ओवरलोडेड भारी वाहनों के दबाव में जर्जर हुआ ककरहटा पुल, हादसे का मंडराया खतरा

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  • मिढ़ासन नदी के पुल के एक्सपेंशन जॉइंट में बढ़ा खतरनाक गैप, स्लैब भी क्षतिग्रस्त

  • जेके सीमेंट समेत भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही का दबाव, सड़क के बाद पुल भी जर्जर

  • 20 साल पुराने पुल पर ओवरलोड का कहर, समय रहते नहीं संभले तो हो सकता है बड़ा हादसा

पन्ना।(www.radarnews.in) जिले के दो राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण सकरिया-ककरहटी-गुनौर- डिघोरा मार्ग पर ग्राम ककरहटा के समीप मिढ़ासन नदी पर बना करीब 20 वर्ष पुराना पुल भारी और ओवरलोडेड मालवाहक वाहनों के लगातार दबाव से जर्जर हो गया है। पुल के एक्सपेंशन जॉइंट का गैप खतरनाक रूप से बढ़ गया है और कई स्थानों पर स्लैब भी क्षतिग्रस्त दिखाई दे रहा है। पुल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए राहगीरों और स्थानीय लोगों में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। खासतौर पर प्रतिदिन गुजरने वाले भारी ट्रेलर, हाइवा और डंपरों का दबाव चिंता बढ़ा रहा है। यह मार्ग पन्ना जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 39 और राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 943 को जोड़ने वाला लिंक रोड है। इसलिए स्थानीय आवागमन के साथ बड़ी संख्या में मालवाहक वाहन भी इसी रास्ते से गुजरते हैं। आरोप है कि मार्ग पर निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक वजन लेकर चलने वाले भारी वाहनों की लगातार आवाजाही सड़क और पुल दोनों की सेहत पर भारी पड़ रही है।

जेके सीमेंट के मालवाहक वाहनों का भारी दबाव

इस मार्ग से गुजरने वाले भारी वाहनों में जेके सीमेंट कंपनी के ग्राम हरदुआकेन स्थित प्लांट से क्लिंकर एवं अन्य खनिज सामग्री लेकर दूसरे जिलों के प्लांटों की ओर जाने वाले ट्रेलर और हाइवा प्रमुख रूप से शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा अन्य औद्योगिक एवं खनिज सामग्री का परिवहन करने वाले डंपर और भारी वाहन भी इस मार्ग से निकलते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ वाहनों में निर्धारित मालवाहक क्षमता से डेढ़ से दो गुना तक अधिक सामग्री लादे जाने की स्थिति भी सामने आती रही है। उनका कहना है कि टोल टैक्स से बचने के लिए भारी वाहनों का इस मार्ग पर बढ़ा दबाव सड़क और पुल की क्षति का एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है। हालांकि ओवरलोडिंग और टोल बचाने के संबंध में संबंधित विभागों द्वारा जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

नई सड़क भी बार-बार हो रही क्षतिग्रस्त

विडंबना यह है कि भारी वाहनों के बढ़ते दबाव का असर केवल पुराने पुल पर ही नहीं, बल्कि इस मार्ग पर कराए गए सड़क निर्माण कार्य पर भी दिखाई दे रहा है। हाल ही में निर्मित सड़क के कई हिस्से बार-बार क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। निर्माण एजेंसी द्वारा लोक निर्माण विभाग के निर्देश पर सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों का मेंटेनेंस कराया जा रहा है, लेकिन भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण समस्या स्थायी रूप से खत्म नहीं हो पा रही है।

खुलते एक्सपेंशन जॉइंट ने बढ़ाई चिंता

ककरहटा पुल की सबसे गंभीर स्थिति इसके एक्सपेंशन जॉइंट को लेकर सामने आ रही है। पुल के जॉइंट में गैप बढ़ने के साथ स्लैब भी क्षतिग्रस्त हो चुका है। ऐसे में भारी वाहनों के लगातार गुजरने से पुल पर कंपन और अतिरिक्त भार बढ़ना स्वाभाविक रूप से चिंता का विषय है। यदि समय रहते तकनीकी परीक्षण और आवश्यक सुधार नहीं कराया गया तो पुल की स्थिति और बिगड़ सकती है। लोक निर्माण विभाग संभाग पन्ना के कार्यपालन यंत्री इंद्रदेव पटेल ने भी पुल की स्थिति और वहां से भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि जानकारी मिलने के बाद उन्होंने स्वयं पुल का निरीक्षण किया था और इसकी वस्तुस्थिति से सेतु निगम के संबंधित सहायक यंत्री को अवगत कराया है।

समय रहते नहीं चेता प्रशासन तो बढ़ सकता है खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल पर स्थिति अभी चेतावनी देने वाली है। यदि पुल की तकनीकी जांच कराकर क्षतिग्रस्त हिस्सों की तत्काल मरम्मत नहीं कराई गई तथा ओवरलोडेड वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में किसी गंभीर दुर्घटना की स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से पुल की तत्काल तकनीकी जांच, ओवरलोडिंग पर रोक और भारी वाहनों के यातायात को नियंत्रित करने की मांग की है। पुल की तस्वीर में एक्सपेंशन जॉइंट का बढ़ा हुआ गैप और क्षतिग्रस्त हिस्सा साफ दिखाई दे रहा है, जो इसकी मौजूदा स्थिति की गंभीरता को सामने लाता है।

इनका कहना है-

“ककरहटा पुल के एक्सपेंशन जॉइंट का गैप बढ़ने और जॉइंट खुलने की जानकारी लोक निर्माण विभाग संभाग पन्ना के अधिकारियों से मिली है। जल्द ही पन्ना आकर पुल का सघन निरीक्षण करूंगा। निरीक्षण उपरांत वरिष्ठ अधिकारियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराकर उनके निर्देश अनुसार अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।”

– दिनेश कुमार ओमरे, सहायक यंत्री, सेतु निगम उप संभाग दमोह।