बिजली का रोना-बिल भुगतान पर चुप्पी: पन्ना जिले में उपभोक्ताओं पर 207 करोड़ बकाया, हर महीने बिलिंग के मुकाबले 50% वसूली

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पन्ना में सतना नाका के समीप एमपीईबी कॉलोनी में स्थित कार्यालय, अधीक्षण अभियंता, मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड।
  • कुल सप्लाई में सिर्फ 70 प्रतिशत की बिलिंग, 30 फीसदी बिजली लाइन लॉस में जाने का कंपनी का दावा

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड अंतर्गत आने वाले पन्ना जिले में बिजली की अघोषित कटौती, लो वोल्टेज और आपूर्ति से जुड़ी शिकायतें आम हैं। ग्रामीण और आंचलिक क्षेत्रों में तो बिजली की समस्या को लेकर उपभोक्ता आए दिन अपनी परेशानी बताते हैं। बिजली आज जीवन की बुनियादी जरूरत है, इसलिए आपूर्ति में थोड़ी भी गड़बड़ी लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करती है। लेकिन बिजली व्यवस्था की इस तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है, जिस पर अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के पन्ना वृत्त में बिजली उपभोक्ताओं पर करीब 207 करोड़ रुपये के बिल बकाया हैं, जबकि कंपनी हर महीने जितनी बिजली की बिलिंग करती है, उसकी तुलना में वसूली लगभग आधी ही हो पा रही है।
यहां यह समझना भी जरूरी है कि 207 करोड़ रुपये का पूरा बकाया किसी एक श्रेणी या केवल घरेलू उपभोक्ताओं का नहीं है। इसमें घरेलू उपभोक्ताओं के साथ सरकारी विभाग, जल प्रदाय संस्थाएं, व्यवसायिक उपभोक्ता और कृषि कनेक्शन भी शामिल हैं। दूसरी ओर, कंपनी के अनुसार जिले में बिजली की कुल सप्लाई में करीब 30 से 32 प्रतिशत हिस्सा लाइन लॉस में चला जाता है। इसमें बिजली चोरी के साथ तकनीकी और अन्य कारण भी शामिल हैं। यानी बिजली की समस्या को केवल उपभोक्ता या केवल विद्युत कंपनी के नजरिए से देखने के बजाय उपलब्ध आंकड़ों के दोनों पहलुओं को समझना जरूरी है।

विभिन्न श्रेणी के 2 लाख से अधिक उपभोक्ता

पन्ना वृत्त के अंतर्गत पन्ना और पवई दो विद्युत संभाग आते हैं और दोनों की भौगोलिक सीमा पूरा पन्ना जिला है। जिले में सभी श्रेणियों को मिलाकर करीब 2 लाख 8 हजार विद्युत उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं तथा विभिन्न संस्थागत श्रेणियों पर कुल करीब 207 करोड़ रुपये की विद्युत बिल राशि लंबित है। श्रेणीवार आंकड़ों के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं पर करीब 140 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके अलावा सरकारी विभागों पर करीब 8 करोड़, जल प्रदाय करने वाली संस्थाओं पर करीब 45 करोड़, व्यवसायिक उपभोक्ताओं पर करीब 4 करोड़ और कृषि कार्य के लिए लिए गए कनेक्शनों पर करीब 6 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। कंपनी द्वारा समय-समय पर बकाया बिलों के भुगतान के लिए समाधान योजना भी चलाई जाती है। इन योजनाओं में उपभोक्ताओं को विभिन्न शर्तों के तहत राहत और छूट देने का प्रावधान रहता है। इसके बावजूद बकाया राशि में अपेक्षित कमी नहीं आ रही है।
हर महीने 10 करोड़ रुपये और बढ़ रहा बकाया
फाइल फोटो।
विद्युत कंपनी के अनुसार पन्ना जिले में प्रतिदिन औसतन करीब 18 लाख यूनिट बिजली की खपत होती है। महीने में बिजली की कुल सप्लाई की तुलना में करीब 70 प्रतिशत यूनिट की ही बिलिंग हो पा रही है, जबकि करीब 30 से 32 प्रतिशत बिजली लाइन लॉस में चली जाती है। लाइन लॉस का मतलब यह नहीं है कि उपभोक्ता 100 प्रतिशत बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं और कंपनी केवल 70 प्रतिशत की बिलिंग कर रही है। सप्लाई की गई बिजली का एक हिस्सा तकनीकी खराबियों, लाइन की स्थिति, ट्रांसफॉर्मर संबंधी नुकसान, बिजली चोरी तथा अन्य कारणों से वितरण प्रणाली में ही दर्ज नहीं हो पाता। विद्युत कंपनी इसी अंतर को लाइन लॉस के रूप में दर्ज करती है। राजस्व वसूली की स्थिति भी कंपनी के लिए चिंता का विषय है। जिले में औसत मासिक बिलिंग करीब 20 करोड़ रुपये होती है, लेकिन इसके मुकाबले वसूली बमुश्किल 50 प्रतिशत के आसपास रहती है।
अगस्त 2026 में जिले में 18 करोड़ रुपये से अधिक की बिलिंग हुई, जबकि उपभोक्ताओं और अन्य बकायादारों से करीब 9 करोड़ रुपये की वसूली हो सकी। इसी तरह अप्रैल से अगस्त 2026 तक पांच महीनों में करीब 103 करोड़ रुपये की बिलिंग हुई, लेकिन इसकी तुलना में लगभग 51 करोड़ रुपये ही वसूल किए जा सके। इस तरह हर महीने चालू बिलिंग और वसूली के बीच करीब 10 करोड़ रुपये का अंतर बना रह रहा है। इसका सीधा असर पहले से लंबित बकाया राशि पर पड़ रहा है और जिले का कुल बकाया लगातार बढ़ रहा है।

घरेलू उपभोक्ताओं पर सबसे ज्यादा देनदारी

पन्ना जिले के कुल बकाये में घरेलू उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। करीब 140 करोड़ रुपये का बकाया घरेलू उपभोक्ताओं पर बताया गया है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि बिजली की आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों को केवल बकाया बिल से जोड़कर देखा जाए। उपभोक्ताओं की आपूर्ति संबंधी शिकायतें और विद्युत कंपनी की राजस्व वसूली दो अलग-अलग मुद्दे हैं। फिर भी नियमित बिल भुगतान वितरण व्यवस्था के वित्तीय प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि बिलिंग के मुकाबले वसूली लगातार कम रहती है और बकाया बढ़ता जाता है तो कंपनी के लिए बिजली खरीद, वितरण व्यवस्था के संचालन और अन्य खर्चों का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण होता है।

बिल पर सब्सिडी योजना के बावजूद बकाया

फाइल फोटो।
किफायती तरीके से बिजली का उपयोग करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को सरकार की ओर से बिजली बिल में सब्सिडी का लाभ भी दिया जाता है। अटल गृह ज्योति योजना के तहत पात्र उपभोक्ताओं को निर्धारित सीमा तक की खपत पर राहत मिलती है। 100 यूनिट तक की खपत वाले पात्र उपभोक्ताओं से अधिकतम 100 रुपये तक का बिल लिए जाने का प्रावधान है, जबकि शेष राशि सरकार सब्सिडी के रूप में वहन करती है। यदि किसी पात्र उपभोक्ता की मासिक खपत 100 से 150 यूनिट के बीच है तो पहले 100 यूनिट के लिए निर्धारित राशि और इसके बाद की खपत का भुगतान निर्धारित टैरिफ के अनुसार करना होता है। इसके बावजूद घरेलू श्रेणी में करीब 140 करोड़ रुपये का बकाया होना कंपनी के लिए बड़ी चुनौती है। समय पर बिल भुगतान नहीं होने से यह राशि आगे बढ़ती जाती है और अंततः कुल बकाया का बोझ बढ़ता है।

अब बड़े बकायादारों पर होगी सख्ती

अशोक कुमार निकोसे, अधीक्षण अभियंता, मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, वृत्त पन्ना।
मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, (MPPKVVCL) पन्ना वृत्त के अधीक्षण अभियंता अशोक कुमार निकोसे ने उपभोक्ताओं से हर महीने निर्धारित समय पर बिजली बिल का भुगतान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बकाया राशि लगातार बढ़ने के कारण कंपनी को वसूली के लिए सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि यदि बड़े बकायादारों ने जल्द लंबित राशि जमा नहीं की तो उनके विद्युत कनेक्शन विच्छेद किए जा सकते हैं। इसके अलावा कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी बकायादारों के घर और प्रतिष्ठानों तक पहुंचकर भुगतान के लिए समझाइश देंगे। आवश्यकता के अनुसार अन्य कदम भी उठाए जाएंगे।
फिलहाल पन्ना जिले की बिजली व्यवस्था के सामने चुनौती दो स्तरों पर है- एक ओर उपभोक्ताओं को निर्बाध और बेहतर बिजली आपूर्ति की अपेक्षा है, तो दूसरी ओर विद्युत कंपनी को लाइन लॉस कम करने के साथ करीब 207 करोड़ रुपये के पुराने बकाये और हर महीने बनने वाले नए अंतर की वसूली करनी है। आने वाले दिनों में कंपनी की कार्रवाई और उपभोक्ताओं के भुगतान से यह तय होगा कि बढ़ते बकाये पर कितना अंकुश लग पाता है।