पत्नी की हत्या कर शव को जंगल में फेंकने वाले आरोपी को आजीवन कारावास की सजा

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जिला एवं सत्र न्यायालय पन्ना का फाइल फोटो।

* जिला एवं सत्र न्यायाधीश पन्ना ने सुनाया फैसला

* जुर्म छिपाने के लिए पत्नी की गुमशुदगी की थाना में दी थी सूचना

* मृतिका की माँ और भाई के संदेह जताने पर हुआ था हत्याकाण्ड का खुलासा

पन्ना। (www.radarnews.in)  मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में धरमपुर थाना अंतर्गत ग्राम पंचमपुर करीब 2 वर्ष पूर्व हुई सुनीता बाई की जघन्य हत्या के बहुचर्चित मामले जिला एवं सत्र न्यायाधीश पन्ना प्रमोद कुमार अग्रवाल ने फैसला सुनाते हुए मृतिका के आरोपी पति राजबहादुर तनय रामसनेही 25 वर्ष निवासी ग्राम रमजूपुर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा उसे छः हजार रूपए के अर्थदण्ड से भी दण्डित किया गया है। लोक अभियोजक किशोर श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि दिनाँक 26 मई 2017 को सुबह करीब 10-11 बजे ग्राम पंचमपुर के जंगल बिरहा पहाड़ थाना धरमपुर में मृतका सुनीता बाई को ले जाकर पति राजबहादुर ने हंसिया से प्रहार कर उसकी हत्या कर दी थी। और फिर लाश को जंगल में ही फेंक दिया था। साक्ष्य छिपाने के लिए राजबहादुर की ओर से पत्नी की गुमशुदगी की सूचना धरमपुर पुलिस थाना में दी गई। करीब तीन माह तक सुनीता का कोई सुराग न लगने पर उसकी माँ और भाई द्वारा पुलिस के समक्ष राजबहादुर की भूमिका को लेकर संदेह जाहिर किया गया। इस आधार पर पुलिस ने दिनाँक 20 अगस्त 2017 को राजबहादुर को अभिरक्षा में लेकर पूंछतांछ की तो उसने अपना जुर्म कबूल करते हुए शव को पंचमपुर जंगल बिरहा पहाड़ में फेंकना बताया। पहाड़ में खोजबीन करने पर मृतिका सुनीता का शव न मिलकर उसकी हड्डियां तथा उसके पहनें कपड़े मिले। कपड़ों के आधार पर माॅं रन्नू बाई ने पहचान की। वहीं साक्षियों ने अंतिम बार दोनों पति-पत्नी को जंगल की तरफ जाते हुये देखने की जानकारी दी।
सांकेतिक फोटो।
धरमपुर थाना पुलिस ने इस प्रकरण में मर्ग कायम कर जाँच उपरांत हत्या और साक्ष्य छिपाने का मामला पंजीबद्ध किया। प्रकरण की विवेचना के बाद चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। प्रकरण के विचारण के दौरान साक्षियों के कथनों, समग्र परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुये तथा दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनने के पश्चात विद्वान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पन्ना प्रमोद कुमार अग्रवाल ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत प्रकरण को युक्तियुक्त संदेह से परे मानते हुए आरोपी राजबहादुर को अपनी पत्नी की हत्या का दोषी माना है। न्यायालय ने अभियुक्त राजबहादुर को भारतीय दण्ड विधान की धारा-302 के अंतर्गत आजीवन सश्रम कारावास एवं पाॅच हजार रूपये का अर्थदण्ड तथा धारा-201 के अन्तर्गत तीन वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किये जाने का निर्णय पारित किया है। इस मामले में अभियोजन की ओर से पैरवी लोक अभियोजक किशोर श्रीवास्तव द्वारा की गई।

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