केन-बेतवा लिंक परियोजना: ‘चिता आंदोलन’ के बीच प्रशासन का बड़ा फैसला, 15 अप्रैल से 4 गांवों को खाली कराने की कार्रवाई

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केन बेतवा लिंक परियोजना प्रभावित ग्रामों के वांशिदों द्वारा संयुक्त रूप से ढोड़न बांध स्थल पर चलाए जा रहे चिता आंदोलन का दृश्य।

*     मुआवजा भुगतान पूरा होने का दावा, वन विभाग को सौंपी जाएगी जमीन

*     पन्ना जिले के कटहरी बिलहटा, कोनी, मझौली और डोड़ी से शुरू होगा विस्थापन का पहला चरण

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित होने वाले पन्ना एवं छतरपुर जिले के डेढ़ दर्जन गांवों के वाशिंदों द्वारा संयुक्त रूप से किए जा रहे ‘चिता आंदोलन’ के बीच पन्ना जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए चार गांवों को खाली कराने की कार्रवाई 15 अप्रैल 2026 से शुरू करने का निर्णय लिया है। ढोड़न बांध स्थल पर बीते 9 दिनों से मुआवजा विसंगतियों और पुनर्वास की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे ग्रामीणों के बीच इस फैसले ने नई चिंता पैदा कर दी है। प्रशासन के अनुसार पहले चरण में ग्राम कटहरी बिलहटा, कोनी, मझौली और डोड़ी से ग्रामीणों को हटाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इन गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और प्रभावित परिवारों को मुआवजा भी वितरित किया जा चुका है। साथ ही, मानवीय आधार पर मकान और खेत खाली करने के लिए दी गई मोहलत भी अब समाप्त हो चुकी है। ऐसे में अब इन गांवों की भूमि और परिसंपत्तियों को खाली कराकर वन विभाग, पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) को सौंपा जाएगा।

पहले से दी गई थी चेतावनी

प्रशासन द्वारा जारी सूचना के मुताबिक 15 अप्रैल को सुबह 9 बजे से संबंधित गांवों में जमीन, मकान और अन्य परिसंपत्तियों को खाली कराने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय पन्ना की ओर से सार्वजनिक सूचना जारी कर ग्रामीणों को पूर्व में ही अपने कब्जे हटाने के लिए निर्देशित किया गया था। पन्ना एसडीएम संजय कुमार नागवंशी ने स्पष्ट किया है कि अधिग्रहण के बाद संपत्ति खाली नहीं करने की स्थिति में प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी और किसी भी प्रकार की हानि के लिए संबंधित व्यक्ति स्वयं जिम्मेदार होंगे। इसके साथ ही ग्राम स्तर पर मुनादी कराकर और सार्वजनिक स्थानों पर सूचना चस्पा कर लोगों को अवगत कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस निर्णय के बीच एक ओर जहां प्रशासन मुआवजा प्रक्रिया पूरी होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित ग्रामीण पुनर्वास और मुआवजे में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और संवेदनशील होने की संभावना बनी हुई है।