शांति समिति की बैठक से पत्रकारों ने क्यों बनाई दूरी…?

0
1266
अजयगढ़ में आयोजित शांति समिति की बैठक में उपस्थित पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी, प्रशासनिक -पुलिस अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक।

* जिले में पिछले कुछ समय से मीडिया और पुलिस के लगातार बिगड़ रहे संबंध

पन्ना/अजयगढ़ (www.radarnews.in) अपराधों के प्रभावी नियंत्रण हेतु मीडिया और पुलिस के बीच बेहतर संबंध होना आवश्यक है। दोनों के परस्पर सामंजस्य व सहयोग से अपराध मुक्त समाज की परिकल्पना को काफी हद तक साकार किया जा सकता है। पन्ना जिले की बात करें तो यहाँ प्रेस और पुलिस के रिश्ते पिछले कुछ समय से लगातार खराब हो रहे हैं। बेशक इस मामले में हर बार पुलिस की गलती नहीं होती लेकिन अधिकांश प्रकरणों में पुलिस का व्यवहार मीडिया के साथ अनुचित और आपत्तिजनक रहा है। कुछ मामलों में यह बात सामने आई है कि कतिपय पुलिस अधिकारी अपनी कार्यप्रणाली की मीडिया में आलोचना होने पर अपनी कमियों पर गौर कर उन्हें दूर करने के बजाए बौखलाहट में पत्रकारों के साथ अभद्रता करते हैं। कई बार सोची-समझी रणनीति के तहत पत्रकारों के साथ अपराधियों जैसा सलूक करते हुए उन्हें खाकी वर्दी का रौब दिखाया जाता है। दुर्भाग्य से पन्ना में पुलिस और पत्रकारों के बीच तेजी से बिगड़ते संबंधों को लेकर पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी बेखबर हैं।
आज विकासखण्ड मुख्यालय अजयगढ़ में संपन्न हुई शान्ति समिति की बैठक में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। पुलिस अधीक्षक पन्ना मयंक अवस्थी की विशेष उपस्थिति में संपन्न हुई शांति समिति की बैठक का अजयगढ़ के पत्रकारों ने एकजुटता के साथ बहिष्कार किया। अपवाद स्वरूप एक-दो पत्रकार बैठक में शामिल हुए। अजयगढ़ के थाना परिसर में आयोजित हुई शांति समिति की बैठक में एसडीएम सुरेश गुप्ता, एडीशनल एसपी बीकेएस परिहार, एसडीओपी इसरार मंसूरी सहित प्रशासनिक-पुलिस अधिकारी-कर्मचारी, क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय लोग शामिल हुए। बैठक में अधिकाँश मीडियाकर्मियों की अनुपस्थिति लोगों के बीच चर्चा का विषय रही।दरअसल, पिछले दिनों अजयगढ़ के पत्रकार अमित जड़िया व थाना प्रभारी के बीच हुए विवाद के चलते स्थानीय पत्रकार इस बैठक से दूर रहे। मीडियाकर्मियों के द्वारा फिलहाल थाना अजयगढ़ की समस्त बैठकों व ख़बरों का भी अघोषित तौर पर बहिष्कार किया जा रहा है। बताते चलें कि विगत दिनों अजयगढ़ के थाना प्रभारी ने स्थानीय पत्रकार अमित जड़िया के साथ कथित तौर अभद्र व्यव्हार करते हुए झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी थी। अमित का आरोप है कि उसके साथ यह सब इसलिए किया गया क्योंकि वह कुछ समय से लगातार क्षेत्र में चल रही रेत की लूट में पुलिस की संलिप्तता होने तथा अवैध धंधों को संरक्षण दिए जाने की तथ्यपरक ख़बरें प्रकाशित कर रहा था। इससे नाराज होकर थाना प्रभारी के द्वारा उसे चुप कराने के लिए धमकाया गया। इस घटनाक्रम के संबंध स्थानीय पत्रकारों के द्वारा पन्ना कलेक्टर व एसपी को आवेदन दिया गया। लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही न होने से अजयगढ़ के अधिकांश पत्रकार नाराज है।
पत्रकारों का कहना है कि मीडिया की आवाज को दबाने के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता निराश करने वाली है। इस स्थिति में मीडियाकर्मी स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक तरीके से अपना काम कैसे कर पाएंगे। अजयगढ़ के पत्रकारों का कहना है कि यदि शीघ्र ही उनके आवेदन पत्र पर कार्रवाई नहीं की गई तो उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कठोर निर्णय लेने के लिए विवश होना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि अजयगढ़ के थाना के निरीक्षक डीके सिंह की गिनती कर्मठ पुलिस अधिकारियों में होती है। अपने अब तक के सेवाकाल में वे जहां भी रहे हैं आमतौर पर मीडिया के साथ उनके अच्छे संबंध रहे हैं। लेकिन अजयगढ़ में विवादित स्थिति क्यों बनीं इस पर दोनों पक्षों को गंभीरता से गौर करने की जरूरत है। यह बात सौ फीसदी सच है कि अजयगढ़ क्षेत्र में रेत का अवैध कारोबार पुलिस एवं राजस्व अधिकारियों के अघोषित संरक्षण में होता है। पर सभी पुलिसकर्मी रेत माफियाओं से सांठगांठ रखते हों ऐसा भी नहीं है। बहरहाल आगामी चुनौतियों के मद्देनजर वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को चाहिए कि इस प्रकरण को लेकर अजयगढ़ में मीडिया और पुलिस के बीच बने गतिरोध को दूर करने के लिए तत्परता से आवश्यक कदम उठाए जाएं।