अप्रैल का मानदेय अटका: बजट आवंटन के बाद भी भुगतान को तरस रहे अतिथि शिक्षक

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फाइल फोटो।

*     ज्ञापन सौंपकर बजट उपयोग की निष्पक्ष जांच की मांग

*     मानदेय भुगतान में देरी से बढ़ीं आर्थिक परेशानियां

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिले के अजयगढ़ विकासखंड के अतिथि शिक्षकों ने अप्रैल माह के मानदेय भुगतान में हो रही देरी को लेकर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है। अतिथि शिक्षक संघ ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अजयगढ़ को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच तथा लंबित मानदेय के शीघ्र भुगतान की मांग की है। संघ द्वारा सौंपे गए आवेदन के अनुसार लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल द्वारा 9 अप्रैल 2026 को अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान के लिए बजट आवंटित किया गया था। आवेदन में दावा किया गया है कि जिले के अन्य विकासखंडों में अप्रैल माह का मानदेय जारी हो चुका है, जबकि अजयगढ़ विकासखंड के अतिथि शिक्षकों को अब तक भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है।

बजट उपयोग को लेकर उठाए सवाल

अतिथि शिक्षक संघ का आरोप है कि अप्रैल माह के लिए उपलब्ध कराई गई राशि से पूर्ववर्ती महीनों का भुगतान किया गया, जिसके कारण अप्रैल माह का मानदेय लंबित रह गया। संघ ने फरवरी, मार्च और अप्रैल माह के बजट आवंटन तथा व्यय की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग की है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि समय पर मांग पत्र नहीं भेजा गया अथवा बजट प्रबंधन में किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई है तो इसकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। अतिथि शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के अनुसार अधिकारियों से चर्चा के दौरान उन्हें बताया गया कि वर्तमान में उपलब्ध राशि पूरे विकासखंड के अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान के लिए पर्याप्त नहीं है। साथ ही उच्च स्तर पर अतिरिक्त बजट की मांग भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है।

मामूली मानदेय पर निर्भर शिक्षकों के सामने आर्थिक संकट

अतिथि शिक्षक (Guest Teacher) लंबे समय से नियमित और समयबद्ध मानदेय भुगतान की समस्या उठाते रहे हैं। सीमित मानदेय पर सेवाएं दे रहे इन शिक्षकों के लिए भुगतान में देरी सीधे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है। बढ़ती महंगाई के बीच अधिकांश अतिथि शिक्षक अपने परिवार का भरण-पोषण इसी आय के सहारे करते हैं। ऐसे में मानदेय में एक-दो माह की देरी का अर्थ अक्सर किराना, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए उधार या कर्ज पर निर्भर होना होता है। शिक्षकों का कहना है कि समय पर भुगतान न होने से उन्हें बार-बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे व्यापक सवाल

यह मामला एक बार फिर प्रदेश में अतिथि शिक्षकों की स्थिति को लेकर बहस का विषय बन गया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षा और शिक्षकों के सम्मान को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अतिथि शिक्षकों को समय पर मानदेय तक उपलब्ध नहीं हो पाता। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि सरकारी स्कूलों और अतिथि शिक्षकों से जुड़ी समस्याएं वर्षों से बनी हुई हैं। वहीं सरकार शिक्षा क्षेत्र में सुधार और संसाधनों के विस्तार के दावे करती रही है। ऐसे में समय पर मानदेय भुगतान जैसे बुनियादी मुद्दे प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करते हैं।

जांच और भुगतान की मांग

अतिथि शिक्षक संघ अजयगढ़ के ब्लॉक अध्यक्ष संजय कुमार रैकवार सहित अतुल्य जैन, अश्विनी कुमार रैकवार, दीपक कुमार पाण्डेय, दिलीप यादव, दिनेश पाल एवं सुनील पाल ने संयुक्त रूप से प्रशासन से मांग की है कि फरवरी, मार्च एवं अप्रैल माह के बजट आवंटन और व्यय की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही लंबित अप्रैल माह के मानदेय का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि विकासखंड के अतिथि शिक्षकों को आर्थिक कठिनाइयों से राहत मिल सके। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी की जानी चाहिए।