पन्ना में खाकी फिर सवालों के घेरे में: निर्दोष को झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर 20 हजार ऐंठने का आरोप; सवाल पूछने पर कट गया एसपी का फोन

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पुलिस अधीक्षक कार्यालय पन्ना। (फाइल फोटो)
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र में एक नागरिक को अवैध रूप से हिरासत में रखने, एनडीपीएस (कोरेक्स) जैसे संगीन मामलों में फंसाने की धमकी देने और रुपयों की उगाही करने का मामला सामने आया है। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है। चौंकाने वाली बात यह है कि जब इस गंभीर मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए पन्ना एसपी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने आरोपों पर बात करने के बजाय फोन काट दिया।

क्या है पूरा मामला?

पन्ना में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर पत्रकारों को अपनी शिकायत की जानकारी देते हुए पीड़ित युवक राजा शुक्ला।
पीड़ित राजा शुक्ला उर्फ शैलेंद्र कुमार शुक्ला (उम्र 42 वर्ष, निवासी बड़वारा) के अनुसार, बीते 15 सितंबर की शाम करीब 6 बजे वे मकरी कुठार से अपने घर लौट रहे थे। पन्ना-सतना मार्ग पर पुलिस ने उन्हें रोककर जुआ खेलने का आरोप लगाया और देवेन्द्रनगर थाने ले आई। पीड़ित का आरोप है कि रात 11 बजे तक उन्हें थाने में बैठाकर रखा गया और एनडीपीएस एक्ट में फंसाकर जिंदगी बर्बाद करने की धमकी दी गई। शिकायत के मुताबिक, शुरुआत में बड़ी रकम मांगी गई, लेकिन अंततः थाने के एक पुलिसकर्मी लक्ष्मी यादव द्वारा कथित रूप से 20 हजार रुपये लेने के बाद ही उन्हें रिहा किया गया।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि उस दौरान कुल 8 लोगों को लाया गया था, जिनमें से 7 पर कार्रवाई हुई, जबकि मुख्य जुआ संचालित करने वाले एक व्यक्ति को राजनीतिक सिफारिश या पैसे के लेन-देन के बाद छोड़ दिया गया। पीड़ित ने थाने के सीसीटीवी फुटेज की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

पन्ना पुलिस पर पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप

पन्ना जिले में फर्जी केस में फंसाने या वसूली के आरोप का यह पहला मामला नहीं है- मड़ला थाना मामला: तत्कालीन थाना प्रभारी उप निरीक्षक रचना पटेल और उनके अमले पर वाहन चेकिंग के दौरान गांजा रखकर वसूली करने के आरोप विभागीय जांच में सिद्ध हुए थे, जिसके बाद एसपी के आदेश पर ही मड़ला थाने में संबधितों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई थी।
अमानगंज थाना मामला: पन्ना निवासी नरेंद्र खरे पर दर्ज SC-ST एक्ट का मामला जांच में फर्जी पाया गया था, जिसके बाद तत्कालीन संवेदनशील पुलिस अधीक्षक साईं थोटा के निर्देश पर पुलिस ने खात्मा लगाने की कार्रवाई शुरू की थी।

जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष

फाइल फोटो।
थाना प्रभारी का दावा: आरोप निराधार और दबाव बनाने की साजिश-  मामले में देवेन्द्रनगर थाना प्रभारी संदीप यादव का कहना है- “राजा उर्फ शैलेंद्र कुमार शुक्ला के विरुद्ध थाने में जुआ एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज है। पकड़े गए अन्य जुआरियों ने भी साथ में जुआ खेलने का जुर्म स्वीकार किया है। जुआ फड़ पर कार्रवाई का वीडियो बनाया जाता है, जो साक्ष्य के रूप में उपलब्ध है। जिस व्यक्ति पर कार्रवाई न करने का आरोप है, वह पुलिस का मुखबिर था। राजा की गतिविधियां संदिग्ध हैं और वह पुलिस पर दबाव बनाने के लिए असत्य, निराधार और मनगढ़ंत आरोप लगा रहा है।”
निष्पक्षता का सवाल: आरोपों पर जवाब देने के बजाय एसपी ने टला सवाल
पुलिस अधीक्षक कार्यालय पन्ना में दिए गए आवेदन पत्र की पावती।
इस पूरे संवेदनशील मामले, पीड़ित की शिकायत और की घटनाओं का हवाला देते हुए जब जिले की पुलिस प्रमुख एसपी निवेदिता नायडू से संपर्क कर विभाग का पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने शिकायत के बिंदुओं पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया। मोबाइल पर हुई बातचीत के दौरान एसपी ने केवल इतना कहा–
“आप अगर विस्तृत जानकारी चाहते हैं तो कार्यालय आकर मुझसे समक्ष में बात करें। मोबाइल पर बात करके रिकॉर्डिंग न करें। आपके मोबाइल से जिस तरह की आवाज आ रही है उससे स्पष्ट है, आप मेरी बात रिकॉर्ड कर रहे हैं… किसी को सुनाने के लिए।”
इतना कहने के बाद, पीड़ित द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों और थाने में हुई कथित वसूली के संबंध में कोई आधिकारिक वक्तव्य दिए बिना ही उन्होंने कॉल समाप्त कर दिया।