इसी कड़ी में सोमवार 1 जून को पन्ना जिला मुख्यालय सहित गांवों में पत्थर खदान मजदूर श्रमिक सहकारी समिति के अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता यूसुफ बेग के आह्वान पर शारीरिक दूरी बनाये रखते हुए एवं शासन के नियमों का पालन करते हुए दो मिनिट का मौन धारण कर अपने शहीद मजदूरों को श्रद्धांजली दी गई। इसके पश्चात काली पट्टी बांधकर बेवश और लाचार श्रमिकों की समस्याओं के निराकरण तथा उनके हितों के संरक्षण के लिए काली पट्टी बांधकर सांकेतिक प्रदर्शन किया गया।
पत्थर खदान श्रमिक मजदूर सहकारी समिति के अध्यक्ष यूसुफ बेग ने प्रेस विज्ञप्ती जारी कर कहा है की पिछले दो महीनों में पूरे देश में कोरोना कोविड 19 के कारण लॉकडाउन ने देश भर के लोगों को खासकर गरीब, बेघर हाशिये पर खड़े लोगों एवं प्रवासी मजदूरों को अभूतपूर्व संकट में डाल दिया है । 22 मई 2020 तक देश में लॉकडाउन के कारण पैदल चलते भूखे-प्यासे परेशान हाल 667 लोगों की मौत हुई है। जिसका कारण कोविड संक्रमण(कोरोना) नहीं है बल्कि उनकी मौत सड़क दुर्घटना, भूख और लॉकडाउन के चलते पैदा हुई मुश्किलों की वजह से हुई है। ऐसे में मजदूरों की हकीकत सामने रखकर सरकार को आईना दिखाने का काम काली पट्टी बाँध कर आज मजदूरों ने किया है। श्री बेग ने कहा कि इस लॉकडाउन के कारण सिर्फ लोगों की मौतें ही नहीं हुई बल्कि उनकी आजीविका, आकांक्षाओं का भी दमन किया गया है। जिसकी हम सभी मजदूर निंदा करते हैं।
इनके द्वारा मांग की गई है कि कोरोना आपदाकाल में हर गरीब व्यक्ति को सार्वजनिक वितरण प्रणाली से 10 किलो अनाज, 1.5 किलो दाल, 800 ग्राम तेल हर महीने दिया जाए, आंगनवाडी और स्कूल में मध्यान भोजन के माध्यम से गरम पका भोजन, प्रवासी मजदूरों एवं देश के अन्य भाग फंसे हुए लोगों को सुरक्षित जाने की मुफ्त व्यवस्था, मनरेगा तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार एवं वापस आये मजदूरों को 200 दिन का रोजगार दिया जाए। श्रमिक नेता युसूफ बेग ने सोशल मीडिया के माध्यम से इन मांगों को देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री तक पहुँचाया है जिससे लॉकडाउन के कारण संकट में आये मजदूरों को भरण-पोषण का सहारा मिल सके और वह पुनः सामान्य जीवन जीने के लिए तैयार हो सकें।