
शांति समिति की बैठक से पत्रकारों ने क्यों बनाई दूरी…?


दरअसल, पिछले दिनों अजयगढ़ के पत्रकार अमित जड़िया व थाना प्रभारी के बीच हुए विवाद के चलते स्थानीय पत्रकार इस बैठक से दूर रहे। मीडियाकर्मियों के द्वारा फिलहाल थाना अजयगढ़ की समस्त बैठकों व ख़बरों का भी अघोषित तौर पर बहिष्कार किया जा रहा है। बताते चलें कि विगत दिनों अजयगढ़ के थाना प्रभारी ने स्थानीय पत्रकार अमित जड़िया के साथ कथित तौर अभद्र व्यव्हार करते हुए झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी थी। अमित का आरोप है कि उसके साथ यह सब इसलिए किया गया क्योंकि वह कुछ समय से लगातार क्षेत्र में चल रही रेत की लूट में पुलिस की संलिप्तता होने तथा अवैध धंधों को संरक्षण दिए जाने की तथ्यपरक ख़बरें प्रकाशित कर रहा था। इससे नाराज होकर थाना प्रभारी के द्वारा उसे चुप कराने के लिए धमकाया गया। इस घटनाक्रम के संबंध स्थानीय पत्रकारों के द्वारा पन्ना कलेक्टर व एसपी को आवेदन दिया गया। लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही न होने से अजयगढ़ के अधिकांश पत्रकार नाराज है।
पत्रकारों का कहना है कि मीडिया की आवाज को दबाने के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता निराश करने वाली है। इस स्थिति में मीडियाकर्मी स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक तरीके से अपना काम कैसे कर पाएंगे। अजयगढ़ के पत्रकारों का कहना है कि यदि शीघ्र ही उनके आवेदन पत्र पर कार्रवाई नहीं की गई तो उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कठोर निर्णय लेने के लिए विवश होना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि अजयगढ़ के थाना के निरीक्षक डीके सिंह की गिनती कर्मठ पुलिस अधिकारियों में होती है। अपने अब तक के सेवाकाल में वे जहां भी रहे हैं आमतौर पर मीडिया के साथ उनके अच्छे संबंध रहे हैं। लेकिन अजयगढ़ में विवादित स्थिति क्यों बनीं इस पर दोनों पक्षों को गंभीरता से गौर करने की जरूरत है। यह बात सौ फीसदी सच है कि अजयगढ़ क्षेत्र में रेत का अवैध कारोबार पुलिस एवं राजस्व अधिकारियों के अघोषित संरक्षण में होता है। पर सभी पुलिसकर्मी रेत माफियाओं से सांठगांठ रखते हों ऐसा भी नहीं है। बहरहाल आगामी चुनौतियों के मद्देनजर वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को चाहिए कि इस प्रकरण को लेकर अजयगढ़ में मीडिया और पुलिस के बीच बने गतिरोध को दूर करने के लिए तत्परता से आवश्यक कदम उठाए जाएं।