प्राप्त जानकारी के अनुसार विजय लक्ष्मी बस सर्विस की बस क्रमाँक-MP-13-P-3611 रविवार 6 दिसम्बर की शाम को टीकमगढ़ जिले के ओरछा से चित्रकूट के लिए रवाना हुई थी। यह बस देर रात 3 बजे जब पन्ना के समीप स्मृति वन पहुँची तो अचानक इंजन से धुँआ निकलने लगा और देखते ही देखते आग भड़क उठी। चालक-परिचालक ने सजगता दिखाते हुए हादसे की आशंका पर तुरंत तीर्थ यात्रियों को नींद से जगाकर बस से बाहर निकाला। इस बीच मची अफरा-तफरी के चलते कई यात्री जलती हुई बस से जल्दी से जल्दी बाहर निकलकर जान बचाने के लिए खिड़कियों के शीशे तोड़कर कूद गए। राहगीरों की मदद से पुलिस को हादसे की सूचना दी गई। आनन-फानन मौके पर पहुंचे दमकल चालक उत्तम सुनकर व रामआसरे साहू, फायर मैन अमित सेन, रुपेश शर्मा ने भी कई यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की और फिर आग को काबू किया गया। हालांकि, बस तब तक पूरी तरह जल चुकी थी।
सोमवार देर रात हुए बस अग्निकांड ने तीन वर्ष पूर्व मड़ला घाटी में हुए हृदय विदारक भयावह हादसे की यादें ताजा कर दीं हैं। मई 2015 में मड़ला घाटी में चलती बस में आग लगने के बाद वह पुलिया के नीचे गिर गई थी। लाछागृह बनी बस में सवार रहे 22 यात्री जिंदा जलकर असमय काल-कवलित हो गए थे। इस हादसे में भी तीर्थ यात्रियों के बचने की उम्मीद नहीं थी। क्योंकि, तीर्थ यात्री बस में खाना पकाने के लिए 7 गैस सिलेंडर, बड़ी मात्रा में कैरोसीन, खाने का तेल आदि सामग्री रखे हुए थे। बस में जब आग लगी तो चालक-परिचालक ने सजगता और सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत सभी यात्रियों को नींद से जगाकर बाल-बाल बचा लिया। वहीं दमकल कर्मियों ने समय रहते जलती हुई बस से गैस सिलेंडर बाहर निकाल लिए जिससे उनमें ब्लास्ट नहीं हो सका। भीषण बस अग्निकांड में मौत के भयावह मंजर को करीब से देखने वाले तीर्थयात्री कोई जनहानि न होने को ईश्वरीय चमत्कार बता रहे हैं।