मध्यप्रदेश: रिश्वतखोरी के मामले में नायब तहसीलदार और चौकीदार को 5-5 वर्ष का सश्रम कारावास

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जिला एवं सत्र न्यायालय पन्ना, मध्य प्रदेश। (फाइल फोटो)

*     लोकायुक्त ट्रैप कार्रवाई के मामले में विशेष न्यायालय पन्ना ने सुनाया फैसला

*     अवैध उत्खनन प्रकरण में जब्त ट्रैक्टर छोड़ने के एवज मांगी गई थी रिश्वत

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में घूसखोरी के एक चर्चित मामले में विशेष न्यायालय ने तत्कालीन नायब तहसीलदार एवं उसके सहयोगी को दोषी ठहराते हुए सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामला गुनौर तहसील में ट्रैक्टर छोड़ने के एवज में रिश्वत मांगने और लेने से जुड़ा था। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पन्ना श्री सुरेन्द्र मेश्राम की अदालत ने आरोपी तत्कालीन नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला तथा चौकीदार देवीदयाल दहायत को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विभिन्न धाराओं के तहत दोषसिद्ध पाते हुए 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।
अभियोजन के अनुसार गुनौर तहसील क्षेत्र के ग्राम सिली निवासी ब्रजबिहारी प्रजापति ने जनवरी 2020 में लोकायुक्त पुलिस सागर से शिकायत की थी कि उनका ट्रैक्टर कथित अवैध उत्खनन के मामले में जब्त कर थाना गुनौर में खड़ा कराया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ट्रैक्टर छोड़ने के बदले तत्कालीन नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला ने 40 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी, जो बाद में 35 हजार रुपये पर तय हुई। शिकायतकर्ता के अनुसार बातचीत के दौरान 10 हजार रुपये पहले ही ले लिए गए थे, जबकि शेष 25 हजार रुपये देने के लिए कहा गया था। लोकायुक्त द्वारा सत्यापन के बाद 25 जनवरी 2020 को जाल बिछाया गया। अभियोजन के मुताबिक आरोपी के शासकीय आवास पर शिकायतकर्ता द्वारा 25 हजार रुपये देने पर नायब तहसीलदार ने राशि अपने पास खड़े चौकीदार देवीदयाल दहायत को लेने के लिए कहा। इसके बाद लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए राशि बरामद की थी। मामले की विवेचना पूर्ण होने के बाद अभियुक्तों के विरुद्ध विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
विचारण के दौरान शासन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने पैरवी करते हुए साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर आरोपों को प्रमाणित किया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष के तर्कों से संतुष्ट होकर तत्कालीन नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 13(1)(बी) सहपठित धारा 13(2) के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास एवं 15 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
प्रतीकात्मक चित्र।
वहीं सहआरोपी देवीदयाल दहायत को धारा 13(1)(बी) सहपठित धारा 13(2) के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास एवं 15 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 12 के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। अभियोजन कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपियों को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। यह मामला लोकसेवकों द्वारा अवैध पारितोषिक की मांग एवं स्वीकार किए जाने से संबंधित था, जिसमें न्यायालय ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए दोषसिद्धि का निर्णय दिया।