पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघिन के साथ विचरण करते शावक। (फाइल फोटो)
* अज्ञात बोलेरो वाहन चालक ने शिकार की नियत से बाघिन को मारी ठोकर या फिर सड़क दुर्घटना
* सूचना मिलने के बाद भी मौके पर नहीं पहुंचे रेंजर, शावकों के भविष्य पर भी मंडराया संकट
* एक माह में दो बाघों की मौत और कोर एरिया में वृद्ध का शव मिलने के बाद अब घायल बाघिन का मामला चर्चा में
* कभी दुनिया के लिए मिसाल बना पन्ना, अब लापरवाही और मॉनिटरिंग फेल होने के लिए बदनाम
* बाघ पुनर्स्थापना की ऐतिहासिक सफलता पर खतरे के संकेत, मैदानी निगरानी पर उठ रहे तीखे सवाल
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) कभी बाघ पुनर्स्थापना की ऐतिहासिक सफलता के लिए दुनिया भर में चर्चा में रहा पन्ना टाइगर रिजर्व इन दिनों लगातार सामने आ रही घटनाओं के कारण गंभीर सवालों के घेरे में है। एक माह के भीतर दो बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, कोर एरिया में कई दिन पुराना अज्ञात वृद्ध का शव मिलने और अब अज्ञात बोलेरो वाहन चालक द्वारा कथित रूप से शिकार की नियत से मारी गई जानलेवा ठोकर में गंभीर रूप से घायल हुई बाघिन की घटना को दबाने के आरोपों ने पीटीआर की सुरक्षा एवं मॉनिटरिंग व्यवस्था की बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने रख दी है।
जिला मुख्यालय पन्ना के जगात चौकी क्षेत्र में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेंज का ऑफिस। (फाइल फोटो)
ताजा मामला पन्ना कोर क्षेत्र के राजाबरिया-अमझिरिया मार्ग का बताया जा रहा है। आरोप हैं कि 28 अप्रैल की रात एक तेज रफ्तार बोलेरो वाहन ने सड़क किनारे एक बाघिन (Tigress) को कथित रूप से शिकार की मंशा से सीधी ठोकर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाघिन सड़क किनारे पत्थरों के बीच जा गिरी और काफी देर तक घायल अवस्था में पड़ी रही। घटना की सूचना वन अमले द्वारा तुरंत वन परिक्षेत्राधिकारी पन्ना कोर अजीत जाट दी गई। लेकिन उन्होंने तत्परता से घेराबंदी कर वाहन को पकड़ने तथा घायल बाघिन को तत्काल आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने की प्रभावी कार्रवाई करना तो दूर मौके पर पहुंचना तक उचित नहीं समझा। रेंजर के निर्देश पर स्टॉफ ने मौके पर पहुंचकर घायल बाघिन को देखा। लेकिन जाट साहब अपने दायित्वों को तिलांजलि देते हुए सुबह मौके पर आने की बात कहकर सोने के लिए चले गए।
पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघिन के साथ विचरण करते शावक। (फाइल फोटो)
सूत्रों के मुताबिक अगले दिन घटनास्थल से वाहन के टूटे हिस्से, पत्थर की खखरी पर जख्मी बाघिन के बाल और आसपास अन्य साक्ष्य मिले थे, जिन्हें रेंजर के इशारे पर मौके से हटा दिया गया। प्रकरण को दबाने के लिए घटना की सूचना पन्ना टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी गई। न ही बाघिन को ढूंढने और उसका उपचार कराने के प्रयास किया गया। घटना की किसी को भनक न लगे इसलिए वन अपराध दर्ज करने और वाहन को पकड़ने की कार्रवाई भी जानबूझकर नहीं की गई। जबकि घटना स्थल से कुछ किलोमीटर की दूरी पर अमझिरिया टोल नाका स्थित है, जहां पर यदि वाहनों के निकलने का उस समय का रिकार्ड यदि चेक किया जाता तो अवश्य ही अज्ञात बोलेरो वाहन का रजिस्ट्रेशन एवं वाहन मालिक/चालक का पता लगाया जा सकता था। और वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9 के तहत शिकार के प्रकरण दर्ज कर कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए थी। लेकिन रेंजर ने पूरी घटना को अपने स्तर पर दबा दिया। बताया जा रहा है कि बाघिन बाद में लंगड़ाते हुए देखी गई। चिंता की बात यह भी है कि उक्त बाघिन के चार छोटे शावक बताए जा रहे हैं, जो पूरी तरह मां पर निर्भर हैं। यदि बाघिन को कुछ भी होता है तो उस पर आश्रित चार बाघ शावकों का जीवन भी संकट में पड़ जाएगा। विदित हो कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दो वनरक्षकों समेत 4-5 सुरक्षा श्रमिकों को थी जिससे रेंजर साहब का कारनामा उजागर हो गया।
लगातार घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
तारा ग्राम से रेस्क्यू किया गया युवा बाघ पन्ना टाइगर रिजर्व की अमानगंज बफर रेंज अंतर्गत रमपुरा इलाके में मृत मिला।
इस घटनाक्रम ने इसलिए भी गंभीरता बढ़ा दी है क्योंकि हाल के दिनों में पीटीआर में कई चिंताजनक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 5 मई को अमानगंज बफर क्षेत्र में एक दो वर्षीय नर बाघ संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिला था। यह वही बाघ था जिसे कुछ दिन पहले तारा गांव से रेस्क्यू कर रेडियो कॉलर पहनाकर कोर क्षेत्र में छोड़ा गया था। उससे पहले गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र में एक अन्य नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल सड़क किनारे जंगल में मिला था। अनुमान था कि उसकी मौत करीब दो सप्ताह पहले हो चुकी थी, लेकिन वन अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। बाद में एक ग्रामीण की सूचना पर मामला उजागर हुआ।
पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र अंतर्गत मुख्य मार्ग से महज 150 फिट दूर जंगल में नर बाघ का शव क्षत-विक्षत कंकाल की हालत में मिला था। (फाइल फोटो)
इन्हीं घटनाओं के बीच रेडियो कॉलरधारी बाघ की मौत के अगले दिन पन्ना कोर रेंज के राजाबरिया जंगल में एक वृद्ध का शव पेड़ पर फांसी के फंदे से लटका मिला। शव कई दिन पुराना बताया गया और उसमें कीड़े पड़ चुके थे। सवाल यह उठा कि कथित तौर पर कड़ी सुरक्षा वाले कोर क्षेत्र में कोई व्यक्ति कई किलोमीटर अंदर तक पहुंच गया और उसका शव चार दिन तक जंगल में लटका रहा, लेकिन निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी तक नहीं हुई।
शून्य से शिखर तक पहुंचा पन्ना
पन्ना टाइगर रिजर्व का इतिहास देश की सबसे बड़ी वन्यजीव संरक्षण उपलब्धियों में गिना जाता है। वर्ष 2009 में यहां बाघ पूरी तरह समाप्त हो गए थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने बाघ पुनर्स्थापना योजना लागू की। दूसरे अभयारण्यों से लाए गए बाघ-बाघिनों की कड़ी सुरक्षा, वैज्ञानिक मॉनिटरिंग और मैदानी अमले की मेहनत से पन्ना ने अभूतपूर्व वापसी की। कुछ वर्षों में यहां बाघों की संख्या शून्य से बढ़कर सौ के पार पहुंच गई और पन्ना दुनिया में सफल बाघ पुनर्स्थापना मॉडल के रूप में स्थापित हुआ। लेकिन अब हालिया घटनाओं, मौजूदा पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली को देखते हुए वन एवं वन्यजीवों पर मंडराता संकट लगातार बढ़ता हुआ नजर आ रहा है।
अब फिर उठने लगे पुराने सवाल
फाइल फोटो।
हालिया घटनाओं ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि कहीं वही पुरानी लापरवाहियां दोबारा तो नहीं लौट रहीं। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि सड़क हादसे में घायल बाघिन की सूचना मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई होती, तो स्थिति स्पष्ट हो सकती थी। अब जबकि मामला चर्चा में आया है, तब अंदरखाने हाथियों की मदद से बाघिन की तलाश और वाहन की पहचान के प्रयास शुरू किए गए हैं। हालांकि सवाल अब भी कायम हैं- यदि सूचना समय पर मिल गई थी तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई? क्या इतनी बड़ी घटना को छिपाने के आरोपों से घिरे रेंजर के विरुद्ध नियमनुसार कार्रवाई की जाएगी या फिर बाघ की मौत होने के मामले की तरह आरोप पत्र जारी कर जांच की आड़ में प्रकरण को रफा-दफा कर दिया जाएगा? लगातार सामने आ रही घटनाओं ने पीटीआर प्रबंधन की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और वास्तविक मॉनिटरिंग व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। वन्यजीव संरक्षण की जिस ऐतिहासिक सफलता पर कभी पूरा देश गर्व करता था लेकिन उसके भविष्य को लेकर अब नई चिंताएं सामने आने लगी हैं।
इनका कहना है-
“घटना की सूचना न देना अक्षम्य अपराध है, पन्ना कोर के रेंजर को आरोप पत्र जारी करके उनके विरुद्ध तत्परता से सख्त एक्शन लिया जाएगा। आपको जल्द ही इसकी जानकारी मिल जाएगी। घायल बाघिन को ढूंढने एवं आरोपी वाहन और चालक को पकड़ने के संबंध अभी कुछ जानकारी नहीं दे पाऊंगा।”
बृजेन्द्र श्रीवास्तव, क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।