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बड़ी खबर : टीएमसी नेत्री महुआ मोइत्रा “कैश-फॉर-क्वेरी” मामले में लोकसभा से निष्कासित

*     लोकसभा में एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट पेश होने पर लिया गया फैसला

*     महुआ बोलीं- ‘मोदी सरकार ऐसा कर के मेरा मुंह नहीं बंद करा सकती’

*     इस कंगारू कोर्ट में जो कुछ हुआ, वो बताता है कि अदानी को बचाने के लिए क्या कुछ कर सकती है मोदी सरकार

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस नेत्री महुआ मोइत्रा को शुक्रवार को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया। उनके विरुद्ध लोकसभा में पेश एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट यह निर्णय लिया गया। लोकसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान आज जमकर हंगामा हुआ। एथिक्स कमेटी (संसदीय आचार समिति) की रिपोर्ट पेश होने के बाद सदन को दो बार स्थगित करना पड़ा। पहले 12 बजे तक के लिए और फिर दो बजे तक के लिए। विपक्षी दलों के सांसदों ने एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट से जुड़ीं चिताओं को दूर करने की मांग की थी। उनका कहना था कि रिपोर्ट में अनेक खामियां हैं। संसद की कार्यवाही को लेकर भी सवाल उठाए गए। कहा गया कि 104 पृष्ठ की रिपोर्ट को आज 12 बजे पेश किया गया, दो बजे से इस पर चर्चा शुरू हुई एक घण्टे में ही निष्कासन हो गया। इतने कम समय में सांसद रिपोर्ट को कैसे पढ़ पाएंगे और क्या चर्चा हो पाएगी? यह भी सवाल उठ रहा है कि महुआ को खुद पर लगे आरोपों पर सफाई का मौक़ा भी क्यों नहीं दिया गया। संसद में रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ‘जैसा कि अधीर रंजन ने कहा अगर हमने इस रिपोर्ट का संज्ञान लेने के लिए 3-4 दिन का समय दिया होता और फिर सदन के सामने अपनी राय रखी होती तो आसमान नहीं टूट जाता क्योंकि सदन एक बेहद संवेदनशील मामले पर फैसला लेने जा रहा है।’
इस कार्रवाई के बाद संसद के बाहर निकल कर महुआ मोइत्रा ने पत्रकारों से बात की और इस पूरे मामले पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि ‘मोदी सरकार ऐसा कर के मेरा मुंह नहीं बंद करा सकती।’ महुआ ने कहा कि एथिक्स कमेटी के पास निष्कासित करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके पास न तो किसी भी नकदी और न ही किसी गिफ्ट का कोई सबूत है। उन्होंने कहा कि जब नाश मनुज पर छाता है तो पहले विवेक मर जाता है।
उल्लेखनीय है कि, कैश-फॉर-क्वेरी (पैसे लेकर सवाल पूंछने) के आरोपों के आरोपों की जांच करने वाली एथिक्स कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित करने का सुझाव दिया था। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि कमेटी की सिफ़ारिश से सदन सहमत है। इस रिपोर्ट पर बहस कराए जाने और महुआ मोइत्रा को लोकसभा में अपनी बात रखने का अवसर देने की मांग को लोकसभा स्पीकर ने ये कहते हुए अस्वीकार दिया कि उन्हें पैनल की बैठक के दौरान अपना पक्ष रखने का मौका मिल चुका है। इसके पूर्व दोपहर बाद एथिक्स कमेटी के चेयरमैन विनोद कुमार सोनकर ने जैसे ही रिपोर्ट पेश की कांग्रेस और टीएमसी के लोकसभा सदस्य अध्यक्ष के आसन के करीब पहुंच गए और नारे लगाते हुए रिपोर्ट की प्रति दिए जाने की मांग करने लगे।
तृणमूल कांग्रेस के सदस्य कल्याण बनर्जी ने रिपोर्ट की सिफ़ारिश पर वोटिंग से पहले बहस कराए जाने की मांग उठाई। कमेटी ने मोइत्रा को सदन से निष्कासित करने की सिफ़ारिश की थी। हंगामे के बीच अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे बीजेपी सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने सदन की कार्रवाई को दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इस बीच लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिख कर अपील की थी कि सदन में रिपोर्ट पर बहस के लिए सदस्यों को तीन चार दिन का समय दिया जाना चाहिए ताकि वे इसका अध्ययन कर सकें। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, ‘जैसा कि अधीर रंजन ने कहा अगर हमें इस रिपोर्ट का संज्ञान लेने के लिए 3-4 दिन का समय दिया होता और फिर सदन के सामने अपनी राय रखी होती तो आसमान नहीं टूट जाता क्योंकि सदन एक बेहद संवेदनशील मामले पर फैसला लेने जा रहा है।’

निष्कासन की सिफारिश राजनीतिक प्रतिशोध

तृणमूल कांग्रेस नेत्री महुआ मोइत्रा।
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने सांसद महुआ मोइत्रा को निष्कासित करने की एथिक्स कमेटी की सिफारिश को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए दावा किया कि इसका उद्देश्य उन्हें अडानी समूह के खिलाफ मुद्दे उठाने से रोकना है। पीटीआई के अनुसार बंदोपाध्याय ने अध्यक्ष से कहा कि महुआ को सदन में अपना भाषण देने के लिए समय दिया जाना चाहिए, जिस पर स्पीकर ओम बिरला ने जवाब दिया था कि मामले पर चर्चा के लिए आधे घंटे का समय दिया जाएगा। बंदोपाध्याय ने पूछा कि जिस सांसद ने आरोप लगाया था कि मोइत्रा को प्रश्न पूछने के लिए नकद भुगतान किया गया था, उन्हें आचार समिति की बैठक में क्यों नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा, पहली बैठक (एथिक्स कमेटी की) थोड़े समय में खत्म हो गई और कोई नतीजा नहीं निकल सका। दूसरी बैठक क्यों नहीं की गई? इतनी जल्दबाज़ी आखिर क्यों है? वहीं सीपीआई सांसद बिनॉय विश्वम ने शुक्रवार को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट की आलोचना की और इसे राजनीति से प्रेरित और सरकार के मुखर आलोचक के खिलाफ स्पष्ट प्रतिशोध करार दिया। उन्होंने कहा, यह राजनीति से प्रेरित है और सरकार के आलोचक के खिलाफ पूर्ण प्रतिशोध जैसा लगता है। आचार समिति को इस तरह से कार्य नहीं करना चाहिए।

संसद के बाहर मोदी सरकार पर साधा निशाना

महुआ ने शुक्रवार को संसद के बाहर संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि, किसी भी कैश, किसी भी तोहफ़े का कोई सबूत कहीं नहीं मिला है। मेरे निष्कासन की सिफ़ारिश सिर्फ़ इस बात पर आधारित है कि मैंने अपना लोकसभा पोर्टल लॉग-इन साझा किया था। उन्होंने कहा कि, लॉग-इन शेयर करने को लेकर कोई नियम नहीं हैं। एथिक्स कमेटी की सुनवाई में ये साफ़ हुआ कि हम सभी सांसद कनवेयर बेल्ट हैं, ताकि हम जनता, नागरिकों के सवालों को संसद में उठा सकें। महुआ ने मोदी और अदानी पर हमला बोलते हुए कहा, अगर मोदी सरकार ये सोच रही है कि मेरा मुंह बंद करके वो अदानी के मुद्दे से ध्यान हटा सकते हैं तो मुझे आपको ये बताना है कि इस कंगारू कोर्ट ने पूरे भारत को दिखा दिया है कि इस प्रक्रिया में जिस तरह से जल्दबाज़ी की गई, दुरुपयोग किया गया, वो ये दिखाता है कि मिस्टर अदानी आप लोगों के लिए कितने ज़रूरी हैं। आप एक महिला सांसद को तंग करने के लिए किस हद तक जा सकते हैं ताकि मुझे चुप कराया जा सके। कल सीबीआई को मेरे घर पर भेजा जाएगा। वो लोग मुझे अगले छह महीने तक मुझे प्रताड़ित करेंगे, लेकिन मुझे सवाल करना है कि मिस्टर अदानी के 13 हज़ार करोड़ रुपए के कोयला घोटाला का क्या होगा, जिस पर सीबीआई या ईडी गौर नहीं कर रहे। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, आप कहते हैं कि मैंने लॉग-इन पोर्टल से राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया है? मिस्टर अदानी हमारे सभी बंदरगाह ख़रीद रहे हैं, हवाई अड्डे ख़रीद रहे हैं और उनके शेयरधारक विदेशी निवेशक हैं और गृह मंत्रालय उन्हें हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर ख़रीदने की इजाज़त दे रहा है?

अल्पसंख्यकों और महिलाओं से नफरत करते हैं आप

तृणमूल कांग्रेस नेत्री महुआ मोइत्रा।
अपने निष्कासन पर महुआ ने संसद के बाहर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए भाजपा और केन्द्र सरकार को दानिश अली-बिधूड़ी मामले में घेरते हुए जमकर सुनाया। उन्होंने सवाल उठाते हुए पूंछा, भाजपा के 303 सांसद लोकसभा में हैं, लेकिन उनमें एक भी मुसलमान नहीं हैं। रमेश बिधूड़ी इसी संसद में खड़े होते हैं और 26 मुसलमान सांसदों में से एक दानिश अली से अपशब्द कहते हैं लेकिन उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जाती? आप अल्पसंख्यकों से नफ़रत करते हैं, आप महिलाओं से नफ़रत करते हैं। आप नारी शक्ति से घृणा करते हैं। आप पावर और अथॉरिटी को संभालना नहीं जानते। मोइत्रा ने लंबी लड़ाई का ऐलान करते हुए कहा, मैं 49 साल की हूं और मैं अगले 30 साल सदन के भीतर, सदन के बाहर आप लोगों से लड़ती रहूंगी, मैं गटर में लड़ूंगी, मैं सड़कों पर लड़ूंगी। महुआ मोइत्रा ने बांग्ला में कहा, लोग आपका अंत देखेंगे। आपके पास पंजाब नहीं है, सिंध हमारे पास नहीं है, द्रविड़ आपका नहीं है, उत्कल आपका नहीं है, बंगाल आपका नहीं है। आप कहां से हम पर राज करेंगे, आपको ये शक्तिशाली बहुमत कहां से मिलेगा? एथिक्स कमेटी के पास निष्कासित करने का अधिकार नहीं है। आपने अर्धन्यायिक अथॉरिटी की अधिकार लिए और मुझ पर कार्रवाई कर दी। आपने प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है। ये आपके अंत की शुरुआत है। हम लौटेंगे और आपका अंत देखेंगे।

क्या है पूरा मामला ?

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और तृणमूल कांग्रेस नेत्री महुआ मोइत्रा के बीच की तकरार जगजाहिर है।
तृणमूल कांग्रेस की मुखर नेत्री महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने प्रसिद्ध कारोबारी गौतम अदानी और उनकी कंपनियों के समूह को निशाना बनाने के लिए लगातार संसद में सवाल पूछे और वह भी रिश्वत लेकर। यह आरोप भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने लगाया है, जिनकी महुआ से छत्तीस का आंकड़ा है। बीजेपी सासंद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि महुआ ने कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से रिश्वत लेकर अदानी समूह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के लिए अनेक सवाल पूछे। महुआ हमेशा ही इन आरोपों को निराधार बताती रही हैं और कहती रही हैं कि वे हर जांच का सामना करने को वो तैयार हैं। एक हलफ़नामे को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें दर्शन हीरानंदानी ने दावा किया है कि मोइत्रा ने अदानी समूह को निशाना बनाया।
हालांकि, मोइत्रा ने इस हलफ़नामे पर सवाल उठाए थे। सांसद निशिकांत ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजी शिकायत में जय अनंत देहाद्राई नाम के वकील ने इन आरोपों को साबित करने के लिए सबूत दिए थे। बता दें कि देहाद्राई वही व्यक्ति हैं जिन्हें महुआ मोइत्रा कुछ समय पूर्व अपना ‘जिल्टेड एक्स’ यानी निराश पूर्व प्रेमी बताया था। दुबे ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर आरोप लगाया गया कि संसद में महुआ मोइत्रा ने जो 61 सवाल पूछे उनमें से 50 सवाल अदानी समूह से संबंधित थे। उन्होंने आरोप लगाया, “रियल एस्टेट समूह हीरानंदानी ग्रुप के प्रमुख अरबपति कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के कारोबारी हितों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए महुआ मोइत्रा ने आपराधिक साज़िश रची।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव से आग्रह किया था कि वे लोकसभा के लिए मोइत्रा के लॉग-इन क्रेडेंशियल के आईपी पते की जांच करें ताकि यह जांचा जा सके कि क्या उन तक किसी और की पहुंच थी। इसके बाद दर्शन हीरानंदानी ने एक हलफनामा देकर दावा किया था कि महुआ मोइत्रा ने उन्हें संसदीय लॉगइन आईडी और पासवर्ड दिया था ताकि वह उनकी ओर से सवाल पोस्ट कर सकें। हीरानंदानी ने लोकसभा की आचार समिति को वह हलफनामा दिया था। महुआ ने कैश-फॉर-क्वेरी (सवाल पूंछने के लिए रिश्वत लेने) के आरोपों का खंडन किया है, लेकिन उन्होंने व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी को अपना संसदीय लॉगइन आईडी पासवर्ड देने की बात स्वीकार की है। एथिक्स कमेटी ने दस्तावेजों एवं सबूतों के साथ तीन मंत्रालयों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर उन्हें तलब किया था।
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