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विरोध-प्रदर्शन : अफसरों के मनमाने फरमान से आक्रोशित महिलाओं ने सड़क पर उतरकर किया चक्काजाम

* पन्ना के साप्ताहिक रविवारीय बाजार प्रांगण का मामला

* प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को जमकर सुनाई खरी-खोटी

* करीब आधा घण्टे बाद चक्काजाम समाप्त होने पर बहाल हुआ यातायात

* प्रशासन की अदूरदर्शिता और अव्यवहारिक निर्णयों से बनीं टकराव की स्थिति

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) जिला मुख्यालय पन्ना में स्थित पहाड़कोठी के इलाके में रहने वाले बड़े प्रशासनिक अफसरों और सर्किट हाऊस में आने वाले अतिथियों को रविवार के दिन आवागमन में ज़रा भी असुविधा ना हो इसके लिए साप्ताहिक बाजार में दुकानदारों की बैठक व्यवस्था को लेकर पिछले कई माह से लगातार प्रयोग किए जा रहे हैं। इससे प्रभावित और अपमानित महसूस कर रहे दुकानदारों का धैर्य आज सुबह जवाब दे गया। सड़क किनारे लगीं दुकानों को नगर पालिका कर्मचारियों एवं यातायात पुलिस कर्मियों के द्वारा अव्यवस्थित किए जाने से नाराज दुकानदार भड़क ऊठे और छत्रसाल पार्क के सामने चक्काजाम कर दिया।
इस विरोध-प्रदर्शन की अगुवाई महिला दुकानदारों ने की। साप्तहिक बाजार में साग-सब्जी व मनिहारी इत्यादि बेंचकर अपना गुजारा करने वाली महिलायें प्रशासनिक प्रताड़ना के विरोध स्वरूप सामूहिक रूप से सड़क पर बैठ गईं। जिससे छत्रसाल पार्क के सामने वाहनों आवागमन पूरी तरह थम गया। कुछ ही देर में वहाँ तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो गई। चक्काजाम के चलते सड़क के दोनों तरफ वाहनों की भीड़ लग गई। रविवार 2 फ़रवरी को दुकानदारों और प्रशासन के बीच सीधे टकराव की यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति सड़क के दोनों किनारों पर लगने वालीं दुकानों को धरमसागर तालाब की तरफ स्थानान्तरित किए जाने से निर्मित हुई।
साप्ताहिक रविवारीय बाजार की बैठक व्यवस्था में यह बदलाव करने के पूर्व दुकानदारों से चर्चा कर उन्हें भरोसे में नहीं लिया गया। साथ ही इस बदलाव पर अमल कराने का दायित्व नगर पालिका परिषद् पन्ना एवं पुलिस के जिन कर्मचारियों को सौंपा गया उनके द्वारा कथित तौर दुकानदारों के साथ काफी अभद्रता पूर्ण व्यवहार किया गया। आज सुबह से ही नगरपालिका के कर्मचारी दुकानों की शिफ्टिंग को लेकर लाउड स्पीकर से जिस तरह रौब भरे अंदाज में अनाउन्समेंट कर रहे थे उसने दुकानदारों के गुस्से को भड़काने में आग में घी का काम किया। परिणामस्वरूप छोटे-गरीब दुकानदार इसे अफसरों की हनक को पूरा करने वाले तुगलकी फरमान के रूप में लेकर विरोध में उतर आए।
करीब आधा घण्टे तक चला यह गतिरोध बमुश्किल तब कहीं जाकर दूर हुआ जब जिला प्रशासन के प्रतिनिधियों ने मौके की नजाकत को देखकर दुकानों को स्थानांतरित करने का फैसला वापस ले लिया। पन्ना की प्रभारी तहसीलदार दीपा चतुर्वेदी एवं कोतवाली थाना पन्ना के निरीक्षक हरी सिंह ठाकुर ने प्रदर्शनकारी दुकानदारों के बीच पहुंचकर उनसे बात की। दोनों अधिकारीयों की समझाइश और मान-मनौव्वल के बाद महिला दुकानदारों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया। तब कहीं जाकर वाहनों का आवगमन और मौके की स्थिति सामान्य हो सकी।

क्यों बने टकराव के हालात

एक दुकानदार ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर इस सवाल का जबाब देते हुए जो कुछ कहा, वह गौर करने लायक है। युवा सब्जी व्यापारी ने इशारों-इशारों में जिले के शीर्ष प्रशासनिक अफसरों के अव्यवहारिक निर्णयों की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि पहाड़ पर रहने वाले अधिकारियों को जमीन के वाशिंदों की तकलीफ से कोई सरोकार नहीं है। वे तो सिर्फ अपनी सुविधा देखते हैं। पिछले कुछ माह से हम दुकानदारों को लगातार परेशान किया जा रहा है, सड़क किनारे चूने की लाइन डालकर दुकानें लगाने से रोका जा रहा है। कई बार तो हमारी लगी हुई दुकान को ही हटवा दिया जाता है। पहले कभी हमें इतना परेशान नहीं किया गया। युवा सब्जी व्यापारी का कहना है कि, पन्ना का साप्तहिक बाजार इस स्थान पर कई दशकों से लग रहा है। यह शहर के बीचों-बीच स्थित होने से बाजार आने-जाने लोगों के लिए यह सुविधाजनक है। बस स्टैण्ड भी नजदीक है जिससे दुकानदारों और ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोगों को भी किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होती। यह बात अलग है कि रविवार के दिन कोतवाली चौराहा से पहाड़कोठी एवं मनहर महिला समिति विद्यालय की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग के दोनों किनारों पर दुकानें लगने से चार पहिया वाहन से आने-जाने वालों को थोड़ी असुविधा होती है।

नपा के कारण फ़ैल रही अव्यवस्था

चाट विक्रेता चंदू का मानना है यह समस्या नगरपालिका की अदूरदर्शिता की वजह से थोड़ी जटिल हुई है। दरअसल, नगरपालिका परिषद् ने छत्रसाल पार्क के सामने स्थित नाला के ऊपर लोहे के पाइप का जाल रखकर उसे प्लास्टिक सीटों से ढँक दिया है। करीब 4-5 फिट ऊँचे इस जाल से नाला तो ढँक गया लेकिन पार्क की सुंदरता पर भी ग्रहण लग गया। इसके पार्क की तरफ पटरी संकीर्ण हो गई है। चंदू कहते हैं, इस अनुपयोगी काम में नगर पालिका ने जितने रुपए खर्चे है उससे यदि नाला पर स्लैब डाल जाता जैसा कि कुछ जगह पूर्व से डला है तो पार्क भी बाहर से न ढँकता और वहां आने जाने वालों को वाहन पार्किंग के लिए दोनों तरफ पर्याप्त स्थान भी मिल जाता। इसका दूसरा लाभ यह होता कि रविवार के दिन जो दुकानें सड़क किनारे लगती हैं वे नाला के ऊपर फर्शीकरण पर बड़े आराम से लगतीं और आवागमन भी बाधित नहीं होता।

इन उपायों पर भी हो विचार

थोक फल-सब्जी विक्रेता शक़ील खान का कहना साप्ताहिक रविवारीय बाजार को अनावश्यक स्थानांतरित करने की जिद छोड़कर प्रशासन को व्यवस्था बनाने के लिए जनहित में खुले दिमाग से अन्य उपायों पर भी गंभीरता पूर्वक विचार करने की जरुरत है। आपने सुझाव देते हुए बताया कि पार्क के सामने वाले नाले के शेष भाग में स्लैब डालने के साथ-साथ रविवार को बाजार प्रांगण में दोपहिया-चार पहिया वाहनों के आवागमन पर पूर्णतः रोक होनी चाहिए। सिर्फ सर्किट हॉउस एवं पहाड़कोठी आने-जाने वालों को इसमें छूट दी जाए। ग्राहक अपने वाहन लेकर बाजार के अंदर प्रवेश न करें इसके लिए कोतवाली थाना परिसर एवं मनहर महिला समिति विद्यालय में वाहनों की पार्किंग की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। बाजार के दोनों तरफ पार्किंग की व्यवस्था होने से वाहनों की धमाचौकड़ी समाप्त हो जाएगी। जिससे पहाड़कोठी के लिए आवागमन में कोई असुविधा नहीं होगी। उल्लेखनीय है कि जब इस संबंध में जिला प्रशासन का पक्ष जानने के लिए पन्ना की प्रभारी तहसीलदार दीपा चतुर्वेदी से मोबाइल फोन सम्पर्क करने का प्रयास किया गया तो कई बार घण्टी बजने के बाद भी उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। वहीं नगर पालिका परिषद् पन्ना के सीएमओ ओ.पी. दुबे का मोबाइल फोन बंद होने के कारण उनसे बात नहीं हो सकी।
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