* पन्ना टाइगर रिजर्व में राज्य के पहले वन्यजीव-केंद्रित सीएसआर कॉन्क्लेव का आयोजन
* दो दिवसीय आयोजन में देश की बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल
पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और औद्योगिक विकास को साथ लेकर चलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्य प्रदेश वन विभाग (MPFD) और मध्य प्रदेश टाइगर फाउंडेशन सोसाइटी (MPTFS) ने पन्ना टाइगर रिजर्व में राज्य के पहले वन्यजीव-केंद्रित कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कॉन्क्लेव का सफल आयोजन किया। 6 और 7 मार्च को आयोजित दो दिवसीय इस कॉन्क्लेव में देश की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और वन्यजीव संरक्षण के लिए सहयोग का भरोसा दिया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह आयोजन संरक्षण वित्तपोषण (Conservation Financing) के क्षेत्र में एक नई पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे वन्यजीव संरक्षण के लिए संसाधन जुटाने के नए रास्ते खुलेंगे।
नीति निर्माताओं और वन्यजीव विशेषज्ञों की मौजूदगी
कॉन्क्लेव में मध्य प्रदेश वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया। इसमें प्रमुख सचिव वन संदीप यादव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख तथा मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक शुभ रंजन सेन, एपीसीएफ (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति, एपीसीएफ (भूमि प्रबंधन) एच. एस. मोहंता और एपीसीएफ एवं चीता प्रोजेक्ट के क्षेत्र संचालक उत्तम शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा राज्य के सभी टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, मुकुंदपुर चिड़ियाघर और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के निदेशक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
देश की बड़ी कंपनियों की भागीदारी
कॉन्क्लेव में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कई प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इनमें ऊर्जा, खनन, इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल रहे। इन कंपनियों में प्रमुख रूप से कोल इंडिया, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL), हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, ग्रीनको, जियोमिन आयरन मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड, टाटा पावर, एलएंडटी, सुजलॉन, नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी (NCC), जेके सीमेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड, ईकेआई (EKI) एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड और आईसीआईसीआई (ICICI) फाउंडेशन जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। कॉर्पोरेट जगत के प्रतिनिधियों ने भारत की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता व्यक्त की और विभाग को भविष्य में ऐसे सहयोग का आश्वासन दिया जो सीधे तौर पर जैव विविधता और वन्यजीव आवासों की सुरक्षा में योगदान देंगे।
धरातल पर संरक्षण कार्यों का प्रत्यक्ष अनुभव
कॉन्क्लेव के दौरान कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों को पन्ना टाइगर रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण भी कराया गया, ताकि वे वन्यजीव प्रबंधन की वास्तविक स्थिति को समझ सकें। भ्रमण के दौरान मुख्य रूप से इन पहलुओं को दिखाया गया- वन सुरक्षा: प्रतिनिधियों ने एंटी-पोचिंग (शिकार विरोधी) कैंपों का दौरा किया और वन कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली 24 घंटे निगरानी प्रणालियों और पैदल गश्त (Foot Patrolling) को देखा। पर्यावास प्रबंधन (Habitat Management): प्रतिभागियों को वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के बारे में जानकारी दी गई, जैसे कि शाकाहारी जीवों की आबादी बढ़ाने के लिए घास के मैदानों का पुनरुद्धार, वर्ष भर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सौर ऊर्जा संचालित बोरवेल के माध्यम से जल निकायों का प्रबंधन, और स्वदेशी वनस्पतियों को पुनर्जीवित करने के लिए ‘लैंटाना’ और ‘वन तुलसी’ जैसी आक्रामक खरपतवार प्रजातियों को हटाना। समुदाय और पर्यटन: यह देखा गया कि कैसे स्थानीय समुदायों को संरक्षण और पर्यटन अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ा गया है। टाइगर साइटिंग: इस दौरे का मुख्य आकर्षण बाघों का दर्शन रहा, जिसने राज्य के संरक्षण प्रयासों की सफलता की पुष्टि की। हिनौता में हाथी कैंप: कॉर्पोरेट लीडर्स ने हाथी कैंप का दौरा किया, जहाँ उन्होंने वन गश्त में हाथियों की महत्वपूर्ण भूमिका और उनकी विशेष देखभाल की सराहना की।
CSR दान पोर्टल का शुभारंभ
कॉन्क्लेव के दौरान कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) दान के लिए एक विशेष डिजिटल पोर्टल csr.mptigerfoundation.org का भी शुभारंभ किया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह पोर्टल पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है, जिससे कॉर्पोरेट कंपनियां सीधे और सरल प्रक्रिया के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण परियोजनाओं में योगदान दे सकेंगी।
संरक्षण और विकास को साथ लेकर चलने का संकल्प
कॉन्क्लेव के समापन पर वन विभाग और कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ आगे बढ़ने चाहिए। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक संरक्षण रणनीतियों और कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के सहयोग से मध्य प्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी का एक मजबूत मॉडल स्थापित कर सकता है। कॉन्क्लेव का समापन एक साझा संकल्प के साथ हुआ “देश की आर्थिक समृद्धि, इसके वन्य क्षेत्रों की पारिस्थितिक सुरक्षा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलनी चाहिए।”
पन्ना के नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठे केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवार।
* केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजना प्रभावित ग्रामीणों का धरना-प्रदर्शन
* न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और व्यापक होगा: अमित भटनागर
* महिलाएं छोटे बच्चों के साथ देर रात तक कलेक्ट्रेट परिसर में डटी रहीं
पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना एवं छतरपुर जिले में निर्माणाधीन वृहद और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित दर्जन भर गांवों के सैंकड़ों आदिवासी-किसान परिवारों ने भू-अर्जन से जुड़ीं समस्याओं, मुआवजा, विस्थापन तथा समुचित पुनर्वास आदि मुद्दों को लेकर बुधवार 11 मार्च को जय किसान संगठन के बैनर तले “न्याय सत्याग्रह” के तहत पन्ना कलेक्ट्रेट का घेराव किया। जिनमें केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना और रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित परिवार शामिल रहे। तेज धूप में पैदल मार्च कर सैंकड़ों की संख्या में नवीन कलेक्ट्रेट भवन पहुंचे किसान और आदिवासी परिवार अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। कलेक्ट्रेट परिसर में दोपहर 3 बजे से लेकर रात्रि 10:30 बजे तक ग्रामीणों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहा। यह “न्याय सत्याग्रह” अनिश्चितकालीन बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा। रात होते-होते आंदोलन और मजबूत होता नजर आया। कई महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ बिना चादर और बिस्तर के जमीन पर ही रात्रि विश्राम करने को मजबूर रहीं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट और न्यायपूर्ण निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक वे कलेक्ट्रेट से हटने वाले नहीं हैं।
कलेक्टर के न आने से बना रहा गतिरोध
सैंकड़ों प्रभावित ग्रामीण परिवार डायमंड चौराहा से डाइट तिराहा, बलदेव मंदिर, बड़ा बाजार और अजयगढ़ चौराहा होते हुए करीब 6 किलोमीटर की पदयात्रा कर कलेक्ट्रेट पहुंचे। तेज धूप में ग्रामीण अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए ग्रामीण कलेक्ट्रेट परिसर में ही धरने पर बैठ गए। सैंकड़ों लोग कड़कड़ती धूप में करीब चार घंटे तक तेज धूप में बैठे रहे, लेकिन कलेक्टर उनसे मिलने नहीं आईं। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थीं, जिनकी गोद में दो-दो, तीन-तीन महीने के बच्चे और कुछ 15 दिन के नवजात शिशु भी थे। ग्रामीणों का आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बावजूद प्रशासन की ओर से पानी तक की व्यवस्था नहीं की गई। यहां तक कि कार्यालय परिसर के अंदर से जो पानी लिया जा रहा था, उसकी सप्लाई भी बंद कर दी गई। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों के लिए दूर जाकर पानी लाने को मजबूर हुईं। बाद में तहसीलदार के आग्रह पर एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से उनके कक्ष में भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से परियोजना से जुड़े दस्तावेज और जानकारी मांगी। ग्रामीणों का कहना था कि इस संबंध में कई बार आवेदन और आरटीआई के माध्यम से भी जानकारी मांगी गई, लेकिन प्रशासन ने अब तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। कलेक्टर ने प्रशासन की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बताते हुए अपनी बात रखी, लेकिन प्रतिनिधिमंडल ने इसे संतोषजनक नहीं माना।
जमीन पर लेटे रहे प्रदर्शनकारी
केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित सैंकड़ों परिवार पन्ना के डायमंड चौराहा से करीब 6 किलोमीटर की पदयात्रा कर कलेक्ट्रेट पहुंचे।
कलेक्टर से मिलकर बाहर आए प्रतिनिधिमंडल ने पूरी जानकारी उपस्थित किसानों और ग्रामीणों को बताई, तो पहले से नाराज लोगों में आक्रोश और बढ़ गया। इसके बाद हजारों ग्रामीणों ने एक स्वर में निर्णय लिया कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा। रात होने तक बड़ी संख्या में किसान और आदिवासी कलेक्ट्रेट परिसर में ही डटे रहे। कई महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ बिना चादर और बिस्तर के जमीन पर ही रात गुजारने को मजबूर रहीं, जबकि कई लोग भूखे-प्यासे ही आंदोलन स्थल पर बैठे रहे। जय किसान संगठन के नेतृत्व में चल रहा यह “न्याय सत्याग्रह” अनिश्चितकालीन बताया जा रहा है।
आंदोलन की प्रमुख मांगें
प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों से जबरन गांव न छीने जाएं। विस्थापन की स्थिति में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम 2013 का पालन हो। आदिवासी संस्कृति को ध्यान में रखते हुए गांव के बदले गांव बसाकर पुनर्वास किया जाए। प्रभावित परिवारों को आजीविका के लिए पर्याप्त कृषि भूमि उपलब्ध कराई जाए। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर ने कहा कि यह लड़ाई सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि अन्याय के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हजारों आदिवासी और किसान परिवारों को उनकी जमीन और संस्कृति से अलग किया जा रहा है, लेकिन कानून का पालन नहीं किया जा रहा। भटनागर ने कहा कि हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण है, लेकिन यदि प्रभावित किसानों और आदिवासियों को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और व्यापक होगा।
कई संगठनों ने दिया समर्थन
आंदोलन को विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन भी मिला। आम आदमी पार्टी की नेता अंजली यादव, जय आदिवासी संगठन के जिलाध्यक्ष मुकेश गौंड़ और कांग्रेस नेता भरत मिलन पाण्डेय ने आंदोलन स्थल पहुंचकर समर्थन जताया। कांग्रेस नेता भरत मिलन पांडे ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना पन्ना और बुंदेलखंड के लिए अभिशाप साबित होगी। उन्होंने सिंचाई परियोजना प्रभावित परिवारों को मुआवजा वितरण, विस्थापन-पुनर्वास जैसे संवेदनशील मुद्दों पर प्रशासन के रवैये की कड़ी आलोचना की। श्री पाण्डेय ने ऐलान किया कि, प्रभावितों को उनका हक दिलाने की कानूनी लड़ाई को वे अपने खर्च पर हाईकोर्ट ले जाएंगे। वहीं जय आदिवासी संगठन के जिलाध्यक्ष मुकेश गौंड़ ने कहा कि आदिवासियों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, आवश्यकता पड़ने पर पूरे प्रदेश के कार्यकर्ता इस आंदोलन में शामिल होंगे। पन्ना जिले के इतिहास में संभवतः यह पहला अवसर है जब इतनी बड़ी संख्या में किसान और आदिवासी कलेक्ट्रेट परिसर में रात तक डटे रहे। अब क्षेत्र की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
इनका कहना है-
“केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजना प्रभावित परिवारों के भू-अर्जन एवं मुआवजा वितरण की कार्यवाही नियमानुसार पारदर्शी तरीके से की गई है। मुझसे मिलने आए प्रतिनिधिमंडल से भी मैनें पूछा यदि कोई पात्र व्यक्ति छूटा हो तो आप जानकारी दें, हम उसकी जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए तत्पर हैं। विस्थापित परिवारों को कृषि भूमि आवंटित करने सहित प्रतिनिधिमंडल की कई ऐसी मांगें हैं जिनका निराकरण जिला प्रशासन स्तर पर संभव नहीं हैं।”
अवैध शराब पकड़वाने से बौखलाए शराब माफिया के गुर्गों के विरुद्ध क़ानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर हरदुआ चौकी प्रभारी को भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन सौंपा।
* गांव-गांव धड़ल्ले से बिक रही शराब, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
* आरोप- आबकारी व पुलिस की निष्क्रियता से ग्रामीणों को खुद पकड़नी पड़ रही शराब
* एसपी के नाम ज्ञापन सौंपकर 7 दिन में कार्रवाई की मांग, आंदोलन की चेतावनी
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिले में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को अब शराब माफिया की खुली धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। होली पर्व के दौरान हरदुआ खमरिया बस स्टैंड क्षेत्र में अवैध शराब पकड़वाने के बाद नाराज शराब माफिया के गुर्गों ने संगठन के कार्यकर्ताओं को रास्ते में रोककर गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। इस पूरे मामले को लेकर भगवती मानव कल्याण संगठन एवं भारतीय शक्ति चेतना पार्टी शाखा जिला इकाई पन्ना के पदाधिकारियों ने हरदुआ चौकी प्रभारी को पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
सूचना देकर पकड़वाई 4 पेटी अवैध शराब
पन्ना जिले में आबकारी ठेका की आड़ में खुलेआम माफियाराज चला रहे शराब ठेकेदार के कथित गुर्गे को रंगे हाथ पकड़कर 4 पेटी अवैध शराब जब्त की गई।
भगवती मानव कल्याण संगठन के अनुसार 4 मार्च 2026 की शाम लगभग 7 बजे होली पर्व को देखते हुए संगठन के कार्यकर्ता हरदुआ खमरिया बस स्टैंड (चौकी हरदुआ पटेल क्षेत्र) में अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर कार्यकर्ताओं ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मौके से लगभग 4 पेटी अवैध शराब पकड़ी गई। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया।
रास्ते में रोककर दी धमकी
संगठन का आरोप है कि अवैध शराब पकड़वाने से नाराज शराब कारोबार से जुड़े लोगों ने संगठन के दो कार्यकर्ताओं को रास्ते में तीन अलग-अलग स्थानों पर रोककर घेर लिया। इस दौरान आरोपियों ने गंदी-गंदी गालियां देते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी और भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाई न करने की चेतावनी भी दी। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने संगठन द्वारा संचालित पूजा-पाठ, धार्मिक कार्यक्रमों और जनजागरण गतिविधियों को लेकर भी अपमानजनक और अशोभनीय शब्दों का प्रयोग किया, जिससे संगठन के कार्यकर्ता मानसिक रूप से आहत और भयभीत हैं।
इन लोगों पर लगाए आरोप
भगवती मानव कल्याण संगठन द्वारा पुलिस अधीक्षक के नाम दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि इस पूरे घटनाक्रम में ग्राम मड़वा निवासी छंगे प्रजापति, धर्मेंद्र लोधी उर्फ धम्मा, युवराज ठाकुर, भोला राय और नीरज राय शामिल हैं। उक्त सभी लोग शराब माफिया के गुर्गे बताए जा रहे हैं। कथित तौर पर ये लोग लाइसेंसी दुकानों से शराब की पेटियां लेकर उन्हें अवैध बिक्री के लिए आसपास के गांवों में पहुंचाने का काम करते हैं। संगठन के कार्यकर्ताओं-पधादिकारियों कहना है कि इन लोगों ने रास्ते में रोककर गाली-गलौज की, जान से मारने की धमकी दी और कानून व्यवस्था को खुली चुनौती देते हुए भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाई न करने की चेतावनी दी।
आबकारी और पुलिस की भूमिका पर सवाल
पन्ना जिले के आबकारी ठेकेदार के गुर्गे से जब्त की गई अवैध शराब और आरोपी को हरदुआ चौकी पुलिस के सुपुर्द किया गया।
इस घटना के बाद जिले में अवैध शराब कारोबार को लेकर आबकारी विभाग और पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि जिले में अवैध शराब बिक्री के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। जीवन लाल विश्वकर्मा, सुरेन्द्र साहू और राजू लोधी का कहना है कि पड़ोसी जिलों से आने वाली शराब को तो तत्परता से पकड़ लिया जाता है, यह अच्छी बात है। लेकिन जिले की लाइसेंसी शराब दुकानों से आसपास के गांवों में खुलेआम पहुंचाई जा रही अवैध शराब पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। भगवती मानव कल्याण संगठन एवं भारतीय शक्ति चेतना पार्टी का यह भी आरोप है कि कई गांवों और कस्बों में ठेकेदार की शराब अवैध रूप से बेची जा रही है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित लोगों पर कार्रवाई नहीं होती। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की उपलब्धता लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे युवा पीढ़ी तेजी से नशे की ओर आकर्षित हो रही है और गांवों का सामाजिक माहौल भी प्रभावित हो रहा है।
लाइसेंसी ठेकेदार द्वारा कथित रूप से आबकारी विभाग एवं पुलिस की मिलीभगत से बड़ी मात्रा में शराब की अवैध बिक्री करके प्रतिदिन शासन को लाखों रुपए के राजस्व का चूना भी लगाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब प्रशासन प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तो मजबूर होकर सामाजिक संगठन और ग्रामीणों को ही अवैध शराब पकड़ने के लिए आगे आना पड़ता है। लेकिन अब ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करने वाले लोगों को ही धमकाया जा रहा है।
कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी
इस पूरे मामले को लेकर भगवती मानव कल्याण संगठन एवं भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक पन्ना के नाम ज्ञापन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 7 दिन के भीतर आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो उन्हें धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। ज्ञापन सौंपने वालों में जीवन लाल विश्वकर्मा, सुरेन्द्र साहू, अरविंद कचेर, राजू लोधी, संजय, गोविन्द सिंह, अनुज विश्वकर्मा सहित अन्य लोग शामिल रहे। उल्लेखनीय है कि, जब इस प्रकरण के संबंध में पुलिस अधीक्षक पन्ना श्रीमती निवेदिता नायडू से कार्रवाई को लेकर बात की गई तो उन्होंने संगठन के ज्ञापन का अवलोकन करने एवं स्थानीय पुलिस अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करने की बात कही। वहीं जब यह पूंछा गया कि आबकारी विभाग व पुलिस पर ठेकेदार की अवैध शराब न पकड़ने के आरोप लग रहे हैं, तो आपने इस सवाल को प्रकरण से अलग बताया और फिर उनका फोन कट गया।
पन्ना जिले के अजयगढ़ कस्बा में स्थित वन परिक्षेत्र अधिकारी अजयगढ़ एवं धरमपुर का कार्यालय भवन। (फाइल फोटो)
* मवेशियों का चारागाह बने करोड़ों की लागत वाले वन विभाग के प्लांटेशन
* उत्तर वन मण्डल पन्ना की धरमपुर रेन्ज अंतर्गत बीट कुड़रा एवं मैहावा का मामला
* बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, सुरक्षा में घोर लापरवाही के कारण बदहाली की भेंट चढ़े वृक्षारोपण
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में जंगल विभाग जंगलराज का पर्याय बना हुआ है। उत्तर सामान्य वन मण्डल पन्ना अंतर्गत वन तथा वन्यजीवों की सुरक्षा का भार पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़कर मैदानी अमले से लेकर बड़े अफसर बजट बंदरबांट के एक सूत्रीय अभियान में जुटे हैं। ज्यादा से ज्यादा नोट छापकर अकूत संपत्ति अर्जित करने की हवश में विभागीय कार्य बेइंतहां भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे हैं। विभाग द्वारा पूर्व में कराए गए तथा वर्तमान में चल रहे वृक्षारोपण कार्य सरकारी धन को ठिकाने लगाने की परियोजना बन चुके हैं। एक ओर जहां केन्द्र की मोदी तथा राज्य की मोहन यादव सरकार “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के जरिए लोगों को पर्यावरण की रक्षा के साथ मां के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए प्रेरित कर रही है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और मैदानी अमला करोड़ों रुपए खर्च कर लगाए गए हजारों पौधों को मवेशियों की खुराक बनने के लिए छोड़ चुके हैं।
उत्तर सामान्य वन मंडल पन्ना के अंतर्गत धरमपुर रेंज के नरदहा सर्किल की कुड़रा और मैहावा बीट में कराए गए वृक्षारोपणों की स्थिति विभागीय भ्रष्टाचार और लापरवाही की पोल खोल रही है। जिन प्लांटेशन पर लाखों रुपए खर्च किए गए, वे आज खुलेआम मवेशियों के चारागाह में तब्दील हो चुके हैं। सुरक्षा, रखरखाव और निगरानी जैसे कार्य कागजों तक सीमित नजर आते हैं, जबकि जमीन पर पौधों के सूखे डंठल और टूटी फेंसिंग ही नजर आती है। वन विभाग के सूत्रों और मौके पर देखी गई स्थिति से स्पष्ट है कि वृक्षारोपण की सुरक्षा और रखरखाव के लिए निर्धारित राशि का बीटगार्ड से लेकर उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से बंदरबांट हो रहा है। परिणाम यह है कि उत्तर वन मण्डल पन्ना अंतर्गत हरित आवरण बढ़ने के बजाए मैदानी अमले से लेकर विभागीय अफसरों की तिजोरी में नोटों की हरियाली का वजन तेजी से बढ़ रहा है।
कहां खर्च हो रही रोपण के रखरखाव की राशि
नरदहा सर्किल की बीट मैहावा में करीब 2 वर्ष पूर्व 40 हेक्टेयर में कराया गया वृक्षारोपण मवेशियों की चराई और समुचित देखरेख के आभाव में उजड़े चमन में तब्दील हो गया।
उल्लेखनीय है कि, कार्य आयोजना एवं कैम्पा सहित अन्य मदों से वन क्षेत्रों में कराए जाने वाले वृक्षारोपण की सुरक्षा और समुचित देखरेख हेतु प्रोजेक्ट रिपोर्ट अनुसार 7 से लेकर 10 वर्ष तक राशि का प्रावधान किया जाता है, ताकि जिस उद्देश्य से वृक्षारोपण कराया गया है वह पूरा हो सके। मध्य प्रदेश राज्य वन सेवा के एक रिटायर अधिकारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि, वृक्षारोपण कार्य में सबसे ज्यादा राशि प्रथम वर्ष क्षेत्र तैयारी के कार्यों पर व्यय होती है। पहले साल स्थल सफाई से लेकर गड्ढों की खुदाई, गड्ढों में गोबर की खाद डालना और सुरक्षा जाली तार फेंसिंग अथवा पत्थर की दीवार (सीपीडब्ल्यू) से प्लांटेशन क्षेत्र का घेराव किया जाता है। दूसरे वर्ष में मानसून सीजन पर गड्ढों में पौधे रोपित किए जाते हैं। स्वीकृत प्लांटेशन प्रोजेक्ट अनुसार दूसरे वर्ष से लेकर सात या दस वर्ष तक पौधों के आसपास निंदाई-गुड़ाई के साथ फेंसिंग और आंतरिक मार्ग मरम्मत आदि कार्यों के लिए राशि का प्रावधान रहता है। जबकि सुरक्षा कार्य प्रथम वर्ष से शुरू होकर परियोजना समाप्ति तक जारी रहता है। वृक्षारोपण की सुरक्षा सुनिश्चित करने बकायदा चौकीदार (सुरक्षा श्रमिक) के पारिश्रमिक राशि का प्रावधान किया जाता है। इन तथ्यों को दृष्टिगत रखते धरमपुर रेन्ज के नरदहा सर्किल अंतर्गत बीट कुड़रा एवं मैहावा में कुछ वर्ष पूर्व कराए गए वृक्षारोपण को देखें तो पता चलता है, लाखों पौधे रोपित करने के बाद धरातल पर उनकी सुरक्षा पूरी तरह से नदारत है। जिम्मेदार अफसर भी रोपण की सुरक्षा और बदहाली पर आंखें बंद करके बैठे हैं। फलस्वरूप वृक्षारोपण के रखरखाव सहित अन्य मदों की राशि फर्जी बिल-वाउचर के जरिए साल दर साल डकारी जा रही है।
30 हेक्टेयर वृक्षारोपण का बुरा हाल
वन परिक्षेत्र धरमपुर की बीट कुड़रा अंतर्गत वन कक्ष क्रमांक-पी 53 में वर्ष 2023-24 में कार्य आयोजना क्रियान्वयन अंतर्गत आरडीएफ वृक्षारोपण 30 हेक्टेयर क्षेत्र में कराया गया था। स्वीकृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट अनुसार यह वृक्षारोपण वर्तमान में सुरक्षा के साथ रखरखाव की अवधि में है। विगत दिवस कुड़रा के भ्रमण पर पहुंचे पत्रकारों ने पाया कि वृक्षारोपण की सुरक्षा जाली कई जगह से क्षतिग्रस्त थी और कुछ जगह जाली के नीचे गड्ढा बनने से छोटे साइज के मवेशी आसानी से अंदर प्रवेश कर जाते हैं। यहां रोपित पौधों के गड्ढों के आसपास नियमित रूप से निंदाई-गुड़ाई न होने से खरपतवार उग आए हैं। वृक्षारोपण में कई जगह मवेशी चरते हुए नजर आए। फलस्वरूप अधिकांश रोपित पौधे या तो मवेशी चटकर चुके है या फिर उनके अवशेष रुपी सूखे डंठल रोपण की सुरक्षा का सूरत-ए-हाल बयां कर रहे हैं। रोपण में निर्मित मार्ग मरम्मत के आभाव में झाड़ियों और खरपतवार में गुम हो चुके हैं। सुरक्षा जाली फेंसिंग को मजबूती प्रदान करने के लिए तीन कटीले तार लगाने का प्रावधान किया जाता है। लेकिन मौके पर सिर्फ दो कटीले तार नीचे-ऊपर लगे मिले। बीच का तार लगाया ही नहीं गया।
54 हेक्टेयर वृक्षारोपण में टूटे पड़े पोल
बीट कुड़रा के कक्ष क्रमांक-पी- 53 में कैम्पा मद अंतर्गत आरडीएफ वृक्षारोपण वर्ष 2022-23 में 54 हेक्टेयर रकबा में कराया गया था। कुड़रा पहुंच मार्ग के किनारे स्थित इस रोपण की सुरक्षा जाली फेंसिंग के कई सीमेंट पोल टूट चुके हैं। सपोर्ट पोल भी टूटे पड़े हैं। कुछ जगह पोल के स्थान पर बांस बल्ली को लगाया गया। रोपण के पोल टूटने तथा सुरक्षा जाली क्षतिग्रस्त होने के कारण स्थानीय ग्रामीणों के मवेशी बड़े आराम से अंदर घुसकर चरते रहते हैं। पत्रकारों को रोपण के अंदर दो दर्जन से अधिक भैंसें दिनदहाड़े चरते हुए मिलीं। चूंकि भैंसे रोपण के बड़े क्षेत्र में फैली थी और खरपतवार तथा पुराने वृक्षों की आड़ के कारण उन सबको एक फोटो में दिखा पाना संभव नहीं था। फिर भी कुछ भैंस को एक फोटो क्लिक करने की कोशिश की गई, ताकि करोड़ों रुपए खर्च करके कराए गए सुरक्षा की जमीनी सच्चाई को दिखाया जा सके। फेंसिंग की मजबूती के लिए तीन कतार में लगाई जाने वाली कटीली तार की मौके पर सिर्फ दो कतार ही नजर नहीं आ रही है। 2-3 मीटर के अंतराल में लगाए जाने वाले सीमेंट पोल्स भी सभी जगह एक जैसे नजर नहीं आ रहे हैं। इस रोपण में भी अधिकांश पौधों को मवेशी चट कर चुके हैं। जो शेष बचे हैं उनके सूखे डंठल रुपी अवशेष नजर आ रहे हैं। गड्ढों के आसपास खरपतवार की भरमार से प्रतीत होता है कि पौधरोपण के बाद से निंदाई-गुड़ाई का कार्य कागजों तक ही सीमित है।
40 हेक्टेयर पौधारोपण बना उजड़ा चमन
कुड़रा ग्राम के बाहरी क्षेत्र में कराए गए वृक्षारोपण में मौके पर न तो सूचना बोर्ड लगाया गया और ना ही दीवार लेखन के माध्यम से रोपण की जानकारी प्रदर्शित की गई है। मजेदार बात यह है कि, धरमपुर रेंजर वैभव सिंह चंदेल से जब इस रोपण की बुनियादी जानकारी प्राप्त करने के लिए दो-तीन बार संपर्क करने पर उनके द्वारा अति आवश्यक शासकीय कार्य में व्यस्त होने का हवाला देकर जानकारी देने में आनकानी की गई। वन परिक्षेत्र धरमपुर अंतर्गत वन सुरक्षा की अत्यंत ही लचर स्थिति, विभागीय कार्यों में भारी भ्रष्टाचार के मद्देनजर मीडिया को जानकारी देने से बचने रेंजर साहब द्वारा की जाने वाली बहानेबाजी को समझा जा सकता है। उक्त रोपण के संबंध में विभागीय सूत्रों से मिली अपुष्ट जानकारी के अनुसार मैहावा बीट अंतर्गत 40 हेक्टेयर रकबे में मिश्रित रोपण 2 वर्ष पूर्व कराया गया था। स्थानीय नाले और पहाड़ी के किनारे स्थित इस रोपण में दूर-दूर तक फैले तकरीबन आधा सैंकड़ा मवेशी खुलेआम चरते हुए मिले। पत्रकार रोपण की बदहाली, मवेशियों की अवैध चराई को जब अपने कैमरों कैद कर रहे थे तो वहीं नजदीक खड़े वन विभाग के 3-4 सुरक्षा श्रमिक मवेशियों को रोपण से बाहर निकालने के बजाए तमाशबीन की तरह खड़े थे। इस रोपण की सुरक्षा के लिए बनाई गई पत्थरों की खखरी (सुरक्षा दीवार) जगह-जगह ढह चुकी है। महज तीन फिट ऊंची सुरक्षा दीवार मवेशियों को अंदर घुसने से रोक नहीं पा रही है। मौके पर बनाई गई पत्थर की दीवार मानक आकार में नहीं पाई गई। प्लांटेशन के अधिकांश पौधे मवेशी हजम कर चुके, जो कुछ शेष बचे हैं वे सूखे डंठल में तब्दील होकर उजड़े हुए चमन की गवाही दे रहे हैं।
इनका कहना है-
“आपके द्वारा कुड़रा के जंगल में अवैध कटाई होने के संबंध में पूर्व में प्रकाशित खबर में प्रयोग किया गया कत्लेआम शब्द आपत्तिजनक है। क्योंकि कुड़रा जंगल की जांच उड़नदस्ता दल से कराने पर वहां सिर्फ 4 सटकठा पेड़ों के 3-4 माह पुराने ठूंठ पाए गए। सागौन तो बिल्कुल भी नहीं मिला। अभी आपने प्लांटेशन में मवेशियों की अवैध चराई आदि के जो फोटोग्राफ्स भेजे हैं, मैं पहले उनकी जांच करवाऊंगा उसके बाद ही कुछ कहूंगा।”
धीरेन्द्र प्रताप सिंह, डीएफओ, उत्तर सामान्य वन मण्डल पन्ना।
“प्लांटेशन में यदि मवेशी चराई कर रहे हैं तो यह घोर आपत्तिजनक है, आपके द्वारा भेजे गए फोटोग्राफ्स मैंने मुख्य वन संरक्षक वृत छतरपुर को भेजकर कार्रवाई हेतु निर्देशित किया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख इस समय खजुराहो में हैं, आप उनसे मिलकर स्थानीय मामलों की विस्तृत जानकारी दे सकते हैं।”
* ई-टेंडर कम ऑक्शन में पन्ना जिले के बृजपुर व शाहनगर समूहों पर लगी ऊंची बोली
* चार समूहों में से दो का निष्पादन, सलेहा और मोहन्द्रा के लिए नहीं मिले टेंडर
* गुनौर, पवई और अजयगढ़ समूह का अगले चरण में 5 मार्च को होगा निष्पादन
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) नवीन आबकारी नीति वर्ष 2026-27 के अंतर्गत पन्ना जिले में शराब दुकान समूहों के निष्पादन की प्रथम चरण की प्रक्रिया मंगलवार 3 मार्च को कलेक्टर की अध्यक्षता में संपन्न हुई। ई-टेंडर कम ऑक्शन प्रक्रिया के तहत दो समूह अपने निर्धारित आरक्षित मूल्य से 10 करोड़ 21 लाख 65 हजार 445 रुपए अधिक पर निष्पादित हुए। दोनों समूहों के लिए कुल सर्वोच्च बोली 47 करोड़ 62 लाख रुपए से अधिक रही।
प्रथम चरण में चार समूह- बृजपुर, मोहन्द्रा, सलेहा और शाहनगर को शामिल किया गया था। ई-टेंडर कम ऑक्शन प्रक्रिया में सलेहा और मोहन्द्रा समूह में कोई टेंडर प्राप्त नहीं हुआ। वहीं बृजपुर समूह में ई-टेंडर के तहत 3 तथा ई-टेंडर कम ऑक्शन में 6, कुल 9 टेंडर प्राप्त हुए। शाहनगर समूह में ई-टेंडर में 1 तथा ई-टेंडर कम ऑक्शन में 3, कुल 4 टेंडर प्राप्त हुए।
बृजपुर 40 और शाहनगर 17 % अधिक में नीलाम
बृजपुर समूह का आरक्षित मूल्य 16 करोड़ 39 लाख 85 हजार 562 रुपए निर्धारित था, जिसके विरुद्ध 23 करोड़ 4 लाख 99 हजार 999 रुपए की सर्वोच्च बोली प्राप्त हुई, जो आरक्षित मूल्य से लगभग 40.56 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार शाहनगर समूह का आरक्षित मूल्य 21 करोड़ 1 लाख 48 हजार 990 रुपए था, जिसके विरुद्ध 24 करोड़ 57 लाख 99 हजार 999 रुपए की सर्वोच्च बोली लगी, जो लगभग 17 प्रतिशत अधिक है। इस प्रकार दोनों समूह आरक्षित मूल्य से उल्लेखनीय वृद्धि के साथ निष्पादित हुए। आधिकारिक जानकारी के अनुसार दोनों समूहों को आबकारी विभाग के वर्तमान लाइसेंसी ठेकेदार आशीष शिवहरे ने सर्वाधिक बोली लगाकर आगामी वित्तीय वर्ष के लिए पुनः प्राप्त किया।
कलेक्टर-एसपी रहीं उपस्थित
निष्पादन प्रक्रिया के दौरान जिला निष्पादन समिति की अध्यक्ष कलेक्टर श्रीमती ऊषा परमार, पुलिस अधीक्षक श्रीमती निवेदिता नायडू तथा पदेन सचिव जिला आबकारी अधिकारी मुकेश कुमार मौर्य, सहायक जिला आबकारी अधिकारी विवेक त्रिपाठी, आबकारी उप निरीक्षक मुकेश पाण्डेय, हरीश पाण्डेय एवं विक्रांत जैन सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। द्वितीय चरण की प्रक्रिया 5 मार्च 2026 को आयोजित की जाएगी। इस चरण में गुनौर, पवई और अजयगढ़ समूहों का निष्पादन ई-टेंडर कम ऑक्शन की ऑनलाइन प्रक्रिया से किया जाएगा। गुनौर समूह का आरक्षित मूल्य 23 करोड़ 13 लाख 46 हजार 307 रुपए, पवई समूह का 27 करोड़ 14 लाख 54 हजार 821 रुपए तथा अजयगढ़ समूह का 22 करोड़ 4 लाख 65 हजार 254 रुपए निर्धारित किया गया है। प्रथम चरण में प्राप्त प्रतिस्पर्धी बोलियों से जिले को राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।
सड़क हादसे में मृत आदिवासी युवकों की क्षतिग्रस्त बाइक।
* बृजपुर-पहाड़ीखेरा मार्ग पर जवाहर नवोदय विद्यालय के समीप हुआ भीषण हादसा
पन्ना।(www.radarnews.in) तेज रफ्तार और कथित रूप से शराब के नशे में बाइक चलाना दो युवकों को भारी पड़ गया। बृजपुर-पहाड़ीखेरा मार्ग पर जवाहर नवोदय विद्यालय के समीप स्थित एक मोड़ पर अनियंत्रित होकर बाइक सड़क से करीब 100 फीट दूर जा गिरी, जिससे उस पर सवार दोनों युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे ने एक बार फिर लापरवाहीपूर्ण ड्राइविंग के खतरनाक परिणामों को उजागर कर दिया है। मंगलवार को दोपहर में लगभग 2 बजे हुए इस हादसे की खबर आने के बाद से इलाके में शोक का माहौल है। सड़क दुर्घटना पर बृजपुर थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले को विवेचना में लिया है।
तेज रफ्तार बनी काल
प्राप्त जानकारी के अनुसार हीरो एक्सट्रीम बाइक (क्रमांक MP- 35 ZE- 6712) बृजपुर से पहाड़ीखेरा की ओर जा रही थी। बाइक की रफ्तार अत्यधिक बताई जा रही है। ग्राम धनौजा के पास स्थित ठाकुर बाबा मोड़ पर चालक संतुलन खो बैठा और बाइक अनियंत्रित होकर सड़क से लगभग 100 फीट दूर जा गिरी। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि दोनों आदिवासी युवकों को शरीर में कई जगह गंभीर चोटें आईं और उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान ग्राम रखैल निवासी कृष्ण कुमार गौंड़ 23 वर्ष पिता मनीराम गौंड़ तथा अर्जन उर्फ कल्लू गौंड़ 22 वर्ष पिता लल्लू गौंड़ के रूप में हुई है। दोनों बृजपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले थे। घटना की सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे, जहां चीख-पुकार और मातम का माहौल बन गया।
हेलमेट नहीं, नशे की आशंका
तेज रफ़्तार बाइक मोड़ पर अनियंत्रित होने से सड़क से दूर गिरे युवकों को आई गंभीर चोटों के कारण मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
थाना प्रभारी शक्ति प्रकाश पांडेय ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला तेज रफ्तार का प्रतीत होता है। दोनों युवक बिना हेलमेट के बाइक पर सवार थे, जिससे सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में घातक चोटें आईं। उनके पास से चखना का नमकीन भी बरामद हुआ है, जिससे शराब के सेवन की आशंका जताई जा रही है। पुलिस मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है।
पुलिस ने किया मर्ग कायम
सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए पन्ना भेजा गया। देर शाम हो जाने के कारण पोस्टमार्टम नहीं हो सका और शवों को सुरक्षित मोर्चरी में रखवाया गया है। बुधवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच प्रारंभ कर दी है। यह हादसा तेज यातायात नियमों की अनदेखी के गंभीर परिणामों की कड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है।
तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य के संयुक्त प्रशिक्षण को दक्षिण वन मण्डल पन्ना के डीएफओ अनुपम शर्मा ने संबोधित किया। प्रशिक्षण में उत्तर वन मण्डल पन्ना के डीएफओ धीरेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा भी फील्ड स्टॉफ को महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
* तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य का संयुक्त प्रशिक्षण संपन्न
* 15 से 25 मार्च के मध्य किया जाएगा शाखकर्तन कार्य
* शाखकर्तन कार्य के लिए 62 रुपए प्रति मानक बोरा दर निर्धारित
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिले के उत्तर सामान्य वन मण्डल एवं दक्षिण सामान्य वन मण्डल के संयुक्त तत्वावधान में तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य का प्रशिक्षण का आयोजन गत दिवस स्मृति वन परिसर पन्ना में किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तर पन्ना वनमण्डल अधिकारी धीरेन्द्र प्रताप सिंह, दक्षिण पन्ना वनमण्डल अधिकारी अनुपम शर्मा, प्रशिक्षु भारतीय वन सेवा अधिकारी अक्षत जैन एवं अंशुल तिवारी, उपवनमण्डल अधिकारी नितिन निगम, प्रशिक्षु राज्य वन सेवा अधिकारी अंकुर गुप्ता सहित दोनों वनमण्डलों के परिक्षेत्र अधिकारी, वनकर्मी, प्राथमिक लघुवनोपज सहकारी समितियों के प्रबंधक, प्रभारी विक्रम सिंह बुंदेला तथा तेंदूपत्ता क्रेता उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को तेंदू पौधों की वैज्ञानिक कटाई एवं शाखकर्तन की विधि का व्यवहारिक प्रदर्शन कराया गया। आगामी तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य 15 से 25 मार्च के मध्य पन्ना जिले के वन क्षेत्रों में निर्धारित रूप से किया जाएगा।
तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य के संयुक्त प्रशिक्षण में दक्षिण वन मण्डल पन्ना तथा उत्तर वन मण्डल पन्ना के अधिकारी-कर्मचारी, वनोपज समितियों के प्रबंधक उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण में बताया गया कि तेंदूपत्ता शाखकर्तन वन प्रबंधन की एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत तेंदूपत्ता के छोटे (20 सेंटीमीटर से कम गोलाई के) पौधों की नियंत्रित कटाई की जाती है। इससे पौधों में नई कोपलों का विकास तेजी से होता है तथा समान आकार, कोमल एवं उच्च गुणवत्ता वाले पत्तों की प्राप्ति सुनिश्चित होती है। शाखकर्तन के बाद विकसित होने वाले पत्ते संग्रहण के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ता है। सही समय एवं तकनीक से किया गया शाखकर्तन तेंदूपत्ता उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों को बेहतर बनाता है। शासन ने इस वर्ष तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य के लिए 62 रुपए प्रति मानक बोरा दर निर्धारित की है।
तेंदूपत्ता संग्रहण प्रदेश के वनाश्रित एवं आदिवासी परिवारों की आजीविका का एक महत्वपूर्ण आधार है। संग्रहण सीजन के दौरान ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होता है तथा सहकारी समितियों के माध्यम से उन्हें प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और वन संरक्षण में समुदाय की सहभागिता भी बढ़ती है। तेंदूपत्ता से होने वाली आय अनेक परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहारा प्रदान करती है।
* 5 ब्राह्मण और 5 क्षत्रिय नेताओं को बनाया पदाधिकारी
* एससी के नेता हुए निराश, नहीं मिल सका स्थान
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) भारतीय जनता पार्टी जिला इकाई पन्ना की नई 21 सदस्यीय कार्यकारिणी की घोषणा जिला अध्यक्ष बृजेन्द्र मिश्रा द्वारा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से की गई। नई टीम में अनुभवी और जमीनी आधार वाले नेताओं के साथ कई युवा चेहरों को शामिल किया गया है। संगठन ने इसे संतुलित और प्रभावी कार्यकारिणी बताया है। अनुभव और युवा ऊर्जा के समन्वय के साथ नई टीम उतारने का दावा किया है, हालांकि सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर पार्टी के अंदर और बाहर चर्चा भी तेज हो गई है। घोषित कार्यकारिणी में सवर्ण वर्ग के नेताओं का दबदबा स्पष्ट नजर आता है। जारी सूची के अनुसार 21 में से 12 पद सवर्ण समाज से जुड़े नेताओं को मिले हैं, जिनमें 5 ब्राह्मण और 5 क्षत्रिय चेहरों के अलावा वैश्य तथा कायस्थ समाज से 1-1 प्रतिनिधि शामिल हैं। वहीं अनुसूचित जाति वर्ग (एससी) को इस बार जिला कार्यकारिणी में स्थान नहीं मिल पाया है, जिससे राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। जिले की तीन विधानसभा सीटों में से गुनौर सीट एससी के लिए आरक्षित है और वहां से भाजपा विधायक भी हैं। ऐसे में एससी वर्ग को प्रतिनिधित्व न मिलना संगठनात्मक संतुलन की दृष्टि से चर्चा का विषय बन गया है। जिला कार्यकारिणी में इस बार आधी आबादी यानी महिलाओं (नेत्रियों) का प्रतिनिधित्व सिर्फ 4 पदों पर सिमट गया।
संतुलित कार्यकारिणी के चक्कर में असंतुलन
वर्तमान राजनीति में सामाजिक/जातिगत समीकरणों की अहम भूमिका को देखते हुए माना जा रहा था कि कार्यकारिणी गठन में व्यापक प्रतिनिधित्व का ध्यान रखा जाएगा। और यह पूरी तरह से समावेशी सोच पर आधारित होगी। जिला अध्यक्ष बृजेन्द्र मिश्रा को संगठनात्मक प्रबंधन में कुशल माना जाता है, लेकिन इस सूची में कुछ वर्गों की अनुपस्थिति को लेकर पार्टी के भीतर ही धीमे स्वर में असंतोष की चर्चा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घोषित सूची में पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह के करीबी माने जाने वाले नेताओं का प्रभाव अधिक दिखता है, जबकि गुनौर विधायक डॉ. राजेश वर्मा और पवई विधायक प्रहलाद लोधी खेमे के समर्थकों को अपेक्षाकृत कम अवसर मिला है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सूत्रों के अनुसार एक महामंत्री, दो मंत्री और मीडिया प्रभारी से जुड़े कुछ पदों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण उन्हें फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। संभावना जताई जा रही है कि आगामी नियुक्तियों के जरिए सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की जा सकती है।
मूल कार्यकर्ताओं पर भरोसा
पिछड़ा वर्ग से आने वाले बीजेपी के एक बड़े नेता ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर जिला कार्यकारिणी में सामाजिक असंतुलन पर असंतोष जताया है। उन्होंने तार्किक सवाल उठाते हुए कहा, पन्ना जिलाध्यक्ष व क्षेत्रीय सांसद वीडी शर्मा ब्राह्मण हैं और पन्ना विधायक क्षत्रिय समाज से आते हैं, इसके बाद भी 21 पदाधिकारियों वाली कार्यकारिणी में 10 पदों पर इन्हीं दोनों जातियों के नेताओं को नियुक्त करना क्या उचित है? इनका मानना है अन्य छूटी हुई जातियों के सक्रिय व कर्मठ युवाओं को अगर पदाधिकारी बनाया जाता तो कार्यकर्ताओं में अच्छा संदेश जाता। सामाजिक न्याय की मांग जब हर क्षेत्र में पुरजोर तरीके से उठाई जा रही उस समय इस तरह के मामले सामने आना निश्चित ही बेहद चिंताजनक है। भाजपा नेता ने एक सवाल के जवाब में बताया कि उनकी नजर में नई टीम की एक प्रमुख विशेषता यह है कि संगठन ने लंबे समय से सक्रिय, वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी है। बता दें कि, विधानसभा एवं लोकसभा चुनावों के दौरान दलबदल कर भाजपा में आने वाले चेहरों को सूची में स्थान नहीं मिला। इसे संगठन के ‘मूल भाजपाइयों’ पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।
माधवेन्द्र को बनाया महामंत्री
भाजपा की नई जिला कार्यकारिणी के कुछ सकारात्मक और मजबूत पक्ष भी जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। जिसमें एक प्रमुख पक्ष यह भी है कि संगठन ने जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले नेताओं को तरजीह दी है। मजबूत जनाधार रखने वाले जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष माधवेन्द्र सिंह (मद्धू राजा) को जिला महामंत्री बनाया जाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। जिला उपाध्यक्ष बनाए गए सुशील त्रिपाठी योग्य, अनुभवी नेता माने जाते हैं। वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप मजूमदार को कार्यालय मंत्री बनाकर भाजपा ने पन्ना विधानसभा के अपने समर्पित बंगाली समुदाय के वोटरों को मैसेज दिया है। राजनीतिक जटिलताओं के साथ पब्लिक के मिजाज को भली-भांति समझकर रणनीति बनाने में माहिर मजूमदार की कार्यकुशलता से सभी परिचित हैं। वहीं पन्ना के व्यापार मंडल में प्रभावी दखल रखने वाले युवा नेता कमल लालवानी, संघर्षशील एवं सक्रिय भास्कर पाण्डेय को जिला उपाध्यक्ष नियुक्त करने के साथ अन्य कई क्षमतावान युवाओं को आगे लाने का काम किया है। पन्ना की पार्षद श्रीमती संगीता राय को जिला मंत्री बनाकर पार्टी ने जिला कार्यकारिणी में महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करते हुए उनकी सक्रियता को सम्मान दिया है।
किसे क्या जिम्मेदारी मिली
भाजपा जिला पन्ना की घोषित नई कार्यकारिणी में कई सक्रिय युवा चेहरों को स्थान मिला।
भारतीय जनता पार्टी जिला इकाई पन्ना की 25 फरवरी को जारी नई जिला कार्यकारिणी में महामंत्री पद पर माधवेंद्र सिंह (मद्धू राजा) और राजेन्द्र कुशवाहा को नियुक्त किया गया है। जिला उपाध्यक्ष के रूप में श्रीमती सुषमा आदिवासी, दीपेन्द्र सिंह, सुशील त्रिपाठी, कमल लालवानी, श्रीमती पूनम यादव, भास्कर पाण्डेय, शैलेन्द्र श्रीवास्तव और शैलेन्द्र सिंह राजपूत को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला मंत्री पद पर कमलेश लोधी, कौशल किशोर लोधी, अवध तिवारी, श्रीमती संगीता राय, श्रीमती विजय राजे और जगदीश पटेल को शामिल किया गया है। वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी दशरथ गुप्ता को कोषाध्यक्ष के रूप में दी गई है, जबकि नागेन्द्र सिंह और राकेश चौबे को सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है। कार्यालय संचालन की जिम्मेदारी प्रदीप मजूमदार को कार्यालय मंत्री और ध्रुव चौबे को सह-कार्यालय मंत्री के रूप में सौंपी गई है। नई जिला कार्यकारिणी के सामने संगठन को बूथ स्तर तक सशक्त करने, सामाजिक संतुलन बनाए रखने और आगामी चुनावी रणनीति को धार देने की चुनौती रहेगी। जहां एक ओर भाजपा ने अनुभव, प्रतिबद्धता और युवा ऊर्जा के मिश्रण के साथ टीम घोषित की है वहीं सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान किस तरह होता है, यह आगामी समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल नई कार्यकारिणी के गठन ने पन्ना में सत्ताधारी दल भाजपा की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।
पशुओं का अवैध रूप से परिवहन करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली अजयगढ़ थाना की पुलिस टीम।
* अजयगढ़ थाना पुलिस ने भैंस वंशीय पशुओं से भरे 4 वाहन किए जब्त
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) अवैध पशु परिवहन और पशु क्रूरता के विरुद्ध जिले की अजयगढ़ थाना पुलिस ने बीती रात बड़ी कार्रवाई करते हुए 105 भैंस वंशीय पशुओं को मुक्त कराया है। चार मालवाहक वाहनों में भूसे की तरह ठूंस-ठूंसकर भरे गए बेजुबान एवं निरीह पशुओं को कथित तौर पर उत्तर प्रदेश के बूचड़खाने (स्लॉटर हाउस) ले जाया जा रहा था। कुछ पशुओं के मुंह और पैर रस्सियों से बंधे हुए थे। पुलिस ने मवेशियों से भरे वाहनों को जब्त कर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। भूख-प्यास से बेहाल पशुओं को समुचित देखभाल के साथ सुरक्षा की दृष्टि से भानपुर ग्राम की गौशाला भेजा गया। यह कार्रवाई नवागत थाना प्रभारी निरीक्षक हरि सिंह ठाकुर के नेतृत्व में हमराही पुलिस बल द्वारा की गई।
मुखबिर की सूचना पर रात में घेराबंदी
पुलिस के अनुसार, 24 फरवरी 2026 की रात्रि थाना प्रभारी को सूचना प्राप्त हुई थी कि पन्ना की ओर से कुछ वाहन मवेशियों को क्रूरतापूर्वक भरकर अजयगढ़ की ओर ले जाए जा रहे हैं, जिन्हें आगे चलकर बूचड़खाने, उत्तर प्रदेश भेजे जाने की तैयारी है। सूचना मिलते ही पुलिस टीमों का गठन कर ग्राम सिंहपुर से कस्बा अजयगढ़ तक विभिन्न स्थानों पर घेराबंदी कर चेकिंग शुरू की गई।
वाहन चेकिंग में सामने आई क्रूरता
वाहनों में भूसे की तरह भरकर स्लॉटर हाऊस ले जाए जा रहे थे भैंस वंशीय पशु।
जांच के दौरान पिकअप क्रमांक UP-71 AT- 8812 से 16, डीसीएम क्रमांक UP-71 CT- 1253 से 57, पिकअप क्रमांक UP- 71 AT- 1702 से 18 तथा पिकअप क्रमांक UP- 71 AT- 8141 से 14 भैंस वंशीय पशु बरामद किए गए। सभी पशु अत्यंत संकुचित स्थिति में ठूंस-ठूंसकर भरे पाए गए थे। कई पशुओं के मुंह और पैर रस्सियों से बांधे गए थे तथा परिवहन के दौरान उनके लिए खाने-पीने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी। पुलिस ने सभी 105 भैंस वंशीय पशुओं को सुरक्षित मुक्त कर सुरक्षार्थ गौशाला भानपुर में भिजवाया है, जहां उनकी देखभाल की व्यवस्था की गई है। परिवहन में प्रयुक्त एक डीसीएम और तीन बोलेरो पिकअप वाहन भी जब्त कर लिए गए हैं। पुलिस के अनुसार जब्त मवेशियों एवं वाहनों सहित कुल लगभग 31 लाख रुपये का मशरूका जप्त किया गया है।
पुलिस ने दर्ज किए चार प्रकरण
पशुओं का अवैध रूप से परिवहन करने तथा पशु क्रूरता के मामले में आरोपियों जब्त वाहनों के साथ अजयगढ़ थाना की पुलिस टीम।
मामले में पुलिस ने चार अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर उत्तर प्रदेश के जिला फतेहपुर निवासी 7 व्यक्तियों को आरोपी बनाया है। जिनमें अमीर हसन (40) निवासी ग्राम सिचोली थाना थरियांव जिला फतेहपुर, असलम खान (24) निवासी ग्राम हनुमानपुर थाना थरियांव जिला फतेहपुर, सलीम (36) निवासी रामपुर थाना थरियांव जिला फतेहपुर, सोहेल (25) निवासी रामपुर थाना थरियांव जिला फतेहपुर, मोहम्मद आलम (20) निवासी ग्राम हनुमानपुर थाना थरियांव जिला फतेहपुर, सुलेमान (26) निवासी खेसहन थाना गाजीपुर जिला फतेहपुर तथा चांद मियां (38) निवासी गोसपुर थाना हथगांव जिला फतेहपुर उत्तर प्रदेश शामिल हैं।
…तो की जाएगी वैधानिक कार्रवाई
हरि सिंह ठाकुर निरीक्षक, थाना प्रभारी अजयगढ़ जिला पन्ना।
थाना प्रभारी निरीक्षक हरि सिंह ठाकुर ने बताया कि आरोपियों के विरुद्ध पशु क्रूरता अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है। थाना क्षेत्र में अवैध पशु परिवहन और पशु क्रूरता के मामलों पर सतत निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के विरुद्ध किसी भी प्रकार की गतिविधि पाए जाने पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस द्वारा जब्त वाहनों के दस्तावेजों और परिवहन संबंधी अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
पन्ना जिले के अजयगढ़ कस्बा में स्थित वन परिक्षेत्र अधिकारी अजयगढ़ एवं धरमपुर का कार्यालय भवन। (फाइल फोटो)
उत्तर वन मण्डल पन्ना के परिक्षेत्र धरमपुर अंतर्गत सीमवर्ती जंगल का मामला
* सागौन के ताज़ा ठूंठ बने सबूत, वन अमले की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
* ईमानदारी से जंगल सुरक्षा न कर वन अपराधों पर पर्दा डालने में जुटा मैदानी अमला
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में दोनों सामान्य वन मण्डलों उत्तर-दक्षिण से इन दिनों जिस तरह की खबरें बाहर आ रही हैं वे अत्यंत चिंताजनक होने के साथ स्थिति के पूरी तरह से असमान्य होने का संकेत दे रहीं है। वानिकी एवं निर्माण कार्यों से नोट छापने के चक्कर में वन विभाग का मैदानी अमला जंगल और जानवरों की सुरक्षा से मुंह मोड़ चुका है। दक्षिण वन मण्डल के परिक्षेत्र कल्दा अंतर्गत पौधरोपण कार्य के लिए वन क्षेत्र में कथित तौर पर ब्लास्टिंग कराए जाने, जेसीबी मशीन से खुदाई करवाकर पत्थर निकालने और पौधारोपण कार्य करने वाले मेहनतकश मजदूरों की खून-पसीने की कमाई (मजदूरी) हड़पते हुए उनका शोषण करने की खबर सुर्ख़ियों में बनी है। वहीं उत्तर सामान्य वन मण्डल पन्ना की बात करें तो पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे जंगलों में अवैध कटाई की गतिविधियां जारी होने के गंभीर संकेत मिले हैं। वन परिक्षेत्र धरमपुर अंतर्गत अंतर्गत सर्किल नरदहा की बीट कुड़रा और मैहावा के सीमावर्ती जंगलों में की अवैध कटाई बेरोकटोक चल रही है।
वन परिक्षेत्र धरमपुर अंतर्गत कुड़रा के जंगल में हाल ही में काटे गए सागौन वृक्ष का ठूंठ और आसपास बिखरी पड़ी छाल।
सप्ताह भर के अंदर दूसरी बार शनिवार 21 फरवरी को क्षेत्र के भ्रमण पर पहुंचे पत्रकारों को जंगल के भीतर सागौन सहित जलाऊ लकड़ी के वृक्षों के कई ताज़ा ठूंठ दिखाई दिए। कटे हुए वृक्षों की लाल ताज़ा लकड़ी, आसपास बिखरी छाल और अधकटे तनों के अवशेष यह दर्शा रहे थे कि कटाई हाल के दिनों में ही की गई है। मोटे सागौन के ठूंठ इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि इमारती लकड़ी पर भी हाथ साफ किया जा रहा है। भ्रमण के दौरान घने जंगल के भीतर से वृक्ष पर कुल्हाड़ी चलने की “ठक-ठक” की आवाजें भी सुनाई दीं। जैसे ही बाहरी मौजूदगी का आभास हुआ, यह आवाज अचानक बंद हो गई। यह घटनाक्रम स्वयं संकेत देता है कि जंगल के भीतर कुछ छिपाने की कोशिश की जा रही थी। यह बात तब और पुख्ता हो गई जब बियाबान जंगल के अंदर की स्याह हकीकत उजागर होने से भयभीत और परेशान मैदानी वन अमले द्वारा अपने अधिकारियों की शह पर पत्रकारों को जंगल भ्रमण तथा विभागीय कार्यों का अवलोकन करने से रोकने तमाम हथकंडे आजमाए गए।
निगरानी व्यवस्था पर सवाल
वन अपराध की दृष्टि से अत्यंत ही संवेदनशील कुड़रा के जंगल में अवैध कटाई सहित अन्य गतिविधियों के प्रमाण मिलने से वन विभाग की नियमित गश्त और कड़ी निगरानी के दावे पर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मसलन, कुड़रा ग्राम में जहां दो वन रक्षकों के आवास स्थित हैं और लगभग दर्जनभर श्रमिक जंगल की सुरक्षा के नाम पर तैनात हैं वहां वृक्षों की कटाई बिना जानकारी के कैसे संभव हो रही है? क्या विभाग को वाकई इसकी भनक नहीं लगी या फिर जानबूझकर अवैध कटाई की अनदेखी की जा रही है? जानकारों का मानना है, कुड़रा-मैहवा बीट के जंगल की जटिल भौगोलिक स्थिति, कुड़रा एवं धरमपुर में वन अमले की पर्याप्त संख्या में मौजूदगी के मद्देनजर इनकी सहमति अथवा संलिप्तता के बगैर किसी तरह की अवैध गतिविधि संभव ही नहीं है।
पत्रकारों के मददगार को धमकाया
वन परिक्षेत्र धरमपुर अंतर्गत विभगीय कार्यों की जमीनी हकीकत जानने पहुंचे पत्रकारों को वन अमले के असहयोग का सामना करना पड़ा। पहले तो वन अमले ने मौके तक ले जाने में अनिच्छा दिखाई गई। पत्रकारों ने जब स्थानीय ग्रामीण बब्बू लोध की मदद ली तो उसे सुरक्षा श्रमिकों के द्वारा चेतावनी दी गई। वृद्ध बब्बू को धमकाते हुए एक सुरक्षा श्रमिक बोला यदि वह पत्रकारों को जंगल के भीतर लेकर गया या विभागीय कार्यों से जुड़ी खबरें कवर करवाईं, तो परिणाम अच्छे नहीं होंगे। सुरक्षा श्रमिकों का यह रवैया कई संदेह खड़े करता है। सवाल यह है कि, यदि सब कुछ पारदर्शी है, तो पत्रकारों को रोकने और स्थानीय व्यक्ति पर दबाव बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह सब व्यक्तिगत स्तर पर हुआ या फिर किसी वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश पर पत्रकारों के भ्रमण को बाधित करने की कोशिश की गई। इसका जबाव तो सुरक्षा श्रमिक, संबंधित सर्किल प्रभारी और परिक्षेत्राधिकारी धरमपुर ही दे सकते हैं। लेकिन इस घटनाक्रम से एक बात पूरी तरह से स्पष्ट है, मैदानी वन अमला अगर निष्ठापूर्वक और ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वाहन कर रहा होता तो उन्हें पत्रकारों के भ्रमण को रोकने के लिए घटिया हथकंडे आजमाने की जरुरत न पड़ती।
टाइगर मूवमेंट का हवाला, लेकिन चरवाहे बेखौफ
उल्लेखनीय है कि चार दिन पूर्व पत्रकार जब पहली बार कुड़रा जंगल के भ्रमण पहुंचे थे तो धरमपुर रेंजर वैभव सिंह चंदेल ने मैहावा बीट में टाइगर और तेंदुए के मूवमेंट का हवाला देकर पत्रकारों को वहां जाने से रोका था। उन्होंने सुझाव दिया था कि, खतरे को देखते हुए आपको वन अमले को साथ लेकर जाना चाहिए। लेकिन अभी कोई साथ नहीं जा सकता, आप लोग अगली बार जब आएं तो किसी को बोल दूंगा। शनिवार को पुनः कुड़रा पहुंचने से पूर्व रेंजर श्री चंदेल को सूचित किया तो उन्होंने स्टॉफ के गिद्ध गणना में व्यस्त होने का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए। वन अमले की असहजता-असहयोग से उपजीं तमाम शंकाओं के बीच पत्रकारों को भ्रमण के दौरान उसी क्षेत्र में कई चरवाहे भैंस चराते मिले। चरवाहों ने जंगल में टाइगर या लेपर्ड के विचरण को कोरी अफवाह बताया। चरवाहों ने बताया बाहरी लोगों को जंगल में आने से रोकने के लिए टाइगर-तेंदुए की मौजूदगी का भय फैलाया जाता है। यदि विभाग का दावा सही भी माना जाए, तो यह और गंभीर प्रश्न खड़ा करता है,जिस जंगल में टाइगर और तेंदुआ जैसे वन्यजीव मौजूद हों, वहां दिनदहाड़े सागौन की अवैध कटाई कैसे हो रही है? नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि कुड़रा जंगल में अवैध कटाई के साथ अवैध खनन और बेजुबान वन्यजीवों का शिकार भी जारी है। यदि यह सही है, तो यह वन संपदा और वन्यजीवों दोनों के लिए गंभीर खतरा है।