न्याय की नीलामी! अजयगढ़ के राजस्व न्यायालयों में अधिकारियों की शह पर बिचौलियों का राज, कलेक्टर के आदेश भी बेअसर

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अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अजयगढ़ एवं तहसीलदार अजयगढ़ का संयुक्त कार्यालय भवन। (फाइल फोटो)
  • अशासकीय व्यक्ति राजस्व न्यायालयों में खुलेआम कर रहे लिपिकीय कार्य

  • अभिभाषक संघ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए अनाधिकृत व्यक्तियों को हटाने सौंपा ज्ञापन

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) न्याय के मंदिर कहे जाने वाले अदालती प्रांगण में यदि मुकदमों की फाइलें सरकारी कर्मचारियों के बजाय बाहरी दलालों की टेबल से होकर गुजरने लगें, तो व्यवस्था पर से आम जनता का विश्वास उठना स्वाभाविक है। पन्ना जिले के अजयगढ़ अनुभाग अंतर्गत राजस्व न्यायालयों और कार्यालयों से प्रशासनिक शुचिता को तार-तार कर देने वाला ऐसा ही एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां शासकीय पीठ पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की शह पर अनाधिकृत (अशासकीय) व्यक्तियों का समानांतर साम्राज्य चल रहा है। आलम यह है कि अजयगढ़ के राजस्व न्यायालयों में ‘दाम कराए काम’ की तर्ज पर दलाली का खेल धड़ल्ले से जारी है, जहां न्याय और विभागीय कार्यों की बाकायदा बोली लगाई जा रही है।

अभिभाषक संघ के नामजद ज्ञापन से पर्दाफाश

अजयगढ़ के राजस्व न्यायालयों में व्याप्त इस अराजकता और बाहरी दखलंदाजी के खिलाफ स्थानीय अभिभाषक संघ ने मोर्चा खोल दिया है। अभिभाषक संघ अजयगढ़ ने स्थानीय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को ज्ञापन सौंपकर राजस्व न्यायालयों में अनाधिकृत रूप से लिपिकीय कार्य व लिखा-पढ़ी कर रहे बाहरी व्यक्तियों को तत्काल हटाने और इस पूरी अवैध प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। अभिभाषक संघ ने अपने ज्ञापन में बकायदा न्यायालयवार नामजद उल्लेख करते हुए बताया है कि कौन-सा बाहरी व्यक्ति किस न्यायालय में गैर-कानूनी तरीके से काम संभाल रहा है-
  • एसडीएम न्यायालय (SDM Court): दीपक रैकवार एवं काशी केवट
  • तहसीलदार न्यायालय अजयगढ़: राजेश साहू
  • नायब तहसीलदार धरमपुर मण्डल: अनिल रजक एवं विनोद शिवहरे (कोटवार)
  • नायब तहसीलदार बीरा मण्डल: बेटा लोध एवं संतराम

वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची शिकायत

मामले की गंभीरता को देखते हुए अभिभाषक संघ अजयगढ़ ने ज्ञापन की प्रतियां आवश्यक कार्यवाही हेतु पन्ना कलेक्टर के अलावा मध्य प्रदेश शासन के सर्वोच्च प्रशासनिक तंत्र तक भेजी हैं। ज्ञापन की प्रतियां मुख्य सचिव मध्य प्रदेश शासन भोपाल, प्रमुख सचिव राजस्व विभाग भोपाल, संभागीय आयुक्त सागर संभाग तथा कलेक्टर जिला पन्ना को डाक के माध्यम से प्रेषित की गई हैं।

एकल खिड़की प्रणाली की तरह सक्रिय बिचौलिये

तराई अंचल में यह चर्चा अब आम हो चुकी है कि अजयगढ़ के राजस्व न्यायालयों में ‘न्याय की नीलामी’ का खेल इन्हीं बिचौलियों के इशारे पर हो रहा है। ये अनाधिकृत व्यक्ति किसी ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ (एकल खिड़की व्यवस्था) की तरह काम कर रहे हैं, जहां हर काम की दरें तय हैं। जब तक इन कथित दलालों के माध्यम से ‘सेटिंग’ नहीं हो जाती, तब तक साहब की टेबल से फाइल आगे नहीं खिसकती। बिना शासकीय नियुक्ति के इन बाहरी तत्वों द्वारा सरकारी फाइलों को छूना और लिखा-पढ़ी करना न केवल गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था पर सीधा प्रहार है।

कलेक्टर पन्ना का पत्र: व्यवस्था की नाकामी की स्वीकारोक्ति

पन्ना कलेक्टर ऊषा परमार द्वारा राजस्व न्यायालयों में अशासकीय व्यक्तियों से कार्य न कराने के संबंध जारी पत्र।
इस पूरे प्रकरण में पन्ना कलेक्टर ऊषा परमार का पत्र प्रशासनिक तंत्र पर सबसे बड़ा दस्तावेज बनकर सामने आया है। कलेक्टर ने 21 सितंबर 2026 को जिले के समस्त एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को पत्र जारी कर अजयगढ़ अभिभाषक संघ के ज्ञापन का स्पष्ट उल्लेख किया। कलेक्टर ने अपने आदेश में स्वीकार किया कि “इसके अतिरिक्त जिले के अन्य राजस्व न्यायालयों में भी अशासकीय व्यक्तियों द्वारा बिना वेतन के अनाधिकृत रूप से लिपिकीय कार्य कर लाभ प्राप्त करने की सूचनाएं यदा-कदा प्राप्त होती रहती हैं, जो कि सर्वथा अनुचित है।”
कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि इस पत्र के जारी होने के दिनांक से जिले के समस्त राजस्व न्यायालयों में केवल अधिकृत शासकीय कर्मचारी ही कार्य का संपादन करेंगे और वे अनिवार्य रूप से कार्यालयों में अपना आईडी कार्ड (ID Card) धारण करेंगे। इसके साथ ही जिला स्तर से एक पृथक निरीक्षण टीम का गठन किया जा रहा है, जो किसी भी समय किसी भी राजस्व न्यायालय का औचक निरीक्षण करेगी। यदि इस दौरान किसी भी शासकीय कर्मचारी के साथ कोई अशासकीय या अनाधिकृत व्यक्ति शासकीय कार्य करता हुआ पाया जाता है, तो संबंधित शासकीय कर्मचारी की दो वार्षिक वेतन वृद्धियां बिना किसी कारण बताओ नोटिस जारी किए ही असंचयी प्रभाव से रोक दी जाएंगी।

कलेक्टर के आदेशों की उड़ रही धज्जियां

पन्ना जिला मुख्यालय के पत्रकारों से सिंचाई परियोजना प्रभावितों के मुद्दे पर चर्चा करते अजयगढ़ एसडीएम आलोक मार्को एवं तहसीलदार सुरेंद्र कुमार अहिरवार। (फाइल फोटो)
कलेक्टर द्वारा दो वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने जैसी कठोर कार्रवाई की लिखित चेतावनी देने के एक माह बाद भी अजयगढ़ के राजस्व न्यायालयों के हालात में रत्ती भर भी बदलाव नहीं आया है। स्थानीय अधिवक्ताओं की तीखी आपत्ति और जिले की शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी (कलेक्टर) के स्पष्ट आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए आज भी उन्हीं अनाधिकृत व्यक्तियों से धड़ल्ले से काम कराया जा रहा है।
यह स्थिति अजयगढ़ के राजस्व अधिकारियों की घोर स्वेच्छाचारिता, मनमानी और प्रशासनिक बेलगाम रवैये को उजागर करती है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर अजयगढ़ के एसडीएम और तहसीलदारों को किसका संरक्षण प्राप्त है, जो वे पन्ना कलेक्टर के स्पष्ट और सख्त आदेशों की भी खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं? क्या इन बाहरी व्यक्तियों और बिचौलियों के माध्यम से फल-फूल रहे ‘दाम कराए काम’ के खेल में राजस्व अधिकारियों का भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हित जुड़ा हुआ है? जब जिले की सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी (कलेक्टर) की लिखित चेतावनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई के भय का भी अजयगढ़ के राजस्व अधिकारियों पर कोई असर नहीं हो रहा है, तो क्या जिला प्रशासन इन लापरवाह और मनमाने अधिकारियों पर सीधे निलंबन जैसी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने का साहस दिखाएगा?
स्थानीय अधिवक्ताओं और आम जनता ने मांग की है कि इस पूरे रिश्वतखोरी और अनाधिकृत दखल के नेटवर्क को तत्काल ध्वस्त किया जाए और दोषी राजस्व अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उल्लेखनीय है कि अभिभाषक संघ के आरोपों के संबंध में एसडीएम अजयगढ़ आलोक मार्को से विभाग का पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया लेकिन उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ।