खजुराहो लोस सीट : पूर्व दस्यु सरगना ददुआ के पुत्र वीर सिंह के सपा प्रत्याशी घोषित होने रोचक होगा मुकाबला, BJP ने उम्मीदवार के नाम का अब तक नहीं किया ऐलान, टीकमगढ़ में आरडी प्रजापति के आने से त्रिकोणीय संघर्ष के आसार

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सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ खजुराहो और टीकमगढ़ लोकसभा सीट के प्रत्याशी एवं अन्य नेतागण।

* नामांकन दाखिल करने की आज से शुरू हुई प्रक्रिया

शादिक खान, खजुराहो / टीकमगढ़ । रडार न्यूज  समाजवादी पार्टी ने मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल अंतर्गत आने वाले खजुराहो और टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। दोनों जगह से दो पूर्व विधायकों को चुनावी महासमर में उतार कर सपा ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। खजुराहो सीट से दस्यु सरगना रहे ददुआ के पुत्र वीर सिंह पटेल को प्रत्याशी घोषित किया है। छतरपुर जिले के चंदला से भाजपा विधायक राजेश प्रजापति के पिता एवं पूर्व विधायक आरडी प्रजापति को समाजवादी पार्टी ने आरक्षित टीकमगढ़ लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया है। भाजपा से टिकिट न मिलने पर नाराज चल रहे आरडी प्रजापति गत दिवस लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के समक्ष बिजावर विधायक राजेश शुक्ला की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। जिसके बाद उन्हें टीकमगढ़ सीट से प्रत्याशी घोषित किया गया। यहाँ उनकी टक्कर भाजपा के उम्मीदवार डॉ. वीरेंद्र कुमार और कांग्रेस की किरण अहिरवार से होगी। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्यप्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच लोकसभा चुनाव पूर्व हुए गठबंधन के चलते मध्यप्रदेश की खजुराहो, टीकमगढ़ समेत तीन संसदीय सीटें समाजवादी पार्टी को मिलीं है। उत्तर प्रदेश से सटे खजुराहो और टीकमगढ़ क्षेत्र लिए मंगलवार को सपा के उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लगने के बाद से सीमावर्ती में क्षेत्र सियासी हलचल तेज हो गई है।

प्रत्याशी को लेकर असमंजस में भाजपा

आरडी प्रजापति, प्रत्याशी टीकमगढ़।
अंतर्राष्ट्रीय पहचान वाले खजुराहो संसदीय क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चित्रकूट सदर के पूर्व विधायक वीर सिंह पटेल को प्रत्याशी बनाकर बहुसंख्यक वर्ग को साधने के लिए बड़ा दांव चला है। इससे निश्चित ही कांग्रेस और भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ गईं है। खजुराहो सीट से कांग्रेस ने राजनगर विधायक विक्रम सिंह नातीराजा की पत्नी कविता सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। पूर्व छतरपुर राजघराने से ताल्लुक रखने वाली कविता सिंह का मायका पन्ना जिले में और ससुराल खजुराहो में स्थित है। पारिवारिक पृष्ठभूमि और क्षेत्रीयता के आधार पर कांग्रेस की कविता सिंह को मजबूत प्रत्याशी के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी का अभेद किला कहलाने वाली खजुराहो सीट पर पार्टी नेतृत्व अब तक योग्य उम्मीदवार तय नहीं कर पाया है।
सांकेतिक फोटो।
इस सीट का चुनावी इतिहास, मतदाताओं का रुझान, और तीन माह पूर्व संपन्न हुए 2018 के विधानसभा चुनाव के परिणाम भाजपा के पक्ष में होने के बाद भी प्रत्याशी चयन को लेकर शीर्ष स्तर पर असमंजस की स्थिति बरकरार है। विधानसभा चुनाव के समय भी बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान अंतिम समय में किया था, लोकसभा चुनाव में भी यही स्थिति बनती दिख रही है। बताते चलें कि बुधवार 10 अप्रैल से खजुराहो संसदीय क्षेत्र के लिए नाम-निर्देशन पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पन्ना में शुरू हो चुकी है। चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार नाम-निर्देशन पत्र भरने की अंतिम तिथि 18 अप्रैल निर्धारित है।

बहुसंख्यक वर्ग पर फोकस

वीर सिंह पटेल, प्रत्याशी खजुराहो।
समाजवादी पार्टी ने खजुराहो सीट पर पिछड़े वर्ग से आने वाले वीर सिंह पटेल को अपना उम्मीदवार बनाकर बहुसंख्यक वर्ग को समर्थन हाँसिल करने का दाँव चला है। चुनाव में जातिगत फैक्टर के प्रभाव और खजुराहो सीट पर पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की तादाद 50 प्रतिशत से अधिक होने के मद्देनजर विश्लेषकों मानना है कि सपा प्रत्याशी वीर सिंह पटेल को कम करके नहीं आँका जा सकता। बसपा का समर्थन प्राप्त होने से इनकी स्थिति और भी मजबूत हो जाती है। बसपा का वोट बैंक माने जाने वाले दलित मतदाता यदि सपा के साथ जाते हैं तो कांग्रेस और भाजपा के लिए चुनावी मुकाबला बेहद संघर्षपूर्ण हो जाएगा। खजुराहो संसदीय क्षेत्र में पिछड़े वर्ग के बाद दलित और अनुसूचित जनजाति वर्ग के मतदाता बड़ी तादाद में है। जन चर्चाओं पर भरोसा करें तो इस चुनाव में सपा के रणनीतिकारों की योजना बहुसंख्यक पिछड़े वर्ग, दलित, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं को अपने पक्ष में एकजुट करना है। बहुसंख्यक वर्ग के ध्रुवीकरण की योजना के तहत ही समाजवादी पार्टी ने पूर्व विधायक वीर सिंह पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया है। सपा को अपने उद्देश्य कितनी सफलता मिलती यह तो समय आने पर ही पता चलेगा। बहरहाल, सबकी नजरें अब भाजपा प्रत्याशी की घोषणा पर टिकीं है। बीजेपी जातिगत समीकरणों को साधने के लिए किसी सवर्ण या फिर पिछड़े वर्ग के नेता पर दाँव लगाती यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। क्योंकि, भाजपा प्रत्याशी के नाम का ऐलान होने के बाद ही खजुराहो लोकसभा सीट पर चुनावी मुकाबले की तस्वीर साफ़ होगी।

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