कॉर्पोरेट जगत ने वन्यजीव संरक्षण के लिए दिया समर्थन का भरोसा 

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*     पन्ना टाइगर रिजर्व में राज्य के पहले वन्यजीव-केंद्रित सीएसआर कॉन्क्लेव का आयोजन

*     दो दिवसीय आयोजन में देश की बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल 

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और औद्योगिक विकास को साथ लेकर चलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्य प्रदेश वन विभाग (MPFD) और मध्य प्रदेश टाइगर फाउंडेशन सोसाइटी (MPTFS) ने पन्ना टाइगर रिजर्व में राज्य के पहले वन्यजीव-केंद्रित कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कॉन्क्लेव का सफल आयोजन किया। 6 और 7 मार्च को आयोजित दो दिवसीय इस कॉन्क्लेव में देश की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और वन्यजीव संरक्षण के लिए सहयोग का भरोसा दिया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह आयोजन संरक्षण वित्तपोषण (Conservation Financing) के क्षेत्र में एक नई पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे वन्यजीव संरक्षण के लिए संसाधन जुटाने के नए रास्ते खुलेंगे।

नीति निर्माताओं और वन्यजीव विशेषज्ञों की मौजूदगी

कॉन्क्लेव में मध्य प्रदेश वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया। इसमें प्रमुख सचिव वन संदीप यादव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख तथा मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक शुभ रंजन सेन, एपीसीएफ (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति, एपीसीएफ (भूमि प्रबंधन) एच. एस. मोहंता और एपीसीएफ एवं चीता प्रोजेक्ट के क्षेत्र संचालक उत्तम शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा राज्य के सभी टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, मुकुंदपुर चिड़ियाघर और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के निदेशक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

देश की बड़ी कंपनियों की भागीदारी

कॉन्क्लेव में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कई प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इनमें ऊर्जा, खनन, इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल रहे। इन कंपनियों में प्रमुख रूप से कोल इंडिया, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL), हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, ग्रीनको, जियोमिन आयरन मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड, टाटा पावर, एलएंडटी, सुजलॉन, नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी (NCC), जेके सीमेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड, ईकेआई (EKI) एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड और आईसीआईसीआई (ICICI) फाउंडेशन जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। कॉर्पोरेट जगत के प्रतिनिधियों ने भारत की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता व्यक्त की और विभाग को भविष्य में ऐसे सहयोग का आश्वासन दिया जो सीधे तौर पर जैव विविधता और वन्यजीव आवासों की सुरक्षा में योगदान देंगे।

धरातल पर संरक्षण कार्यों का प्रत्यक्ष अनुभव

कॉन्क्लेव के दौरान कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों को पन्ना टाइगर रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण भी कराया गया, ताकि वे वन्यजीव प्रबंधन की वास्तविक स्थिति को समझ सकें। भ्रमण के दौरान मुख्य रूप से इन पहलुओं को दिखाया गया- वन सुरक्षा: प्रतिनिधियों ने एंटी-पोचिंग (शिकार विरोधी) कैंपों का दौरा किया और वन कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली 24 घंटे निगरानी प्रणालियों और पैदल गश्त (Foot Patrolling) को देखा। पर्यावास प्रबंधन (Habitat Management): प्रतिभागियों को वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के बारे में जानकारी दी गई, जैसे कि शाकाहारी जीवों की आबादी बढ़ाने के लिए घास के मैदानों का पुनरुद्धार, वर्ष भर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सौर ऊर्जा संचालित बोरवेल के माध्यम से जल निकायों का प्रबंधन, और स्वदेशी वनस्पतियों को पुनर्जीवित करने के लिए ‘लैंटाना’ और ‘वन तुलसी’ जैसी आक्रामक खरपतवार प्रजातियों को हटाना। समुदाय और पर्यटन: यह देखा गया कि कैसे स्थानीय समुदायों को संरक्षण और पर्यटन अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ा गया है। टाइगर साइटिंग: इस दौरे का मुख्य आकर्षण बाघों का दर्शन रहा, जिसने राज्य के संरक्षण प्रयासों की सफलता की पुष्टि की। हिनौता में हाथी कैंप: कॉर्पोरेट लीडर्स ने हाथी कैंप का दौरा किया, जहाँ उन्होंने वन गश्त में हाथियों की महत्वपूर्ण भूमिका और उनकी विशेष देखभाल की सराहना की।

CSR दान पोर्टल का शुभारंभ

कॉन्क्लेव के दौरान कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) दान के लिए एक विशेष डिजिटल पोर्टल csr.mptigerfoundation.org का भी शुभारंभ किया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह पोर्टल पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है, जिससे कॉर्पोरेट कंपनियां सीधे और सरल प्रक्रिया के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण परियोजनाओं में योगदान दे सकेंगी।

संरक्षण और विकास को साथ लेकर चलने का संकल्प

कॉन्क्लेव के समापन पर वन विभाग और कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ आगे बढ़ने चाहिए। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक संरक्षण रणनीतियों और कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के सहयोग से मध्य प्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी का एक मजबूत मॉडल स्थापित कर सकता है। कॉन्क्लेव का समापन एक साझा संकल्प के साथ हुआ “देश की आर्थिक समृद्धि, इसके वन्य क्षेत्रों की पारिस्थितिक सुरक्षा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलनी चाहिए।”