फर्जीवाड़े में कांग्रेस नेता श्रीकांत का सहयोग करने वाले अधिवक्ता को पुलिस ने बनाया आरोपी, गिरफ्तार कर जेल भेजा

0
93
वरिष्ठ अधिवक्ता रामलखन त्रिपाठी को पुलिस द्वारा हिरासत में लेने की जानकारी मिलने के बाद जिला न्यायालय से बड़ी संख्या अधिवक्ता एकत्र होकर पन्ना कोतवाली थाना पहुंचे।

*      आदिवासी महिला की बेशकीमती जमीन हड़पने का मामला

*      बहुचर्चित प्रकरण में अधिवक्ता का पुत्र पहले से है आरोपी

*      अभिभाषक संघ ने एसपी के नाम ज्ञापन सौंपकर जताया विरोध  

पन्ना।(www.radarnews.in) गरीब आदिवासी महिलाओं की बेशकीमती पैतृक भूमि को फर्जीवाड़ा करके हड़पने के बहुचर्चित मामले में दर्ज आपराधिक प्रकरण की विवेचना में पुलिस ने कई संगीन धाराएं बढ़ाने के साथ आरोपियों की संख्या में भी इजाफा किया है। जमीन हड़पने के षड्यंत्र में कांग्रेस नेता श्रीकांत उर्फ पप्पू दीक्षित का कथित तौर पर सहयोग करने वाले अधिवक्ता रामलखन त्रिपाठी को भी पुलिस ने आरोपी बनाकर गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार सुबह अधिवक्ता को नगर सुधार न्यास कॉलोनी इंद्रपुरी स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया, गिरफ़्तारी की कार्रवाई के बाद कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल पन्ना भेज दिया गया। इस मामले अधिवक्ता रामलखन त्रिपाठी के पुत्र अनुपम त्रिपाठी पूर्व से ही आरोपी हैं। अनुपम फिलहाल फरार चल रहे हैं, जबकि मुख्य आरोपी मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व महमंत्री श्रीकांत उर्फ पप्पू दीक्षित को पन्ना पुलिस 15 जनवरी 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता रामलखन त्रिपाठी।
सोमवार 19 जनवरी को करीब 10 बजे पुलिस टीम पन्ना एसडीओपी एसपी सिंह बघेल के नेतृत्व में अधिवक्ता रामलखन को गिरफ्तार करने पहुंची। पुलिस के दस्तक देने पर परिजनों ने दरवाजा तो खोल दिया लेकिन मच्छर जाली वाला गेट नहीं खोला। पुलिस के बोलने पर भी परिजन उक्त गेट को नहीं खोल रहे थे। फलस्वरूप पुलिस टीम सख्ती के साथ अंदर दाखिल हुई और रामलखन को पकड़कर बाहर ले आई। पुलिस की दबिश के चलते नगर सुधार न्यास कॉलोनी में सुबह-सुबह हड़कंप मच गया। पुलिस टीम त्रिपाठी को कोतवाली थाना ले गई, जहां शाम तक गिरफ्तारी की कार्रवाई चलती रही। पुलिस के अनुसार आदिवासी महिलाओं की जमीन को कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से नामांतरण के मामले में संगठित षड्यंत्र में शामिल होने पर यह गिरफ़्तारी की गई है। बता दें कि, आदिवासी महिलाओं के द्वारा पूर्व में कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत किए गए शपथ पत्र में लेख किया गया था कि श्रीकांत दीक्षित एवं रामलखन त्रिपाठी ने राजराम सौंर को हमारा फर्जी तरीके से भाई बनाकर पैतृक भूमि विक्रय करने के लिए 35 हजार रूपए दिए थे।

क्या है पूरा मामला

पन्ना जिला मुख्यालय से लगे मनौर ग्राम की दो आदिवासी महिलाओं ने कांग्रेस नेता श्रीकांत उर्फ़ पप्पू दीक्षित और अनुपम त्रिपाठी पर उनकी 2 हेक्टेयर पैतृक कृषि भूमि को फर्जीवाड़ा करते हुए अवैध तरीके से क्रय कर कब्जाने का आरोप लगाया था। फरियादिया संतोष रानी गौंड़ पुत्री स्वर्गीय जगोला आदिवासी 50 वर्ष निवासी ताखौरी थाना रैपुरा ने इस मामले की शिकायत दिनांक 25 सितंबर 2025 कोतवाली थाना पन्ना में दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उसके पिता जगोला गौंड़ की मृत्यु हो चुकी है। मां मलन बाई नेत्रहीन है। परिवार में केवल दो बहनें हैं, कोई भाई नहीं है। इसके बावजूद एक व्यक्ति राजाराम सौंर निवासी जैतूपुरा थाना अमानगंज ने फर्जी तरीके से स्वयं को मेरे पिता का एकमात्र पुत्र बताकर मनौर ग्राम में स्थित हमारी पैतृक आराजी भूमि खसरा नंबर 148/4 रकवा 2.000 हेक्टेयर का फौती नामांतरण अपने नाम पर करा लिया है। कुसुम रानी गौंड़ व संतोष रानी पुत्री स्वर्गीय जगोला गौंड़ द्वारा फर्जीवाड़े की पहली शिकायत बताया था, ग्राम जैतूपुर तहसील अमानगंज निवासी राजाराम सौंर द्वारा अपने एवं हमारे पिता के मिलते-जुलते नाम का गलत फायदा उठाते हुए पैतृक जमीन हड़पने का षड्यंत्र किया गया।

अभिभाषक संघ ने लगाए आरोप

अधिवक्ता रामलखन त्रिपाठी को पन्ना पुलिस टीम के द्वारा हिरासत में लेने अपनाए गए तरीके पर जिला अभिभाषक संघ पन्ना ने गहरी नारजगी जाहिर करते हुए अपना विरोध जताया है। त्रिपाठी को पुलिस टीम द्वारा को उनके घर से ले जाने की खबर फैलने के लगभग घंटे भर बाद जिला न्यायलाय से बड़ी संख्या में अधिवक्ता एकजुट होकर कोतवाली पहुंच गए। यहां उन्होंने पुलिस अधिकारियों से चर्चा कर अपने वरिष्ठ साथी को हिरासत में लेने की जानकारी ली। तदुपरांत अधिवक्ताओं ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा। अभिभाषक संघ ने ज्ञापन में लेख किया है कि, पुलिस ने त्रिपाठी को हिरासत में लेने का कारण नहीं बताया। पुलिस बल दरवाजा तोड़कर घर के अंदर दाखिल हुआ और अपमानित कर गाली-गलौज करते हुए रामलखन को वाहन बैठाकर कोतवाली ले गए। अभिभाषक संघ चेतावनी दी है यदि श्री त्रिपाठी को स्वतंत्र नहीं किया गया तो वे अग्रिम कार्रवाई लिए विवश होंगे। जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

विषय से संबंधित अधिक जानकारी के लिए नीचे दी गई लिंक को क्लिक करें-

मध्यप्रदेश: आदिवासी की जमीन हड़पने के मामले में कांग्रेस नेता श्रीकांत दीक्षित गिरफ्तार, जेल भेजा