दोहरा चरित्र: बाघ संरक्षण के लिए जन समर्थन की बात, जनता की पीड़ा से मुंह मोड़ता पीटीआर प्रबंधन

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पन्ना के जगात चौकी क्षेत्र में स्थित क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व के बाहर वन क्षेत्र से सटे ग्रामों के रहवासियों द्वारा जमकर नारेबाजी की गई।

    वन क्षेत्र से सटे गांवों के वाशिंदों का ज्ञापन लेने चेंबर से बाहर नहीं आए पन्ना टाइगर रिजर्व के अफसर

  तेंदुए के हमले में बालक की मौत के बाद भी ग्रामीणों से मिलने का समय नहीं

*     उप संचालक की गरीब-विरोधी टिप्पणी और कुतर्कों से भड़के ग्रामीण प्रतिनिधि

   आधा घंटे तक बाहर इंतजार और नारेबाज़ी के बाद बिना ज्ञापन सौंपे लौटे ग्रामीण

पन्ना टाइगर रिजर्व (पीटीआर) प्रबंधन का एक ओर बाघ संरक्षण के लिए जन समर्थन का दावा और दूसरी ओर वन क्षेत्र से सटे गांवों के ग्रामीणों की पीड़ा के प्रति उदासीन रवैया गुरुवार को खुलकर सामने आ गया। तेंदुए के हमले में एक आदिवासी बालक की मौत से सहमे ग्रामीण जब अपनी समस्याएं लेकर क्षेत्र संचालक से मिलने पहुंचे, तो उन्हें न सिर्फ नजरअंदाज किया गया, बल्कि संवेदनहीन व्यवहार का भी सामना करना पड़ा।
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) की पन्ना कोर रेंज से सटे जरधोवा गांव में कुछ दिन पूर्व तेंदुए के हमले में एक 12 वर्षीय आदिवासी बालक की दर्दनाक मौत के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश और भय का माहौल है। बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे कोटा गुंजापुर, जरधोवा सहित आसपास के आधा दर्जन गांवों के ग्रामीण गुरुवार 5 फरवरी को जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) के जिलाध्यक्ष मुकेश गौंड और समाजसेवी रामविशाल गौंड के नेतृत्व में पन्ना पहुंचे थे। ग्रामीण पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक (Field Director) नरेश यादव से मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा करना और ज्ञापन सौंपना चाहते थे।

बुनियादी सुविधाओं से वंचित वन क्षेत्र के गांव

ग्रामीणों का कहना है कि पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) की आपत्तियों के चलते वन क्षेत्र से सटे कई गांवों में वर्षों से बिजली, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाईं। जंगल से घिरे इन गांवों में जंगली जानवरों का खतरा लगातार बना रहता है। बिजली न होने के कारण अंधेरे का फायदा उठाकर वन्यजीव गांव तक पहुंच रहे हैं। हाल ही में तेंदुए द्वारा एक लड़के को अपना शिकार बनाए जाने की घटना ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।

ग्रामीणों से मिलने बाहर नहीं आए क्षेत्र संचालक

क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व को ज्ञापन सौंपने और अपनी पीड़ा सुनाने के लिए उनके कक्ष के बाहर वन क्षेत्र से सटे ग्रामों के वाशिंदे काफी देर तक इंतजार करते रहे।
ग्रामीण और जयस (JAYS) संगठन के पदाधिकारी लंबे समय तक पन्ना टाइगर रिजर्व कार्यालय परिसर में क्षेत्र संचालक से मिलने का इंतजार करते रहे, लेकिन आरोप है कि नरेश यादव अपने कक्ष से बाहर नहीं आए और न ही ग्रामीणों की समस्याएं सुनने का समय निकाला। क्षेत्र संचालक के इस रवैये से ग्रामीण निराश और आक्रोशित हो गए। अंततः उन्होंने कार्यालय परिसर में नारेबाज़ी की और बिना ज्ञापन सौंपे वापस लौट गए। ग्रामीणों का आरोप है कि पीटीआर प्रबंधन एक ओर बाघ संरक्षण के लिए जन समर्थन की बात करता है, वहीं दूसरी ओर पार्क क्षेत्र से सटे गांवों के रहवासियों की सुरक्षा, मूलभूत सुविधाओं और जान-माल के खतरे को नजरअंदाज किया जा रहा है।

 डीडी के गरीब विरोधी बयान पर भड़के प्रतिनिधि

वन क्षेत्र के ग्रामीणों के प्रतिनिधि एवं समाजसेवी रामविशाल गौंड ने बताया कि वे स्वयं क्षेत्र संचालक नरेश यादव के कक्ष में पहुंचे और बाहर कार्यालय परिसर में खड़े ग्रामीणों की जानकारी देते हुए उनसे बाहर आकर समस्याएं सुनने व ज्ञापन लेने का आग्रह किया। उस समय कक्ष में पन्ना टाइगर रिजर्व के नवागत उप संचालक वीरेन्द्र पटेल (Deputy Director) भी मौजूद थे। श्री पटेल ने रामविशाल को वन क्षेत्र से सटे गांवों में बिजली, सड़क और पानी की पाइप लाइन के लिए विभिन्न विभागों से लंबित अनुमतियों की स्थिति से अवगत कराया। इसी दौरान उप संचालक ने कथित रूप से असंवेदनशील और बेतुका सवाल करते हुए पूछा कि जिस गांव में बिजली की मांग की जा रही है, वहां आर्थिक रूप से सक्षम कितने लोग रहते हैं। रामविशाल द्वारा शत-प्रतिशत गरीब आदिवासी आबादी होने की जानकारी देने पर उप संचालक ने कहा कि “इसीलिए गांव को बिजली नहीं मिल पा रही है।”
इस कथन को गरीबों का अपमान बताते हुए रामविशाल ने कड़ा एतराज जताया और पूछा कि क्या गरीबों को बुनियादी सुविधाएं (Basic Amenities)पाने का अधिकार नहीं है। इसके बाद उप संचालक ने सफाई देते हुए कहा कि गरीब लोग बिजली का बिल जमा नहीं कर पाते। रामविशाल ने इस तर्क को गरीबों का मजाक उड़ाने वाला और तथ्यहीन बताते हुए खारिज किया और कहा कि देशभर में करोड़ों गरीब परिवारों के घरों में बिजली कनेक्शन हैं। इस बहस के बाद रामविशाल कक्ष से बाहर आ गए, लेकिन इसके बावजूद काफी देर तक इंतजार के बाद भी न तो क्षेत्र संचालक और न ही उप संचालक बाहर आए और न ही ग्रामीणों का ज्ञापन लेना जरूरी समझा। पीटीआर प्रबंधन के इस अप्रत्याशित रवैए से निराश और आक्रोशित आधा दर्जन गांवों- बाँधीकाला, इटवां, बराछ, डोभा, जरधोवा और कोटा गुंजापुर के ग्रामीण वापस लौट गए।

कई गंभीर सवाल छोड़ गया घटनाक्रम

क्षेत्र संचालक अथवा उप संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व के द्वारा बाहर आकर ज्ञापन ग्रहण न करने से निराश ग्रामीण ट्रेक्टर-ट्रॉली से वापस लौट गए।
इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जब मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है और एक बालक की जान जा चुकी है, तब क्या क्षेत्र संचालक का ग्रामीणों से मिलने से बचना एक लोकसेवक के दायित्वों के अनुरूप है? यदि यही रवैया जारी रहा तो क्या भविष्य में पन्ना टाइगर रिजर्व को पार्क क्षेत्र से सटे गांवों का जन समर्थन मिल पाएगा? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया और सुरक्षा व बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो इसके दूरगामी और गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
“आप सभी लोग मेरे व्यवहार को बेहतर जानते हैं कि, व्यक्तिगत तौर पर मैं कभी किसी का अनादर नहीं करता। ज्ञापन सौंपने आए ग्रामीणों एक प्रतिनिधि मेरे कक्ष में आए थे, मैनें उनकी पूरी बात सुनीं और आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया। मुझे क्योंकि शासकीय कार्य के सिलसिले में जाना था इसलिए मैं निकल गया। बाद में ग्रामीणों द्वारा की गई नारेबाजी की मुझे जानकारी नहीं है।”

नरेश यादव, प्रभारी क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।