फर्जीवाड़ा | मृत लोगों के शौंचालय बनवाये, दूसरे की फोटो लगाई, तीसरे के खाते में राशि डाली

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फाइल फोटो।

पन्ना जिले की पवई जनपद अंतर्गत गूढ़ा ग्राम पंचायत का मामला

स्वच्छ एमपी अभियान को पलीता लगा रही भ्रष्टाचार की गंदगी

पन्ना/मोहन्द्रा। रडार न्यूज  व्यक्तिगत शौंचालयों का निर्माण कराकर गावों को खुले में शौंच से मुक्त कर उन्हें हर-हाल में ओडीएफ घोषित कराने की उपलब्धि हांसिल करने के प्रशासनिक टॉरगेट ने इस महत्कांक्षी अभियान को अनियमितताओं की गंदगी से पाट कर रख दिया है। केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता वाले स्वच्छ भारत अभियान के क्रियान्वयन में पन्ना जिले में लगातार व्यापक पैमाने पर गंभीर अनियमिततायें आरहीं हैं।जिम्मेदार अधिकारी इन गड़बड़ियों को जानबूझकर नजरअंदाज करते हुए किसी तरह अपने नंबर बढ़ाने के लिए ओडीएफ का कागजी तमगा हांसिल करने की जुगत भिड़ाने में जुटे हैं। जमीनी हकीकत की अनदेखी कर गावों को अगर ओडीएफ घोषित कर भी दिया गया तो क्या वे वाकई खुले में शौंच से पूर्णतः मुक्त हो पायेंगे? यह एक बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल है। पन्ना जिले में शौंचालय निर्माण की अनियमितताओं पर गौर करें तो यहां की पवई जनपद पंचायत अंतर्गत गूढ़ा ग्राम पंचायत का मामला इन दिनों सुर्ख़ियों में है। यहां कई वर्ष पूर्व मर चुके व्यक्तियों के नाम पर शौंचालय का निर्माण करवाया गया। मृत व्यक्तियों के नाम से बने इन शौंचालयों में गांव के दूसरे व्यक्तियों को खड़ा कर फोटो खिंचवाई गई और फिर किसी तीसरे व्यक्ति के खाते में शौंचालयों की राशि डालकर उसका आहरण किया गया। कथित तौर पर गूढ़ा ग्राम पंचायत के सहायक सचिव द्वारा की गई इस अनियमितता की शिकायत ग्रामीणों ने करीब एक माह पूर्व 9 जुलाई 2018 को जनसुनवाई में पन्ना के कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और पवई एसडीएम से की थी। इस मामले अब तक क्या कार्यवाही की गई, इसकी जानकारी शिकायतकर्ताओं को नहीं दी जा रही है। उधर जनपद पंचायत पवई के सीईओ इस गड़बड़ी के संज्ञान में आने के बाद भी मामले से अनभिज्ञ होने का अभिनय कर रहे हैं।

क्या है मामला           केस क्रमांक-1:-

मृतक तांतू तनय सुलईयां रैकवार के शौंचालय के सामने फोटो में नजर आता कुंजी चौधरी।

ग्राम पंचायत गूढ़ा के तांतू तनय सुलईयां रैकवार की मृत्यु पांच वर्ष पूर्व सितंबर 2013 में हो गई थी। तांतू की समग्र आईडी क्रमांक 35000181 पर उसके नाम से शौंचालय बनवाया गया। मजेदार बात यह है कि तांतू के शौंचालय के सामने गांव के ही कुंजी चौधरी को खड़ा कराकर सत्यापन के लिए उसकी फोटो उतारी गई और खाता क्रमांक- 30716336582 पर शौंचालय निर्माण की राशि 12000 रुपये दिनांक 4 मार्च 2017 को जारी की गई। उल्लेखनीय है कि गांव में अब तांतू के परिवार का कोई सदस्य भी जिंदा नहीं है। पंचायत ने फिर शौंचालय किसका बनया यह जांच का विषय है।

केस क्रमांक-2 :-

मृतिका तुलसियांबाई के नाम स्वीकृत शौंचालय के सामने फोटो खड़ी द्रोपती पति निंदू ढीमर।

तुलसियां पिता मंजू ढीमर की मृत्यु नवंबर 2012 में हो गई थी। उसकी समग्र आईडी क्रमांक 35000009 पर शौंचालय स्वीकृत कर बनवाया गया। फोटो खिंचवाने के लिये गांव की द्रोपती पति निंदू ढीमर को शौंचालय के सामने खड़ा कराया गया। जबकि किसी तीसरे व्यक्ति के खाता क्रमांक- 3466723586 में 4 मार्च 2017 को शौंचालय निर्माण की राशि जारी की गई। अर्थात मृत व्यक्ति तुलसियां पिता मंजू ढीमर के नाम पर फर्जीवाड़ा करने के लिए दो अन्य लोगों की इस्तेमाल किया गया। यहां गौर करने बाली बात ये है कि 6 वर्ष मर चुकी महिला का न तो पति था न कोई संतान। फिर भी उसके नाम पर फर्जी शौंचालय बनवाकर राशि का बंदरबांट किया गया।

केस क्रमांक-3 :-

मृतक किशोर पिता मरुआ चौधरी की जगह पुसऊआ पिता घमंडी चौधरी की फोटो अपलोड है।

किशोर पिता मरुआ चौधरी की मृत्यु जुलाई 2015 में हो गई थी। पर उसकी समग्र आईडी क्रमांक 34998937 पर रोजगार फर्जी तरीके से व्यक्तिगत शौंचालय स्वीकृत किया गया। जबकि शौंचालय के सामने जिस व्यक्ति को खड़ाकर फोटो उतारी गई वह गांव का ही पुसऊआ पिता घमंडी चौधरी है। किशोरा चौधरी के शौंचालय की राशि किसी अन्य के खाता क्रमांक- 30716336752 पर 24 अप्रैल 2017 को जारी की गई। बताते चलें कि किशोरा के परिजन जीवित हैं लेकिन उनके बैंक खाते में राशि ट्रांसफर नहीं की गई। इस खुलासे के बाद से मृतक के परिजन हैरान हैं। मृतक किशोरा के नाम की राशि उसके आश्रितों के बजाय किसी अन्य व्यक्ति खाते जारी कराने से साफ जाहिर है कि यह सब बड़े ही सुनियोजित तरीके से गबन की मंशा से किया गया है।

केस क्रमांक- 4 :-

मृतक धुक्का पिता गयादीन राय के स्थान पर उसके पुत्र रामप्रकाश को खड़ा कर फोटो खिंचवाई गई।

इसी तरह धुक्का पिता गयादीन राय की मृत्यु 19 नवंबर 2016 को हो गई थी। उसके शौंचालय के सामने उसके पुत्र रामप्रकाश को खड़ा कर फोटो खिंचवाई गई। मालूम हो कि रामप्रकाश राय का बैंक में खाता ही नहीं है। उसके पिता के शौंचालय निर्माण की राशि 12000 रुपये का भुगतान अन्य परिजनों के नाम पर ना करके अन्य किसी के बैंक खाता क्रमांक- 31745313788 में दिनांक 1 अप्रैल 2017 को जारी की गई। मृतक धुक्का के नाम पर शौंचालय निर्माण की राशि किसी अन्य व्यक्ति को जारी होने के खुलासे के बाद से उसके परिजन उक्त राशि प्राप्त करने के लिए ग्राम पंचायत के नुमाइंदों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन अपने कारनामों को छिपाने के लिए उन्हें गोलमोल जबाब दिए जा रहे हैं।

इसलिए नहीं होती कार्यवाही

शौंचालय निर्माण में फर्जीवाड़े को उजागर कर उसकी शिकायत करने वाले ग्रामीण इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की उपेक्षा के चलते परेशान हैं। इनका आरोप है कि फर्जी समग्र आईडी से लेकर कागजों पर शौंचालय बनवाने तक कई स्तर पर हुए घपले को दबाने के लिए अफसर शिकायत पर कार्यवाही नहीं कर रहे हैं। दरअसल पन्ना में पंचायतों व्याप्त अथाह भ्रष्टाचार को लेकर यह आम धारणा है कि विकास कार्यों की राशि जारी होने पर जनपदों में लगने वाले 20-25 प्रतिशत कमीशन के चलते यहां भ्रष्टाचार की जानबूझकर अनदेखी की जाती है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों या फिर किसी अन्य अवसरों पर वरिष्ठ अधिकारियों के अघोषित निर्देशों पर ग्राम पंचायतों से जो भीड़ लाई जाती है उसका कोई बजट तो पृथक से होता नहीं है, इसलिए उक्त अतिरिक्त खर्चों की पूर्ती के लिए जनपद से लेकर जिला पंचायत और प्रशासनिक अधिकारियों ने इन्हें मनमानी करने की खुली छूट दे रखी है। शिकवा-शिकायत होने पर जांच की आड़ में भी पंचायतों के नुमाइंदों से आमतौर पर वसूली ही होती है। भ्रष्टाचार को लेकर बनी इस मूक सहमति के कारण जीरो-टॉलरेंस के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। आमजन को सुनवाई की झूठी तसल्ली देने के लिए यहां जनसुनवाई हर सप्ताह की जाती है, जिसमें आने वाले 95 फीसदी आवेदनों को एक प्रतिवेदन लगाकर नस्तीबद्ध कर दिया जाता है। इन हालत क्या ग्राम पंचायत गूढ़ा के फर्जीवाड़े पर कार्यवाही होगी, अगर होगी तो कब तक? कहना मुश्किल पर समझना आसान है।

इनका कहना है

आपने जनपद सीईओ सर से शौंचालय निर्माण की शिकायत के संबंध चर्चा की थी, इसलिए मिलने आया हूं। मैनें जानबूझकर कोई गड़बड़ी नहीं की है, जिनके खातों में राशि जारी की गई है वे मृतकों के परिजन हैं। कतिपय लोग जानबूझकर झूठी शिकायत कर मुझे बदनाम और परेशान कर रहे हैं।” 

                     जेपी चनपुरिया, जीआरएस ग्राम पंचायत गूढ़ा।

पूर्व की शिकायत कहां गई आप इसमें ना पड़ें, मैं जो कह रहा हूं उसे सुनें ग्रामीणों से पुनः शिकायत करवा दें, क्या मामला है मैं उसे देख लूंगा, आप परेशान ना हों।

                       सतीष सिंह नागवंशी, सीईओ जपं पवई।

मुझे शिकायत का तो याद नहीं है लेकिन आपके द्वारा दी गई इस महत्वपूर्ण जानकारी की जांच कराई जाएगी, उसमें यदि किसी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।

                                                गिरीश मिश्रा, सीईओ जिपं पन्ना।