आसपास मौजूद लोगों व राहगीरों ने आनन-फानन खिड़कियों के काँच तोड़कर घायलों तथा यात्रियों को बाहर निकाला। बिना किसी देरी के सभी घायलों को निजी वाहनों एवं बृजपुर थाना पुलिस की गाड़ियों से समुचित उपचार हेतु पन्ना जिला चिकित्सालय लाया गया। जहाँ ड्यूटी डॉक्टर ने छात्र लक्ष्मन यादव पिता कृपाल सिंह यादव 17 वर्ष एवं प्रेम सागर पाण्डेय उर्फ़ रामभरोसी पुत्र रामलखन पाण्डेय 16 वर्ष दोनों निवासी ग्राम धरमपुर का चिकित्सीय परीक्षण करने के उपरांत दोनों को मृत घोषित कर दिया। इस हादसे में 24 यात्री घायल हुए हैं, जिनका इलाज पन्ना में चल रहा है। उल्लेखनीय है कि, पन्ना में टीएल की बैठक के दौरान बस हादसे की खबर मिलने पर संवेदनशील कलेक्टर कर्मवीर शर्मा के द्वारा तत्काल एसडीम एवं नायब तहसीलदार को जिला चिकित्सालय के लिए भेजा गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने जिला चिकित्सालय पहुँचकर डॉक्टरों से घायलों के इलाज की जानकारी ली और उनका हालचाल जाना।
जिला मुख्यालय पन्ना से करीब 25 किलोमीटर दूर पहाड़ीखेरा मार्ग पर जिस स्थान पर यह भीषण हादसा हुआ वहाँ यात्री बस हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से बाल-बाल बच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अनियंत्रित बस यदि सड़क किनारे लगे मील के पत्थर से टकराकर न पलटती तो हाईटेंशन लाइन के सम्पर्क में आ जाती। अगर ऐसा होता तो शायद बस के अंदर कोई भी जीवित न बचता। लोगों का कहना है कि, घटनास्थल का दृश्य-परिस्थियाँ देखकर, इस बारे में सोचकर उनके शरीर में सिहरन पैदा होने लगती है और कलेजा काँप उठता है। अभी जो कुछ हुआ निश्चित ही वह अत्यंत ही दुखद है। अनियंत्रित बस अगर हैवी विधुत लाइन से टकराती तब शायद कोई भी जीवित न बचता। प्रत्यक्षदर्शियों का मानना है कि, मड़ला घाटी जैसा भयानक हादसा होने से बाल-बाल बच गया। बताते चलें कि करीब 4 वर्ष पूर्व पन्ना जिले की मड़ला घाटी में पुलिया के नीचे गिरी बस में आग लगने से दो दर्जन यात्री जिंदा जल गए थे।