इन गांवों में 14 साल बाद भी नहीं मिटा उपेक्षा का अंधेरा

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योजनाओं के सिर्फ नाम बदले, विद्युतीकरण की कछुआ चाल नहीं बदली

लाईट न होने से बच्चों की पढ़ाई और खेती प्रभावित

पन्ना। रडार न्यूज प्रदेश में और केन्द्र में सरकार बदलने पर ग्रामीण विद्युतीकरण की महत्वकांक्षी योजना के नाम बदलने में सत्तासीनों ने रूचि दिखाई है लेकिन विद्युतीकरण को गति देने में इनकी जरा भी दिलचस्पी नहीं है। जनप्रतिनिधियों-नेताओं के दावों के उलट जमीनी हकीकत यह है कि पन्ना जिले के कई गांव आज भी विद्युत विहीन है। इन गांवों के वाशिंदे उपेक्षा के घोर अंधेरे में रहने को मजबूर है। परिणामस्वरूप ग्रामीणों का आज और उनकी भावी पीढ़ी का सुनहरा भविष्य अंधेरे की भेंट चढ़ते हुए चौपट हो रहा है। पन्ना जिले के अजयगढ़ विकासखण्ड अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खोरा के मजरा ग्राम छोटी बनकी एवं गलदहा इसका एक उदाहरण मात्र है। ग्राम पंचायत खोरा महज पांच किलोमीटर से कम की दूरी पर स्थित इन दोनों गांवों में पिछले 14 साल में बिजली नहीं पहुंच सकी। दोनों गावों के विद्युतीकरण का कार्य सिर्फ सर्वे तक ही सीमित होकर रह गया है। अंधेरे में रहने को विवश यहां के ग्रामीणों ने मंगलवार को पन्ना में कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचकर तत्परता से विद्युतीकरण कार्य कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि लाईट न होने के कारण वे अपनी फसलों की सही तरीके से सिंचाई नहीं कर पाते। इसलिए शासन की तमाम योजनाओं के बावजूद उनके लिए खेती आज भी घाटे का धंधा बनी हुई है। शाम ढ़लते ही उनके गांव अंधेरे में डूब जाने से बच्चों की पढ़ाई भी खासी प्रभावित हो रही है। कलेक्टर मनोज खत्री ने ग्रामीणों की समस्या को गंभीरतापूर्वक लेेेते हुए विद्युत विभाग के कार्यपालन यंत्री ओपी सोनी को सौभाग्य योजना अंतर्गत मजरा ग्राम छोटी बनकी एवं गलदहा का शीघ्रता से विद्युतीकरण कराने के निर्देश दिये है। अब देखना यह है कि अंधेरे में डूबे दोनों गांवों को बिजली से रोशन करने में और कितना वक्त लगता है।

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