श्रीरामकथा के नव कलाप्रयोगों पर एकाग्र ‘‘रामायणम’’ समारोह

0
820
‘‘रामायणम’’ समारोह में अपनी प्रस्तुति देतीं कलाकार।

रामनाट्यम की प्रस्तुति भरटनाट्य, कुचीपुड़ी और मोहिनीअट्टम नृत्य शौलियों में हुई

श्रीरामजन्म से श्रीराम राज्याभिषेक की भावपुर्ण लीलाओं ने किया मंत्रमुग्ध

चित्रकूट। रडार न्यूज  तुलसी शोध संस्थान चित्रकूट में मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा श्रीरामकथा के नव कलाप्रयोगों पर एकाग्र तीन दिवसीय प्रतिष्ठा आयोजन ‘रामायणम’ का आयोजन 11 से 13 अगस्त 2018 तक तुलसी भवन, तुलसी शोध संस्थान, नयागांव, चित्रकूट के ऑडिटोरियम में किया जा रहा है। श्रीरामकथा के कलारूपों की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा पूरे देश में हैं नहीं बल्कि अन्य देशों थाईलैण्ड, इण्डोनेशिया, श्रीलंका, वियतनाम, लाओस, मारीशस, कम्बोडिया आदि में भी प्रचलित है। हमारे देश में श्रीराम और श्रीकृष्ण दो ऐसे चरित आख्यान हैं जिन पर प्रायः सभी कलाविधाओं में गायन और मंचन के माध्यम से जनसामान्य के समक्ष अपने इष्ट के आदर्श और कथा के व्यावहारिक पक्ष को प्रस्तुत किया जाता है।

बघेलखण्ड के लोकगीतों से की शुरूआत

रामायणम समारोह में दूसरे दिन की प्रस्तुतियों की शुरूआत में बघेलखण्ड अचंल में पारम्परिक रूप से गाये जाने वाले श्रीराम से संबंधीत लोकगीतों की प्रस्तुति शशिकुमार पाण्डे और साथी कलाकारों द्वारा दी गई। श्री पाण्डे ने लोक की इस समृद्ध परम्परा से चुने हुये गीतों की प्रस्तुति दी जिसमें प्रमुख संस्कारों को समाहित किया गया। श्री पाण्डे ने अपने गायन का प्रारंभ पारम्परिक भगत गाकर जिसमें- “सीता कहहे दूनौ रैया रे मुनईया, सोहर-रामा की फूली फुलबरिया, बरूआ-मोरे राम रिसाने जायें सोहाग-कहमा बिताईऊ सीता, नहछू-बुलाये देते हो सलगी समूची नगर अयोध्या का, गइलहाई-लक्षिमन लिहेबान राम हिरनिया मारे, सुआगीत-सिया हरे रामन जाय, परछन-बियाह लाये रघुवर जानकी का और समापन में कजरी-हरे हरे दशरथ राज दुलारे” से किया। दूसरी प्रस्तुति श्रीलेयम् नाट्य कला समिति-भोपाल के चालीस से अधिक कलाकारों ने वाल्मिकी कृत रामायण के आधार पर रामनाट्यम की प्रस्तुति भरटनाट्य, कुचीपुड़ी और मोहिनीअट्टम नृत्य शौलियों के साथ भोपाल से पधारे वरिष्ठ और युवा निर्देशक एम.शाजी के निर्देशन में हुई। रंगभूषा, वेशभूषा, अभिनय और भावपूर्ण इस लीला प्रस्तुति को अन्त तक दर्शक , श्रोताओं ने भरी आँखो से निहारा।

प्रकाश और ध्वनि के साथ कलाकारों के अद्भुत समन्वय की सराहा

श्रीरामजन्म से श्रीराम राज्याभिषेक तक के प्रसंगों की एक घंटा पन्द्रह मिनट की सुगंठित इस प्रस्तुति में प्रायः सभी प्रमुख लीलाओं जिनमें रामजन्म, गुरूकुल ऋषियों के यज्ञ की असुरों से रक्षा, पुष्पवाटिका, वनगमन, चित्रकूट निवास, भरत मिलाप, अरण्य प्रस्थान, ऋषियों का आर्षीवाद, असुरों का वध, शूर्पणखा, सीताहरण, सुग्रीव-मिलन, माता सीता की खोज, अशोक वाटिका, लंकादहन, युद्ध और श्रीराम राज्याभिषेक तक के प्रसंगों को सुन्दर दृष्य बंध के साथ संयोजित किया गया। प्रकाश और ध्वनि के साथ कलाकारों के अद्भुत समन्वय को दर्शक ने बार-बार तालियों से न केवल सराहा बल्कि मंत्रमुग्ध हो अलग-अलग उम्र के प्रभु श्रीराम, माता सीता और श्री लक्ष्मण के सुन्दर स्वरूपों के दर्शन करते हुए कथा का श्रवण करते रहे। समारोह के समापन दिवस 13 अगस्त, 2018 को सुश्री ममता शर्मा एवं साथी-बनारस द्वारा अवधी गीतों में श्रीराम के गीतों के गायन तथा तिरूअनंतपुरम केरल से पधारे जॉय कृष्नन और साथियों द्वारा केरल की पारम्परिक नृत्य शैली केरलानादनम और शास्त्रीय नृत्य शैली भरतनाट्यम और कुचीपुड़ी के समन्वय से श्रीरामकथा नृत्य नाट्य की प्रस्तुति देंगे।