इस गांव की महिलाएं क्यों हैं आंदोलित: हाथ में लाठी, चेहरे पर गुस्सा; होठों पर शिकायत और रात्रि जागरण

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पन्ना जिले के दूरस्थ ग्राम ताखौरी में शराब दुकान खोलने के विरोधस्वरूप हाथ में लाठी-डण्डा लेकर प्रदर्शन करती महिलाएं।

*    लाड़ली बहनें बोलीं- शराब दुकान खुलने से टूट-बिखर जाएगा परिवार

*    शराब दुकानों की शिफ्टिंग को लेकर पन्ना के चंद गांवों में उपजा आक्रोश

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) प्रदेश के पन्ना समेत 19 धार्मिक महत्व वाले स्थानों की शराब दुकानों को बंद करने (शराबबंदी) के निर्णय पर लोग जहां ख़ुशी जाहिर कर रहे हैं वहीं शराब दुकानों की शिफ्टिंग को लेकर कुछ स्थानों पर गुस्सा भी देखा जा रहा है। जिले के शहरी एवं आंचलिक क्षेत्रों में जिन कस्बों-गांवों में शराब दुकानें कई सालों से संचालित थीं उनको वहां से हटाकर नए स्थान पर शिफ्ट करने संबंधी कार्यवाही को लेकर हंगामा बरपा है। खासकर जिले की रैपुरा तहसील क्षेत्र अंतर्गत शराब दुकानों की मनमानी शिफ्टिंग का कई गांवों में जबरदस्त विरोध हो रहा है। बघवारकला, रैपुरा के बाद तखौरी के वाशिंदे गांव में शराब दुकान खोलने की योजना के खिलाफ विगत दिवस सड़कों पर उतर आए। इस विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व गांव की महिलाओं ने किया। हाथ में लाठी-डण्डे लेकर तखौरी की महिलाओं ने शराब दुकान के खिलाफ जब मोर्चा खोला तो गांव के पुरुष और स्कूली बच्चे भी समर्थन में आ गए। महिलाओं की अगुवाई में एकजुट गांववालों ने सोमवार 31 मार्च की शाम से लेकर मंगलवार 1 अप्रैल की अलसुबह तक रात्रि जागरण किया ताकि रात के सन्नाटे में गुपचुप तरीके से गांव में शराब दुकान स्थापित न होने पाए।
शराब दुकान खोलने का विरोध करने वाली महिलाओं का कहना है कि इससे उनके गांव-घर की शांति भंग हो जाएगी।
महिलाओं के आक्रोश को देखते हुए आबकारी विभाग के अफसर और ठेकेदार अपनी योजना पर अमल करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। भारी विरोध से बचने के लिए आबकारी विभाग ने तखौरी एवं बघवारकला को छोड़कर अन्य किसी स्थान को प्रस्तावित करने की कार्यवाही शुरू कर दी है। पन्ना के तखौरी गांव की महिलाओं का शराब दुकान के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन जिले में चर्चा का विषय बना है। इनके प्रदर्शन के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। कम पढ़ी-लिखी ये महिलाएं भलीभांति जानती हैं कि शराब एक सामाजिक बुराई है, यह न सिर्फ व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है, बल्कि इसके मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दुष्परिणाम भी काफी गंभीर होते हैं। इसलिए वे गांव में शराब दुकान खोलने का पुरजोर विरोध कर रही हैं।
शराब दुकान की शिफ्टिंग के विरोध स्वरूप तखौरी में महिलाओं के द्वारा किए गए विरोध-प्रदर्शन को गांव के पुरुषों ने भी अपना समर्थन दिया।
बता दें कि तहसील मुख्यालय रैपुरा से सटे भरवारा में स्थित शराब दुक़ान को राजस्व वृद्धि की दृष्टि से रैपुरा, बघवारकला या फिर तखौरी में शिफ्ट करने का प्रस्ताव आबकारी विभाग ने तैयार किया था। विगत दिवस शराब ठेकेदार के प्रतिनिधि और आबकारी विभाग का मैदानी अमला उपयुक्त स्थल चयन के सिलसिले में जब उक्त स्थानों का अवलोकन करने पहुंचा तो रैपुरा से लेकर तखौरी तक तनाव फ़ैल गया। भरवारा शराब दुकान को बघवारकला अथवा रैपुरा में शिफ्ट करने की योजना का स्थानीय लोगों द्वारा कड़ा विरोध किए जाने पर तखौरी को विकल्प के तौर पर चिन्हित किया गया। लेकिन इस पर कोई फैसला हो पाता उसके पहले ही गांव की महिलाएं चूल्हा-चौका छोड़ हाथ में लाठी-डंडे लेकर सड़क पर उतर आईं। सोमवार 31 मार्च 2025 की शाम लेकर 1 अप्रैल की सुबह तक तखौरी की महिलाओं ने रात्रि जागरण किया। क्योंकि रात के अंधेरे में गांव में शराब दुकान को शिफ्ट किए जाने का अंदेशा जताया जा रहा था। दूसरे दिन यानी 1 अप्रैल को भी महिलाएं पूरी तरह अलर्ट रहीं।
शराब दुकान खोलने के विरोध में हुए प्रदर्शन में तखौरी गांव के स्कूली बच्चे में शामिल रहे।
जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित छोटे से गांव में हुए महिलाओं के इस विरोध-प्रदर्शन की खबर ने हर किसी का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। गांव की अनपढ़ अथवा कम पढ़ी-लिखी महिलाओं ने स्व प्रेरणा से शराब दुकान के खिलाफ जिस ठेठ अंदाज में मोर्चा खोला उसकी काफी सराहना हो रही है। सबसे अच्छी बात यह रही कि गांव के पुरुषों तथा स्कूली बच्चों ने भी महिलाओं की मांग का पूर्ण समर्थन किया।

भंग होगी शांति, बिखर जाएगा परिवार

प्रदर्शकारी महिलाओं ने स्थानीय मीडियाकर्मी को बताया कि शराब दुकान खुलने पर ताखौरी समेत आसपास के इलाके की शांति भंग हो जाएगी। शराब पीने वाले रोजाना लड़ाई-झगड़ा करके माहौल ख़राब करेंगे। महिलाओं के मुताबिक इसका सबसे अधिक दुष्परिणाम भी उन्हें ही झेलना पड़ेगा। लकड़ी बेंचने अथवा मेहनत-मजदूरी करने पर जो चंद रुपए मिलते हैं उनके पति उस राशि को जबरन छुड़ाकर शराब के नशे में उड़ा देंगे। शराब के सेवन को लेकर हर घर में रोज-रोज कलह होगी और यह परिवारों के टूटने-बिखरने की वजह बनेगी। महिलाओं का मानना है कि घर के बड़ों को शराब पीते देखकर बच्चे भी आगे चलकर नशे को अपना लेंगे। इस तरह शराब दुकान खुलने से उनका वर्तमान और भविष्य दोनों ही तबाह-बर्बाद हो जाएगा। यह सामाजिक बुराई है, इसे ख़त्म करना सबका कर्तव्य है। महिलाओं का कहना है कि, उन्हें पक्का भरोसा है कि प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री उनकी चिंता और परेशानी का संज्ञान लेकर अपनी लाड़ली बहनों के घर को टूटने-बिखरने से रोकने के लिए तखौरी में शराब दुकान खुलने नहीं देंगे।
इनका कहना है-
‘पवई सर्किल अंतर्गत कुछ शराब दुकानों की शिफ्टिंग की गई है। इसी क्रम में भरवारा शराब दुकान को रैपुरा, बघवारकला अथवा ताखौरी में शिफ्ट करना प्रस्तावित किया गया था। लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध और आपत्तियों को देखते हुए फिलहाल भरवारा दुकान की शिफ्टिंग को रोक दिया गया है। वरिष्ठ अधिकारी अब जो निर्णय लेंगे उसके अनुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।’

हरीश पाण्डेय, उप निरीक्षक, आबकारी विभाग, जिला पन्ना।