परता के साथ समय रहते सभी यात्रियों को नींद से जगाकर जलती हुई बस से किसी सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस बीच चंद मिनिट में ही पूरी बस धू-धूकर जलकर गई। इस हादसे की सूचना मिलने पर दो दमकल वाहन और पन्ना कोतवाली थाना पुलिसकर्मी आनन-फानन मौके पर पहुँच गए। दमकल वाहनों में तैनात फायरमैनों ने पानी की बौछार कर आग पर काबू पा लिया लेकिन तब तक पूरी बस जल चुकी थी। हादसे में बाल-बाल बचे तीर्थ यात्रियों को कोतवाली पुलिस द्वारा रात्रि में ही स्मृति वन में ठहराया गया और उनकी भोजन आदि की व्यवस्था की गई। वहीं पन्ना के कई संवेदनशील लोगों व सामाजिक संगठनों ने आगे आकर तीर्थ यात्रियों को कपड़े, बिस्तर, जूते-चप्पल उपलब्ध कराये। सोमवार 7 दिसम्बर की सुबह पन्ना में लोग जब नींद से जागे तो इस हादसे के बारे में जानकर दंग रह गए।

ओरछा से चित्रकूट जा रही थी बस

प्राप्त जानकारी के अनुसार विजय लक्ष्मी बस सर्विस की बस क्रमाँक-MP-13-P-3611 रविवार 6 दिसम्बर की शाम को टीकमगढ़ जिले के ओरछा से चित्रकूट के लिए रवाना हुई थी। यह बस देर रात 3 बजे जब पन्ना के समीप स्मृति वन पहुँची तो अचानक इंजन से धुँआ निकलने लगा और देखते ही देखते आग भड़क उठी। चालक-परिचालक ने सजगता दिखाते हुए हादसे की आशंका पर तुरंत तीर्थ यात्रियों को नींद से जगाकर बस से बाहर निकाला। इस बीच मची अफरा-तफरी के चलते कई यात्री जलती हुई बस से जल्दी से जल्दी बाहर निकलकर जान बचाने के लिए खिड़कियों के शीशे तोड़कर कूद गए। राहगीरों की मदद से पुलिस को हादसे की सूचना दी गई। आनन-फानन मौके पर पहुंचे दमकल चालक उत्तम सुनकर व रामआसरे साहू, फायर मैन अमित सेन, रुपेश शर्मा ने भी कई यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की और फिर आग को काबू किया गया। हालांकि, बस तब तक पूरी तरह जल चुकी थी।

… तो कोई जिंदा न बचता

सोमवार देर रात हुए बस अग्निकांड ने तीन वर्ष पूर्व मड़ला घाटी में हुए हृदय विदारक भयावह हादसे की यादें ताजा कर दीं हैं। मई 2015 में मड़ला घाटी में चलती बस में आग लगने के बाद वह पुलिया के नीचे गिर गई थी। लाछागृह बनी बस में सवार रहे 22 यात्री जिंदा जलकर असमय काल-कवलित हो गए थे। इस हादसे में भी तीर्थ यात्रियों के बचने की उम्मीद नहीं थी। क्योंकि, तीर्थ यात्री बस में खाना पकाने के लिए 7 गैस सिलेंडर, बड़ी मात्रा में कैरोसीन, खाने का तेल आदि सामग्री रखे हुए थे। बस में जब आग लगी तो चालक-परिचालक ने सजगता और सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत सभी यात्रियों को नींद से जगाकर बाल-बाल बचा लिया। वहीं दमकल कर्मियों ने समय रहते जलती हुई बस से गैस सिलेंडर बाहर निकाल लिए जिससे उनमें ब्लास्ट नहीं हो सका। भीषण बस अग्निकांड में मौत के भयावह मंजर को करीब से देखने वाले तीर्थयात्री कोई जनहानि न होने को ईश्वरीय चमत्कार बता रहे हैं।