पन्ना बोरवेल हादसा: ONGC देहरादून की टीम ने लिए पानी और गैस के सैंपल, 2-3 सप्ताह में आएगी रिपोर्ट

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नारायणपुरा में बोरवेल के बाजू में स्थित विद्युत मोटर वाले गहरे गड्ढे में उपकरण डालकर गैस के नमूने लेते ONGC टीम के सदस्य।
  • तीन सदस्यीय विशेषज्ञ टीम करीब दो घंटे तक नारायणपुरा में रही; मोटर वाले गड्ढे में उपकरण डालकर लिए गैस के नमूने

  • ऑक्सीजन की कमी समेत संभावित कारणों की होगी जांच

  • बोरवेल की मोटर वाले गड्ढे में उतरने से किसान परिवार के मुखिया और दो बेटों की आठ दिन में अलग-अलग हादसों में मौत

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की पवई तहसील के ग्राम नारायणपुरा में आठ दिन के भीतर एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत के मामले में अब वैज्ञानिक जांच शुरू हो गई है। सोमवार को तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ONGC) देहरादून की तीन सदस्यीय विशेषज्ञ टीम नारायणपुरा पहुंची और करीब दो घंटे तक घटनास्थल पर रहकर बोरवेल तथा उसके बाजू में स्थित उस गहरे गड्ढे की जांच की, जिसमें उतरने के दौरान दो अलग-अलग हादसों में किसान परिवार के मुखिया और उनके दो बेटों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञ टीम ने बोरवेल के पानी के सैंपल लिए। इसके अलावा बोरवेल के पास स्थित उस गहरे गड्ढे में विशेष उपकरण डालकर वहां मौजूद गैस के नमूने भी एकत्र किए। सैंपल लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गड्ढे को पुनः ढक दिया गया। अब पानी और गैस के नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार लैब जांच और पूरी प्रक्रिया में करीब दो से तीन सप्ताह का समय लग सकता है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गड्ढे में वास्तव में किस प्रकार की गैस या अन्य घातक परिस्थितियां मौजूद थीं अथवा वहां ऑक्सीजन की कमी थी और क्या इनमें से कोई स्थिति दोनों हादसों का कारण बनी।

मोटर वाले गड्ढे से लिए गैस के नमूने

प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस बल एवं ग्रामीणों की मौजूदगी में करीब दो घंटे तक जांच करती ONGC टीम; बोरवेल के पानी और गड्ढे में मौजूद गैस के सैंपल लेते विशेषज्ञ।
ONGC टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर सबसे पहले पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। इसके बाद बोरवेल के पानी का नमूना लिया गया। टीम ने बोरवेल के ठीक बाजू में स्थित उस गहरे गड्ढे की भी जांच की, जिसमें विद्युत मोटर रखी गई थी और जिसे निकालने के दौरान हादसे हुए थे। विशेषज्ञों ने उपकरण की मदद से गड्ढे के भीतर से गैस के नमूने एकत्र किए। इस जांच का उद्देश्य गड्ढे में मौजूद वातावरण की वैज्ञानिक स्थिति का पता लगाना है। गैस की प्रकृति, उसकी मात्रा तथा गड्ढे में ऑक्सीजन की उपलब्धता जैसे पहलुओं की जांच रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है। सैंपल लेने के बाद गड्ढे को दोबारा ढक दिया गया। इससे यह भी सुनिश्चित किया गया कि जांच पूरी होने के बाद कोई व्यक्ति अनजाने में गड्ढे के भीतर न उतर सके।
20 अगस्त को पिता-पुत्र की हुई थी मौत
नारायणपुरा में पहला हादसा 20 अगस्त को हुआ था। किसान उजागर लाल वर्मन (55) अपने बेटे अटील वर्मन (30) के साथ बोरवेल के बाजू में स्थित गहरे गड्ढे में रखी विद्युत मोटर को निकालने के लिए उतरे थे। दोनों की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों की मौत का कारण दम घुटना बताया गया था। घटना के बाद गड्ढे में जहरीली गैस होने अथवा ऑक्सीजन की कमी की आशंका को लेकर चर्चा शुरू हुई थी। हालांकि उस समय इन आशंकाओं की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई थी। पहली घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की जांच कराने और गड्ढे को सुरक्षित कराने की मांग की थी।

आठ दिन बाद फिर हादसा, सतीश की गई जान

पिता और बड़े भाई की मृत्यु होने के 8वें दिन पुनः उसी गलती को दोहराते हुए बोरवेल की मोटर निकालने गड्ढे में उतरे सतीश वर्मन की भी दर्दनाक मौत हो गई।
पहली घटना के आठ दिन बाद 28 अगस्त को उसी परिवार के 32 वर्षीय सतीश वर्मन भी विद्युत मोटर निकालने के लिए गड्ढे में उतर गए। कुछ देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। एक ही परिवार के पिता और दो बेटों की आठ दिन के भीतर मौत से नारायणपुरा गांव में शोक के साथ दहशत और आक्रोश का माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि पहली घटना के बाद यदि गड्ढे को तत्काल सुरक्षित तरीके से बंद कर दिया जाता और विशेषज्ञों की जांच होने तक उसमें उतरने पर रोक लगा दी जाती तो संभवतः दूसरे हादसे को टाला जा सकता था।

प्रशासन की लापरवाही पर भारी जनाक्रोश

वैज्ञानिक जांच पूरी होने के बाद विद्युत मोटर वाले गहरे गड्ढे को प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षित तरीके से ढंकवाकर ग्रामीणों से ऊपर पत्थर रखवाए।
सतीश वर्मन की मौत के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी सामने आई। लोगों का स्पष्ट आरोप था कि पहली घटना के बाद गड्ढे को तत्काल बंद या सुरक्षित नहीं कराया गया। ग्रामीणों के अनुसार जब पहली घटना में पिता-पुत्र की मौत हो चुकी थी और गड्ढे के वातावरण को लेकर गंभीर आशंका पैदा हो गई थी, तब पुलिस और प्रशासन को विशेषज्ञों की जांच तथा रिपोर्ट आने तक गड्ढे को बंद करवा देना चाहिए था।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की इस कथित लापरवाही के कारण ही दूसरे हादसे की पुनरावृत्ति हुई। लोगों का कहना था कि यदि पहले हादसे के बाद गड्ढे को बंद करा दिया गया होता तो सतीश वर्मन को उसमें उतरने का मौका ही नहीं मिलता और संभवतः उनकी जान बच सकती थी। दूसरे हादसे के बाद जनाक्रोश बढ़ने पर पवई तहसीलदार रत्नराशि पाण्डेय ने नारायणपुरा पहुंचकर ग्रामीणों की मदद से गड्ढे में रखी विद्युत मोटर को बाहर निकलवाया। इसके बाद गड्ढे में पत्थर भरवाकर उसे ऊपर से बंद करवा दिया गया।
कांग्रेस ने किया था चक्काजाम
सतीश वर्मन की मौत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ आवाज उठाई थी। पवई कस्बे के सलेहा मोड़ तिराहे पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार नामदेव के नेतृत्व में चक्काजाम किया गया था। कांग्रेस ने पहली घटना के बाद गड्ढे को सुरक्षित नहीं कराए जाने को पुलिस और प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताते हुए जिम्मेदारी तय करने की मांग की थी। मृतकों के आश्रितों को 50 लाख रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा गड्ढे में संभावित गैस रिसाव की विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग को लेकर शाहनगर एसडीएम रामनिवास चौधरी को ज्ञापन भी सौंपा गया था। एसडीएम की समझाइश के बाद चक्काजाम समाप्त किया गया।
कुआं-बोरवेल में उतरने से पहले बरतें सावधानी 
नारायणपुरा में बोरवेल हादसे की जांच के लिए पहुंची ONGC देहरादून की टीम के साथ पवई एसडीएम समीक्षा जैन, तहसीलदार रत्नराशि पाण्डेय, पंचायत प्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी एवं स्थानीय ग्रामीण।
ONGC (Oil and Natural Gas Corporation) विशेषज्ञों ने जांच के दौरान ग्रामीणों को खुले कुएं और बोरवेल में उतरने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी। विशेषज्ञों के अनुसार बरसात के मौसम में गहरे और बंद स्थानों में ऑक्सीजन की कमी अथवा हानिकारक गैसों की मौजूदगी का खतरा हो सकता है। ऐसे स्थानों में बिना जांच किए उतरना जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों ने प्राथमिक स्तर पर ऑक्सीजन की स्थिति का अंदाजा लगाने के लिए मोमबत्ती की लौ का उदाहरण भी बताया, लेकिन यह सुरक्षित गैस या ऑक्सीजन जांच का वैज्ञानिक विकल्प नहीं है। ऐसे स्थानों में प्रवेश से पहले प्रशिक्षित विशेषज्ञों और उपयुक्त उपकरणों से जांच कराना जरूरी है।
अब नारायणपुरा में ONGC देहरादून की टीम द्वारा लिए गए पानी और गैस के नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार है। करीब दो से तीन सप्ताह बाद आने वाली लैब रिपोर्ट से यह पता चल सकेगा कि गड्ढे में वास्तव में किस प्रकार की गैस या अन्य घातक परिस्थितियां मौजूद थीं अथवा ऑक्सीजन की कमी थी और क्या वही 20 अगस्त तथा 28 अगस्त को हुए दोनों हादसों का कारण बनीं। रिपोर्ट के बाद ही हादसे के वास्तविक वैज्ञानिक कारणों और आगे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।