“न्याय सत्याग्रह”: पन्ना कलेक्ट्रेट बना आंदोलन का केंद्र, सैंकड़ों आदिवासी-किसानों ने डाला डेरा

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पन्ना के नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठे केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवार।

*    केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजना प्रभावित ग्रामीणों का धरना-प्रदर्शन

*    न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और व्यापक होगा: अमित भटनागर

*    महिलाएं छोटे बच्चों के साथ देर रात तक कलेक्ट्रेट परिसर में डटी रहीं

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना एवं छतरपुर जिले में निर्माणाधीन वृहद और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित दर्जन भर गांवों के सैंकड़ों आदिवासी-किसान परिवारों ने भू-अर्जन से जुड़ीं समस्याओं, मुआवजा, विस्थापन तथा समुचित पुनर्वास आदि मुद्दों को लेकर बुधवार 11 मार्च को जय किसान संगठन के बैनर तले “न्याय सत्याग्रह” के तहत पन्ना कलेक्ट्रेट का घेराव किया। जिनमें केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना और रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित परिवार शामिल रहे। तेज धूप में पैदल मार्च कर सैंकड़ों की संख्या में नवीन कलेक्ट्रेट भवन पहुंचे किसान और आदिवासी परिवार अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। कलेक्ट्रेट परिसर में दोपहर 3 बजे से लेकर रात्रि 10:30 बजे तक ग्रामीणों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहा। यह “न्याय सत्याग्रह” अनिश्चितकालीन बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा। रात होते-होते आंदोलन और मजबूत होता नजर आया। कई महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ बिना चादर और बिस्तर के जमीन पर ही रात्रि विश्राम करने को मजबूर रहीं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट और न्यायपूर्ण निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक वे कलेक्ट्रेट से हटने वाले नहीं हैं।

कलेक्टर के न आने से बना रहा गतिरोध

सैंकड़ों प्रभावित ग्रामीण परिवार डायमंड चौराहा से डाइट तिराहा, बलदेव मंदिर, बड़ा बाजार और अजयगढ़ चौराहा होते हुए करीब 6 किलोमीटर की पदयात्रा कर कलेक्ट्रेट पहुंचे। तेज धूप में ग्रामीण अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए ग्रामीण कलेक्ट्रेट परिसर में ही धरने पर बैठ गए। सैंकड़ों लोग कड़कड़ती धूप में करीब चार घंटे तक तेज धूप में बैठे रहे, लेकिन कलेक्टर उनसे मिलने नहीं आईं। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थीं, जिनकी गोद में दो-दो, तीन-तीन महीने के बच्चे और कुछ 15 दिन के नवजात शिशु भी थे। ग्रामीणों का आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बावजूद प्रशासन की ओर से पानी तक की व्यवस्था नहीं की गई। यहां तक कि कार्यालय परिसर के अंदर से जो पानी लिया जा रहा था, उसकी सप्लाई भी बंद कर दी गई। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों के लिए दूर जाकर पानी लाने को मजबूर हुईं। बाद में तहसीलदार के आग्रह पर एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से उनके कक्ष में भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से परियोजना से जुड़े दस्तावेज और जानकारी मांगी। ग्रामीणों का कहना था कि इस संबंध में कई बार आवेदन और आरटीआई के माध्यम से भी जानकारी मांगी गई, लेकिन प्रशासन ने अब तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। कलेक्टर ने प्रशासन की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बताते हुए अपनी बात रखी, लेकिन प्रतिनिधिमंडल ने इसे संतोषजनक नहीं माना।

जमीन पर लेटे रहे प्रदर्शनकारी

केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित सैंकड़ों परिवार पन्ना के डायमंड चौराहा से करीब 6 किलोमीटर की पदयात्रा कर कलेक्ट्रेट पहुंचे।
कलेक्टर से मिलकर बाहर आए प्रतिनिधिमंडल ने पूरी जानकारी उपस्थित किसानों और ग्रामीणों को बताई, तो पहले से नाराज लोगों में आक्रोश और बढ़ गया। इसके बाद हजारों ग्रामीणों ने एक स्वर में निर्णय लिया कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा। रात होने तक बड़ी संख्या में किसान और आदिवासी कलेक्ट्रेट परिसर में ही डटे रहे। कई महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ बिना चादर और बिस्तर के जमीन पर ही रात गुजारने को मजबूर रहीं, जबकि कई लोग भूखे-प्यासे ही आंदोलन स्थल पर बैठे रहे। जय किसान संगठन के नेतृत्व में चल रहा यह “न्याय सत्याग्रह” अनिश्चितकालीन बताया जा रहा है।

आंदोलन की प्रमुख मांगें

प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों से जबरन गांव न छीने जाएं। विस्थापन की स्थिति में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम 2013 का पालन हो। आदिवासी संस्कृति को ध्यान में रखते हुए गांव के बदले गांव बसाकर पुनर्वास किया जाए। प्रभावित परिवारों को आजीविका के लिए पर्याप्त कृषि भूमि उपलब्ध कराई जाए। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर ने कहा कि यह लड़ाई सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि अन्याय के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हजारों आदिवासी और किसान परिवारों को उनकी जमीन और संस्कृति से अलग किया जा रहा है, लेकिन कानून का पालन नहीं किया जा रहा। भटनागर ने कहा कि हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण है, लेकिन यदि प्रभावित किसानों और आदिवासियों को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और व्यापक होगा।

कई संगठनों ने दिया समर्थन

आंदोलन को विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन भी मिला। आम आदमी पार्टी की नेता अंजली यादव, जय आदिवासी संगठन के जिलाध्यक्ष मुकेश गौंड़ और कांग्रेस नेता भरत मिलन पाण्डेय ने आंदोलन स्थल पहुंचकर समर्थन जताया। कांग्रेस नेता भरत मिलन पांडे ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना पन्ना और बुंदेलखंड के लिए अभिशाप साबित होगी। उन्होंने सिंचाई परियोजना प्रभावित परिवारों को मुआवजा वितरण, विस्थापन-पुनर्वास जैसे संवेदनशील मुद्दों पर प्रशासन के रवैये की कड़ी आलोचना की। श्री पाण्डेय ने ऐलान किया कि, प्रभावितों को उनका हक दिलाने की कानूनी लड़ाई को वे अपने खर्च पर हाईकोर्ट ले जाएंगे। वहीं जय आदिवासी संगठन के जिलाध्यक्ष मुकेश गौंड़ ने कहा कि आदिवासियों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, आवश्यकता पड़ने पर पूरे प्रदेश के कार्यकर्ता इस आंदोलन में शामिल होंगे। पन्ना जिले के इतिहास में संभवतः यह पहला अवसर है जब इतनी बड़ी संख्या में किसान और आदिवासी कलेक्ट्रेट परिसर में रात तक डटे रहे। अब क्षेत्र की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

इनका कहना है-

“केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजना प्रभावित परिवारों के भू-अर्जन एवं मुआवजा वितरण की कार्यवाही नियमानुसार पारदर्शी तरीके से की गई है। मुझसे मिलने आए प्रतिनिधिमंडल से भी मैनें पूछा यदि कोई पात्र व्यक्ति छूटा हो तो आप जानकारी दें, हम उसकी जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए तत्पर हैं। विस्थापित परिवारों को कृषि भूमि आवंटित करने सहित प्रतिनिधिमंडल की कई ऐसी मांगें हैं जोकि जिला प्रशासन स्तर पर संभव नहीं हैं।”

ऊषा परमार, कलेक्टर पन्ना।