गंभीर पेयजल संकट की आहट : पन्ना जिला जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित

0
63
प्रतीकात्मक चित्र।

*      अत्याधिक दोहन के कारण भू-गर्भीय जल स्त्रोतों का जल स्तर नीचे खिसका

पन्ना। (www.radarnews.in) कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट सुरेश कुमार ने मध्य प्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 3 के तहत तत्काल प्रभाव से पन्ना जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। जिले के सभी विकासखण्ड एवं नगरीय व शहरी क्षेत्रों को आगामी 15 जुलाई तक की अवधि के लिए जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की कार्यवाही की गई है। उक्त आदेश प्रभावशील रहने की अवधि में कोई भी व्यक्ति बगैर अनुमति के किसी शासकीय भूमि पर स्थित जल स्त्रोतों में पेयजल एवं घरेलू प्रयोजन को छोड़कर अन्य किसी भी प्रयोजनों के लिए नहरों में प्रवाहित जल के अलावा अन्य स्त्रोतों का जल दोहन एवं किन्हीं भी साधनों द्वारा जल का उपयोग नहीं कर सकेगा।
विकासखण्ड व नगरीय क्षेत्रों के सभी नदी, नालों, स्टॉप डैम, सार्वजनिक कुओं तथा अन्य जल स्त्रोतों का उपयोग घरेलू प्रयोजन के लिए तत्काल प्रभाव से सुरक्षित किया गया है। इसके अतिरिक्त जल अभावग्रस्त क्षेत्र में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की पूर्व अनुज्ञा के बगैर कोई व्यक्ति अथवा निजी ठेकेदार किसी भी प्रयोजन के लिए नवीन नलकूप का निर्माण नहीं करेेगा। शासकीय नलकूप खनन पर उक्तादेश लागू नहीं होगा। अपनी निजी भूमि पर नलकूप खनन कार्य के लिए इच्छुक व्यक्तियों को निर्धारित प्रारूप में व नियत शुल्क के साथ संबंधित एसडीएम को आवेदन करना होगा।

निजी पेयजल स्त्रोत का हो सकेगा अधिग्रहण

एसडीएम द्वारा सार्वजनिक पेयजल स्त्रोत सूख जाने के कारण वैकल्पिक रूप से दूसरा कोई सार्वजनिक पेयजल स्त्रोत उपलब्ध नहीं होने पर जनहित में निजी पेयजल स्त्रोत को पेयजल परिरक्षण संशोधित अधिनियम 2002 के प्रावधानों के अधीन निश्चित अवधि के लिए अधिग्रहण किया जा सकेगा। आदेश के उल्लंघन पर म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 9 एवं भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के तहत दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी। सभी अनुविभागीय दण्डाधिकारी सहित तहसीलदार एवं कार्यपालिक दण्डाधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस, थाना प्रभारी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मैदानी अधिकारी-कर्मचारियों, नगरीय निकायों के सीएमओ, जनपद पंचायत सीईओ तथा ग्राम पंचायतों के सचिवों द्वारा आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कराया जाएगा।

जल स्तर में दर्ज की गई गिरावट

उल्लेखनीय है कि कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खण्ड पन्ना द्वारा सिंचाई इत्यादि कार्यों में भू-गर्भीय जल का अत्याधिक दोहन होने के कारण पेयजल स्त्रोतों के जल स्तर में कमी के बारे में अवगत कराया गया था। साथ ही नगरीय व शहरी क्षेत्रों के नलकूपों व अन्य जल स्त्रोतों के जल स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज होने के कारण तथा जिले में पेयजल संकट की स्थिति निर्मित होने की संभावना के दृष्टिगत निजी नलकूप खनन में पूर्णतः प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की गई थी, जिससे सार्वजनिक पेयजल स्त्रोतों की क्षमता प्रभावित न हो। जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जनहित में पेयजल व अन्य निस्तार समस्याओं के दृष्टिगत जनता को पेयजल प्रदाय बनाए रखने और बढ़ोत्तरी के लिए तथा पेयजल का समान वितरण सुनिश्चित कर जनता की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संपूर्ण जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है।