नेशनल लोक अदालत :
समझाईश और सुलह से कई बिखरे परिवार फिर हुए एक
पन्ना। नेशनल लोक अदालत अंतर्गत गठित अलग-अलग खण्डपीठों ने कई दम्पत्तियों के बीच उपजी गलतफहमी, आपसी वाद-विवाद और मनमुटाव को दूर करने के लिए समझाईश देकर व सुलह कराकर बिखरे हुए परिवारों को फिर से एक करा दिया। लंबे समय बाद एक हुए दंपतियों ने न्यायालय कक्ष में ही एक-दूसरे को माला पहनाकर एक बार फिर से प्रेमपूर्वक दाम्पत्य जीवन निर्वहन करने का संकल्प लिया। इन दंपतियों के पुनर्मिलन के भावनात्मक दृश्य के साक्षी बने न्यायधीशों, परिवार परामर्श केन्द्र के काउन्सलर व अधिवक्ताओं ने उन्हें एक नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं और बधाई दी है।

नेशनल लोक अदालत की खंडपीठ क्रमांक-6 में आवेदक शिवनारायण लोधी ने लिखित आवेदन दिया, उसने बताया कि मेरी पत्नी फोन पर कई घंटो तक बात करती रहती है। मेरे घर आने पर तुरन्त फोन बन्द कर देती है। अनावेदिका विनय कुमारी ने बताया कि मैं आशा कार्यकर्ता हूॅ फोन में बात करना मेरे लिए जरूरी है, मेरा पति मुझ पर बेवजह शक करता है। दोनों पक्षों को खण्डपीठ पीठासीन न्यायाधीश श्रीमती वंदना सिंह की समझाईश, सुलहकर्ता सदस्यों परिवार परामर्श केन्द्र के परामर्श प्रभारी, काउन्सलर के प्रयासों से विनय कुमारी अपनी शर्त के मुताबिक पति के साथ रहने को तैयार हो गई। इसके अलावा अन्य 10 मामलों में खण्डपीठ पीठासीन न्यायाधीश श्रीमती वंदना सिंह की समझाईश सुलहकर्ता सदस्यों परिवार परामर्श केन्द्र के परामर्श प्रभारी, काउन्सलर के प्रयासों से बिखरे परिवार एक इनमें से कुछ एक हुए परिवारों को जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार कोष्टा के सम्मुख आपस में माला पहनाकर एवं न्यायाधीश द्वारा स्मृति स्वरूप पौधे देकर भविष्य में सदा खुश रहने के लिए प्रेरित किया गया।
मासूम बच्ची के माता-पिता हुए एक-

शनिवार 14 जुलाई 2018 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत पन्ना में ग्राम ललपुरवा तहसील अजयगढ़ जिला पन्ना के रहने वाले पुष्पेन्द्र सिंह व उनकी पत्नी श्रीमती देवकुॅवर के मध्य आपसी वाद-विवाद व मनमुटाव के कारण विगत एक वर्ष से कुटुम्ब न्यायालय पन्ना में दो प्रकरण धारा 9 व भरण-पोषण के विचाराधीन थे। पति-पत्नी के बीच में दो वर्षीय मासूम बच्ची माता-पिता के झगड़े में अपना बचपन खोती जा रही थी। नेशनल लोक अदालत हेतु गठित खण्डपीठ क्रमांक-1 के जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार कोष्टा की समझाईश से एवं सुलहकर्ता सदस्य अधिवक्ता आर.सी. तिवारी एवं प्रवीण खरे (सीनियर) के प्रयासों से वे पुनः एक साथ रहने को तैयार हो गये। उन्होंने न्यायालय कक्ष में ही एक-दूसरे को माला पहनाकर एक बार फिर से प्रेमपूर्वक दाम्पत्य जीवन निर्वहन करने का संकल्प लिया।
स्मृति स्वरूप पौधे दिये-
वहीं नेशनल लोक अदालत में खण्डपीठ क्रमांक-2 पीठासीन अधिकारी श्री अमिताभ मिश्र के समझाईश फलस्वरूप कई मामलों में राजीनामा हुआ एवं पक्षकारगण आपस में एक दूसरे को पुष्प माला पहनाकर गले मिले। श्री मिश्र द्वारा पक्षकारगणों को स्मृति स्वरूप पौधे दिये गये। खण्डपीठ क्रमांक-3 पीठासीन अधिकारी अनुराग द्विवेदी के समझाईश एवं सुलहकर्ता सदस्यों के समझाईश फलस्वरूप कई मामलों में राजीनामा हुआ एवं पक्षकारगण आपस में एक दूसरे को पुष्पमाला पहनाकर गले मिले एवं श्री द्विवेदी द्वारा स्मृति स्वरूप पौधे दिये गये। खण्डपीठ क्रमांक- 4 पीठासीन अधिकारी आमोद आर्य की समझाईश एवं सुलहकर्ता सदस्यों के समझाईश फलस्वरूप कई मामलों में राजीनामा हुआ एवं पक्षकारगण आपस में एक दूसरे को फूल माला पहनाकर गले मिले एवं श्री आर्य द्वारा स्मृति स्वरूप पौधे दिये गये।






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