मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने कहा कि खेल स्वस्थ जीवन के लिये निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हैं। हार-जीत से ज्यादा महत्व प्रतियोगिता में सहभागिता का होता है। उन्होंने कहा कि खेल जीवन के सर्वांगीण विकास और चुनौतियों का सामना करना सिखाते हैं। डॉ. चौधरी ने कहा कि अभिभावको को चाहिए कि बच्चों को खेल के लिये प्रोत्साहित करें। खेल के माध्यम से बच्चे देश, प्रदेश एवं परिवार का नाम रोशन कर सकते हैं। आजकल बच्चे खेलों को कैरियर के रूप में अपना रहे हैं। डॉ. चौधरी ने बताया कि स्कूलों में भी र्स्पोट्स एवं योग शिक्षकों की भर्ती की जा रही है ताकि बच्चों को शिक्षा के साथ खेल एवं योग की शिक्षा भी दी जा सके।
आयुक्त लोक-शिक्षण श्रीमती जयश्री कियावत ने कहा कि पूरे देश से स्कूली बच्चे इस प्रतियोगिता में भाग लेने आए हैं। ये सभी बच्चे अपने प्रदेश के हीरे हैं। उन्होंने खिलाड़ी बच्चों से कहा कि प्रतियोगिता में खेल भावना के साथ एकाग्रचित होकर खेलें, अवश्य सफल होंगे। असफलता मिलने पर भी निराश न होते हुए आगे बढते जाना है, यही खेल भावना है। मंत्री द्वय ने एसजीएफआई का ध्वज फहराकर प्रतियोगिता का शुभांरभ किया। प्रतिभागी खिलाड़ियों को नियमाधीन खेल भावना से खेलने की शपथ दिलाई।