त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया को हाईकोर्ट में दी चुनौती

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फाइल फोटो।

 

वर्ष 2014 के आरक्षण रोस्टर अनुसार चुनाव कराने के खिलाफ प्रस्तुत की याचिका

जबलपुर। (www.radarnews.in) त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव वर्ष 2014 के आरक्षण रोस्टर के अनुसार संपन्न कराने के राज्य सरकार के निर्णय को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शनिवार 4 दिसम्बर को राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा पंचायत के आम निर्वाचन का कार्यक्रम घोषित किया जा चुका है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचरण संहिता के प्रभावशील होने के बाद अब त्रि-स्तरीय पंचायतों के आम निर्वाचन में आरक्षण रोस्टर के पालन को लेकर उच्च न्यायालय जबलपुर में मंगलवार 7 दिसम्बर को एक याचिका प्रस्तुत की गई है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राम भजन लोधी ने प्रेस में जारी विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण के लिए राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना एवं मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज्य संशोधन अध्यादेश 2021 में अधिनियम की धारा 9 में संशोधन कर पंचायत, जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत के वार्डों का निर्वाचन वर्ष 2014 के आरक्षण रोस्टर पालन कराए जाने के अध्यादेश को न्यायालय में चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता अवधेश सिंह लोधी निवासी ग्राम पुखरा तहसील अजयगढ़ जिला पन्ना द्वारा अपनी याचिका मैं दलील दी गई है कि संविधान के अनुच्छेद 243 (सी) और (डी) के अंतर्गत आरक्षण का पालन करना अनिवार्य है। जबकि सरकार वर्ष 2014 के आधार पर चुनाव करा रही है। वर्ष 2020 में नियमों का पालन करते हुए तत्कालीन सरकार द्वारा विहित प्रक्रिया अनुसार आरक्षण का पालन रोस्टर अनुसार कराया गया था। वर्ष 2020 के नोटिफिकेशन एवं आरक्षण रोस्टर को विधि अनुसार समाप्त किए बिना अध्यादेश जारी किया गया है, जोकि संविधान के मूल अधिकारों द्वारा प्रदत्त प्रत्येक व्यक्ति को अवसर की समानता के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा के प्रतिकूल है। इसलिए वर्ष 2020 के आरक्षण की प्रक्रिया को रद्द किया जाना संविधान के विरुद्ध है। याचिकाकर्ता की ओर से इस मामले में अधिवक्ता राजमणि सिंह एवं राम भजन लोधी पैरवी कर रहे है।

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