जनता ने दिल खोलकर आशीर्वाद दिया लेकिन शिवराज ने घोषणा के बाद भी नहीं निभाया वादा

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फाइल फोटो।

मोहन्द्रा को नगर परिषद का दर्जा देने के वादे पर अमल करने की मांग

राजनैतिक दवाब के बगैर जल्द साकार नहीं होगा नगर परिषद का सपना

शादिक खान/आकाश बहरे, पन्ना(मोहन्द्रा)। (www.radarnews.in) जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों की फेहरिस्त में शामिल मोहन्द्रा को नगर परिषद का दर्जा देने की बहुप्रतीक्षित मांग आज भी अधूरी है। प्रदेश की सत्ता में भाजपा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की वापसी के लगभग डेढ़ वर्ष बाद भी नगर परिषद की घोषणा पर अमल न होने से मोहन्द्रा के वाशिंदे निराश और बैचेन हैं। दीघर्कालिक उपेक्षा के कारण बुनियादी सुविधाओं के आभाव से जूझते मोहन्द्रा ग्राम को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का वर्षों से सपना देख रहे स्थानीय लोगों को मानना है, नगर परिषद का दर्जा मिलने से उनका सपना हकीकत तब्दील हो जाएगा। इसलिए स्थानीय लोगों ने मोहन्द्रा को नगर परिषद का दर्जा देने संबंधी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की चुनावी घोषणा पर शीघ्र अमल सुनिश्चित कराने के लिए जरुरी दवाब बनाने की रणनीति के तहत अपने स्तर प्रयास तेज कर दिए हैं।
जनभावनाओं को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक प्रहलाद सिंह लोधी भी सक्रिय नजर आ रहे हैं। कुछ समय पूर्व पवई विधायक ने मुख्यमंत्री से भेंटकर उन्हें चुनावी घोषणा को पूरा करने की याद दिलाई। इधर, गत दिवस मोहन्द्रा के विकास को लेकर सजग नागरिकों के एक प्रतिनिधि मण्डल ने पन्ना पहुंचकर कलेक्टर संजय कुमार मिश्र से भेंट की और ठण्डे बस्ते में पड़े नगर परिषद के प्रस्ताव की आवश्यक पूर्ती करवाकर उसे शासन को शीघ्रता से पुनः प्रेषित करने के सबंध में चर्चा की गई।
मालूम हो कि वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव के पूर्व जुलाई माह में जन आर्शीवाद यात्रा लेकर मोहन्द्रा आये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्थानीय लोगों की एकमात्र मांग ‘‘मोहन्द्रा को नगर परिषद का दर्जा‘‘ देने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री के वादे पर भरोसा करते हुए मोहन्द्रा के लोगों ने और समूचे पवई विधानसभा के मतदाताओं भाजपा के विधायक पद के उम्मीदवार प्रहलाद सिंह लोधी को प्रचण्ड बहुमत से विजयी बनाया। सर्वविदित है, विधानसभा चुनाव में भाजपा मामूली अंतर से बहुमत हांसिल करने से चूक गई थी। प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी। लेकिन यह सरकार महज डेढ़ वर्ष ही चल सकी। बेहद नाटकीय घटनाक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद हुए उप चुनाव में प्रदेश फिर भाजपा, फिर शिवराज सत्तासीन हो गए।
इस परिवर्तन से मोहन्द्रा के लोगों की उम्मीदें जाग उठीं, उन्हें लगा कि नगर परिषद की घोषणा अब जल्द ही पूरी हो जाएगी। लेकिन डेढ़ साल गुजरने के बाद भी नगर परिषद की घोषणा सरकारी फाइलों के ठण्डे बस्ते में पड़ी है। यह हाल तब है जब मुख्यमंत्री शिवराज ने इस मांग को प्राथमिकता के साथ पूर्ण करने के लिए फाइल पर विशेष नोट लगाकर नगरीय प्रशासन एवं शहरी विकास विभाग को प्रेषित किया था तब से आज तक संबंधित विभाग चार बार कलेक्टर पन्ना को कुछ बिंदुओं में चाही गई जानकरी प्रस्ताव के साथ पूर्ण कर भेजने का अनुरोध कर चुका है। घोषणा के सिर्फ फ़ाइलों तक सीमित होने से लोग चिंतित और निराश हैं। दरअसल, घोषणाओं पर अमल को लेकर शिवराज सरकार का रिकार्ड ठीक ना होना मोहन्द्रा के लोगों की चिंता और बैचेनी का असल कारण है।
मोहन्द्रा को नगर परिषद का दर्जा दिलाये जाने की कार्यवाही के लिये इस बीच मुख्यमंत्री से पवई विधायक तो कलेक्टर से मोहन्द्रा का एक प्रतिनिधि मंडल ने संबंधित प्रस्ताव की आवश्यक कार्यवाही शीघ्र पूर्ण कराने के लिए भेंट कर चुका है। कलेक्टर से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधि मंडल की अगुवाई करने वाले जनपद पंचायत पवई के पूर्व उपाध्यक्ष पारथलाल चौरसिया ने जानकारी देते हुये बताया कि नगर परिषद का दर्जा देने के लिए वर्ष 2011 की जनसंख्या को मापदंड बनाया जा रहा है। जिस लिहाज से आसपास की अन्य पंचायतों को जोड़कर ही नगर परिषद बनाया सकेगा। जिसके लिये शासन-प्रशासन व जनप्रतिनिधि प्रयासरत् है।

आखिर किन कारणों से लंबित है मामला

आबादी व क्षेत्रफल के लिहाज से पन्ना जिले के सबसे बड़े गांवों में शुमार मोहन्द्रा की जनगणना जिला योजना और सांख्यिकी विभाग के मुताबिक 8349 व निर्वाचन शाखा पन्ना से प्राप्त मतदाता सूची के अनुसार 3 मार्च 2021 को 6701 मतदाता दर्ज है। जबकि इसी विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार बीस साल पहले नगर परिषद का दर्जा पा चुके ककरहटी में 3 मार्च 2021 की सूची के मुताबिक मोहन्द्रा से पांच सौ मतदाता कम 6220 व हाल में नगर परिषद का दर्जा प्राप्त गुनौर में तीन गांवों पड़ेरी, सिली व गुनौर को मिला देने के बाद 9723 मतदाता दर्ज है। जबकि मोहन्द्रा को मुख्यालय बनाकर आसपास के दो किलोमीटर की परिधि को पैमाना बनाया जाये तो मोहन्द्रा में 13210 मतदाताओं के मुकाबले अजयगढ़ में 11641, अमानगंज में 11085, देवेंद्रनगर में 10006 व पवई में 10602 मतदाता दर्ज है।
इन आकड़ों के आधार पर वर्तमान आबादी का आंकलन किया जा सकता है। मतदाताओं की संख्या से यह भी स्पष्ट होता है कि नगर परिषद का जो दर्जा मोहन्द्रा को सालों पहले पात्रता के आधार पर मिल जाना चाहिये था वह आज भी नहीं मिला। सजग नागरिक हस्तक्षेप के आभाव व राजनैतिक नेतृत्व की उदासीनता के चलते मोहन्द्रा की हमेशा उपेक्षा होती रही है। नगर परिषद का दर्जा पा चुके कस्बों के मुकाबले विकास के मामलों में मोहन्द्रा आज बहुत पीछे छूट गया है। स्थानीय जागरूक लोगों को यह पिछड़ापन अब चुभने लगा है। शायद यही वजह है कि मोहन्द्रा के समग्र विकास के सपने को साकार करने वाली नगर पंचायत की घोषणा को पूर्ण कराने के लिए लोगों ने माहौल बनाना शुरू कर दिया है। अब इसमें हीला-हवाली या फिर अनावश्यक देरी होने से सत्ताधारी दल को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बीजेपी का गढ़ फिर विकास से वंचित क्यों ?

पिछले कई चुनावों सहित 2018 के विधानसभा व 2019 के लोकसभा चुनावों में मोहन्द्रा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशियों को एकतरफा वोट मिलते रहे हैं। अर्थात इस क्षेत्र के लोगों ने भाजपा को पूरे दिल से सपोर्ट किया लेकिन प्रदेश में पिछले 16 साल से भाजपा की सरकार रहने के बावजूद मोहन्द्रा सहित आसपास के इलाके का जनाकांक्षाओं के अनुरूप विकास न होना स्थानीय लोगों को सोचने को मजबूर करता है। जबकि मौजूदा पवई विधायक एवं क्षेत्रीय सांसद के थोड़े से प्रयास से नगर पंचायत की घोषणा पूरी हो सकती है। दोनों ही जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि, नगरीय प्रशासन व शहरी विकास विभाग द्वारा चाही गई जानकारियों को शीघ्र पूर्ण कराने का जिम्मा अपने हांथों में लेकर चुनावी वादे को पूरा करायें। ताकि मोहंद्रा व आसपास का क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके।

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