पदोन्नति और पदनाम की मांग पूरी न होने से हैं नाराज
सीएम और शिक्षा मंत्री की घोषणा के बाद भी जारी नहीं हुए आदेश
एक पैसे का अतिरिक्त खर्च नहीं फिर भी लगा रहे अड़ंगा
पन्ना। रडार न्यूज आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश सरकार को लगातार विभिन्न कर्मचारी संगठनों के विरोध और व्यापक असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। घोषणाओं के बाद भी कर्मचारी हितैषी मांगों पर अमल न होने से कर्मचारी सरकार के खिलाफ खुलकर अपना आक्रोश जता रहे है। इसी क्रम में रविवार 8 अप्रैल को मध्यप्रदेश के नियमित सहायक शिक्षक एवं शिक्षकों की वर्षों से लंबित पदोन्नति/पदनाम की मांग को लेकर प्रदेश के सभी जिला एवं संभागीय मुख्यालयों में प्रेसवार्ता आयोजित हुई। जिसमें प्रदेश के मुखिया और शिक्षा मंत्रीद्वय की घोषणाओं पर अमल न होने से नाराज सहायक शिक्षक और शिक्षकों ने आगामी 15 जुलाई से चरणबद्ध अंदोलन करने का ऐलान किया है। पदोन्नति/पदनाम की मांग का निराकरण न होने से 35 से 40 वर्षों की सेवा के बाद भी पदोन्नति से वंचित शिक्षकों में प्रदेश सरकार के प्रति जहां गहरी नाराजगी देखी जा रही वहीं वे खुद को अपमानित महसूस कर रहे है। सहायक शिक्षकों-शिक्षकों की पीड़ा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शीघ्र ही वे मुख्यमंत्री को सामूहिक रूप से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देने व इच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान करने के लिए आवेदन सौंपेगें।
मध्यप्रदेश में हावी अफरशाही लगा रही अड़ंगे –
आज पन्ना में आयोजित प्रेसवार्ता में मध्यप्रदेश शिक्षक कांग्रेस जिला ईकाई पन्ना के अध्यक्ष कमलेश त्रिपाठी ने बताया कि मध्यप्रदेश के नियमित सहायक शिक्षक-शिक्षक पिछले कई वर्षों से वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर अपनी एक सूत्रीय मांग पदोन्नति/पदनाम के लिए संघर्ष कर रहे है।
वर्ष 2011 से सभी शिक्षक संगठनों द्वारा इस मांग को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि 10 अप्रैल 2017 से निरंतर विभिन्न मंचों से मुख्यमंत्री, प्रदेश के शिक्षा मंत्री और शिक्षा राज्यमंत्री द्वारा इस मांग को न्यायोचित ठहराते हुए इसे पूर्ण करने की घोषणा कर चुके है। श्री त्रिपाठी का कहना है कि मध्यप्रदेश में मौजूदा समय में अफसरशाही इस कदर हावी है कि शीर्ष अधिकारी तमाम अड़गें लगाकर मुख्यमंत्री की घोषणा को पूर्ण होने नहीं दे रहे है। भोपाल स्थित राज्य सचिवालय (मंत्रालय) में बैठे अफसरों द्वारा बेवजह पैदा की जा रही अड़चनों से शिक्षक अपना हक पाने से वंचित है। इसकी पीड़ा और कुण्ठा के चलते परेशान शिक्षक हर पल खुद को अपमानित महसूस कर रहे है। इसे बिडम्बना ही कहा जायेगा कि इस घोषणा को अमल में लाने पर प्रदेश सरकार पर एक रूपये पर बोझ नहीं पड़ना है बावजूद इसके शिक्षक हितैषी मांग झूठी घोषणाओं और वादों तक सिमट कर रह गई है। कर्मचारी नेता कमलेश त्रिपाठी ने जोर देते हुए कहा कि अब हम और बर्दास्त नहीं करेंगे। प्रति माह प्रदेशभर में 400-500 शिक्षक अपमान का घूट पीकर रिटायर्ड होने को मजबूर है। प्रदेश के डेढ़ लाख शिक्षक हताशा और निराशा के दौर से गुजर रहे है। तीन से चार दशक तक एक ही पद पर सेवा करते हुए रिटायर्ड होना हर किसी को बेचैन कर रहा है। आपने कहा कि पदोन्नति/पदनाम की मांग हमारे स्वाभिमान और हक जुड़ी है जिसे हरहाल में पूर्ण कराने के लिए विभिन्न शिक्षक संगठनों ने अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहते हुए जुलाई महीने से चरणबद्ध आंदोलन करने का ऐलान किया है।
अब और नहीं पियेंगे अपमान का घूंट –
इस अवसर पर कोर कमेटी के सदस्य राजकिशोर शर्मा ने बड़े दुख के साथ कहा कि शिक्षकों का ऐसा अपमान आज तक कहीं नहीं हुआ जैसा कि मध्यप्रदेश में हो रहा है। इसके विरोध में समस्त शिक्षक संगठन अपने अधिकारों की आवाज को बुलंद करने के लिए अब एक मंच पर आ गये है। आगामी आंदोलन को सफलतापूर्वक चलाने के लिए एक कोर कमेटी का गठन पिछले दिनों भोपाल में 5 जून 2018 को किया गया है। इस बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि पदोन्नति/पदनाम की एक सूत्रीय मांग को लेकर 2 जुलाई से चरणबद्ध आंदोलन का आगाज करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा, प्रमुख सचिव वित्त एवं आयुक्त लोक शिक्षण को ज्ञापन सौंपकर 14 जुलाई 2018 तक उक्त मांग को पूर्ण करने के लिए अल्टीमेटम दिया जायेगा। यदि फिर भी पदोन्नति/पदनाम के आदेश जारी नहीं किये गये तो 15 जुलाई को भोपाल में प्रदेश स्तरीय प्रेसवार्ता की जायेगी। इसके पश्चात् 22 जुलाई को सम्पूर्ण प्रदेश के शिक्षक साथी भोपाल में स्वाभिमान सत्याग्रह प्रारंभ करेंगे जोकि आदेश जारी होने तक निरंतर चलता रहेगा। इसी क्रम में 29 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास तक पैदल मार्च निकालकर सामूहिक रूप से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इच्छामृत्यु के आवेदन पत्र सौंपे जायेगें।
व्याख्याताओं से प्राथमिक शालाओं में करा रहे पढ़ाई-
शिक्षक राजकिशोर शर्मा ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि सहायक शिक्षकों-शिक्षकों को पदनाम देने से शासन के ऊपर किसी भी तरह का वित्तीय भार नहीं आयेगा। इस संबंध में तत्परता से निर्णय लेना शिक्षकों के साथ-साथ शासन के लिए भी लाभदायक साबित होगा। इसे शासकीय माध्यमिक शालाओं, हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों को विषयवार शिक्षक प्राप्त हो सकेगें। सर्वविदित है कि हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूलों में बड़ी तादाद में विषयवार शिक्षकों के पद रिक्त होने के कारण बच्चों के भविष्य सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। इसे विड़म्बना ही कहा जायेगा कि सभी सहायक शिक्षक क्रमोन्नति प्राप्त है और यूडीटी, व्याख्याता और प्राचार्य का वेतन प्राप्त कर रहे है लेकिन उनसे अध्यापन कार्य प्राथमिक शालाओं में कराया जा रहा है। इससे शिक्षकों की योग्यता और क्षमता का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पा रहा है। गौरतलब है कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा क्रमोन्नति प्राप्त सहायक प्राध्यापकों को प्राध्यापक का पदनाम हाल ही में दिया गया है। जबकि शिक्षक पिछले 10 वर्षों से पुरजोर तरीके से यह मांग कर रहे है। मौजूदा व्यवस्था के असंवेदनशीलता और उदासीनता के कारण उक्त मांग के पूरे न होने से शिक्षकों को हर पल अपमान झेलना पड़ रहा है। श्री शर्मा का कहना है कि लगातार कई बार पदनाम परिवर्तन की मांग करने और घोषणा के बावजूद उसे पर अमल न होने से अपने स्वाभिमान, आत्म सम्मान और हितों की रक्षा के लिए हमें मजबूर होकर आंदोलन का सहारा लेना पड़ रहा है।
ये रहे उपस्थित- शिक्षक संगठनों की प्रेसवार्ता में मुख्य रूप से कमलेश त्रिपाठी प्रांतीय महामंत्री एवं जिलाध्यक्ष शिक्षक कांग्रेस मप्र, कोर कमेटी के सदस्य राजकिशोर शर्मा, सह मुख्य अध्यक्ष अलोक खरे, रामेश्वर प्रसाद खरे, शिव कुमार मिश्रा, रवि डनायक, प्रदीप द्विवेदी, शरद श्रीवास्तव, एलबी शर्मा, प्रमोद अवस्थी, हेमंत सिंह, रंजोर सिंह, गंगा शर्मा, विनोद मिश्रा, दिनेश मिश्रा, सुनील खरे, यार मोहम्मद, राजेन्द्र श्रीवास्तव, उपेन्द्र खरे, महेन्द्र तिवारी, नाथूराम सोनी, श्याम सोनी, उदयनारायण श्रीवास्तव, धूरिया प्रसाद आदि कर्मचारी नेता उपस्थित रहे।






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