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कांग्रेस नेता पप्पू दीक्षित दो दिन की पुलिस रिमांड पर, फरियादी को धमकाने के आरोप में करीबी गिरफ्तार

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कांग्रेस नेता को आपराधिक मामले में बचाने के लिए फरियादी महिला को धमकाने और समझौता करने का दवाब बनाने वाला आरोपी समिति प्रबंधक सतीश श्रीवास्तव।

*    गरीब आदिवासी महिला की बेशकीमती जमीन हड़पने का बहुचर्चित मामला 

मध्यप्रदेश के इस जिले में मजदूरों के नाम पर सबसे बड़ा भ्रष्टाचार!

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उत्तर वन मंडल के वन परिक्षेत्र अजयगढ़ अंतर्गत पौधारोपण के लिए मजदूरों के नाम पर ट्रैक्टरों से गड्ढों की खुदाई कराई गई।

*     पौधारोपण के लिए ट्रैक्टर लगाकर खुदवाए करोड़ों गड्ढे, मजदूरों के नाम पर बनाए प्रमाणक

*     उत्तर वन मण्डल पन्ना में व्याप्त भ्रष्टाचार की लगातार खुल रही परतें

*     पूर्व डीएफओ गंगवार जाते-जाते कर गए थे लगभग 50 फीसदी भुगतान

*      वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पूर्व शेष भुगतान को लेकर वन अमला सक्रिय

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले का उत्तर वन मंडल भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका है। यहां विगत कई वर्षों से जंगलराज कायम होने से चौतरफा लूट-खसोट मची है। जिसका अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभागीय निर्माण कार्यों की स्वीकृत राशि में बमुश्किल 30-40 फीसदी राशि ही धरातल पर खर्च की जा रही है। परिक्षेत्र अजयगढ़, धरमपुर में अटल भू-जल योजना तथा दूसरे परिक्षेत्रों में अन्य मद से निर्मित तालाबों, पर्कुलेशन टैंक एवं पर्कुलेशन पिट निर्माण की करोड़ों रुपए की राशि को पलीता लगाने के बाद अब पौधारोपण की तैयारी से जुड़े कार्यों में वृहद स्तर पर खेला चल रहा है। उत्तर वन मण्डल के अजयगढ़ परिक्षेत्र में आगामी मानसून सीजन में पौधारोपण कराने के लिए जो कुछ किया गया वह सिर्फ अनियमितता नहीं बल्कि मजदूरों के हक पर खुला डाका है। पौधारोपण के लिए लाखों गड्ढों की खुदाई ट्रैक्टरों (मशीनों) से कराई जबकि कागजों में इन्हें मजदूरों द्वारा खुदवाया जाना दर्शाया गया। उन्हें मजदूरी देने के नाम पर लगभग 50 फीसदी राशि का भुगतान भी किया जा चुका है। अब वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पूर्व शेष राशि का भुगतान कराने की तैयारी चल रही है। पौधारोपण कार्यों में भ्रष्टाचार सिर्फ अजयगढ़ रेंज तक सीमित नहीं, वनमण्डल की अन्य रेन्जों में भी इसी तर्ज पर मजदूरों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया। इस खुलासे के बाद भी अगर शेष बचा मजदूरी भुगतान किया जाता है तो संभवतः यह मध्य प्रदेश में किसी एक वित्तीय वर्ष में मजदूरों के नाम पर होने वाला अब तक का सबसे बड़ा घोटाला हो सकता है।

गड्ढे खुद दे रहे मशीनों के कार्य की गवाही

पौधारोपण के गड्ढों की खुदाई ट्रैक्टरों से कराने के चक्कर में गड्ढे वर्ग की आकृति के बजाए गोलाकार हो गए।
विगत दिवस परिक्षेत्र (रेन्ज) अजयगढ़ की बीट धवारी के वन कक्ष क्रमांक पी-194, बीट टौरिया के कक्ष क्रमांक पी-177 और बीट देवराभापतपुर के भ्रमण पर पहुंचे मीडियाकर्मियों को कई जगह हजारों की तादाद में गोलाकार गड्ढे देखने को मिले। इन अजब-गजब गड्ढों को कैमरों में कैद करने के बाद जब मौके पर उपस्थित वनरक्षक से पूछताछ की तो उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के ऑफ रिकार्ड स्वीकार किया कि गड्ढे ट्रैक्टरों से कराए गए हैं। साथ ही यह भी बताया कि जल्द से जल्द काम कराने के प्रेशर में यह सब करना पड़ा। मजदूरों के नाम पर मशीनों को रोजगार देने का यह फर्जीवाड़ा अजयगढ़ परिक्षेत्र की अन्य बीटों के साथ-साथ वन मण्डल की सभी रेन्जों में हुआ है। इस तरह देखें तो ट्रैक्टर चालकों को ठेके देकर कराए गए गड्ढों की तादाद कई लाखों में पहुंच जाती है। जाहिर है, इतने वृहद पैमाने पर अनियमितता होना रेंजर से लेकर अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता के बगैर संभव ही नहीं है।

वर्ग की आकृति में होते हैं गड्ढे

वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि, विभागीय पौधारोपण कार्यों में आमतौर पौधों की प्रजाति के अनुसार वर्ग की आकृति में चार साइज के गड्ढों की खुदाई की जाती है, जिसका उल्लेख वर्किंग प्लान में है। सबसे छोटी साइज का गड्ढा 30x30x30 सेंटीमीटर का होता है अर्थात फिट में देखें तो इसकी लम्बाई, चौड़ाई और गहराई 1 फिट रहती है। इस साइज के गड्ढों में आमतौर पर सागौन (टीक) का रोपण किया जाता है। इन गड्ढों के बीच की दूरी 2 मीटर होती है। दूसरी साइज का गड्ढा 30x30x45 का होता है। इसकी लंबाई, चौड़ाई एक फिट लेकिन गहराई डेढ़ फिट रहती है। इन गड्ढों में रोपित किए जाने वाले पौधों की आपस की दूरी 2.5 या 3 मीटर हो सकती है। तीसरा साइज 45x45x45 सेंटीमीटर का है, यह मध्यम आकार का गड्ढा होता है जिसकी लंबाई, चौड़ाई और गहराई डेढ़ फिट होती है। इनमें छोटे झाड़ वाले पौधे लगाए जाते हैं। मध्यम आकार वाले गड्ढों का आपस में डिस्टेंस 3 मीटर होता है। चौथा गड्ढा सबसे बड़े साइज का 60x60x60 सेंटीमीटर का रहता है। अर्थात इनकी लम्बाई, चौड़ाई और गहराई सब एक सामान 2 फिट की रहती है। बड़े साइज के गड्ढों में बड़े झाड़ वाले पौधे लगाए जाते हैं। इन गड्ढों के बीच की दूरी 4 मीटर हो सकती है। साइज के हिसाब से अगर गड्ढों की खुदाई की राशि को देखें तो प्रत्येक गड्ढे की खुदाई सहित अन्य कार्य के लिए वर्तमान में प्रचलित दरों के अनुसार 13 रुपए लेकर 25 रुपए तक मजदूरी भुगतान करने का प्रावधान है।

अब मजदूर लगाकर गड्ढों में सुधार

पौधारोपण के लिए वन परिक्षेत्र अजयगढ़ अंतर्गत ट्रैक्टर लगाकर ठेके पर कराए गए गोलाकार गड्ढों का कुछ स्थानों पर मजदूर लगाकर सुधार कराया जा रहा है। रुपए बचाने के चक्कर में मशीनों से कराई गई गड्ढों की खुदाई पर पर्दा डालने के लिए अब मजदूर लगाकर उन्हें निर्धारित आकार-साइज देने काम शुरू हो गया है। मीडियाकर्मियों को निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर मजदूर गोलाकार गड्ढों को सही आकार देने के साथ मशीन से कराए गए कार्य के साक्ष्यों को मिटाते हुए नजर आए। वन विभाग के जानकारों की मानें तो पौधारोपण गड्ढा खुदाई के दोहरे कार्य के बावजूद प्रत्येक गड्ढे की मजदूरी राशि का अधिकतम 50 फीसदी ही खर्च आएगा। इस तरह गड्ढों की मजदूरी की शेष 50 फीसदी राशि का कार्य प्रभारी वनरक्षक से लेकर भुगतान कर्ता अधिकारी के बीच बंदरबांट हो जाएगा। और गड्ढों में सुधार करते मजदूरों के फोटोग्राफ्स निकालकर कागजों में साबित कर दिया जाएगा कि काम मशीनों ने नहीं बल्कि मजदूरों/श्रमिकों ने ही किया है। दरअसल, जहां पूरा तंत्र ही भ्रष्टाचार में आकण्ठ डूबा हो वहां सब संभव है। मशीनों से लाखों-करोड़ों गड्ढों की खुदाई पर विभागीय अधिकारियों द्वारा सख्ती से रोक न लगाना फर्जीवाड़े में उनकी संलिप्तता का स्पष्ट संकेत है।

सीमेंट पोल में अंदर मिट्टी, ऊपर कंक्रीट

बीट टौरिया में पौधारोपण सुरक्षा जाली लगाने के लिए खड़े किए सीमेंट पोल में सिर्फ ऊपर जमीन की सतह पर कंक्रीट डालकर अंदर मिट्टी भर गई।
पौधारोपण तैयारी कार्य में भ्रष्टाचार सिर्फ गड्ढों की खुदाई तक सीमित नहीं है। स्थल पर इससे जुड़े अब तक जितने भी कार्य हुए हैं सभी में हद दर्जे की लीपापोती की गई। पौधों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग जाली लगाने खड़े किये गए सीमेंट पोल के होल से कंक्रीट मसाला गायब है। अभी जिन बीटों में पोल (खम्भे) लगाए गए उनकी फिलिंग प्रोजेक्ट रिपोर्ट अनुसार कंक्रीट मटेरियल से न करके मिट्टी से कर दी गई। सीमेंट पोल के होल में झोल करने वालों ने निरीक्षणकर्ताओं की नजर में धूल झोंकने के लिए जमीन की सतह पर लगभग 10 सेंटीमीटर कंक्रीट मसाला पोल के चारों तरफ डाला है। ताकि ऊपर से देखने पर ऐसा प्रतीत हो कि अंदर भी कंक्रीट मटेरियल लगाया है। जानकारों के मुताबिक, कंक्रीट मसाले की चोरी का सीधा असर सीमेंट पोल की मजबूती पर पड़ना तय है। बता दें कि, सीमेंट पोल को तमाम विषम परिस्थितियों में को सालों-साल तक मजबूती से खड़े रखने के लिए जमीन के अंदर डेढ़ फिट की गहराई तक कंक्रीट मटेरियल से कवर किया जाता है। जबकि जमीन की ऊपरी सतह पर 10 सेंटीमीटर कंक्रीट पोल के चारों तरफ लगाया जाता है। पोल के गड्ढे में कंक्रीट मसाला न डालने से उनके लूज होकर गिरने का खतरा बना रहेगा। पौधारोपण सुरक्षा जाली फेंसिंग भार सीमेंट पोल झेल सकें, इसके लिए प्रत्येक 3 पोल्स के बाद सपोर्टिंग पोल (दो पोल) खड़े किये जाते हैं।

नवागत डीएफओ की कार्रवाई पर रहेगी नजर

उत्तर वन मण्डल कार्यालय पन्ना। (फाइल फोटो)
उत्तर वन मण्डल पन्ना अंतर्गत पौधारोपण कार्य में व्यापक पैमाने पर हुई अनियमितताएं कथित तौर पर पूर्व डीएफओ गर्वित गंगवार के कार्यकाल के अंतिम दिनों में की गई हैं। डीएफओ ऑफिस के सूत्रों की मानें तो गंगवार साहब जाते-जाते पौधारोपण के प्रमाणकों का बड़ी तादाद में भुगतान भी कर गए हैं। अब जो राशि शेष बची है उसका भुगतान चालू वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पूर्व कराने के लिए कार्य प्रभारी बीट गार्ड से लेकर संबंधित परिक्षेत्राधिकारी (रेंज ऑफिसर) सक्रिय हैं। पौधारोपण कार्य में फर्जीवाड़ा और कार्य की गुणवत्ता से समझौते का मामला उत्तर वन मण्डल के नवागत धीरेन्द्र प्रताप सिंह डीएफओ के संज्ञान में है। ऐसे में अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नवागत डीएफओ लंबित भुगतान करके इस भ्रष्टाचार को आगे बढ़ाते हैं या फिर फर्जी प्रमाणकों के भुगतान पर रोक लगाकर तत्परता से गहन जांच उपरांत दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।

इनका कहना है-

“पौधारोपण कार्य में अनियमितताएं होने का मामला संज्ञान में आने पर जांच के आदेश दिए हैं। आप सोमवार को कार्यालय आएं बैठकर बात करते हैं, आप जहां भी मेरे वन मण्डल के कार्यों को देखना चाहते हैं मेरे साथ मेरी गाड़ी से चलिए, मैं स्वयं आपको लेकर चलूंगा।”

धीरेन्द्र प्रताप सिंह, वनमण्डलाधिकारी, उत्तर वन मण्डल, पन्ना।

एम्बुलेंस से शराब तस्करी का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार, 120 लीटर अवैध शराब जब्त

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अवैध शराब का परिवहन करने के मामले में गुनौर थाना पुलिस टीम द्वारा एम्बुलेंस वाहन कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

*     सरकारी आपातकालीन सेवा के दुरुपयोग से हड़कंप

*     पन्ना जिले की गुनौर थाना पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ा वाहन

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिले में अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच गुनौर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। तस्कर सरकारी आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा 108 का दुरुपयोग कर अवैध शराब का परिवहन कर रहे थे। पुलिस ने एम्बुलेंस वाहन से 120 लीटर देशी मदिरा बरामद करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
थाना प्रभारी गुनौर निरीक्षक माधवी अग्निहोत्री के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मुखबिर सूचना पर 12-13 फरवरी की दरम्यानी रात कार्रवाई करते हुए महेबा रोड स्थित बेलही महादेव मंदिर के मुख्य द्वार के पास घेराबंदी कर संदिग्ध एम्बुलेंस को पकड़ा। तलाशी के दौरान वाहन क्रमांक CG-04NS-7479 से 10 पेटियों में भरी करीब 120 लीटर (475 क्वार्टर) देशी मसाला शराब बरामद की गई, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 60 हजार रुपये बताई गई है। मौके से 1,000 रुपये नकद भी जब्त किए गए। पुलिस ने एम्बुलेंस चालक सहित तीन आरोपियों लोकेन्द्र लोधी सीलघाट कुम्हारी जिला दमोह, विधा प्रसाद दाहायत कुड़ई पटेरा जिला दमोह और अभिषेक राजपूत रनेह जिला दमोह को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ थाना गुनौर में आबकारी एक्ट की धारा 34(2) के तहत अपराध क्रमांक 40/2026 दर्ज किया है। आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया।

अपराध का तरीका चिंताजनक

इस मामले का शराब की बढ़ती तस्करी के साथ सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा के लिए संचालित 108 एम्बुलेंस का उपयोग अवैध गतिविधि में किया गया। यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि आम जनता के भरोसे और आपातकालीन सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि एम्बुलेंस जैसी सेवा का दुरुपयोग बढ़ता है तो वास्तविक मरीजों को समय पर सहायता मिलने में बाधा उत्पन्न हो सकती है।पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी माधवी अग्निहोत्री सहित पुलिस टीम के अन्य सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि अवैध शराब कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी प्रकार के नए तरीके से की जा रही तस्करी पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।

अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने युवा अधिवक्ता ने प्रशासन को भेजा लीगल नोटिस

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अधिवक्ता शैलेष विश्वकर्मा, जिला एवं सत्र न्यायालय पन्ना।

  हाईकोर्ट जाने की चेतावनी, पुलिस-आबकारी की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

पन्ना।(www.radarnews.in) जिले में गांव-गांव और गली-गली फैलते जा रहे अवैध शराब कारोबार को लेकर अब कानूनी स्तर पर बड़ा कदम उठाया गया है। जिला एवं सत्र न्यायालय पन्ना के युवा अधिवक्ता शैलेश विश्वकर्मा ने जिले में अवैध शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने तथा शराब कारोबारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर जिला कलेक्टर पन्ना, पुलिस अधीक्षक पन्ना एवं जिला आबकारी अधिकारी पन्ना को 15 दिवसीय मियादी लीगल नोटिस डाक के माध्यम से प्रेषित किया है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि पन्ना जिले में आबकारी ठेकेदार द्वारा लाइसेंसी दुकानों से शराब उठाकर आसपास के गांवों और मोहल्लों में अवैध रूप से बिक्री कराई जा रही है। इस अवैध कारोबार से जहां एक ओर शासन के राजस्व को भारी क्षति पहुंच रही है, वहीं दूसरी ओर गांव-गांव में नशे का जाल फैलने से सामाजिक माहौल बिगड़ता जा रहा है और युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में जा रही है।

रोजनों लाखों का अवैध कारोबार

नोटिस के अनुसार जिले में प्रतिदिन लाखों रुपये की अवैध शराब बिक्री होने का अनुमान है। अधिवक्ता शैलेश विश्वकर्मा ने अपने नोटिस में यह भी उल्लेख किया है कि अवैध शराब के कारण गांवों में शांति भंग हो रही है, आए दिन विवाद, हंगामा और आपराधिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ रही है, जिनका पारिवारिक और सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा है।

पुलिस-आबकारी की भूमिका पर उठे सवाल

नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि अवैध शराब बिक्री को लेकर पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में है। कई बार ग्रामीणों द्वारा शराब तस्करी करते हुए ठेकेदारों के गुर्गों को पकड़ा गया, जिसके वीडियो भी सामने आए, बावजूद इसके प्रभावी और समान कार्रवाई नहीं की जा रही। आरोप है कि कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों पर होती है, जबकि ठेकेदारों से जुड़े अवैध नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई से परहेज किया जा रहा है। अधिवक्ता शैलेश विश्वकर्मा ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिवस की अवधि में अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर अथवा अन्य सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र होंगे, जिसकी सम्पूर्ण जवाबदेही संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी। गौरतलब है कि पन्ना जिले में अप्रैल 2025 से अवैध शराब कारोबार को लेकर हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। ऐसे में लीगल नोटिस के माध्यम से उठाया गया यह कदम प्रशासन के लिए एक कड़ी चेतावनी माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस नोटिस के बाद क्या ठोस कार्रवाई करता है।

जंगल के रक्षक ही बने भक्षक: अवैध सागौन कटाई कराने के मामले में वनरक्षक पर प्रकरण दर्ज, निलंबन

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फाइल फोटो।

*    पीटीआर के बफर क्षेत्र में गश्त के दौरान खुला मामला, सुरक्षा श्रमिक भी आरोपी

  सागौन की छिलाई करते समय वन अमले को देख भाग निकले, पहचान में आया बीटगार्ड और श्रमिक

  7 नग सागौन सिल्लियां जब्त कर आरोपियों के विरुद्ध तत्परता से की गई प्रभावी कार्रवाई

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जंगल की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वालों की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व से एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) के पन्ना बफर परिक्षेत्र में अवैध सागौन कटाई कराए जाने के मामले में एक वनरक्षक (बीटगार्ड) के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण दर्ज करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में एक वन सुरक्षा श्रमिक को भी आरोपी बनाया गया है। सोशल मीडिया पर जारी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई जानकारी के अनुसार यह मामला दिनांक 8 फरवरी 2026 का है, जब परिक्षेत्र सहायक छापर एवं अन्य वनकर्मियों द्वारा बीट छापर क्षेत्र में नियमित गश्त की जा रही थी। गश्त के दौरान कक्ष क्रमांक पी-293 में कुछ व्यक्तियों को सागौन लकड़ी की छिलाई कर सिल्ली बनाते हुए देखा गया।

भागते समय पहचाने गए दोनों आरोपी

जंगल गश्त के दौरान अचानक वन अमले के मौके पर पहुंचने से सागौन की सिल्लियों को छोड़ आरोपी भाग निकले।
वन स्टाफ द्वारा मौके पर घेराबंदी कर आरोपियों को पकड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन सभी आरोपी घने जंगल का लाभ उठाकर फरार हो गए। हालांकि भागते समय दो व्यक्तियों की पहचान की गई, जिनमें बिहारी पिता रामलगन यादव, निवासी ग्राम बनहरीकलां, जो बीट छापर में समिति सुरक्षा श्रमिक के रूप में कार्यरत है तथा संतोष प्रजापति, पदस्थ वनरक्षक बीटगार्ड छापर शामिल हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार इन दोनों की प्रथम दृष्टया अवैध कटाई में संलिप्त पाई गई है। घटनास्थल की तलाशी के दौरान वन विभाग द्वारा सागौन लकड़ी की कुल सात सिल्लियां जब्त की गईं, जिनका कुल घनफल 1.526 घन मीटर बताया गया है। जब्त सामग्री के आधार पर आरोपी बिहारी यादव एवं वनरक्षक संतोष प्रजापति के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया।

प्रतिवेदन के आधार पर तत्काल निलंबन

पूरे घटनाक्रम का प्रतिवेदन परिक्षेत्र अधिकारी पन्ना बफर द्वारा तैयार कर सहायक संचालक मड़ला के माध्यम से 10 फरवरी 2026 को क्षेत्र संचालक कार्यालय भेजा गया। प्रतिवेदन के परीक्षण के बाद प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर वनरक्षक संतोष प्रजापति को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए गए। पन्ना टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के उप संचालक वीरेन्द्र कुमार पटेल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा है कि वन क्षेत्र में अवैध गतिविधियों में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह विभाग का कर्मचारी ही क्यों न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि जंगल की सुरक्षा से जुड़े पदों पर बैठे लोगों से और अधिक जवाबदेही अपेक्षित है।

बॉर्डर पर जुए के फड़ से 3 जिलों के 11 जुआरी पकड़े गए, नकदी सिर्फ 27 हजार जब्त, लग्जरी गाड़ियों से पहुंचे थे खेलने

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पन्ना-सतना जिले के बॉर्डर क्षेत्र में दबिश देकर जुआरियों को पकड़ने वाली देवेन्द्रगर थाना पुलिस टीम।

*     देवेन्द्रनगर थाना अंतर्गत पन्ना-सतना बॉर्डर के जंगल क्षेत्र में हुई कार्रवाई

*     पुलिस के दावे को लेकर संदेह, जुआ फड़ में 5 से 7 लाख रुपए होने की जनचर्चा

पन्ना।(www.radarnews.in) जिले देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत पन्ना-सतना बॉर्डर क्षेत्र में जुए के फड़ पर की गई पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सोशल मीडिया पर पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी दी गई है कि जंगल के इलाके में दबिश देकर पुलिस ने 11 जुआरियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दावा किया है कि यह कार्रवाई 9-10 फरवरी की दरम्यानी रात को की गई, जब कुछ लोग सीमा क्षेत्र में जुए का फड़ संचालित कर रहे थे। पुलिस के अनुसार सूचना मिलने पर देवेन्द्रनगर थाना पुलिस ने पन्ना-सतना सीमा के पास ग्राम गिरवारा के जंगल क्षेत्र में दबिश दी, जहां रात्रि के अंधेरे में प्रकाश की व्यवस्था कर ताश के पत्तों से जुआ खेला जा रहा था। मौके से सभी आरोपियों को घेराबंदी कर पकड़ने का दावा किया गया है। पुलिस का यह भी कहना है कि यह फड़ लंबे समय से पन्ना, सतना और दमोह जिलों की सीमा से सटे इलाकों में स्थान बदल-बदलकर संचालित किया जा रहा था।

जुआ खेलते इनको किया गिरफ्तार

जंगल में जुआ खेलने आए जुआरियों जब्त बोलेरो कार।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में देवेंद्रनगर थाना क्षेत्र के ग्राम गिरवारा निवासी नरेन्द्र वर्मा 26 वर्ष और भंडारी कुशवाहा 27 वर्ष शामिल हैं। सतना जिले के जसो थाना अंतर्गत खगई निवासी बलवान सिंह बुंदेला 63 वर्ष, कोलगवां थाना क्षेत्र के आदर्श नगर घुरडांग निवासी पुष्पेन्द्र कुशवाहा 19 वर्ष, ज्ञानेंद्र सिंह दीक्षित 27वर्ष तथा दीपेन्द्र द्विवेदी 25 वर्ष को भी मौके से पकड़े जाने का दावा किया गया है। इसके अलावा पन्ना शहर के बेनीसागर मोहल्ला निवासी राजू कुशवाहा 40 वर्ष और रामकिशोर मिश्रा 56 वर्ष, सिमरिया थाना क्षेत्र के महोड़ निवासी राकेश सिंह बैस 44 वर्ष तथा करिया निवासी राजवेन्द्र लोध 38 वर्ष के साथ-साथ दमोह जिले के गैसाबाद थाना अंतर्गत ग्राम कचनारी निवासी 29 वर्षीय सतेन्द्र राजपूत के नाम भी पुलिस द्वारा जारी सूची में शामिल बताए गए हैं।

नकदी कम मिलने से कार्रवाई को लेकर संदेह

जुआरियों के कब्जे से पुलिस के द्वारा जब्त की गई बलेनो कार।
पुलिस ने अपने दावे में बताया है कि आरोपियों के पास से कुल 27 हजार रुपये नकद, एक बलेनो कार, एक बोलेरो कार, 12 मोबाइल फोन और जुआ खेलने में प्रयुक्त ताश के पत्तों की गड्डी जब्त की गई है। हालांकि कार्रवाई के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि जब आरोपी लग्जरी वाहनों से जुआ खेलने पहुंचे थे, तो मौके से इतनी कम नकदी की बरामदगी कैसे हुई। इधर क्षेत्र में यह जनचर्चा भी है कि जुए के फड़ पर मौजूद नकदी की मात्रा पुलिस द्वारा बताई गई राशि से कहीं अधिक थी। अपुष्ट चर्चाओं के अनुसार फड़ 5 से 7 लाख रुपए जुआरियों के पास मौजूद थे। जिससे शेष राशि कहां गई और वह जब्त क्यों नहीं हो पाई इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। इन्हीं चर्चाओं के चलते पुलिस की कार्रवाई पर सवाल और संदेह भी व्यक्त किए जा रहे हैं। जनचर्चाओं में कितनी हकीकत और कितना फसाना है, यह तो सिर्फ देवेन्द्रगर थाना पुलिस और जुआरी ही बेहतर बता सकते हैं। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध देवेन्द्रनगर थाना में जुआ एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई किए जाने का दावा किया है।

एनएच-39 पर अज्ञात वाहन की टक्कर से तेंदुए के शावक की मौत

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अज्ञात वाहन की ठोकर लगने से मृत तेंदुए के शावक का शव।

*      पन्ना टाइगर रिजर्व के परिक्षेत्र मड़ला की घटना

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में पन्ना टाइगर रिजर्व के परिक्षेत्र मड़ला अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-39 के समीप स्थित राजस्व क्षेत्र में शुक्रवार को एक तेंदुए का शावक मृत अवस्था में पाया गया। शावक का शव मिलने से क्षेत्र में वन विभाग में हड़कंप मच गया और मौके पर जांच शुरू की गई। तेंदुए के शावक की मृत्यु की जानकारी पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेन्द्र पटेल द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी गई है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार दिनांक 07 फरवरी 2026 को सुबह लगभग 11:15 बजे घटना की सूचना प्राप्त हुई। मौके पर पहुंचे वन विभाग के अमले द्वारा किए गए निरीक्षण में तेंदुए के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए।
मौके से मिले साक्ष्यों एवं तेंदुए के शरीर पर पाए गए जख्मों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि तेंदुए के शावक की मृत्यु किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से हुई है। विभागीय आकलन के अनुसार शावक की मौत सुबह लगभग 10:30 से 11:00 बजे के बीच होना प्रतीत होती है। यह मामला हिट एंड रन का माना जा रहा है। उक्त प्रकरण में अज्ञात वाहन चालक के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया गया है तथा घटनास्थल पर विधिवत जांच की जा रही है। जांच के लिए पुलिस विभाग के साइबर सेल की सहायता ली जा रही है। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग एवं आसपास उपलब्ध सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर अज्ञात वाहन की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग के अनुसार वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र में निगरानी और गश्त बढ़ाई गई है तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित वाहन चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शराब की लत को लेकर पति से विवाद में चली गोली, महिला और बेटी घायल

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गोली चलने से निकले छर्रे लगने से जख्मी महिला का इलाज जिला अस्पताल पन्ना में जारी।

  खुद को गोली मारने की कोशिश कर रही महिला को बचाने आई मासूम, छीना-झपटी में हुआ हादसा

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में अजयगढ़ थाना की चंदौरा चौकी क्षेत्र अंतर्गत लोढ़ापुरवा गांव में पति-पत्नी के आपसी विवाद के दौरान चली गोली से महिला और उसकी नाबालिग बेटी गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना के बाद परिजनों ने दोनों को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी है।
जानकारी के अनुसार रमाशंकर कुशवाहा शराब पीने का आदी है। इसी बात को लेकर शुक्रवार रात उसका अपनी पत्नी रामसखी से विवाद हो गया। विवाद के दौरान मानसिक रूप से परेशान महिला ने आवेश में आकर देशी कट्टे से स्वयं को गोली मारने की कोशिश की। मां को हथियार उठाते देख उसकी करीब 9-10 वर्षीय बेटी रश्मि उसे बचाने के लिए बीच में आ गई। इसी दौरान छीना-झपटी में गोली चल गई। गोली के छर्रे महिला और मासूम बच्ची के शरीर के कई हिस्सों में लगे हैं, जिससे दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है।
सूचना मिलते ही चंदौरा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने मामले में प्रकरण दर्ज कर लिया है तथा आरोपी पति से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में शराब के नशे और घरेलू विवाद को घटना का कारण बताया गया है। पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की बात कह रही है।

दुखद घटना: गृह कलह ने उजाड़ दिया परिवार, जहर खाकर युवक ने की आत्महत्या, तीन मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

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पन्ना विच्छेदन गृह में पोस्टमार्टम के बाद शव को शासकीय शव वाहन से जिजगांव ले जाया गया।

*      पन्ना जिले के अमानगंज थाना क्षेत्र के जिजगांव की घटना

*      विवाद के बाद तीनों बच्चों को लेकर पत्नी के मायके जाने से दुखी था रतिराम

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के जिले के जिजगांव से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया है। पारिवारिक कलह और लंबे समय से चले आ रहे मानसिक तनाव से टूट चुके एक युवक ने आत्मघाती कदम उठाते हुए जहर खाकर अपनी जान दे दी। इस घटना ने न सिर्फ एक घर का चिराग बुझा दिया, बल्कि तीन मासूम बच्चों को हमेशा के लिए पिता के साए से वंचित कर दिया। मृतक की पहचान 30 वर्षीय रतिराम चौधरी पिता दरबरिया चौधरी)के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार रतिराम और उसकी पत्नी मनीषा निवासी गुनौर के बीच बीते करीब एक वर्ष से पारिवारिक विवाद चल रहा था। हाल के दिनों में विवाद बढ़ने पर पत्नी अपने तीनों बच्चों- प्रियंका (9), रश्मि (12) और ऋषि (7) को लेकर मायके चली गई थी। इसके बाद से रतिराम गहरे तनाव में रहने लगा था।
बताया गया कि घटना वाले दिन रतिराम काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकला। जब परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई तो उन्होंने दरवाजा खोला, जहां वह बेसुध अवस्था में पड़ा मिला। परिजन उसे तुरंत अमानगंज स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां से हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान शनिवार 7 फरवरी को रतिराम ने दम तोड़ दिया। प्रारंभिक तौर पर जहर सेवन से मौत की आशंका जताई जा रही है। मृतक के भाई गेंदा लाल ने बताया कि रतिराम पहले भी मानसिक तनाव के चलते आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास कर चुका था, लेकिन तब उसकी जान बच गई थी। रतिराम मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी असमय मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है और तीनों मासूम बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है।
पन्ना में पोस्टमार्टम के दौरान शव विच्छेदन गृह के बाहर बैठे शोक संतृप्त परिजन।
घटना के बाद गांव में शोक की लहर है। हर आंख नम है और हर जुबान पर बस यही सवाल है कि पारिवारिक विवादों का यह दर्दनाक अंत क्यों हुआ। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के सभी पहलुओं की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

तेंदुए के हमले में बालक की मौत के बाद बाघ शावक के हमले में महिला घायल

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बाघ शावक के हमले की घटना को गंभीरता से लेते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने पलकोहा के ग्रामीणों से संवाद कर उन्हें आवशयक सतर्कता बरतने की सलाह दी।

*     पन्ना टाइगर रिजर्व के चन्द्रनगर परिक्षेत्र के पलकोहा गांव की घटना

*     सुरक्षा व्यवस्था सख्त करते हुए बढ़ाई गश्ती, कैमरा ट्रैप और ड्रोन से निगरानी

*     इलाके में लगातार बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष, ग्रामीण भयभीत और आक्रोशित

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व समेत पन्ना जिले के सामान्य वन क्षेत्रों से सटे गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे वन वन क्षेत्र से लगे ग्रामों के वाशिंदों में भय, चिंता और आक्रोश का माहौल है। सप्ताह भर पूर्व पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेंज से सटे जरधोवा गांव में तेंदुए ने एक 12 वर्षीय बालक पर हमला कर उसे अपना शिकार बना लिया था। घटनास्थल पर बालक का सिर और धड़ अलग-अलग मिले, जबकि तेंदुआ शव के कुछ हिस्सों को खा चुका था। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से क्षेत्र के ग्रामीण गहरे सदमे में हैं। इसी क्रम में पन्ना टाइगर रिजर्व के चंद्रनगर परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पलकोहा में खेत में कार्य कर रही एक महिला पर बाघ के शावक के हमले की घटना सामने आई है। हालांकि महिला को केवल मामूली खरोचें आईं और उपचार के बाद वह स्वस्थ होकर घर लौट आई, लेकिन इस घटना ने ग्रामीणों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। उल्लेखनीय है कि, पन्ना टाइगर रिजर्व का एरिया तीन जिलों पन्ना, छतरपुर और दमोह जिले की सीमाओं तक फैला है। जिसमें चंद्रनगर वन परिक्षेत्र का इलाका छतरपुर जिले में स्थित है।

खेत में काम करते समय किया हमला

वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 3 फरवरी की शाम लगभग 6 बजे, चंद्रनगर परिक्षेत्र की बीट पलकोहा (कक्ष क्रमांक P-538) के समीप राजस्व क्षेत्र में खेत में काम कर रही महिला पर बाघ के शावक ने हमला कर दिया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल महिला को शासकीय वाहन से जिला अस्पताल छतरपुर भेजा गया। महिला के पैर में आई मामूली चोटों का उपचार किया गया तथा तात्कालिक सहायता के रूप में रुपए 1,000/- की राशि भी प्रदान की गई। दो दिन के उपचार के बाद 5 फरवरी को महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

भालू के हमलों ने भी बढ़ाई दहशत

पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र तथा पन्ना जिले के सामान्य वन क्षेत्र के आसपास स्थित गांवों में केवल तेंदुआ और बाघ ही नहीं, बल्कि हाल के दिनों में भालू के हमलों में बुजुर्गों के गंभीर रूप से घायल होने की घटनाएं भी सामने आई हैं। पन्ना जिले के दक्षिण वन मंडल और उत्तर वन मंडल अंतर्गत हाल के दिनों में घटित भालू के हमलों की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इलाके में वन क्षेत्र के आसपास मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। वन क्षेत्र से लगे खेतों में फसल की सुरक्षा के लिए झोपड़ी बनाकर रात में खेतों में रुकने वाले किसान सबसे अधिक भयभीत हैं। जरधोवा में बालक की दर्दनाक मौत और अब पलकोहा की घटना के बाद ग्रामीण खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

वन विभाग अलर्ट, गश्त और निगरानी बढ़ाई

पन्ना टाइगर रिजर्व का मड़ला ग्राम में स्थित प्रवेश द्वार। (फाइल फोटो)
मानव-वन्यजीव संघर्ष की इन घटनाओं के बीच पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने के निर्देश दिए हैं। चंद्रनगर परिक्षेत्र में दो दल दिन-रात सघन गश्त कर रहे हैं। बाघ और शावक की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दो जोड़ी कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं तथा ड्रोन के माध्यम से हवाई निगरानी भी की जा रही है। अधिकारियों द्वारा घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण कर बाघ और शावक की मौजूदगी की पुष्टि की गई है।

ग्रामीणों से संवाद, सतर्कता बरतने की अपील

पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेन्द्र पटेल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि, ग्राम पलकोहा में वन विभाग द्वारा ग्रामीणों के साथ बैठक आयोजित कर संवाद किया गया। ग्रामीणों को सूर्यास्त के बाद खेतों की ओर न जाने, दिन में समूह बनाकर ही खेतों में जाने और लाठी/डंडा साथ रखने की सलाह दी गई। विभाग का कहना है कि पलकोहा गांव टाइगर रिजर्व के भीतर स्थित होने के कारण यहां के निवासी वन्यजीवों के स्वभाव से परिचित हैं, फिर भी जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। बहरहाल, लगातार हो रही घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र समेत पन्ना जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष अब एक गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले चुका है, जिससे निपटने के लिए दीर्घकालीन और ठोस रणनीति की आवश्यकता है।